सावन और शिव पूजा के दौरान लाखों श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान कुछ नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है। मान्यता है कि अनजाने में की गई कुछ छोटी गलतियां पूजा के शुभ फल को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए जल अर्पित करने से पहले इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

पहली बात, अगर आप शिवलिंग पर दूध चढ़ा रहे हैं तो तांबे के बर्तन का इस्तेमाल न करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार तांबे के पात्र में रखा दूध अभिषेक के लिए उचित नहीं माना जाता। दूध अर्पित करने के लिए स्टील, चांदी या पीतल के पात्र का उपयोग करना बेहतर माना जाता है।
दूसरी बात, जलाभिषेक करते समय दिशा का भी विशेष ध्यान रखें। मान्यता है कि भगवान शिव की पूजा उत्तर दिशा की ओर मुख करके करना शुभ माना जाता है। साथ ही जल तेज धार से नहीं, बल्कि श्रद्धा और शांत मन से धीरे-धीरे अर्पित करना चाहिए। इस दौरान “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है।
तीसरी बात, यदि आप जल के साथ दूध या पंचामृत भी चढ़ा रहे हैं तो उसका सही क्रम अपनाना चाहिए। पहले शुद्ध जल या गंगाजल अर्पित करें, फिर दूध या पंचामृत चढ़ाएं और अंत में दोबारा शुद्ध जल से अभिषेक पूरा करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यही सही विधि मानी जाती है।
धार्मिक विद्वानों का मानना है कि भगवान शिव की पूजा में सबसे अधिक महत्व श्रद्धा, भक्ति और पवित्र भाव का होता है। इसलिए जलाभिषेक के दौरान जल्दबाजी, लापरवाही या दिखावे से बचना चाहिए। नियमों का पालन करते हुए की गई पूजा अधिक शुभ फलदायी मानी जाती है।
हालांकि ये सभी बातें धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं। अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में पूजा की विधि में कुछ अंतर हो सकता है। श्रद्धालु अपने परिवार की परंपरा या योग्य आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार भी पूजा कर सकते हैं।
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