दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का मामला अब सुप्रीम कोर्ट में गरमा गया है। 15 अक्टूबर को अदालत में प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई, मेट्रो सेवाओं पर पाबंदियों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ी 22 याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इसी दौरान 12 अक्टूबर को राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं के सुप्रीम कोर्ट परिसर में पहुंचने के मामले पर भी सवाल उठे। यानी चुनाव आयोग के खिलाफ शुरू हुई लड़ाई अब अदालत की दहलीज तक पहुंच चुकी है।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार ने अपने कदमों का बचाव किया है और इस संबंध में हलफनामे में कारण बताए गए हैं। अदालत ने 12 अक्टूबर को राहुल गांधी के आचरण को लेकर सवाल उठाए और उनसे स्पष्टीकरण देने को कहा। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। हालांकि, अदालत में सवाल उठने का मतलब यह नहीं है कि राहुल गांधी के खिलाफ कोई अंतिम फैसला सुना दिया गया है।
दरअसल, 12 अक्टूबर को राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के कई नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ज्ञापन देने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियां हुई हैं और बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर पारदर्शिता की जरूरत है। विपक्ष चाहता है कि मतदाता सूची में हुए बदलावों का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया की जांच हो। इन आरोपों पर अदालत में सुनवाई जारी है।
इसी मार्च के दौरान राहुल गांधी के साथ कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी मौजूद थे। बाद में सामने आए वीडियो में राहुल गांधी उन्हें कुर्ते के कॉलर से पीछे खींचते दिखाई दिए। इस वीडियो को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया और बीजेपी नेताओं ने राहुल गांधी के व्यवहार पर सवाल उठाए। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी इस घटना को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। हालांकि, यह विवाद अलग राजनीतिक मुद्दा है और इसे सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही से जोड़कर कोई निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।
उधर, दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के कथित उत्पीड़न को लेकर भी कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन के दौरान लोगों को हिरासत में लिया गया, कुछ के साथ मारपीट हुई और दिल्ली मेट्रो के कई स्टेशनों पर आवाजाही प्रतिबंधित की गई। मेट्रो सेवाओं और ट्रेनों पर असर को लेकर भी अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई है। दूसरी ओर, अधिकारियों ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के आधार पर उठाए गए कदमों का बचाव किया है।
अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई पर है। एक तरफ राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की SIR संबंधी याचिकाएं हैं, तो दूसरी तरफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और सार्वजनिक परिवहन पर लगे प्रतिबंधों का मामला है। अदालत इन सभी मुद्दों पर उपलब्ध तथ्यों और कानूनी दलीलों के आधार पर विचार करेगी। फिलहाल इतना साफ है कि CEC के खिलाफ विरोध अब केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा—इसकी लड़ाई अदालत में भी पहुंच चुकी है।
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