रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने एक ऐसे तलाक मामले में अहम फैसला सुनाया है, जिसमें पति ने दावा किया था कि उसकी पत्नी आधी रात करीब 2 बजे काजल और लिपस्टिक लगाती थी, इसलिए वह मानसिक रूप से अस्वस्थ है। अदालत ने इस दलील को स्वीकार करने से इनकार करते हुए पति की तलाक याचिका खारिज कर दी।

मामला वर्ष 2015 में हुई शादी से जुड़ा है। पति का कहना था कि एक रात उसकी नींद खुली तो उसने पत्नी को अलमारी के सामने खड़े होकर मेकअप करते देखा। इस घटना के बाद उसे पत्नी की मानसिक स्थिति पर शक हुआ। उसका आरोप था कि शादी से पहले पत्नी के परिवार ने उसकी कथित बीमारी की जानकारी छिपाई थी, इसलिए उसे तलाक दिया जाए।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि किसी महिला का देर रात सजना-संवरना अपने आप में मानसिक बीमारी का प्रमाण नहीं हो सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि मानसिक बीमारी के आधार पर तलाक तभी दिया जा सकता है, जब उसके समर्थन में किसी योग्य मनोचिकित्सक की मेडिकल रिपोर्ट और ठोस साक्ष्य मौजूद हों। इस मामले में पति ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर सका।
पत्नी ने अदालत में बताया कि शादी के बाद उससे अतिरिक्त दहेज की मांग की गई। आरोप है कि उसके पिता ने एक लाख रुपये भी दिए, लेकिन बाद में दो लाख रुपये और मांगे गए। मांग पूरी नहीं होने पर उसे मानसिक रोगी बताकर प्रताड़ित किया गया और आखिरकार मायके छोड़ दिया गया।
कोर्ट ने यह भी गौर किया कि मध्यस्थता के दौरान पत्नी हमेशा अपने पति के साथ रहने को तैयार थी, जबकि पति उसे वापस ले जाने के लिए राजी नहीं हुआ। अदालत ने माना कि वैवाहिक संबंध टूटने के लिए पति स्वयं जिम्मेदार था और वह अपनी ही गलती का लाभ लेकर तलाक नहीं ले सकता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए पति की अपील खारिज कर दी।
Leave a Reply