आंध्र प्रदेश के तिरुमला स्थित भगवान वेंकटेश्वर मंदिर से कई रहस्य और मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। इन्हीं में से एक यह भी है कि मंदिर के गर्भगृह में अन्य मंदिरों की तरह घंटी नहीं टंगी है। इसके पीछे एक प्राचीन धार्मिक कथा प्रचलित है, जिसे श्रद्धालु आज भी आस्था के साथ मानते हैं।

मान्यता के अनुसार, संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले द्रोणांबा और अनंत सूर्य नामक दंपति ने भगवान वेंकटेश्वर की कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने गर्भगृह की घंटी उन्हें प्रसाद स्वरूप प्रदान कर दी। इसी दिव्य कृपा के बाद उनके घर महान वैष्णव संत वेदांत देशिक का जन्म हुआ।
कहा जाता है कि वेदांत देशिक बचपन से ही असाधारण प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने अपने जीवन में कई धार्मिक ग्रंथों की रचना की और वैष्णव परंपरा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके जीवन से जुड़ी अनेक चमत्कारी कथाएं भी धार्मिक ग्रंथों और लोकमान्यताओं में मिलती हैं।
हालांकि, तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) की ओर से गर्भगृह में घंटी न होने का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है। मंदिर की पूजा-पद्धति प्राचीन वैखानस आगम पर आधारित है, जिसके अनुसार यहां की परंपराएं अन्य मंदिरों से अलग हैं। इसलिए श्रद्धालु इस मान्यता को आस्था और परंपरा से जोड़कर देखते हैं।

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