दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन करने पहुंचे CJP नेताओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जंतर-मंतर पर बिना अनुमति प्रदर्शन करने के मामले में पुलिस ने सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे के खिलाफ कार्रवाई की। अब इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प मोड़ यह है कि तीनों के साथ एक जैसा नहीं हुआ—दो नेताओं को जेल जाना पड़ा, जबकि तीसरे को बॉन्ड भरकर रिहाई मिल गई।

आजतक की 14 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। यानी प्रदर्शन के बाद दोनों की मंजिल फिलहाल तिहाड़ जेल बनी। जिस विरोध प्रदर्शन के जरिए वे अपनी आवाज उठाना चाहते थे, उसके बाद अब उन्हें कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ रहा है।
दूसरी तरफ, अजिंक्य शिंदे ₹50,000 का पीस बॉन्ड भरकर रिहा हो गए। मतलब तीन नेता प्रदर्शन में शामिल हुए, लेकिन आगे का रास्ता अलग-अलग निकला—दो तिहाड़ पहुंचे और एक बॉन्ड भरकर बाहर आ गया। अब सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई को लेकर चर्चा होना तय है कि आखिर किस आधार पर किसे हिरासत में रखा गया और किसे राहत मिली।
विवाद की जड़ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति को लेकर है। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के पास जरूरी अनुमति नहीं थी। इसी मामले में FIR दर्ज की गई और नेताओं को अदालत में पेश किया गया। जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद वहां प्रदर्शन करने की कोशिश ने मामले को और गंभीर बना दिया।
CJP के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विरोध जता रहे थे। उनका प्रदर्शन चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर केंद्रित था। लेकिन अब राजनीतिक विरोध के साथ-साथ मामला कानूनी मोर्चे पर भी पहुंच गया है। प्रदर्शन की वजह और पुलिस की कार्रवाई—दोनों को लेकर बहस जारी रह सकती है।
फिलहाल सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने और अजिंक्य शिंदे की ₹50 हजार के बॉन्ड पर रिहाई की खबर चर्चा में है। अब देखना होगा कि आगे अदालत में क्या होता है और CJP इस कार्रवाई पर क्या कदम उठाती है। प्रदर्शन से शुरू हुई कहानी फिलहाल जेल, बॉन्ड और कानूनी लड़ाई के मोड़ पर आकर ठहर गई है।
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