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  • नौकरी ऐसी कि बॉस बोले ‘घूमो भाई, दुनिया तुम्हारी है!’ 6 महीने की ट्रैवलिंग, सैलरी करीब ₹95 लाख… बस एक शर्त पूरी करनी होगी

    नौकरी ऐसी कि बॉस बोले ‘घूमो भाई, दुनिया तुम्हारी है!’ 6 महीने की ट्रैवलिंग, सैलरी करीब ₹95 लाख… बस एक शर्त पूरी करनी होगी

    अगर आपको घूमने का शौक है और ऑफिस में बैठकर काम करने से ज्यादा मजा नई जगहें देखने में आता है, तो यह खबर आपके चेहरे पर मुस्कान ला सकती है। अरबपति रिचर्ड ब्रैनसन के वर्जिन ग्रुप ने एक ऐसी नौकरी निकाली है, जिसमें आपको छह महीने तक दुनिया घूमने और अपने अनुभवों को वीडियो में कैद करने का मौका मिलेगा। इस नौकरी का नाम है ‘हेड ऑफ यस’ और इसके लिए करीब 95 लाख रुपये तक की सैलरी बताई गई है। यानी घूमना भी काम और काम के बदले मोटी कमाई!

    अब सोच रहे होंगे कि आखिर इस नौकरी में करना क्या होगा? दरअसल, चुने गए व्यक्ति को वर्जिन रेड के साथ दुनिया की शानदार जगहों, रोमांचक गतिविधियों और अनोखे अनुभवों को कैमरे में रिकॉर्ड करना होगा। फिर इन पलों को वीडियो और तस्वीरों के जरिए लोगों तक पहुंचाना होगा। कंपनी ऐसे व्यक्ति की तलाश में है, जो जिंदगी के नए अनुभवों को अपनाने से न घबराए और अपनी कहानी दिलचस्प तरीके से लोगों के सामने रख सके।

    इस नौकरी की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसके लिए सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स होना जरूरी नहीं है। कंपनी ने साफ किया है कि आवेदन करने वाले व्यक्ति के फॉलोअर्स की संख्या मायने नहीं रखती। यहां तक कि प्रोफेशनल शो-रील होना भी जरूरी नहीं बताया गया है। मतलब अगर आपके पास लाखों फॉलोअर्स नहीं हैं, तब भी मौका मिल सकता है—बस आपके अनुभव और उन्हें पेश करने का अंदाज दमदार होना चाहिए।

    वर्जिन ग्रुप के मुताबिक, यह छह महीने की नौकरी जनवरी 2027 से शुरू होगी। अमेरिका में चुने गए उम्मीदवार को एक लाख डॉलर और ब्रिटेन में चुने गए उम्मीदवार को 75 हजार पाउंड तक का भुगतान मिलेगा। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 95 लाख रुपये तक बैठती है। हालांकि, यह वेतन संबंधित देश के उम्मीदवार के लिए है; भारत में रहने वाले हर व्यक्ति को सीधे यह रकम मिलने की गारंटी नहीं है।

    अब आवेदन का तरीका भी जान लीजिए। इच्छुक उम्मीदवार को एक छोटा वीडियो बनाना होगा, जिसमें वह बताए कि उसने कब किसी रोमांचक या नए अनुभव के लिए ‘हां’ कहा था और उस फैसले ने उसकी जिंदगी पर क्या असर डाला। इस वीडियो को Instagram, YouTube या TikTok पर #HeadOfYes हैशटैग के साथ पोस्ट करना होगा और @Virgin को टैग करना होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, आवेदन की आखिरी तारीख 20 अक्टूबर 2026 रात 11:59 बजे है। लेकिन एक अहम बात—यह अवसर अमेरिका और ब्रिटेन में रहने वाले उम्मीदवारों के लिए बताया गया है।

    तो अगर आपके दिमाग में भी कभी आया है कि काश कोई आपको दुनिया घूमने के पैसे दे, तो वर्जिन ग्रुप की यह नौकरी किसी सपने से कम नहीं लगती। लेकिन आवेदन करने से पहले पात्रता और आधिकारिक नियम जरूर जांच लें। क्योंकि यहां सिर्फ सूटकेस पैक करके निकलना काफी नहीं होगा—आपको अपने अनुभवों को इस तरह पेश करना होगा कि दुनिया भी कहे, ‘वाह, ये तो सच में हेड ऑफ यस है!’

  • बच्ची की पीठ पर निकली 2 इंच लंबी पूंछ, डॉक्टर भी रह गए दंग! 2 महीने बाद हुई सर्जरी, फिर सामने आई मेडिकल साइंस की हैरान करने वाली कहानी

    बच्ची की पीठ पर निकली 2 इंच लंबी पूंछ, डॉक्टर भी रह गए दंग! 2 महीने बाद हुई सर्जरी, फिर सामने आई मेडिकल साइंस की हैरान करने वाली कहानी

    मैक्सिको से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। यहां एक बच्ची का जन्म पीठ के निचले हिस्से में पूंछ जैसी संरचना के साथ हुआ। पहली नजर में डॉक्टर भी चौंक गए, क्योंकि यह कोई सामान्य जन्मजात निशानी नहीं थी। बच्ची के शरीर पर करीब 2 इंच लंबी संरचना थी, जिस पर बाल भी मौजूद थे। हालांकि, जांच में राहत की बात यह रही कि बच्ची बाकी मामलों में स्वस्थ थी और उसकी हालत स्थिर थी।

    यह मामला उत्तर-पूर्वी मैक्सिको के एक ग्रामीण अस्पताल का बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बच्ची का जन्म सिजेरियन डिलीवरी से हुआ था। जन्म के बाद जब डॉक्टरों ने नियमित जांच की, तो उन्हें रीढ़ की हड्डी के पास पूंछ जैसी संरचना दिखाई दी। यह देखकर मेडिकल टीम ने आगे की जांच की, ताकि पता चल सके कि यह संरचना किस तरह के ऊतकों से बनी है और कहीं इसका संबंध रीढ़ की हड्डी या नसों से तो नहीं है।

    जर्नल ऑफ पीडियाट्रिक सर्जरी केस रिपोर्ट्स में प्रकाशित विवरण के मुताबिक, यह संरचना हड्डी से बनी हुई नहीं थी। इसमें मुख्य रूप से चर्बी और दूसरे मुलायम ऊतक मौजूद थे। जांच के दौरान सुई चुभने पर बच्ची की प्रतिक्रिया से यह संकेत मिला कि इसमें नसों की मौजूदगी भी थी। मेडिकल साहित्य में इंसानों में इस तरह की पूंछ जैसी संरचनाएं बेहद दुर्लभ मानी जाती हैं। हालांकि, ऐसी हर संरचना को असली पूंछ कहना सही नहीं होता, क्योंकि कुछ मामलों में यह जन्मजात ऊतकों की असामान्य वृद्धि भी हो सकती है।

    डॉक्टरों ने बच्ची की सेहत और विकास पर लगातार नजर रखी। जब बच्ची करीब दो महीने की हुई, तब तक यह संरचना बढ़कर लगभग 5.7 सेंटीमीटर लंबी हो गई थी। इसके बाद विशेषज्ञों ने सर्जरी करने का फैसला लिया। ऑपरेशन के दौरान पूंछ जैसी संरचना को शरीर से सफलतापूर्वक हटाया गया और प्रभावित हिस्से की मरम्मत की गई। राहत की बात यह रही कि सर्जरी सफल रही और बच्ची को स्वस्थ हालत में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

    अब सवाल यह है कि इंसान के शरीर में ऐसी संरचना बनती कैसे है? गर्भ में भ्रूण के शुरुआती विकास के दौरान कुछ समय के लिए पूंछ जैसी संरचना मौजूद होती है, जो सामान्य विकास के साथ बाद में समाप्त हो जाती है। दुर्लभ मामलों में इस प्रक्रिया में बदलाव होने पर पूंछ जैसी संरचना जन्म के समय दिखाई दे सकती है। हालांकि, हर मामले का कारण एक जैसा नहीं होता और इसकी सही प्रकृति जानने के लिए डॉक्टरों को जांच करनी पड़ती है।

    इस घटना ने एक बार फिर दिखाया है कि मानव शरीर का विकास कितना जटिल है और मेडिकल साइंस के सामने अब भी कई दुर्लभ स्थितियां आती रहती हैं। सबसे अहम बात यह है कि बच्ची की सर्जरी सफल रही और वह स्वस्थ घर लौट गई। विशेषज्ञों के लिए ऐसे मामले महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इनसे जन्मजात असामान्यताओं को समझने में मदद मिलती है।

  • बांग्लादेश में सत्ता पलटी, अब भारत में भी वही सपना? नेहा बोरा के बयान पर BJP ने राहुल गांधी को घेरा, बोली— ‘ये आंदोलन नहीं, सत्ता बदलने का खेल है!’

    बांग्लादेश में सत्ता पलटी, अब भारत में भी वही सपना? नेहा बोरा के बयान पर BJP ने राहुल गांधी को घेरा, बोली— ‘ये आंदोलन नहीं, सत्ता बदलने का खेल है!’

    दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा के एक बयान ने नया सियासी बवाल खड़ा कर दिया है। नेहा ने कहा कि भारत में युवाओं के आंदोलन बांग्लादेश के Gen-Z प्रदर्शन से प्रेरित हैं। उनके इस बयान पर बीजेपी ने तुरंत हमला बोला और आरोप लगाया कि कांग्रेस का मकसद सिर्फ विरोध करना नहीं, बल्कि सत्ता बदलना है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या बांग्लादेश का छात्र आंदोलन भारत की राजनीति में भी नई बहस का कारण बनने जा रहा है?

    नेहा बोरा ने यह बयान ‘बांग्लादेश सोशलिस्ट स्टूडेंट फ्रंट’ के छठे राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए जारी एक वीडियो संदेश में दिया। उन्होंने बांग्लादेश के छात्र कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि वहां के युवाओं ने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संघर्ष करके दूसरे देशों के युवाओं को भी प्रेरित किया है। नेहा के मुताबिक, भारत में भी Gen-Z युवा मतदान के अधिकार और लोकतंत्र की रक्षा के लिए आंदोलनों में हिस्सा ले रहे हैं और नेतृत्व कर रहे हैं।

    लेकिन नेहा के इस बयान पर बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने पलटवार कर दिया। उन्होंने नेहा को राहुल गांधी की ‘पोस्टर गर्ल’ बताते हुए दावा किया कि इस विरोध का असली मकसद सत्ता बदलना है। बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस और उससे जुड़े संगठन चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन को राजनीतिक रंग दे रहे हैं। हालांकि, यह बीजेपी का राजनीतिक आरोप है; नेहा के बयान में युवाओं के संघर्ष और लोकतांत्रिक अधिकारों की बात कही गई थी।

    दरअसल, नेहा बोरा पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रही हैं। इन प्रदर्शनों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है। प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सवाल उठा रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि इस प्रक्रिया में मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है और इसी बीच बांग्लादेश के आंदोलन से प्रेरणा लेने वाला बयान नई बहस का विषय बन गया है।

    इस मामले में समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने नेहा की तारीफ की। उन्होंने कहा कि नेहा के व्यक्तित्व में भारत की बहादुर महिलाओं के संघर्ष की झलक दिखाई देती है। उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई और बेगम हजरत महल जैसी ऐतिहासिक हस्तियों का जिक्र करते हुए नेहा के विरोध को साहस से जोड़ा। इस तरह एक तरफ बीजेपी ने उनके बयान को सत्ता परिवर्तन की राजनीति से जोड़ा, तो दूसरी तरफ सपा सांसद ने उनकी भूमिका की सराहना की।

    अब बड़ा सवाल यही है कि नेहा बोरा का बांग्लादेश के Gen-Z आंदोलन से प्रेरणा लेने वाला बयान भारत में युवाओं के विरोध को किस दिशा में ले जाएगा। क्या यह मुद्दा लोकतांत्रिक अधिकारों और मतदाता सूची तक सीमित रहेगा, या फिर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सत्ता की राजनीति पर एक और बड़ा टकराव बनेगा? फिलहाल नेहा के बयान ने दिल्ली के विरोध प्रदर्शन को नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है और दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ मैदान में उतर चुके हैं।

  • दिवाली पर किसानों के खाते में आएंगे ₹2,000 या फिर करना पड़ेगा इंतजार? 24वीं किस्त को लेकर बड़ा अपडेट, ये गलती हुई तो अटक जाएगा पैसा!

    दिवाली पर किसानों के खाते में आएंगे ₹2,000 या फिर करना पड़ेगा इंतजार? 24वीं किस्त को लेकर बड़ा अपडेट, ये गलती हुई तो अटक जाएगा पैसा!

    दिवाली नजदीक है और देशभर के करोड़ों किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं। हर किसी के मन में एक ही सवाल है—क्या त्योहार से पहले खाते में ₹2,000 आएंगे या फिर सरकार किसानों को इंतजार करवाएगी? TV9 भारतवर्ष की 15 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार दिवाली से पहले किस्त आने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, सरकार ने अभी तक भुगतान की पक्की तारीख घोषित नहीं की है। यानी उम्मीद जरूर है, लेकिन अभी इसे पक्की खबर समझकर खर्च का हिसाब मत बना लेना!

    पीएम किसान योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को हर साल ₹6,000 की आर्थिक मदद दी जाती है। यह रकम एक साथ नहीं, बल्कि ₹2,000 की तीन किस्तों में सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है। सरकार ने 23वीं किस्त 20 जून 2026 को जारी की थी। आमतौर पर किस्तें चार महीने के अंतराल पर आती हैं, इसलिए अक्टूबर में अगली किस्त आने की संभावना जताई जा रही है। लेकिन तारीख का अंतिम फैसला केंद्र सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही होगा।

    अब सवाल है कि पैसा खाते में आएगा भी या नहीं? क्योंकि सिर्फ योजना में रजिस्ट्रेशन होने से हर बार किस्त मिलना तय नहीं होता। अगर आपकी ई-केवाईसी अधूरी है, जमीन के रिकॉर्ड का सत्यापन नहीं हुआ है या आधार और बैंक खाते की जानकारी में गड़बड़ी है, तो भुगतान अटक सकता है। इसलिए दिवाली के पैसों की उम्मीद लगाने से पहले इन जरूरी चीजों को जरूर जांच लें। छोटी-सी गलती की वजह से किस्त रुकी तो त्योहार पर इंतजार लंबा हो सकता है।

    अपना पेमेंट स्टेटस चेक करना भी बेहद आसान है। सबसे पहले पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट https://pmkisan.gov.in/ पर जाएं। वहां ‘Know Your Status’ विकल्प चुनें। इसके बाद अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और स्क्रीन पर दिया गया कैप्चा भरें। फिर ‘Get OTP’ पर क्लिक करके मोबाइल पर आए ओटीपी से सत्यापन पूरा करें। इसके बाद स्क्रीन पर आपके रजिस्ट्रेशन और भुगतान से जुड़ी उपलब्ध जानकारी दिख जाएगी। अगर कोई कमी नजर आती है, तो उसे जल्द ठीक कराने की कोशिश करें।

    एक जरूरी बात और—सोशल मीडिया पर अगर कोई दावा करे कि 24वीं किस्त किसी खास तारीख को पक्के तौर पर जारी हो रही है, तो तुरंत भरोसा मत करना। कई बार फर्जी तारीखें और भ्रामक संदेश वायरल होने लगते हैं। किस्त जारी होने की पुष्टि कृषि मंत्रालय या पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट से ही करें। अभी तक उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, दिवाली से पहले भुगतान की संभावना है, लेकिन आधिकारिक तारीख का ऐलान नहीं हुआ है।

    अब किसानों की नजर सरकार की अगली घोषणा पर टिकी है। अगर किस्त दिवाली से पहले जारी होती है, तो लाखों परिवारों को त्योहार के खर्च, खेती की जरूरतों और बीज-खाद की खरीद में मदद मिल सकती है। लेकिन फिलहाल ₹2,000 खाते में आने की खुशी पहले से मत मना लेना—सबसे पहले अपना स्टेटस जांचो और आधिकारिक तारीख का इंतजार करो।

  • सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी की ‘पेशी’ पर तीखे सवाल! 12 अक्टूबर को कोर्ट के अंदर क्या हुआ था? सरकार ने हलफनामा देकर घेरा, अब 22 याचिकाओं पर सुनवाई

    सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी की ‘पेशी’ पर तीखे सवाल! 12 अक्टूबर को कोर्ट के अंदर क्या हुआ था? सरकार ने हलफनामा देकर घेरा, अब 22 याचिकाओं पर सुनवाई

    दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का मामला अब सुप्रीम कोर्ट में गरमा गया है। 15 अक्टूबर को अदालत में प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई, मेट्रो सेवाओं पर पाबंदियों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ी 22 याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इसी दौरान 12 अक्टूबर को राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं के सुप्रीम कोर्ट परिसर में पहुंचने के मामले पर भी सवाल उठे। यानी चुनाव आयोग के खिलाफ शुरू हुई लड़ाई अब अदालत की दहलीज तक पहुंच चुकी है।

    सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार ने अपने कदमों का बचाव किया है और इस संबंध में हलफनामे में कारण बताए गए हैं। अदालत ने 12 अक्टूबर को राहुल गांधी के आचरण को लेकर सवाल उठाए और उनसे स्पष्टीकरण देने को कहा। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। हालांकि, अदालत में सवाल उठने का मतलब यह नहीं है कि राहुल गांधी के खिलाफ कोई अंतिम फैसला सुना दिया गया है।

    दरअसल, 12 अक्टूबर को राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के कई नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ज्ञापन देने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियां हुई हैं और बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर पारदर्शिता की जरूरत है। विपक्ष चाहता है कि मतदाता सूची में हुए बदलावों का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया की जांच हो। इन आरोपों पर अदालत में सुनवाई जारी है।

    इसी मार्च के दौरान राहुल गांधी के साथ कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी मौजूद थे। बाद में सामने आए वीडियो में राहुल गांधी उन्हें कुर्ते के कॉलर से पीछे खींचते दिखाई दिए। इस वीडियो को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया और बीजेपी नेताओं ने राहुल गांधी के व्यवहार पर सवाल उठाए। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी इस घटना को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। हालांकि, यह विवाद अलग राजनीतिक मुद्दा है और इसे सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही से जोड़कर कोई निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।

    उधर, दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के कथित उत्पीड़न को लेकर भी कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन के दौरान लोगों को हिरासत में लिया गया, कुछ के साथ मारपीट हुई और दिल्ली मेट्रो के कई स्टेशनों पर आवाजाही प्रतिबंधित की गई। मेट्रो सेवाओं और ट्रेनों पर असर को लेकर भी अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई है। दूसरी ओर, अधिकारियों ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के आधार पर उठाए गए कदमों का बचाव किया है।

    अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई पर है। एक तरफ राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की SIR संबंधी याचिकाएं हैं, तो दूसरी तरफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और सार्वजनिक परिवहन पर लगे प्रतिबंधों का मामला है। अदालत इन सभी मुद्दों पर उपलब्ध तथ्यों और कानूनी दलीलों के आधार पर विचार करेगी। फिलहाल इतना साफ है कि CEC के खिलाफ विरोध अब केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा—इसकी लड़ाई अदालत में भी पहुंच चुकी है।

  • हिंदू मंदिर में खून की होली खेलने निकला था 19 साल का युवक! राइफल अटकी तो भागा, घर से मिला ऐसा सामान कि FBI भी जांच में जुटी

    हिंदू मंदिर में खून की होली खेलने निकला था 19 साल का युवक! राइफल अटकी तो भागा, घर से मिला ऐसा सामान कि FBI भी जांच में जुटी

    अमेरिका के इलिनॉय राज्य में हिंदू मंदिर पर कथित सामूहिक गोलीबारी की साजिश का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। पुलिस ने 19 साल के एलेक्जेंड्रोस पापोराकिस को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों को शक है कि वह ऑरोरा इलाके में किसी हिंदू धार्मिक स्थल को निशाना बनाने की तैयारी कर रहा था। उसके घर से राइफल, भरी हुई मैगजीन, सैकड़ों कारतूस और चरमपंथी विचारधारा से जुड़ी सामग्री बरामद होने का दावा किया गया है।

    पुलिस के मुताबिक, 11 अक्टूबर को माउंट प्रॉस्पेक्ट पुलिस को आरोपी के इलेक्ट्रॉनिक संदेशों के बारे में जानकारी मिली थी। एक व्यक्ति ने अधिकारियों को बताया कि पापोराकिस ने कथित तौर पर सामूहिक गोलीबारी की योजना से जुड़ा दस्तावेज और हथियारों की तस्वीरें साझा की थीं। इसके बाद पैलेटाइन और माउंट प्रॉस्पेक्ट पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई की और आरोपी को उसके घर से निकलते समय गिरफ्तार कर लिया।

    जांच में सामने आया कि आरोपी ने कथित तौर पर एक आठ पन्नों का दस्तावेज तैयार किया था, जिसमें श्वेत वर्चस्ववादी और चरमपंथी विचारों का जिक्र था। अभियोजकों के मुताबिक, उसमें भारतीय, यहूदी और अफ्रीकी-अमेरिकी लोगों के खिलाफ हिंसा की बातें भी लिखी गई थीं। पुलिस का आरोप है कि आरोपी ने अपने कार्यस्थल पर भी भारतीयों के प्रति नफरत जताई थी। हालांकि, ये आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।

    मामले में सबसे चौंकाने वाला दावा यह है कि आरोपी ने कथित तौर पर एक सहकर्मी को फोन करके बताया था कि उसकी बंदूक जाम हो गई और वह वहां से तेजी से निकल गया। अभियोजकों के अनुसार, उसने हथियार में आई खराबी से जुड़ी तस्वीरें और संदेश भी साझा किए थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वह वास्तव में कहां हमला करने पहुंचा था और उसकी योजना कितनी आगे बढ़ चुकी थी।

    पुलिस ने आरोपी के घर की तलाशी में एक AR-स्टाइल राइफल, कई लोडेड मैगजीन, सैकड़ों अतिरिक्त कारतूस, सामरिक उपकरण और बॉडी आर्मर वाला वेस्ट बरामद किया। कुछ सामान पर श्वेत वर्चस्ववादी चरमपंथ से जुड़े प्रतीक भी मिले। आरोपी पर आतंकवादी धमकी देने और अवैध रूप से हथियार रखने के आरोप लगाए गए हैं। FBI भी जांच में स्थानीय पुलिस का सहयोग कर रही है।

    फिलहाल आरोपी को हिरासत में रखने का आदेश दिया गया है और उसकी अगली पेशी 30 अक्टूबर को तय है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जिस विशेष मंदिर को निशाना बनाने की कथित योजना थी, उसकी पहचान अभी पुष्टि के साथ नहीं हुई है। इलाके के हिंदू धार्मिक स्थलों को सतर्क कर दिया गया है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित साजिश के पीछे कौन-कौन से संपर्क थे और क्या इस मामले में अतिरिक्त आरोप लगाए जाएंगे।

  • श्राद्ध का भोज खाने निकले थे बच्चे, घर लौटीं 13 अर्थियां! किसी की गोद सूनी हुई, किसी का पूरा परिवार उजड़ गया… राघोपुर में चीखों से कांपा गांव

    श्राद्ध का भोज खाने निकले थे बच्चे, घर लौटीं 13 अर्थियां! किसी की गोद सूनी हुई, किसी का पूरा परिवार उजड़ गया… राघोपुर में चीखों से कांपा गांव

    बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में गंगा नदी ने ऐसा कहर बरपाया कि पूरे गांव की खुशियां मातम में बदल गईं। मंगलवार रात रामपुर श्यामचंद गांव के लोग श्राद्ध का भोज खाने के लिए नाव से नदी पार जा रहे थे। नाव पर बच्चे और दूसरे लोग सवार थे, लेकिन बीच नदी में नाव पलट गई। इस हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई, जिनमें ज्यादातर मासूम बच्चे थे। बुधवार को जब गांव में एक के बाद एक शव पहुंचे, तो हर तरफ चीख-पुकार मच गई।

    जानकारी के मुताबिक, नाव में करीब 20 से 25 लोग सवार थे। सभी गंगा पार एक गांव में आयोजित श्राद्ध भोज में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान नाव का संतुलन बिगड़ा और वह नदी में पलट गई। देखते ही देखते बच्चे और दूसरे यात्री पानी में डूबने लगे। आसपास मौजूद लोगों ने बचाव की कोशिश की और प्रशासन को सूचना दी। हादसे के बाद SDRF की टीम और स्थानीय गोताखोरों ने राहत-बचाव अभियान चलाया।

    इस हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि कई परिवारों ने एक साथ अपने बच्चों को खो दिया। रिपोर्टों के मुताबिक, मृतकों में नौ लड़कियां और चार लड़के शामिल थे। एक ही परिवार के कई बच्चों की मौत ने त्रासदी को और भयावह बना दिया। जिन घरों में त्योहारों की तैयारी होनी थी, वहां अब बच्चों की तस्वीरें और उनके कपड़े देखकर परिजन बिलख रहे हैं। गांव की गलियां, जहां बच्चों की आवाजें गूंजती थीं, वहां अब मातम पसरा है।

    हादसे के बाद नाव की हालत को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, नाव पुरानी थी और उसमें बड़ा छेद होने की बात सामने आई है। नाव में क्षमता से ज्यादा लोग सवार थे या नहीं, और उसे चलाने के लिए सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं—इन पहलुओं की जांच की जा रही है। हालांकि, दुर्घटना की सटीक वजह आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। अगर सुरक्षा में लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय करना बेहद जरूरी होगा।

    घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दुख जताया है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की, जबकि प्रधानमंत्री की ओर से भी मृतकों के परिवारों के लिए दो-दो लाख रुपये की सहायता घोषित की गई। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य के साथ हादसे की जांच शुरू की है। स्थानीय अधिकारियों से जवाब भी मांगा गया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इतनी बड़ी दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई।

    लेकिन मुआवजे और जांच के बीच उन परिवारों का दर्द कम नहीं हो सकता, जिनके बच्चे अब कभी लौटकर नहीं आएंगे। श्राद्ध भोज में शामिल होने निकले बच्चों की यात्रा घरों में मातम छोड़ गई। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होगी और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नदी में नावों की सुरक्षा पर सख्ती की जाएगी? राघोपुर की यह त्रासदी पूरे देश को याद दिलाती है कि थोड़ी-सी लापरवाही भी कितनी बड़ी कीमत वसूल सकती है।

  • ‘शिवा का मर्डर नहीं हुआ, सुसाइड था!’ फरार श्रद्धा दुबे ने वीडियो जारी कर तोड़ी चुप्पी, नेताओं से कनेक्शन पर भी दी सफाई

    ‘शिवा का मर्डर नहीं हुआ, सुसाइड था!’ फरार श्रद्धा दुबे ने वीडियो जारी कर तोड़ी चुप्पी, नेताओं से कनेक्शन पर भी दी सफाई

    लखनऊ के कारोबारी शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में फरार चल रही श्रद्धा दुबे ने आखिरकार वीडियो जारी कर अपना पक्ष रखा है। हत्या के आरोपों का सामना कर रही श्रद्धा ने दावा किया कि शिवा की हत्या नहीं हुई, बल्कि उसने आत्महत्या की थी। उन्होंने कहा कि वह पुलिस से भाग नहीं रही हैं और जांच अधिकारियों के सामने पेश होकर अपना बयान दर्ज कराना चाहती हैं। हालांकि, उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।

    वीडियो में श्रद्धा ने कहा कि सोशल मीडिया और मीडिया में उनके बारे में कई तरह की बातें फैलाई जा रही हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि बिना तथ्यों की पुष्टि किए उनके बारे में अफवाहें न फैलाएं। श्रद्धा का कहना है कि वह मामले से जुड़ी सच्चाई पुलिस को बताना चाहती हैं, लेकिन फिलहाल उनकी शारीरिक स्थिति ठीक नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि वह कहीं गायब नहीं हैं।

    श्रद्धा ने अपने वीडियो में नेताओं और अधिकारियों के साथ नाम जोड़े जाने पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति का इंस्टाग्राम पर उनसे जुड़ा होना या विज्ञापन के सिलसिले में संपर्क होना किसी निजी संबंध का सबूत नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की कि बिना किसी आधार के उनका नाम किसी के साथ न जोड़ा जाए। इस बयान के जरिए श्रद्धा ने उन चर्चाओं पर सफाई देने की कोशिश की, जो शिवा की मौत के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही हैं।

    दरअसल, 9 अक्टूबर को लखनऊ के हजरतगंज स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरने के बाद कारोबारी शिवा शर्मा की मौत हो गई थी। शुरुआत में घटना को लेकर अलग-अलग बातें सामने आईं, लेकिन शिवा के परिवार ने हत्या और प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए। परिवार की शिकायत के बाद पुलिस ने श्रद्धा, उनकी बहन रश्मि और अन्य लोगों के खिलाफ हत्या समेत संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत से पहले लगी कई अंदरूनी चोटों का भी जिक्र हुआ है, जिनकी परिस्थितियों की जांच की जा रही है।

    इस मामले में पुलिस ने श्रद्धा दुबे, उनकी बहन रश्मि दुबे और एक अन्य आरोपी की गिरफ्तारी के लिए 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। जांच के दौरान उनकी तलाश तेज की गई है और पुलिस अलग-अलग संभावित ठिकानों पर जानकारी जुटा रही है। श्रद्धा का वीडियो सामने आने के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि वह पुलिस के सामने कब पेश होंगी और जांच में अपना पक्ष कब दर्ज कराएंगी।

    फिलहाल मामले में दो अलग-अलग दावे सामने हैं—श्रद्धा इसे आत्महत्या बता रही हैं, जबकि शिवा का परिवार हत्या का आरोप लगा रहा है। सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर सफाई देना जांच का विकल्प नहीं है; मौत की असली परिस्थितियां पुलिस की जांच और उपलब्ध सबूतों से ही स्पष्ट होंगी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि श्रद्धा कब सामने आती हैं और पूछताछ में क्या जानकारी देती हैं।

  • शादी, कत्ल और नीले ड्रम में लाश… 590 दिन बाद मुस्कान-साहिल को फांसी! सौरभ की जिंदगी से लेकर कोर्ट के फैसले तक, रोंगटे खड़े कर देगी पूरी कहानी

    शादी, कत्ल और नीले ड्रम में लाश… 590 दिन बाद मुस्कान-साहिल को फांसी! सौरभ की जिंदगी से लेकर कोर्ट के फैसले तक, रोंगटे खड़े कर देगी पूरी कहानी

    मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में आखिरकार अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुना दी है। मर्चेंट नेवी से जुड़े रहे सौरभ राजपूत की हत्या ने मार्च 2025 में पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। पत्नी और उसके प्रेमी पर सौरभ की हत्या कर शव के टुकड़े करने और उन्हें सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपाने का आरोप साबित होने के बाद अब दोनों को मृत्युदंड मिला है। करीब 13 महीने चली सुनवाई, 126 पेशियों और 22 गवाहों के बाद 14 अक्टूबर 2026 को अदालत ने अपना फैसला सुना दिया।

    इस कहानी की शुरुआत साल 2016 में हुई थी, जब सौरभ और मुस्कान ने परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी की थी। बाद में दोनों परिवारों ने इस रिश्ते को स्वीकार कर लिया। साल 2019 में उनकी बेटी का जन्म हुआ। सौरभ पहले मर्चेंट नेवी में काम करते थे और बाद में लंदन में नौकरी करने लगे। परिवार के लिए सब कुछ सामान्य दिखाई देता था, लेकिन आगे चलकर यही रिश्ता एक ऐसे हत्याकांड में बदल गया, जिसकी चर्चा देशभर में होने लगी।

    24 फरवरी 2025 को सौरभ लंदन से मेरठ लौटे थे। 25 फरवरी को मुस्कान का जन्मदिन और 28 फरवरी को बेटी का जन्मदिन मनाया गया। लेकिन अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 3 मार्च को सौरभ की हत्या कर दी गई। आरोप था कि मुस्कान ने उन्हें नशीली दवा दी और फिर साहिल को बुलाया गया। इसके बाद दोनों ने कथित तौर पर चाकू से हमला किया। हत्या के बाद शव के टुकड़े किए गए और उन्हें नीले प्लास्टिक के ड्रम में रखकर सीमेंट से ढक दिया गया, ताकि किसी को शक न हो।

    हत्या के अगले दिन, 4 मार्च को मुस्कान अपनी बेटी को मायके छोड़कर साहिल के साथ हिमाचल प्रदेश चली गई। रिपोर्टों के मुताबिक, इस दौरान सौरभ के फोन से परिवार को संदेश भेजे गए, जिससे उनकी गैरमौजूदगी पर तुरंत शक नहीं हुआ। जब परिवार को सौरभ से संपर्क नहीं हो पाया और हालात संदिग्ध लगे, तो मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंची। 17 मार्च 2025 को पुलिस ने घर में रखे नीले ड्रम से शव के टुकड़े बरामद किए। इस खुलासे ने पूरे मामले को सनसनीखेज बना दिया।

    18 मार्च को मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने जांच के बाद 12 मई 2025 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 22 गवाहों के बयान और परिस्थितिजन्य तथा फॉरेंसिक सबूत पेश किए। करीब 13 महीने की सुनवाई और 126 पेशियों के बाद 30 सितंबर 2026 को अदालत ने दोनों को हत्या और सबूत मिटाने के मामले में दोषी करार दिया। इसके बाद सजा पर अंतिम बहस हुई और अभियोजन पक्ष ने दोनों के लिए मृत्युदंड की मांग की।

    14 अक्टूबर 2026 को मेरठ की अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुना दी। फैसले के दौरान जज ने महाभारत का जिक्र करते हुए कहा कि ‘दंड भी धर्म है’। सौरभ के परिवार ने दोनों के लिए अधिकतम सजा की मांग की थी और फैसले के बाद उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद जताई। हालांकि, मृत्युदंड के फैसले के बाद भी कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रह सकती है। नीले ड्रम से शुरू हुई इस कहानी में अब अदालत का फैसला आ चुका है, लेकिन आगे की अपील और न्यायिक प्रक्रिया पर भी सबकी नजर रहेगी।

  • राहुल गांधी के सामने NSUI की ‘शेरनी’ ने खोली पोल! बोलीं— गला पकड़ा, चेहरा नोचा, थप्पड़ भी मारा… राहुल ने कहा, ‘सबका हिसाब होगा’

    राहुल गांधी के सामने NSUI की ‘शेरनी’ ने खोली पोल! बोलीं— गला पकड़ा, चेहरा नोचा, थप्पड़ भी मारा… राहुल ने कहा, ‘सबका हिसाब होगा’

    दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन अब पुलिस और कांग्रेस के बीच बड़े विवाद में बदल गया है। NSUI कार्यकर्ताओं ने दिल्ली पुलिस पर हिरासत के दौरान बेरहमी से मारपीट करने के आरोप लगाए हैं। बुधवार को राहुल गांधी ने इन कार्यकर्ताओं के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की और पुलिस की कथित कार्रवाई पर सवाल उठाए। राहुल ने कहा कि ये छात्र देश की आवाज हैं और उनकी आवाज को दबाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में समर्थ नाम के NSUI कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि वे 4 अक्टूबर से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। 5 अक्टूबर को हिरासत में लिए जाने के बाद उन्हें पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहां कथित तौर पर करीब 20 पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की। समर्थ का दावा है कि इसके बाद उन्हें दूसरे रास्ते से बाहर ले जाया गया और दिल्ली कैंट तक भी एक कांस्टेबल ने पीटा। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उनके साथी ने उल्टी आने की बात कही, तो पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर उसे बैग में उल्टी करने को कहा।

    इस दौरान महिला प्रदर्शनकारी रितु भराल ने भी अपनी आपबीती सुनाई। उनके आरोप के मुताबिक, हिरासत के दौरान महिला कांस्टेबल चंचल यादव ने उनका गला पकड़कर खींचा और धक्का दिया, जिससे वह सीट पर गिर गईं। रितु ने दावा किया कि इसके बाद उनके चेहरे और कान के पास नाखूनों से खरोंच मारी गई और विरोध करने पर थप्पड़ भी मारा गया। राहुल गांधी ने रितु को ‘शेरनी’ बताते हुए कहा कि वह कथित मारपीट के बावजूद डरी नहीं। हालांकि, इन आरोपों पर पुलिस का पक्ष और स्वतंत्र पुष्टि सामने आना बाकी है।

    एक अन्य NSUI कार्यकर्ता धर्मेंद्र कुमार ने भी पुलिस पर अभद्र भाषा इस्तेमाल करने और मारपीट करने का आरोप लगाया। उनका दावा है कि पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को चुनौती देते हुए कहा कि वे अपने नेताओं को बुला लें, कोई उन्हें बचाने नहीं आएगा। धर्मेंद्र ने कहा कि वे कथित कार्रवाई के बावजूद अन्याय के खिलाफ प्रदर्शन जारी रखेंगे। इन आरोपों ने हिरासत के दौरान पुलिस के व्यवहार और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में छात्रों से कहा कि वे अपने पास मौजूद वीडियो सबूत सुरक्षित रखें। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों की आवाज दबाई जा रही है और कहा कि उचित समय पर इन सबूतों का इस्तेमाल कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। राहुल ने गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी निशाने पर लिया। उनके बयान के मुताबिक, कांग्रेस इस मामले को आगे तक ले जाएगी और कथित बर्बरता को भूलने वाली नहीं है।

    यह पूरा विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा है। NSUI और कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि पुलिस ने अलग-अलग प्रदर्शन मामलों में कार्रवाई की है। अब बड़ा सवाल यह है कि हिरासत के दौरान कथित मारपीट के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी या नहीं। फिलहाल राहुल गांधी के समर्थन और NSUI कार्यकर्ताओं के आरोपों ने इस विवाद को और गरमा दिया है।