झारखंड हाईकोर्ट ने एक अहम मामले की सुनवाई करते हुए पति की तलाक याचिका को खारिज कर दिया। पति का आरोप था कि उसकी पत्नी देर रात तक मेकअप करती है, सोशल मीडिया पर सक्रिय रहती है और उसके व्यवहार की वजह से वैवाहिक जीवन प्रभावित हुआ है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि केवल देर रात मेकअप करना, खुद की देखभाल करना या अपनी पसंद के अनुसार जीवनशैली अपनाना मानसिक क्रूरता नहीं माना जा सकता। ऐसे कारणों के आधार पर तलाक की मांग को उचित नहीं ठहराया जा सकता।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वैवाहिक संबंधों में मतभेद या अलग-अलग जीवनशैली होना अपने आप में विवाह खत्म करने का आधार नहीं बन जाता। तलाक के लिए ठोस और कानूनी रूप से स्वीकार्य कारण होना जरूरी है।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पति की अपील को खारिज कर दिया और निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। अदालत ने माना कि पति लगाए गए आरोपों को मानसिक क्रूरता साबित करने लायक पर्याप्त साक्ष्यों के साथ पेश नहीं कर सका।

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