पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पार्टी PTI के लिए बड़ा झटका लगा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने इमरान खान के मजबूत राजनीतिक गढ़ खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लागू कर दी है। इस फैसले के साथ ही प्रांत में PTI की चुनी हुई सरकार के अधिकार निलंबित कर दिए गए और शासन की कमान संघीय सरकार के नियंत्रण में चली गई।

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने 11 अक्टूबर को संघीय कैबिनेट की सिफारिश के बाद इमरजेंसी की घोषणा को मंजूरी दी। सरकार ने इसके पीछे बिगड़ती कानून-व्यवस्था और बढ़ती आतंकी घटनाओं को वजह बताया है। उसका आरोप है कि प्रांतीय सरकार आतंकवाद से निपटने में पर्याप्त सहयोग नहीं कर रही थी और हालात इतने बिगड़ गए थे कि केंद्र को हस्तक्षेप करना पड़ा।
इस फैसले के बाद खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री, मंत्रियों और अन्य प्रमुख पदाधिकारियों को अपने पद छोड़ने होंगे। प्रांत का प्रशासन अब नियुक्त गवर्नर और सलाहकार परिषद के जरिए चलाया जाएगा। सरकार ने शुरुआत में इस व्यवस्था को छह महीने तक लागू रखने की बात कही है। यानी जिस प्रांत में इमरान खान की पार्टी की सरकार थी, वहां अब सत्ता का समीकरण ही बदल गया है।
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया, जब PTI नेताओं की गिरफ्तारी की खबरें सामने आईं। पार्टी के नेताओं ने इस कदम का विरोध करते हुए इसे लोकतांत्रिक जनादेश पर हमला बताया है। PTI का आरोप है कि आतंकवाद का हवाला देकर उसकी चुनी हुई सरकार को हटाया जा रहा है। वहीं, संघीय सरकार का कहना है कि प्रांत की सुरक्षा स्थिति को देखते हुए यह कदम जरूरी था।
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर चल रहा राजनीतिक टकराव भी अहम है। PTI समर्थक इस्लामाबाद की ओर मार्च निकाल रहे हैं और इमरान खान की रिहाई के साथ उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा देने की मांग कर रहे हैं। सरकार और पार्टी के बीच बातचीत से कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया, जिसके बाद तनाव और बढ़ गया। अधिकारियों ने इस्लामाबाद की ओर जाने वाले कई रास्तों पर भी अवरोध लगाए हैं।
अब पाकिस्तान की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि खैबर पख्तूनख्वा में इमरान खान की पार्टी इस फैसले का विरोध किस तरह करेगी और क्या इससे केंद्र तथा PTI के बीच टकराव और बढ़ेगा। सरकार इसे सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक कार्रवाई मान रहा है। फिलहाल, इमरान खान के सबसे मजबूत गढ़ में सत्ता बदलने के इस फैसले ने पाकिस्तान की राजनीति को नए संकट के मुहाने पर खड़ा कर दिया है।
Leave a Reply