पेरू: चिकित्सा जगत के इतिहास में दर्ज सबसे हैरान कर देने वाले मामलों में से एक है लीना मार्सेला मदीना की कहानी। पेरू की रहने वाली लीना ने महज 5 साल, 7 महीने और 17 दिन की उम्र में एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया था, जिससे वह आधिकारिक तौर पर दुनिया की सबसे कम उम्र की माँ बन गईं।

शुरुआत: लीना के माता-पिता ने जब देखा कि उनकी बच्ची का पेट असाधारण रूप से फूल रहा है, तो उन्हें लगा कि यह शायद कोई ट्यूमर है।
डॉक्टरों का खुलासा: वर्ष 1939 में जब परिवार उसे डॉक्टरों के पास लेकर गया, तो जाँच के बाद डॉक्टर भी सदमे में आ गए—छोटी सी लीना वास्तव में सात महीने की गर्भवती थी।
कम उम्र में विकास: डॉक्टरों ने पाया कि लीना को प्रीकॉशियस प्यूबर्टी (Precocious Puberty) नामक एक दुर्लभ स्थिति थी। इस स्थिति के कारण उनके प्रजनन अंग (Reproductive Organs) इतनी कम उम्र में ही पूरी तरह से विकसित हो चुके थे। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, लीना को मात्र 4 साल की उम्र से ही पीरियड्स (मासिक धर्म) आने शुरू हो गए थे।
जन्म: 14 मई 1939 को, डॉक्टरों ने सिजेरियन ऑपरेशन (C-Section) के माध्यम से लीना की सुरक्षित डिलीवरी कराई। बच्चे का वजन लगभग 2.7 किलो था।
लीना ने जिस बेटे को जन्म दिया, उसका नाम बच्चे की सफल डिलीवरी कराने वाले डॉक्टर जेरार्दो (Gerardo) के नाम पर रखा गया।
भाई की तरह पाला गया: गरीबी और सामाजिक दबाव के चलते, जेरार्दो को कई सालों तक यही बताया गया कि लीना उसकी बड़ी बहन है। जब जेरार्दो लगभग 10 साल का हुआ, तब उसे सच्चाई का पता चला कि उसकी ‘बहन’ ही उसकी माँ है।
जेरार्दो की मृत्यु: जेरार्दो स्वस्थ रहे और 40 साल की उम्र में वर्ष 1979 में उनका निधन हो गया।पिता का रहस्य: इस पूरे मामले में सबसे बड़ा रहस्य यह है कि जेरार्दो का जैविक पिता कौन था? लीना ने कभी भी बच्चे के पिता का नाम नहीं बताया और न ही किसी भी तरह की जानकारी सार्वजनिक की। उनके पिता को शुरू में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन सबूतों के अभाव में उन्हें बाद में रिहा कर दिया गया।
लीना मदीना बाद में एक सामान्य जीवन जीती रहीं और 1972 में उन्होंने दूसरे बेटे को भी जन्म दिया। यह घटना आज भी मेडिकल साइंस और मानवता के इतिहास में एक अनसुलझा और हैरतअंगेज मामला बनी हुई है।