यूरोप के देश अल्बानिया में सदियों पुरानी एक ऐसी परंपरा रही है, जिसके बारे में जानकर ज्यादातर लोग हैरान रह जाते हैं। इस परंपरा को ‘बुरनेशा’ (Burrnesha) या ‘स्वॉर्न वर्जिन’ कहा जाता है। इसके तहत कुछ महिलाएं समाज के सामने आजीवन कुंवारी रहने की शपथ लेकर पुरुष की सामाजिक भूमिका अपना लेती हैं। इसके बाद उन्हें समाज में पुरुषों जैसे अधिकार और जिम्मेदारियां मिलती हैं।

यह परंपरा उत्तरी अल्बानिया के पुराने कनून (Kanun) नामक सामाजिक नियमों से जुड़ी मानी जाती है। उस समय महिलाओं के अधिकार बेहद सीमित थे। ऐसे में यदि किसी परिवार में पुरुष सदस्य नहीं होता था या किसी महिला को जबरन शादी से बचना होता था, तो वह ‘बुरनेशा’ बनने का फैसला कर सकती थी। इसके बाद वह पुरुषों जैसे कपड़े पहनती, पुरुषों की तरह जीवन जीती और परिवार की मुखिया की भूमिका निभाती थी।
हालांकि इस फैसले की एक बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ती थी। ‘बुरनेशा’ बनने वाली महिला को पूरी जिंदगी अविवाहित रहना पड़ता था। वह न शादी कर सकती थी, न यौन संबंध बना सकती थी और न ही मां बन सकती थी। यह शपथ जीवनभर के लिए होती थी और इसे तोड़ना सामाजिक रूप से स्वीकार्य नहीं माना जाता था।
समय के साथ अल्बानिया में महिलाओं के अधिकार बढ़े और समाज में बदलाव आया। इसी वजह से अब यह परंपरा लगभग समाप्त होने की कगार पर है। रिपोर्टों के मुताबिक आज दुनिया में ऐसी महिलाओं की संख्या बेहद कम बची है और नई पीढ़ी इस परंपरा को लगभग नहीं अपनाती।
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