अफगानिस्तान से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने दुनिया भर के लोगों को हैरान कर दिया है। यहां एक पिता ने अपनी बेटी को करीब 10 साल तक लड़के के रूप में पाला। इस दौरान बच्ची ने लड़कों जैसे कपड़े पहने, छोटे बाल रखे, लड़कों वाला नाम अपनाया और समाज के सामने उसकी पहचान भी एक बेटे के रूप में ही रही। यह मामला अफगानिस्तान की ‘बाचा पोश’ (Bacha Posh) परंपरा से जुड़ा बताया जा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, परिवार में बेटा न होने के कारण पिता ने यह फैसला लिया। अफगानिस्तान के कई हिस्सों में बेटों को परिवार की सामाजिक पहचान और जिम्मेदारियों से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में कुछ परिवार अपनी एक बेटी को अस्थायी रूप से लड़के की तरह पालते हैं ताकि वह घर के जरूरी काम कर सके, बाहर आ-जा सके और परिवार की मदद कर सके।
इस परंपरा में लड़की के बाल छोटे कर दिए जाते हैं, उसे लड़कों जैसे कपड़े पहनाए जाते हैं और नया पुरुष नाम भी दिया जाता है। इसके बाद वह स्कूल जा सकती है, बाजार के काम कर सकती है, अपनी बहनों को बाहर ले जा सकती है और वे कई आजादियां हासिल कर लेती है जो वहां सामान्य तौर पर लड़कियों को नहीं मिल पातीं।
हालांकि, यह बदलाव हमेशा के लिए नहीं होता। ज्यादातर मामलों में जब लड़की किशोरावस्था में पहुंचती है, तो उसे फिर से अपनी मूल पहचान के साथ लड़की के रूप में जीवन जीना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव कई बच्चों के लिए मानसिक और सामाजिक रूप से काफी कठिन साबित होता है, क्योंकि वर्षों तक लड़के की तरह रहने के बाद अचानक नई भूमिका अपनानी पड़ती है।
‘बाचा पोश’ कोई नई परंपरा नहीं है। माना जाता है कि यह प्रथा अफगानिस्तान में कई पीढ़ियों से चली आ रही है। खासतौर पर उन परिवारों में, जहां बेटा नहीं होता या घर के बाहर के काम करने के लिए किसी पुरुष सदस्य की जरूरत होती है। कई मानवाधिकार संगठनों ने भी इस परंपरा पर अध्ययन किया है और इसे वहां की सामाजिक परिस्थितियों से जोड़कर देखा है।
फिलहाल यह कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। एक तरफ लोग इसे अफगानिस्तान की सामाजिक मजबूरी का उदाहरण बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ कई लोग इसे महिलाओं और लड़कियों की आजादी पर लगे प्रतिबंधों से जोड़कर देख रहे हैं। यही वजह है कि ‘बाचा पोश’ की यह परंपरा आज भी दुनिया भर में चर्चा और बहस का विषय बनी हुई है।
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