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  • यूसुफ पठान ने की मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात! वोटर लिस्ट को लेकर रख दी ऐसी मांग कि मच गई सियासी हलचल

    यूसुफ पठान ने की मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात! वोटर लिस्ट को लेकर रख दी ऐसी मांग कि मच गई सियासी हलचल

    पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई, जब सांसद यूसुफ पठान ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने मतदाता सूची (Voter List) से जुड़े विवाद को लेकर एक अहम मांग रखी। उन्होंने प्रत्येक जिले में स्पेशल ट्रिब्यूनल बनाने की जरूरत बताई, ताकि मतदाता सूची से जुड़े मामलों का जल्द निपटारा हो सके।

    यूसुफ पठान का कहना है कि कई लोगों के नाम मतदाता सूची से हटने या जुड़ने को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं। उनका मानना है कि यदि हर जिले में विशेष ट्रिब्यूनल बनाया जाए, तो लोगों को अदालतों के लंबे इंतजार से राहत मिलेगी और विवादों का तेजी से समाधान हो सकेगा।

    बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर शुभेंदु अधिकारी ने भी गंभीरता दिखाई। दोनों नेताओं के बीच चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। हालांकि सरकार की ओर से फिलहाल इस मांग को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

    इस मुलाकात के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। हाल के दिनों में यूसुफ पठान के राजनीतिक रुख को लेकर लगातार चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात ने पश्चिम बंगाल की सियासत में नई अटकलों को जन्म दे दिया है।

    विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब इस बात पर है कि सरकार इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाती है। यदि स्पेशल ट्रिब्यूनल बनाने की दिशा में कोई कदम उठाया जाता है, तो इसका असर आगामी चुनावी तैयारियों और मतदाता सूची से जुड़े विवादों पर पड़ सकता है।

    फिलहाल इस मुलाकात की सबसे ज्यादा चर्चा वोटर लिस्ट को लेकर उठाई गई मांग को लेकर हो रही है। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और इस मुद्दे पर होने वाले फैसले से पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया मोड़ आ सकता है।

  • 22 साल तक बेगुनाह काटता रहा उम्रकैद! सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला तो न्याय व्यवस्था पर उठ गए बड़े सवाल

    22 साल तक बेगुनाह काटता रहा उम्रकैद! सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला तो न्याय व्यवस्था पर उठ गए बड़े सवाल

    ओडिशा के अर्जुन जानी उर्फ टुनटुन की कहानी ने पूरे देश को झकझोर दिया है। एक ट्रिपल मर्डर केस में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्होंने अपनी जिंदगी के 22 साल जेल में बिताए, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बेगुनाह करार देते हुए बरी कर दिया। फैसले के साथ ही शीर्ष अदालत ने न्याय व्यवस्था की गंभीर खामियों पर भी कड़ी टिप्पणी की।

    मामला साल 2004 के ट्रिपल मर्डर केस का है। ट्रायल कोर्ट ने 2006 में अर्जुन जानी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बाद में उन्होंने ओडिशा हाईकोर्ट में अपील की, लेकिन 3,157 दिन की देरी का हवाला देकर हाईकोर्ट ने अपील पर सुनवाई ही नहीं की। इस कारण उन्हें करीब 10 साल और जेल में रहना पड़ा।

    सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि हाईकोर्ट को यह देखना चाहिए था कि अपील जेल से दायर की गई थी और आरोपी पहले ही 12 साल से ज्यादा समय जेल में बिता चुका था। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में तकनीकी आधार पर अपील खारिज करने के बजाय उसके गुण-दोष के आधार पर सुनवाई होनी चाहिए थी।

    सुप्रीम कोर्ट ने केस के सबूतों की भी दोबारा जांच की। अदालत ने पाया कि पूरी सजा मुख्य रूप से एक ऐसे चश्मदीद गवाह की गवाही पर आधारित थी, जिसे विश्वसनीय नहीं माना जा सकता। साथ ही कथित कबूलनामा भी कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं था। इन्हीं कारणों से अदालत ने अर्जुन जानी को संदेह का लाभ नहीं, बल्कि पूरी तरह बेगुनाह मानते हुए बरी कर दिया।

    फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाशिए पर रहने वाले और गरीब लोगों के लिए न्याय तक पहुंच आज भी बड़ी चुनौती है। अदालत ने यह भी माना कि अर्जुन जानी की जिंदगी के 22 साल न्यायिक व्यवस्था की खामियों की वजह से चले गए। कोर्ट ने जिला प्रशासन और विधिक सेवा प्राधिकरण को उनके पुनर्वास की व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया।

    इस फैसले के बाद एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया, जांच एजेंसियों की भूमिका और समय पर सुनवाई को लेकर बहस तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी भविष्य में ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए भी एक महत्वपूर्ण मिसाल मानी जा रही है।

  • गुरु की शुभ दृष्टि पड़ते ही चमकेगी इन 3 राशियों की किस्मत! पैसा, तरक्की और सफलता के बन रहे प्रबल योग

    गुरु की शुभ दृष्टि पड़ते ही चमकेगी इन 3 राशियों की किस्मत! पैसा, तरक्की और सफलता के बन रहे प्रबल योग

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब देवगुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि में मजबूत स्थिति में होते हैं, तो उनकी शुभ दृष्टि कई राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। इस समय गुरु की 5वीं, 7वीं और 9वीं दृष्टि को बेहद शुभ माना जा रहा है, जिससे कुछ राशियों के लिए धन, करियर और भाग्य के मजबूत योग बन रहे हैं।

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार, गुरु की शुभ दृष्टि से तीन राशियों को विशेष लाभ मिलने के संकेत हैं। इन राशि वालों को करियर में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, रुके हुए काम पूरे होने की संभावना है और आर्थिक स्थिति पहले से मजबूत हो सकती है। व्यापार और नौकरी दोनों क्षेत्रों में अच्छे अवसर मिलने के योग बताए गए हैं।

    मेष राशि : उच्च के गुरु की कृपा से मेष राशि वालों के लिए आर्थिक स्थिति मजबूत होने के योग बन रहे हैं। रुका हुआ धन वापस मिल सकता है और आय के नए स्रोत भी खुल सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है, जबकि कारोबार करने वालों को अच्छा लाभ मिल सकता है। परिवार में भी खुशियों का माहौल रहेगा।

    कन्या राशि : कन्या राशि के जातकों पर गुरु की शुभ दृष्टि करियर और व्यापार में तरक्की के संकेत दे रही है। लंबे समय से अटके हुए काम पूरे हो सकते हैं। निवेश से लाभ मिलने की संभावना है और समाज में मान-सम्मान बढ़ सकता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को भी सफलता मिलने के योग बताए गए हैं।

    मीन राशि: मीन राशि वालों के लिए यह समय भाग्य का पूरा साथ देने वाला माना जा रहा है। आर्थिक लाभ के नए अवसर मिल सकते हैं और किसी बड़ी योजना में सफलता मिलने के संकेत हैं। पारिवारिक जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी और लंबे समय से चली आ रही परेशानियां कम हो सकती हैं। नौकरी और व्यवसाय दोनों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, गुरु की कृपा बनाए रखने के लिए भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की पूजा करना, गुरुवार को पीली वस्तुओं का दान करना और जरूरतमंदों की सहायता करना शुभ माना जाता है। हालांकि यह सभी बातें धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय विश्वासों पर आधारित हैं।

    डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

  • पहले एक आशिक… फिर दूसरा! लेकिन जब पुराने वाले ने बीच में एंट्री मारी, तो खेल में आया बड़ा ट्विस्ट

    पहले एक आशिक… फिर दूसरा! लेकिन जब पुराने वाले ने बीच में एंट्री मारी, तो खेल में आया बड़ा ट्विस्ट

    उत्तर प्रदेश के मऊ से सामने आई एक सनसनीखेज वारदात ने सभी को हैरान कर दिया। पुलिस के मुताबिक, पति से अलग रह रही एक महिला की जिंदगी में पहले एक प्रेमी आया और कुछ समय बाद दूसरे युवक से भी उसका प्रेम संबंध बन गया। यही लव ट्रायंगल आगे चलकर एक खूनी साजिश में बदल गया।

    पुलिस के अनुसार, महिला का पहला प्रेमी असगर अली उससे रिश्ता खत्म करने को तैयार नहीं था और वह उसके दूसरे प्रेमी आकाश राव से मिलने का विरोध करता था। इसी विवाद के बाद कथित तौर पर पहले प्रेमी को रास्ते से हटाने की योजना बनाई गई।

    जांच में पुलिस का दावा है कि महिला ने किराए के कमरे में असगर अली को बहाने से बुलाया। रात में जब वह सो गया, तब दूसरा प्रेमी आकाश राव अपने साथी सूरज राजभर के साथ वहां पहुंचा। आरोप है कि सूरज ने असगर को पकड़ा, महिला ने उसका सिर दबोचा और आकाश ने चाकू से कई वार कर उसकी हत्या कर दी। ये पुलिस के आरोप हैं और मामले की जांच जारी है।

    वारदात के बाद महिला ने खुद पुलिस को सूचना दी और शुरुआत में मृतक को अपना पति बताया। लेकिन पूछताछ, कॉल डिटेल और अन्य सबूतों के आधार पर पुलिस को कहानी पर शक हुआ। जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि मृतक उसका पति नहीं बल्कि प्रेमी असगर अली था।

    पुलिस ने महिला और सूरज राजभर को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मुख्य आरोपी आकाश राव अभी फरार है। पुलिस के मुताबिक, आकाश हिस्ट्रीशीटर है और उसके खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।

    पूछताछ के दौरान महिला ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि पति के अलावा उसके दो अन्य लोगों से संबंध थे और इसी वजह से पूरा मामला इस मोड़ तक पहुंचा। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और फरार आरोपी की तलाश जारी है।

  • शुभेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में नया मोड़! आरोपी के पिता का दावा- ‘मेरे बेटे को फंसाया जा रहा है’

    शुभेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में नया मोड़! आरोपी के पिता का दावा- ‘मेरे बेटे को फंसाया जा रहा है’

    पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में अब एक नया मोड़ सामने आया है। CBI द्वारा सागर सोनकर की गिरफ्तारी के बाद उसके पिता ने बेटे को बेगुनाह बताते हुए जांच एजेंसी की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि उनके बेटे को इस मामले में झूठा फंसाया जा रहा है। ये आरोपी के पिता के दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    सागर सोनकर के पिता ने कहा कि उनका बेटा किसी भी तरह से हत्या की साजिश में शामिल नहीं था। उनके मुताबिक, परिवार का इस पूरे मामले से कोई लेना-देना नहीं है और जांच में कई अहम पहलुओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग भी की।

    दूसरी ओर, CBI का दावा है कि जांच में मिले सबूतों के आधार पर सागर सोनकर और उसके भाई साहिब सोनकर को गिरफ्तार किया गया है। एजेंसी के अनुसार, दोनों पर कथित तौर पर हमलावरों की व्यवस्था करने, रेकी कराने और अन्य लॉजिस्टिक सहायता देने के आरोप हैं। मामले की जांच अभी जारी है।

    CBI की जांच में यह भी सामने आया है कि कथित साजिश की तैयारी कई महीने पहले शुरू हो गई थी। एजेंसी के मुताबिक, पैसों के लेनदेन और अन्य सबूतों से संकेत मिले हैं कि हत्या की योजना दिसंबर 2025 से बनाई जा रही थी। जांच अधिकारी अब पूरे नेटवर्क और संभावित साजिशकर्ताओं की भूमिका की भी पड़ताल कर रहे हैं।

    चंद्रनाथ रथ की हत्या पश्चिम बंगाल की सबसे चर्चित वारदातों में से एक रही है। इस मामले में पहले भी कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। CBI अब राजनीतिक एंगल समेत सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है, हालांकि एजेंसी ने अभी तक किसी अंतिम निष्कर्ष की घोषणा नहीं की है।

    फिलहाल आरोपी के पिता के बयान के बाद इस हाई-प्रोफाइल मामले में नई बहस शुरू हो गई है। अब सबकी नजर CBI की आगे की जांच पर है कि क्या इस केस में और गिरफ्तारियां होंगी या नए सबूत सामने आएंगे।

  • ‘बीफ खाने वाला भगवान राम कैसे बन सकता है?’ एक्ट्रेस का रणबीर कपूर पर बड़ा हमला, ‘माफी मांगो, नहीं तो Boycott’ की चेतावनी

    ‘बीफ खाने वाला भगवान राम कैसे बन सकता है?’ एक्ट्रेस का रणबीर कपूर पर बड़ा हमला, ‘माफी मांगो, नहीं तो Boycott’ की चेतावनी

    नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ रिलीज से पहले एक बार फिर विवादों में आ गई है। अभिनेत्री निकिता रावल ने भगवान राम की भूमिका निभा रहे रणबीर कपूर पर तीखा हमला बोलते हुए उनके पुराने ‘बीफ’ वाले बयान को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्ति को भगवान राम का किरदार नहीं निभाना चाहिए।

    निकिता रावल ने कहा कि रणबीर कपूर को पहले सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उनके अनुसार, यह सिर्फ एक अभिनेता की निजी पसंद का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान राम का किरदार निभाने वाले कलाकार पर लोगों की अलग तरह की अपेक्षाएं होती हैं।

    अभिनेत्री ने फिल्म निर्माताओं के फैसले पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि भगवान राम जैसे पूजनीय चरित्र के लिए ऐसे कलाकार का चयन किया जाना चाहिए, जिसकी छवि इस भूमिका के अनुरूप हो। उन्होंने सोशल मीडिया पर #BoycottRanbirKapoor अभियान जारी रखने की भी बात कही।

    यह विवाद रणबीर कपूर के कई साल पुराने उस इंटरव्यू से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने खुद को “बीफ पसंद करने वाला” बताया था। वही बयान अब दोबारा चर्चा में है और फिल्म ‘रामायण’ की रिलीज से पहले इस पर नई बहस शुरू हो गई है। दूसरी ओर, फिल्म के निर्माता और रणबीर कपूर की ओर से इस नए विवाद पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर लोगों की राय बंटी हुई है। कुछ लोग निकिता रावल की बात का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कई यूजर्स का कहना है कि किसी अभिनेता का निजी जीवन और पर्दे पर निभाया गया किरदार अलग-अलग बातें हैं। इसी वजह से यह विवाद लगातार चर्चा में बना हुआ है।

    फिलहाल फिल्म ‘रामायण’ की रिलीज से पहले यह बयानबाजी चर्चा का बड़ा विषय बन गई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि रणबीर कपूर या फिल्म के निर्माता इस विवाद पर कोई प्रतिक्रिया देते हैं या नहीं और इसका फिल्म की रिलीज पर कोई असर पड़ता है या नहीं।

  • साल में सिर्फ 24 घंटे खुलते हैं इस रहस्यमयी मंदिर के दरवाजे! बाकी 364 दिन क्यों रहता है बंद, जानकर रह जाएंगे हैरान

    साल में सिर्फ 24 घंटे खुलते हैं इस रहस्यमयी मंदिर के दरवाजे! बाकी 364 दिन क्यों रहता है बंद, जानकर रह जाएंगे हैरान

    उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध नागचंद्रेश्वर मंदिर सालभर बंद रहता है और इसके कपाट केवल नाग पंचमी के दिन 24 घंटे के लिए खोले जाते हैं। यही वजह है कि इस एक दिन लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यह मंदिर महाकालेश्वर मंदिर परिसर की तीसरी मंजिल पर स्थित है और इसे देश के सबसे अनोखे शिव मंदिरों में गिना जाता है।

    इस साल 17 अगस्त 2026 को नाग पंचमी के अवसर पर मंदिर के कपाट आधी रात के बाद श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। पूरे 24 घंटे तक भक्त भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन कर सकेंगे और उसके बाद मंदिर फिर पूरे एक साल के लिए बंद हो जाएगा।

    इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी दुर्लभ प्रतिमा है। यहां भगवान शिव, माता पार्वती और नागराज तक्षक की अद्भुत प्रतिमा विराजमान है। मान्यता है कि ऐसी प्रतिमा दुनिया में कहीं और नहीं है। इसी कारण नाग पंचमी के दिन यहां दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नाग पंचमी पर नागचंद्रेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना करने और भगवान शिव का जलाभिषेक करने से कालसर्प दोष, सर्प भय और जीवन की कई बाधाओं से राहत मिल सकती है। हालांकि यह धार्मिक आस्था पर आधारित मान्यता है।

    हर साल मंदिर खुलने से पहले प्रशासन और महाकाल मंदिर समिति की ओर से विशेष तैयारियां की जाती हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा, दर्शन व्यवस्था और कतार प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए जाते हैं, क्योंकि कुछ ही घंटों में लाखों लोग यहां पहुंच जाते हैं।

    नाग पंचमी के दिन नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन को लेकर देशभर के श्रद्धालुओं में खास उत्साह रहता है। साल में सिर्फ एक बार मिलने वाला यह अवसर धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और यही कारण है कि भक्त पूरे साल इस दिन का इंतजार करते हैं।

  • ‘GB रोड वाली लग रही है…’ ट्रेन में लड़की पर फब्ती पड़ते ही खींच दी चेन, फिर जो हुआ उसका वीडियो हो गया वायरल

    ‘GB रोड वाली लग रही है…’ ट्रेन में लड़की पर फब्ती पड़ते ही खींच दी चेन, फिर जो हुआ उसका वीडियो हो गया वायरल

    उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में चलती ट्रेन के अंदर हुई एक घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दावा किया गया कि ट्रेन में सफर कर रही एक युवती पर कुछ लोगों ने आपत्तिजनक टिप्पणी की। आरोप है कि उनमें से एक ने युवती को लेकर “GB रोड वाली लग रही है” जैसी अभद्र टिप्पणी कर दी, जिसके बाद माहौल अचानक गर्मा गया।

    बताया जा रहा है कि टिप्पणी सुनते ही ट्रेन में मौजूद एक यात्री ने इसका विरोध किया। देखते ही देखते बहस बढ़ गई और मामला इतना गरमा गया कि किसी ने इमरजेंसी चेन खींच दी। ट्रेन रुकते ही कोच के अंदर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कई यात्री भी वहां इकट्ठा हो गए।

    घटना का वीडियो किसी यात्री ने अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद लोग इस घटना पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कई लोगों ने महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के संबंध में रेलवे और सुरक्षा एजेंसियों तक भी मामला पहुंचा है। वायरल वीडियो के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी की गलती सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर बहस तेज हो गई है। कुछ लोग इमरजेंसी चेन खींचने को गलत बता रहे हैं, जबकि कई लोगों का कहना है कि महिला के सम्मान की रक्षा के लिए विरोध करना जरूरी था। फिलहाल वायरल वीडियो की भी जांच की जा रही है और पूरे मामले के तथ्यों को खंगाला जा रहा है।

    फिलहाल यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर जांच के नतीजों पर है कि ट्रेन में अभद्र टिप्पणी करने वाला कौन था और रेलवे इस पूरे मामले में आगे क्या कार्रवाई करता है।

  • 14 बच्चों की मां… लोग बोले- ‘बस करो मैडम!’ हर महीने ₹9 लाख का खर्च सुनकर उड़ जाएंगे होश

    14 बच्चों की मां… लोग बोले- ‘बस करो मैडम!’ हर महीने ₹9 लाख का खर्च सुनकर उड़ जाएंगे होश

    अमेरिका के शिकागो में रहने वाले एक परिवार की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। 44 वर्षीय शे बार्बी (Shay Barbee) और उनके पति विल बार्बी 14 बच्चों की परवरिश कर रहे हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े परिवार का खर्च चलाने के लिए उन्हें हर महीने करीब 9 लाख रुपये (लगभग 9 हजार पाउंड) सिर्फ जरूरी खर्चों पर ही खर्च करने पड़ते हैं।

    परिवार के अनुसार, सबसे ज्यादा खर्च खाने-पीने पर होता है। पूरे साल में सिर्फ किराने के सामान पर ही लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं। कपड़ों, पढ़ाई, जन्मदिन और त्योहारों का खर्च अलग है। हर बच्चे के जन्मदिन पर सैकड़ों पाउंड खर्च किए जाते हैं, जबकि क्रिसमस जैसे त्योहारों का बजट भी हजारों पाउंड तक पहुंच जाता है।

    शे बार्बी बताती हैं कि उनके सभी बच्चे होमस्कूलिंग के जरिए पढ़ाई करते हैं। हर बच्चे की पढ़ाई का अलग खर्च है, जिसमें किताबें, कला, संगीत और अन्य शैक्षणिक सामग्री शामिल होती है। परिवार का कहना है कि वे किसी सरकारी आर्थिक मदद पर निर्भर नहीं हैं और अपने दम पर पूरे परिवार का खर्च उठाते हैं।

    इतने बड़े परिवार के साथ यात्रा करना भी आसान नहीं है। परिवार के पास 5 गाड़ियां हैं, लेकिन अक्सर वे 15-सीटर वाहन का इस्तेमाल करते हैं। कई बार जगह कम पड़ने पर दो गाड़ियों से सफर करना पड़ता है। बाहर घूमने जाने से पहले उन्हें हर छोटी-बड़ी योजना पहले से बनानी पड़ती है ताकि किसी तरह की परेशानी न हो।

    खर्च कम करने के लिए परिवार ने अपने घर में मुर्गियां और बतख भी पाल रखी हैं। इससे उन्हें हर हफ्ते बड़ी संख्या में अंडे मिल जाते हैं और बाजार से कम सामान खरीदना पड़ता है। शे खुद घर पर ब्रेड भी बनाती हैं, जिससे रोजमर्रा के खर्च में कुछ बचत हो सके।

    हालांकि 14 बच्चों की परवरिश आसान नहीं है, लेकिन शे और उनके पति का कहना है कि वे इस जीवन से खुश हैं। सोशल मीडिया पर लोग अक्सर उनके परिवार को देखकर हैरान रह जाते हैं। अब यह परिवार अपनी अनोखी लाइफस्टाइल और बड़े परिवार के खर्च को लेकर दुनियाभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • योगी सरकार का बड़ा फैसला! अखिलेश सरकार का मदरसा वाला कानून किया खत्म, अब नहीं मिलेगा ये खास संरक्षण..

    योगी सरकार का बड़ा फैसला! अखिलेश सरकार का मदरसा वाला कानून किया खत्म, अब नहीं मिलेगा ये खास संरक्षण..

    उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने मदरसों से जुड़े एक पुराने फैसले को पलटते हुए बड़ा कदम उठाया है। राज्य कैबिनेट ने समाजवादी पार्टी सरकार के समय लाए गए उस विधेयक को वापस लेने का फैसला किया है, जिसे लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ था। सरकार का कहना है कि यह फैसला संवैधानिक सिद्धांतों और समान कानून व्यवस्था को ध्यान में रखकर लिया गया है।

    यह विधेयक वर्ष 2016 में तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार के दौरान विधानसभा से पारित हुआ था। हालांकि तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक ने इस पर संवैधानिक आपत्तियां जताते हुए इसे राष्ट्रपति के पास भेज दिया था। इसी कारण यह कानून कभी लागू नहीं हो सका। अब योगी सरकार ने इसे औपचारिक रूप से वापस लेने का निर्णय लिया है।

    सरकार के अनुसार, प्रस्तावित कानून में ऐसे प्रावधान थे जिनके कारण मदरसा शिक्षकों और कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और जांच की प्रक्रिया पर विशेष प्रतिबंध लगते थे। सरकार का तर्क है कि कानून के सामने सभी नागरिक समान हैं और किसी एक वर्ग को अलग कानूनी संरक्षण देना संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है।

    अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी समुदाय को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि सभी के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करना है। उनका कहना है कि ईमानदारी से काम करने वाले शिक्षकों को इस फैसले से घबराने की जरूरत नहीं है, जबकि किसी भी शिकायत या आरोप की जांच अब सामान्य कानूनी प्रक्रिया के तहत होगी।

    इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी नई बहस शुरू हो गई है। विपक्ष इसे अलग नजरिए से देख रहा है, जबकि सरकार इसे कानून के समान अनुपालन की दिशा में उठाया गया कदम बता रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

    फिलहाल योगी सरकार के इस फैसले की पूरे प्रदेश में चर्चा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि इस निर्णय के बाद मदरसा प्रशासन, शिक्षक संगठनों और विपक्षी दलों की ओर से आगे क्या प्रतिक्रिया आती है और क्या इस मुद्दे पर कोई नई कानूनी या राजनीतिक चुनौती सामने आती है।