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  • शादी के चौथे दिन पत्नी मायके गई, फिर 10 लाख की मांग और दहेज केस का आरोप! सुसाइड नोट में युवक ने लिखी ऐसी बात कि पुलिस तक पहुंची गुहार

    शादी के चौथे दिन पत्नी मायके गई, फिर 10 लाख की मांग और दहेज केस का आरोप! सुसाइड नोट में युवक ने लिखी ऐसी बात कि पुलिस तक पहुंची गुहार

    राजस्थान की राजधानी जयपुर से एक दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां 30 वर्षीय देवेंद्र शर्मा की मौत के बाद उसके परिवार ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जामडोली इलाके में 11 अक्टूबर को देवेंद्र अपने कमरे में मृत मिला। कमरे से मिले सुसाइड नोट में उसने अपने ससुराल वालों को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए पुलिस से परिवार को न्याय दिलाने की गुहार लगाई। पुलिस फिलहाल पूरे मामले की जांच कर रही है।

    देवेंद्र की शादी करीब पांच महीने पहले हुई थी। परिवार का आरोप है कि शादी के महज चौथे दिन उसकी पत्नी मायके चली गई थी। मृतक के मामा के मुताबिक, देवेंद्र और उसके भाई अंशु की शादी दो बहनों से हुई थी और शादी के कुछ ही दिनों बाद दोनों की पत्नियां मायके लौट गई थीं। करीब 15 दिन बाद वे अपने परिवार के साथ ससुराल आईं और कथित तौर पर जेवर, कपड़े तथा अन्य सामान लेकर चली गईं।

    परिजनों का आरोप है कि इसके बाद दोनों भाइयों पर दबाव बनाया जाने लगा और दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज कराने के साथ 10 लाख रुपये की मांग की गई। परिवार का दावा है कि लगातार विवाद और कथित ब्लैकमेलिंग के कारण देवेंद्र मानसिक तनाव में था। हालांकि, ये आरोप परिवार की ओर से लगाए गए हैं और इनकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    मृतक के मामा ने यह भी आरोप लगाया कि करीब 20 दिन पहले किशनगढ़-रेनवाल पुलिस ने समझौते के लिए दोनों भाइयों को थाने बुलाया था। परिवार का कहना है कि वहां एक सब-इंस्पेक्टर ने देवेंद्र पर दबाव डालकर बयान लिए और बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। परिजनों ने दावा किया कि इन घटनाओं ने उसकी परेशानी बढ़ा दी थी। पुलिस की भूमिका और लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

    11 अक्टूबर की शाम करीब पांच बजे देवेंद्र की मां ने उसे आवाज दी, लेकिन कमरे से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद बड़े भाई विशाल को फोन किया गया। विशाल अपनी पत्नी के साथ पहुंचा तो कमरे का दरवाजा बंद था। खिड़की से देखने पर देवेंद्र अंदर मिला। उसे कमरे से निकालकर एसएमएस अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। बाद में विशाल ने जामडोली थाने में ससुराल पक्ष के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

    अब इस मामले में पुलिस के सामने कई सवाल हैं—क्या देवेंद्र पर वास्तव में पैसे देने का दबाव बनाया जा रहा था, दहेज प्रताड़ना के मामले में क्या घटनाक्रम रहा और सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है? इन सभी पहलुओं की जांच जरूरी है, ताकि तथ्यों के आधार पर कार्रवाई हो सके और परिवार को न्याय मिल सके।

  • 4 साल में ऐसी पलटी किस्मत कि 5-स्टार होटल, महंगी शराब और VIP कनेक्शन! शिवा की मौत के बाद फरार श्रद्धा की लग्जरी लाइफ ने खड़े किए बड़े सवाल

    4 साल में ऐसी पलटी किस्मत कि 5-स्टार होटल, महंगी शराब और VIP कनेक्शन! शिवा की मौत के बाद फरार श्रद्धा की लग्जरी लाइफ ने खड़े किए बड़े सवाल

    लखनऊ में कारोबारी शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार उलझता जा रहा है। इस केस में फरार चल रही श्रद्धा दुबे की लग्जरी लाइफस्टाइल अब जांच का अहम हिस्सा बन गई है। TV9 भारतवर्ष की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस जब श्रद्धा के फ्लैट पर पहुंची तो वहां महंगी शराब की बोतलें, विदेशी सिगरेट के पैकेट और दूसरी महंगी चीजें मिलीं। इन सामानों को जांच के लिए कब्जे में लिए जाने की बात कही गई है।

    रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस सूत्रों का दावा है कि करीब चार साल पहले तक श्रद्धा साधारण जिंदगी जी रही थी, लेकिन बाद में उसका रहन-सहन तेजी से बदल गया। वह दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों के पांच सितारा होटलों में ठहरने लगी। उसकी कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें महंगे होटलों में ठहरने की झलक दिखाई देती है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि उसकी इस लाइफस्टाइल के पीछे पैसे का स्रोत क्या था।

    मामले में VIP कनेक्शन की चर्चा भी तेज है। रिपोर्ट के मुताबिक, श्रद्धा के मोबाइल में कई बड़े नेताओं के साथ तस्वीरें मिली हैं। यह भी दावा किया गया है कि एक बार प्रयागराज से बीजेपी के एक नेता उसकी पैरवी करने थाने पहुंचे थे और उसे अपनी भतीजी बताया था। हालांकि, इन कथित संपर्कों का शिवा की मौत से कोई सीधा संबंध है या नहीं, यह अभी जांच का विषय है।

    शिवा शर्मा की मौत के बाद श्रद्धा के फरार होने से मामले पर सवाल और बढ़ गए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वह शिवा की मौत के बाद अपने दूसरे बॉयफ्रेंड के साथ चली गई थी। पुलिस के मुताबिक, शिवा के बालकनी से नीचे गिरने की घटना CCTV में कैद हुई है। लेकिन वह किन परिस्थितियों में गिरा और उस वक्त फ्लैट के अंदर क्या हुआ था, इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगा।

    पुलिस अब श्रद्धा के संपर्कों, उसके घर आने-जाने वाले लोगों और खर्चों के स्रोत की पड़ताल कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, उसके रहन-सहन और घूमने-फिरने पर हर महीने लाखों रुपये खर्च होने की बात सामने आई है। ऐसे में जांच का अहम सवाल यह है कि अगर उसकी अपनी कमाई सीमित थी, तो इस खर्च का पैसा कहां से आता था। फिलहाल इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

    इस पूरे मामले में शिवा की मौत को लेकर उसके परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि पुलिस सबूतों के आधार पर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है। श्रद्धा की लग्जरी लाइफ, कथित VIP संपर्क और फरारी ने केस को और पेचीदा बना दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि पुलिस उसे कब पकड़ती है और पूछताछ में शिवा की मौत से जुड़े कौन-से तथ्य सामने आते हैं।

  • मोबाइल चुराया तो यात्रियों ने चलती ट्रेन से ही ‘फैसला’ सुना दिया! खिड़की से लटकाया, फिर नीचे गिराया… वीडियो देख इंटरनेट पर छिड़ी जंग

    मोबाइल चुराया तो यात्रियों ने चलती ट्रेन से ही ‘फैसला’ सुना दिया! खिड़की से लटकाया, फिर नीचे गिराया… वीडियो देख इंटरनेट पर छिड़ी जंग

    बिहार के शिवनारायणपुर रेलवे स्टेशन से सामने आए एक वायरल वीडियो ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। आरोप है कि एक शख्स चलती ट्रेन से यात्री का मोबाइल फोन छीनकर भागने की कोशिश कर रहा था। लेकिन इस बार उसकी चाल काम नहीं आई और यात्रियों ने उसे पकड़ लिया। इसके बाद जो हुआ, उसने चोरी की घटना को लेकर बहस को सीधे कानून और इंसाफ के सवाल तक पहुंचा दिया।

    वायरल वीडियो में दिखाई देता है कि यात्रियों ने संदिग्ध का हाथ पकड़ रखा है और वह ट्रेन की खिड़की के बाहर लटका हुआ है। ट्रेन आगे बढ़ रही है, जबकि वह खुद को बचाने की गुहार लगाता नजर आता है। यात्रियों का गुस्सा भी वीडियो में सुनाई देता है। कुछ ही पलों में यह मामला इतना खतरनाक मोड़ ले लेता है कि शख्स की जान पर बन आती है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेन की रफ्तार बढ़ने के बाद यात्रियों ने उसका हाथ छोड़ दिया और वह नीचे गिर गया। गनीमत रही कि वह ट्रेन के पहियों के नीचे नहीं आया। हालांकि, इस घटना में उसकी चोटों और बाद की स्थिति को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। वीडियो देखकर यह जरूर समझ आता है कि कुछ सेकंड का गुस्सा किसी की जान को गंभीर खतरे में डाल सकता है।

    वीडियो को X पर @rameshofficial0 नाम के अकाउंट से शेयर किया गया, जिसके बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कई यूजर्स मोबाइल चुराने की कोशिश करने वाले शख्स के खिलाफ नाराजगी जता रहे हैं। उनका कहना है कि यात्रियों ने चोरी करते पकड़े गए व्यक्ति को सबक सिखाया। लेकिन दूसरी तरफ लोग यह भी पूछ रहे हैं कि क्या किसी को इस तरह चलती ट्रेन से गिरा देना सही है?

    बहस का सबसे अहम पहलू यही है कि मोबाइल चोरी करना अपराध है, लेकिन किसी संदिग्ध की जान को खतरे में डालना भी गंभीर मामला हो सकता है। यात्रियों के पास उसे पकड़कर रेलवे पुलिस या जीआरपी के हवाले करने का विकल्प था। कानून अपने हाथ में लेने से मामला उल्टा यात्रियों के लिए भी कानूनी मुश्किल खड़ी कर सकता है। सोशल मीडिया पर भी कई लोग इसी बात पर जोर दे रहे हैं कि गुस्से में लिया गया फैसला इंसाफ नहीं बन जाता।

    अब सवाल यही है कि इस घटना में दोष किसका कितना है और क्या संदिग्ध के खिलाफ कोई आधिकारिक कार्रवाई हुई? वायरल वीडियो ने एक बार फिर मोबाइल स्नैचिंग की समस्या और भीड़ द्वारा खुद सजा देने की प्रवृत्ति, दोनों पर सवाल खड़े किए हैं। चोरी रोकना जरूरी है, लेकिन चलती ट्रेन में किसी की जान जोखिम में डाल देना भी मामूली बात नहीं है।

  • शरीर पर ग्रीस, चेहरे पर नीला कपड़ा और वो भी बिना कपड़ों के! ‘मंकी चोर’ की अजीब एंट्री, महिला जागी तो छत से भागा

    शरीर पर ग्रीस, चेहरे पर नीला कपड़ा और वो भी बिना कपड़ों के! ‘मंकी चोर’ की अजीब एंट्री, महिला जागी तो छत से भागा

    झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने इलाके के लोगों को हैरान कर दिया है। माझी टोला के संजय नगर में मंगलवार सुबह करीब 4:30 बजे एक संदिग्ध व्यक्ति किराए के मकान में घुस गया। उसके शरीर पर ग्रीस लगा था, चेहरे पर नीला कपड़ा बंधा था और वह बिना कपड़ों के था। इस अजीबोगरीब हुलिए के चलते इलाके में उसे लेकर ‘मंकी चोर’ की चर्चा होने लगी है।

    जानकारी के मुताबिक, घटना के वक्त महिला अपने कमरे में सो रही थी। वह नवरात्रि का व्रत रख रही थी, जबकि उसका पति और बच्चा घर के बाहर एक चौकी पर सोए हुए थे। इसी दौरान संदिग्ध छत के रास्ते कमरे में दाखिल हुआ। बताया जा रहा है कि उसने अंदर आकर दरवाजा भिड़ा लिया और कमरे में रखा मोबाइल फोन उठाने की कोशिश करने लगा।

    लेकिन संदिग्ध की चोरी की कोशिश ज्यादा देर तक छिपी नहीं रह सकी। अचानक महिला की नींद खुल गई और सामने अजनबी को देखकर वह घबरा गई। उसने तुरंत शोर मचाना शुरू कर दिया। महिला की आवाज सुनते ही संदिग्ध के होश उड़ गए और पकड़े जाने के डर से वह जिस रास्ते आया था, उसी छत की ओर भाग निकला।

    इस पूरी घटना के सीसीटीवी कैमरे में कैद होने की बात सामने आई है। संदिग्ध का हुलिया और घर में घुसने का तरीका अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। शरीर पर ग्रीस लगाने और चेहरे को कपड़े से ढकने के पीछे उसका मकसद क्या था, यह अभी स्पष्ट नहीं है। मोबाइल फोन चुराने की कोशिश किए जाने की बात भी शुरुआती जानकारी पर आधारित है।

    घटना के बाद संजय नगर और आसपास के इलाके में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। खासकर रात और सुबह के समय घरों में घुसपैठ की आशंका ने लोगों को सतर्क कर दिया है। हालांकि, संदिग्ध की पहचान, उसके किसी गिरोह से जुड़े होने या पहले भी ऐसी घटनाओं में शामिल रहने को लेकर अभी कोई पुख्ता जानकारी सामने नहीं आई है।

    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह अजीब हुलिए वाला संदिग्ध कौन था और उसका अगला निशाना कौन हो सकता था? सीसीटीवी फुटेज से उसकी पहचान और घटना की सच्चाई सामने आने में मदद मिल सकती है। पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई और संदिग्ध की गिरफ्तारी को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है, इसलिए ‘मंकी चोर’ के नाम से चल रही चर्चाओं को फिलहाल पुष्टि से अलग रखना जरूरी है।

  • दिवाली से पहले UPI चार्ज पर NPCI ने मारी ‘यू-टर्न’ वाली चाल! 15 अक्टूबर से नहीं कटेगा MDR, लेकिन राहत कितने दिन की?

    दिवाली से पहले UPI चार्ज पर NPCI ने मारी ‘यू-टर्न’ वाली चाल! 15 अक्टूबर से नहीं कटेगा MDR, लेकिन राहत कितने दिन की?

    यूपीआई से पेमेंट करने वालों और दुकानदारों के लिए बड़ी खबर है। जिस MDR चार्ज को 15 अक्टूबर 2026 से लागू करने की तैयारी थी, उस पर नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने फिलहाल ब्रेक लगा दिया है। अब यह चार्ज दिवाली के तुरंत बाद लागू किया जाएगा। नई तारीख का ऐलान अलग से होगा। यानी त्योहारों के बीच दुकानदारों को फिलहाल अतिरिक्त खर्च की चिंता से राहत मिल गई है।

    NPCI की यूपीआई और सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने 13 अक्टूबर को यह फैसला लिया। इसके पीछे त्योहारी सीजन को अहम वजह बताया गया है। दिवाली के आसपास बाजारों में खरीदारी बढ़ती है और ऐसे समय पर पेमेंट की लागत बढ़ने से व्यापारियों की परेशानी बढ़ सकती थी। इसी वजह से प्रस्तावित व्यवस्था को कुछ समय के लिए टाल दिया गया है।

    अब समझिए कि आखिर यह MDR चार्ज है क्या। प्रस्ताव के मुताबिक, चुनिंदा दुकानदारों को 2,000 रुपये से अधिक के पात्र UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत फीस देनी होगी। उदाहरण के लिए, 10,000 रुपये के भुगतान पर 40 रुपये MDR बनता है। 75,000 रुपये या उससे अधिक के पात्र लेनदेन पर प्रस्तावित अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है। यह फीस ग्राहकों के बजाय पेमेंट स्वीकार करने वाले व्यापारियों पर लागू होने के लिए तय की गई है।

    इस फैसले से पहले व्यापारी संगठनों और फिनटेक कंपनियों ने चार्ज लागू करने के समय पर चिंता जताई थी। उनका तर्क था कि त्योहारों के दौरान अतिरिक्त लागत कारोबार को प्रभावित कर सकती है और कुछ व्यापारी इसका बोझ ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं। इसी विरोध के बीच MDR लागू करने की तारीख आगे बढ़ाने का फैसला आया है।

    हालांकि, इसे चार्ज पूरी तरह रद्द होने की खबर समझना गलत होगा। फिलहाल फैसला सिर्फ लागू करने की तारीख टालने का है; प्रस्तावित MDR व्यवस्था में बदलाव की पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, सभी UPI पेमेंट पर चार्ज लगने की बात भी सही नहीं है। यह व्यवस्था चुनिंदा व्यापारी लेनदेन के लिए है, जबकि व्यक्ति से व्यक्ति के बीच पैसे भेजने वाले UPI ट्रांजैक्शन इससे अलग हैं।

    अब सबसे बड़ा सवाल है कि दिवाली के बाद यह चार्ज आखिर किस तारीख से लागू होगा और क्या इसके नियमों में कोई बदलाव किया जाएगा। फिलहाल NPCI ने नई तारीख घोषित नहीं की है। तब तक दुकानदारों को राहत जरूर मिली है, लेकिन UPI पर MDR की कहानी खत्म नहीं हुई—सिर्फ त्योहारों के बाद तक टल गई है।

  • राहुल गांधी को पीयूष गोयल ने पुराने रिकॉर्ड का आईना दिखाया! बोले— कांग्रेस ने CEC को ही सांसद, मंत्री और राज्यपाल बना दिया था

    राहुल गांधी को पीयूष गोयल ने पुराने रिकॉर्ड का आईना दिखाया! बोले— कांग्रेस ने CEC को ही सांसद, मंत्री और राज्यपाल बना दिया था

    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। राहुल गांधी और विपक्षी दल चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं, तो केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने पलटवार करते हुए कांग्रेस के पुराने कार्यकाल का हिसाब सामने रख दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस आज जिस चुनाव आयोग पर सवाल उठा रही है, उसके शासनकाल में चुनाव आयुक्तों को ही राजनीतिक पद दिए गए थे।

    पीयूष गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने चुनाव आयोग को स्वतंत्र और स्वायत्त तरीके से काम करने दिया है। उनके मुताबिक, मौजूदा सरकार ने किसी चुनाव आयुक्त को राजनीतिक फायदा पहुंचाने की कोशिश नहीं की। गोयल ने राहुल गांधी के रवैये को बचकाना बताते हुए कहा कि कांग्रेस को दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपना पुराना रिकॉर्ड भी देखना चाहिए।

    गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का उदाहरण देते हुए दावा किया कि कांग्रेस ने 1999 में उन्हें लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए पार्टी का टिकट दिया था। उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एमएस गिल का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि रिटायरमेंट के बाद गिल कांग्रेस में शामिल हुए, राज्यसभा पहुंचे और फिर केंद्रीय मंत्री बनाए गए। गोयल ने सवाल उठाया कि क्या ऐसे कदम चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े नहीं करते?

    केंद्रीय मंत्री ने टीकाराम मीणा और केरल के पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी रतन यू. केलकर का नाम लेते हुए भी राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि चुनावी जिम्मेदारियां निभाने वाले अधिकारियों को बाद में राजनीतिक या सरकारी पदों पर जगह दी गई। हालांकि, ये पीयूष गोयल के आरोप और उनकी राजनीतिक दलीलें हैं; इनसे अपने आप किसी अधिकारी की निष्पक्षता या किसी चुनाव में गड़बड़ी साबित नहीं होती।

    चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर भी गोयल ने कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि पहले सरकार अपनी पसंद के व्यक्ति को मुख्य चुनाव आयुक्त बना सकती थी, जबकि 2023 में मोदी सरकार ने नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ा कानून बनाया, जिसमें चयन समिति में लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष को भी शामिल किया गया। कांग्रेस और विपक्ष का मौजूदा विवाद इसी व्यापक सवाल से जुड़ा है कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता कैसे सुनिश्चित हो और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कैसे हो।

    वहीं, राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के नेता विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा चुका है, जबकि चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों को लेकर राजनीतिक टकराव जारी है। अब सवाल यही है कि यह बहस पुराने कार्यकाल के आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहेगी या मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर भी कोई ठोस जवाब सामने आएगा?

  • जंतर-मंतर पर रोक लगी तो CJP नेताओं ने बैरिकेड ही पार कर दिया! तिरंगा लेकर पहुंचे सौरव दास-आशुतोष रांका, पुलिस ने फिर हिरासत में लिया

    जंतर-मंतर पर रोक लगी तो CJP नेताओं ने बैरिकेड ही पार कर दिया! तिरंगा लेकर पहुंचे सौरव दास-आशुतोष रांका, पुलिस ने फिर हिरासत में लिया

    दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की मनाही के बावजूद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं ने मंगलवार सुबह वहां पहुंचकर विरोध जताने की कोशिश की। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास, राष्ट्रीय प्रवक्ता और अजिंक्य शिंदे समेत कई कार्यकर्ताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। तिरंगा लेकर पहुंचे इन कार्यकर्ताओं का मकसद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन करना था, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।

    दरअसल, दिल्ली पुलिस ने सोमवार को जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल की सूची से हटाने का ऐलान किया था। इसके बाद दिल्ली में प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली के CBD मैदान को निर्धारित किया गया। पुलिस का कहना है कि जंतर-मंतर पर बिना अनुमति प्रदर्शन करने की इजाजत नहीं है। इसके बावजूद CJP के नेता मंगलवार सुबह वहां पहुंच गए और परिसर में दाखिल होने की कोशिश की।

    CJP नेताओं ने इस कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास ने दावा किया कि वे जंतर-मंतर में दाखिल हो गए थे और इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। आशुतोष रांका ने भी अपने पोस्ट में कहा कि वे वहां जाने के बजाय अंदर घुस गए। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी इस घटनाक्रम से जुड़ी तस्वीरें साझा करते हुए विरोध की आवाज दबाने का आरोप लगाया।

    यह पहली बार नहीं है जब CJP के नेताओं को हिरासत में लिया गया हो। इससे पहले 10 अक्टूबर को अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया था। वे मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने दिल्ली पहुंचे थे। बाद में कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत ने उन्हें एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर रिहा किया था।

    इस पूरे विवाद की जड़ चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR प्रक्रिया है। विपक्षी दलों और CJP का आरोप है कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के कारण लोगों के मतदान के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। चुनाव आयोग इन आरोपों को खारिज करता रहा है और उसका कहना है कि जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत दोबारा नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

    अब जंतर-मंतर पर दोबारा हुई हिरासत के बाद दिल्ली में प्रदर्शन की अनुमति और विरोध करने के अधिकार को लेकर बहस तेज हो गई है। पुलिस का कहना है कि कार्रवाई प्रतिबंधों और अनुमति से जुड़े नियमों के तहत की गई, जबकि CJP इसे अपनी आवाज उठाने से रोकने की कोशिश बता रही है। फिलहाल सवाल यही है कि जंतर-मंतर से हटाए जाने के बाद CJP अपना आंदोलन किस जगह और किस तरीके से आगे बढ़ाएगी।

  • यूपी में चुनाव फरवरी में होंगे या मार्च तक खिंचेंगे? बोर्ड परीक्षाओं की तारीखों ने बढ़ाया सस्पेंस, 5 फरवरी से एग्जाम और 24 को आखिरी पेपर!

    यूपी में चुनाव फरवरी में होंगे या मार्च तक खिंचेंगे? बोर्ड परीक्षाओं की तारीखों ने बढ़ाया सस्पेंस, 5 फरवरी से एग्जाम और 24 को आखिरी पेपर!

    उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। इसी बीच यूपी बोर्ड ने 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं का शेड्यूल जारी कर दिया है। परीक्षाएं 5 फरवरी से शुरू होकर 24 फरवरी 2027 तक चलेंगी। अब सवाल उठ रहा है कि क्या चुनाव आयोग बोर्ड परीक्षाओं के बाद ही मतदान की तारीखें तय करेगा, ताकि परीक्षा और चुनावी तैयारियों के बीच टकराव न हो।

    उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं और पिछले चुनावों के समय को देखते हुए फरवरी में मतदान की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, चुनाव आयोग ने अभी तक चुनाव की आधिकारिक तारीखों का ऐलान नहीं किया है। ऐसे में बोर्ड परीक्षाओं का कार्यक्रम सामने आने के बाद चुनावी कैलेंडर को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

    यूपी बोर्ड के मुताबिक, हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं 5 से 24 फरवरी तक आयोजित होंगी। दोनों कक्षाओं की परीक्षाएं दो पालियों में होंगी। पहली पाली सुबह 8:30 बजे से 11:45 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक चलेगी। परीक्षाओं की शुरुआत हिंदी के पेपर से होगी, जबकि अंतिम दिन 24 फरवरी को कृषि, कंप्यूटर और संस्कृत जैसे विषयों की परीक्षाएं निर्धारित हैं।

    चुनाव और बोर्ड परीक्षाओं का एक ही समय पर पड़ना प्रशासन के लिए चुनौती बन सकता है। विधानसभा चुनाव कराने के लिए बड़ी संख्या में स्कूलों को मतदान केंद्र बनाया जाता है और शिक्षकों तथा सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई जाती है। ऐसे में परीक्षा केंद्रों, कर्मचारियों और सुरक्षा व्यवस्था की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग को अपना कार्यक्रम तय करना होगा।

    इसी वजह से यह चर्चा है कि बोर्ड परीक्षाएं समाप्त होने के बाद चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। हालांकि, परीक्षा कार्यक्रम से यह अपने आप साबित नहीं होता कि विधानसभा चुनाव मार्च में ही होंगे। चुनाव की तारीखें तय करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास है, जो सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक तैयारियों और दूसरे जरूरी पहलुओं की समीक्षा के बाद फैसला करेगा।

    फिलहाल इतना तय है कि यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 5 से 24 फरवरी 2027 के बीच होंगी, जबकि विधानसभा चुनाव की तारीखों पर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। क्या उत्तर प्रदेश में पहले परीक्षाएं खत्म होंगी और फिर चुनावी बिगुल बजेगा, या चुनाव आयोग कोई अलग कार्यक्रम बनाएगा—इसका जवाब आने वाले महीनों में ही साफ होगा।

  • ‘चौकीदार चोर है’ वाले बयान पर राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से राहत! मानहानि केस पर लगी रोक, अब निचली अदालत में नहीं चलेगी कार्यवाही

    ‘चौकीदार चोर है’ वाले बयान पर राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से राहत! मानहानि केस पर लगी रोक, अब निचली अदालत में नहीं चलेगी कार्यवाही

    राहुल गांधी को ‘चौकीदार चोर है’ वाले बयान से जुड़े मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में चल रही कार्यवाही पर रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद अब निचली अदालत में फिलहाल केस आगे नहीं बढ़ेगा। राहुल गांधी के लिए यह राहत ऐसे समय आई है, जब उनके पुराने राजनीतिक बयानों को लेकर कानूनी विवाद फिर चर्चा में है।

    यह मामला 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए राहुल गांधी के बयान से जुड़ा है। उस समय उन्होंने राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए ‘चौकीदार चोर है’ का नारा इस्तेमाल किया था। इस बयान को लेकर भाजपा नेता विजय मिश्रा ने मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि इस टिप्पणी से प्रधानमंत्री और भाजपा की छवि को नुकसान पहुंचा।

    मामले में निचली अदालत में सुनवाई चल रही थी और राहुल गांधी को कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ रहा था। राहुल गांधी की ओर से इस कार्यवाही को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। शीर्ष अदालत ने अब मामले में आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी है। इसका मतलब यह है कि फिलहाल निचली अदालत इस केस में आगे की सुनवाई नहीं करेगी।

    हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की ओर से कार्यवाही पर रोक लगाए जाने का मतलब यह नहीं है कि राहुल गांधी को मामले में अंतिम रूप से बरी कर दिया गया है। यह अंतरिम राहत है, जिसके दौरान आगे की कानूनी प्रक्रिया पर विराम रहेगा। मानहानि के आरोपों और शिकायत की वैधता पर अंतिम फैसला संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

    ‘चौकीदार चोर है’ का नारा 2019 के चुनावी माहौल में काफी चर्चा में रहा था। कांग्रेस ने राफेल सौदे को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए थे, जबकि भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया था। इसी राजनीतिक टकराव के बीच राहुल गांधी के बयान को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हुई, जो अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है।

    फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश से राहुल गांधी को इस मामले में अस्थायी राहत जरूर मिली है, लेकिन कानूनी विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अब आगे की सुनवाई और अदालत के अगले आदेश पर नजर रहेगी। राजनीतिक बयानबाजी से शुरू हुआ यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि चुनावी मंच पर दिए गए बयान बाद में लंबी कानूनी लड़ाई का रूप भी ले सकते हैं।

  • पृथ्वी शॉ पर धोखे के आरोप, फिर तोड़ी सगाई… अब एक महीने में ही लौटीं आकृति अग्रवाल! बोलीं- ‘मैं गुमराह हो गई थी’, आखिर किसने भरे थे कान?

    पृथ्वी शॉ पर धोखे के आरोप, फिर तोड़ी सगाई… अब एक महीने में ही लौटीं आकृति अग्रवाल! बोलीं- ‘मैं गुमराह हो गई थी’, आखिर किसने भरे थे कान?

    भारतीय क्रिकेटर पृथ्वी शॉ और एक्ट्रेस-इन्फ्लुएंसर आकृति अग्रवाल की लव स्टोरी में ऐसा ट्विस्ट आया है कि फैंस भी हैरान हैं। कुछ हफ्ते पहले जिस रिश्ते के टूटने की खबर सामने आई थी, अब उसी रिश्ते को एक और मौका देने का ऐलान हो गया है। आकृति ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर बताया कि दोनों ने आपस में बातचीत की और फिर से साथ रहने का फैसला किया है।

    आकृति ने अपने बयान में माना कि सगाई तोड़ते समय उन्होंने अपने करीबी लोगों की बातों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा कर लिया था। उनके मुताबिक, कुछ लोगों की राय ने पृथ्वी और उनके रिश्ते को देखने का नजरिया बदल दिया। आकृति ने कहा कि वह गुमराह हो गई थीं और दोनों के बीच ईमानदार बातचीत होने से पहले ही उन्होंने रिश्ता खत्म करने का फैसला कर लिया।

    आकृति ने अपने फैसले की जिम्मेदारी लेते हुए यह भी स्वीकार किया कि उनके कदम से पृथ्वी को तकलीफ पहुंची। उन्होंने बताया कि बाद में दोनों ने खुलकर बातचीत की, एक-दूसरे की बात समझी और फिर से साथ रहने का निर्णय लिया। आकृति ने अपने पोस्ट में कहा कि अब वह चाहती हैं कि उनके रिश्ते का भविष्य किसी दूसरे की राय से नहीं, बल्कि दोनों के आपसी भरोसे और प्यार से तय हो।

    इस रिश्ते में दरार की खबर सितंबर 2026 में आई थी, जब आकृति ने सगाई खत्म करने का ऐलान किया था। उस समय उन्होंने अलग-अलग लक्ष्य और परिस्थितियों को अलग होने की वजह बताया था। इससे पहले जुलाई में आकृति ने सोशल मीडिया पर धोखा मिलने से जुड़े पोस्ट भी शेयर किए थे, जिसके बाद पृथ्वी शॉ को लेकर अटकलें शुरू हो गई थीं। हालांकि, उस समय उन्होंने स्पष्ट किया था कि वे पोस्ट पृथ्वी के बारे में नहीं थे और उनकी सगाई बरकरार थी।

    पृथ्वी शॉ और आकृति ने मार्च 2026 में सगाई की घोषणा की थी। लेकिन कुछ ही महीनों में रिश्ता टूटने और फिर दोबारा जुड़ने की खबर ने इस निजी मामले को सुर्खियों में ला दिया। आकृति ने उन लोगों के नाम नहीं बताए, जिनकी बातों से वह प्रभावित हुई थीं। वहीं, पृथ्वी शॉ की तरफ से इस पैचअप पर अलग से कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।

    अब आकृति के नए बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उन करीबी लोगों ने उनसे क्या कहा था, जिनकी बातों पर भरोसा करके उन्होंने सगाई तोड़ दी? फिलहाल इसका जवाब सामने नहीं आया है। इतना जरूर है कि दोनों ने अपने रिश्ते को एक और मौका देने का फैसला किया है और आकृति ने लोगों से उनकी निजी जिंदगी का सम्मान करने की अपील की है।