तेलंगाना के करीमनगर जिले के हुजूराबाद में एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने अंतिम संस्कार के वक्त पूरे परिवार को उम्मीद और फिर गहरे सदमे में डाल दिया। सरिता नाम की महिला को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था और परिजन अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे। लेकिन चिता पर रखने के दौरान एक रिश्तेदार ने दावा कर दिया कि महिला की नब्ज चल रही है। इसके बाद वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई।

हुजूराबाद की एकलव्य कॉलोनी की रहने वाली सरिता काफी समय से बीमार थीं। परिवार के मुताबिक, उनकी हालत बिगड़ने के बाद मौत हो गई थी। घर में मातम पसरा था और रिश्तेदार अंतिम विदाई की तैयारियों में जुटे थे। परिवार को लग रहा था कि अब सरिता कभी वापस नहीं आएंगी, लेकिन श्मशान में अचानक किए गए एक दावे ने सबको फिर उम्मीद से भर दिया।
दरअसल, जब सरिता के शव को चिता पर रखा जा रहा था, तभी वहां मौजूद एक रिश्तेदार को लगा कि उनकी नब्ज चल रही है और शरीर में हलचल है। बस फिर क्या था, परिवार ने अंतिम संस्कार रोक दिया। बिना देर किए एम्बुलेंस की मदद से सरिता को अस्पताल ले जाया गया। जो लोग कुछ देर पहले उन्हें आखिरी विदाई देने पहुंचे थे, वे अब उनके दोबारा जीवित होने की उम्मीद लगाए बैठे थे।
अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने महिला की दोबारा जांच की। रिपोर्ट के मुताबिक, ईसीजी और अन्य जांच के बाद डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि सरिता की मौत पहले ही हो चुकी थी। नब्ज चलने का दावा गलतफहमी निकला और परिवार की आखिरी उम्मीद भी टूट गई। अस्पताल में मौजूद परिजन यह खबर सुनकर बिलख पड़े।
इस घटना ने हुजूराबाद इलाके में शोक की लहर पैदा कर दी। कुछ देर के लिए परिवार को लगा था कि शायद कोई चमत्कार हो गया है, लेकिन डॉक्टरों की जांच के बाद सच्चाई सामने आ गई। सरिता के निधन से परिवार पहले ही सदमे में था और इस घटनाक्रम ने उनकी पीड़ा को और बढ़ा दिया।
इस पूरे मामले में सबसे दुखद पहलू यही रहा कि अंतिम विदाई के ठीक पहले परिवार को एक नई उम्मीद मिली और फिर वह भी टूट गई। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में नब्ज चलने की बात रिश्तेदार का दावा बताई गई है, डॉक्टरों की पुष्टि नहीं। घटना ने यह भी याद दिलाया कि मृत्यु की पुष्टि और ऐसी असाधारण परिस्थितियों में चिकित्सा जांच कितनी अहम होती है।
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