Blog

  • शख्श ने जिस लड़की से शादी कर 2 बच्चे किए, DNA टेस्ट से पता चला कि उसकी पत्नी उसकी चचेरी बहन है!

    शख्श ने जिस लड़की से शादी कर 2 बच्चे किए, DNA टेस्ट से पता चला कि उसकी पत्नी उसकी चचेरी बहन है!

    सोशल मीडिया पर एक शख्स की कहानी तेजी से वायरल हो रही है, जिसने अपनी जिंदगी से जुड़ा एक ऐसा सच बताया है जिस पर यकीन करना मुश्किल है। दावा है कि एक टिकटॉक क्रिएटर को शादी और दो बच्चे होने के कई साल बाद पता चला कि उसकी पत्नी वास्तव में उसकी फर्स्ट कजिन यानी चचेरी बहन है। यह खुलासा दोनों के DNA टेस्ट कराने के बाद हुआ। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि शादी से पहले न तो दोनों को इस रिश्ते की जानकारी थी और न ही परिवार के किसी सदस्य को इसका अंदाजा था।

    रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों पति-पत्नी अपनी फैमिली हिस्ट्री और DNA के बारे में जानना चाहते थे। इसी सिलसिले में उन्होंने DNA टेस्ट कराया। रिपोर्ट सामने आने के बाद दोनों को पता चला कि उनके बीच करीबी पारिवारिक रिश्ता है। बताया गया कि उनकी दादियां आपस में सगी बहनें थीं, लेकिन समय के साथ दोनों परिवारों का संपर्क पूरी तरह टूट गया था। इसी वजह से परिवार की अगली पीढ़ी को इस रिश्ते के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

    इस खुलासे ने पति को बुरी तरह परेशान कर दिया। उसने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर लोगों से सलाह मांगी कि अब उसे क्या करना चाहिए। उसके सामने सबसे बड़ा सवाल अपनी शादी और दो बच्चों के भविष्य को लेकर है। उसने लोगों से पूछा कि क्या उसे अपनी पत्नी से तलाक ले लेना चाहिए या फिर बच्चों की वजह से रिश्ते को बनाए रखना चाहिए। उसका वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गया और इंटरनेट पर इस मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

    मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स की राय भी बंट गई। कुछ लोगों ने बच्चों की सेहत को लेकर चिंता जताई और कहा कि करीबी रिश्तेदारों के बीच विवाह होने पर कुछ आनुवंशिक बीमारियों का जोखिम सामान्य आबादी की तुलना में बढ़ सकता है। वहीं, कुछ यूजर्स का कहना था कि अब जब शादी हो चुकी है और दो बच्चे भी हैं, तो परिवार को घबराने के बजाय स्थिति को समझदारी से संभालना चाहिए। ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह लेने की बात भी कही गई।

    फिलहाल यह पूरी कहानी वायरल सोशल मीडिया पोस्ट और उस पर आधारित रिपोर्टों पर टिकी है। TV9 भारतवर्ष ने भी स्पष्ट किया है कि वह वायरल पोस्ट में किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। इसलिए इस कहानी को एक वायरल दावा मानकर ही देखा जाना चाहिए। अगर ऐसी स्थिति वास्तविक हो, तो परिवार को किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले डॉक्टर और जेनेटिक काउंसलर से उचित सलाह लेना जरूरी होगा।

  • नौकरी छोड़ो पकौड़े तलने शुरू करो, सड़क किनारे ब्रेड पकोड़ा बेचने वाले की कमाई ने उड़ाए होश, सालाना लाखों कमाने का दावा

    नौकरी छोड़ो पकौड़े तलने शुरू करो, सड़क किनारे ब्रेड पकोड़ा बेचने वाले की कमाई ने उड़ाए होश, सालाना लाखों कमाने का दावा

    सोशल मीडिया पर इन दिनों एक छोटे से स्ट्रीट फूड बिजनेस की कहानी तेजी से वायरल हो रही है, जिसने नौकरी और कारोबार को लेकर नई बहस छेड़ दी है। वायरल पोस्ट में ‘मनोज ब्रेड पकोड़ा’ नाम की दुकान का जिक्र किया गया है, जहां सड़क किनारे ब्रेड पकोड़ा और गुलाब जामुन बेचने वाले दुकानदार की कमाई लाखों रुपये बताई जा रही है। पोस्ट के मुताबिक, दुकान पर न कोई बड़ी ब्रांडिंग है और न ही कोई आलीशान सेटअप, लेकिन ग्राहकों की अच्छी भीड़ लगातार पहुंचती है।

    वायरल पोस्ट को X पर अंकित पांडे नाम के यूजर ने शेयर किया। उनके मुताबिक, दुकान पर रोजाना करीब 400 ग्राहक आते हैं। दुकान पर ब्रेड पकोड़ा और गुलाब जामुन दोनों की कीमत 15-15 रुपये बताई गई है। यानी अगर एक ग्राहक औसतन 30 रुपये खर्च करता है और 400 ग्राहक रोज आते हैं, तो रोजाना बिक्री करीब 12,000 रुपये बैठती है। इसी गणना के आधार पर पोस्ट में महीने की कमाई करीब 2.5 लाख रुपये और सालाना कमाई लगभग 30 लाख रुपये बताई गई है।

    कमाई का दावा यहीं खत्म नहीं होता। वायरल पोस्ट के अनुसार, दुकानदार ने तेल, गैस, कच्चे माल और दूसरे खर्च निकालने के बाद करीब 70 फीसदी रकम बचने की बात कही है। इस हिसाब से रोजाना लगभग 8,400 रुपये बचत का दावा किया गया है। हालांकि, यह आंकड़े वायरल सोशल मीडिया पोस्ट में बताए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन्हें वास्तविक और निश्चित आय मानने के बजाय पोस्ट में किए गए दावे के तौर पर देखना जरूरी है।

    इस कहानी ने सोशल मीडिया पर कॉरपोरेट नौकरी बनाम छोटा कारोबार की बहस भी शुरू कर दी है। कई यूजर्स का कहना है कि सड़क किनारे दुकान चलाने वाले लोगों की कमाई को अक्सर कम करके आंका जाता है। उनके मुताबिक, किसी छोटे बिजनेस की सफलता के पीछे लगातार मेहनत, ग्राहकों का भरोसा और खाने की क्वालिटी सबसे महत्वपूर्ण होती है। वायरल पोस्ट में भी दुकान की सादगी के बावजूद ग्राहकों की लगातार मौजूदगी को इसकी सफलता की बड़ी वजह बताया गया है।

    हालांकि, इस पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ₹30 लाख सालाना कमाई का आंकड़ा एक वायरल सोशल मीडिया पोस्ट से आया है। TV9 भारतवर्ष ने भी स्पष्ट किया है कि वह पोस्ट में किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। इसलिए इस कहानी से यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि हर ब्रेड पकोड़ा या स्ट्रीट फूड विक्रेता इतनी कमाई करता है। फिर भी, यह मामला इस बात की ओर जरूर ध्यान खींचता है कि सही लोकेशन, स्वाद, ग्राहक और लगातार मेहनत के साथ छोटा कारोबार भी अच्छी आय का जरिया बन सकता है।

  • चिकन-मटन छोड़िए… यहां मिलते हैं कोबरा के पकौड़े और समोसे! जिंदा सांपों से सजा बाजार देख कांप उठे लोग

    चिकन-मटन छोड़िए… यहां मिलते हैं कोबरा के पकौड़े और समोसे! जिंदा सांपों से सजा बाजार देख कांप उठे लोग

    इंडोनेशिया से सामने आया एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर लोगों को हैरान कर रहा है। वजह है वहां का ऐसा स्ट्रीट फूड मार्केट, जहां चिकन और मटन की जगह कोबरा के मांस से बनी अलग-अलग डिशेज बेची जा रही हैं। वायरल वीडियो में कोबरा के पकौड़े, समोसे और सूप तक तैयार किए जाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो को देखने के बाद कई भारतीय यूजर्स के लिए इस तरह का खान-पान यकीन करना मुश्किल हो रहा है।

    वायरल वीडियो में इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता की सड़कों पर लगे इन फूड स्टॉल्स की झलक दिखाई गई है। वीडियो को इंस्टाग्राम पर पाकिस्तानी ट्रैवल व्लॉगर मुहम्मद अदनान ने शेयर किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन दुकानों पर कोबरा के मांस से कई तरह के व्यंजन तैयार किए जाते हैं और इन्हें देखने के लिए लोगों की भीड़ भी नजर आती है। यानी जिस सांप को देखकर आमतौर पर लोग डर जाते हैं, उसे यहां कुछ जगहों पर खाने की चीज के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

    वीडियो का सबसे हैरान करने वाला हिस्सा वह है, जहां दुकानों पर जिंदा कोबरा रखे हुए दिखाई देते हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि विक्रेता सुरक्षा के लिए सांपों के मुंह पर टेप लगाकर रखते हैं। ग्राहक के ऑर्डर के बाद इन्हें पकाकर अलग-अलग डिश के रूप में परोसा जाता है। वीडियो में दुकान पर काम करने वाली महिलाएं भी इन सांपों को तैयार करती नजर आती हैं।

    इन दुकानों पर सिर्फ पकौड़े ही नहीं बल्कि कोबरा सूप, टिक्का, सॉसेज और समोसे जैसी चीजें भी तैयार किए जाने का दावा किया गया है। दुकानदारों के मुताबिक, स्थानीय ग्राहकों के बीच कोबरा मीट की मांग है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो ने लोगों के बीच खान-पान की अलग-अलग संस्कृतियों को लेकर भी चर्चा छेड़ दी है। जहां कुछ लोगों को यह बेहद डरावना लग रहा है, वहीं रिपोर्ट के मुताबिक वहां कुछ लोग इसे सामान्य भोजन की तरह लेते हैं।

    https://www.instagram.com/reel/DbhykRXjxtu/?igsh=YmtrOXFkYjJxbDg3

    वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कोबरा जैसे जहरीले सांप को खाने की डिश में बदलते देख कई लोग हैरान हैं। हालांकि, किसी वायरल वीडियो को देखकर पूरे देश या वहां के सभी लोगों की खान-पान की आदतों के बारे में सामान्य निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। फिलहाल जकार्ता के इस कथित स्ट्रीट फूड मार्केट का वीडियो इंटरनेट पर तेजी से चर्चा में है और लोग इसे देखकर अपनी आंखों पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं।

  • आतंकियों को ‘हीरो’ मानता था सिराज नबी, इंटरनेट पर आतंकियों की करता था तारीफ, बडगाम से गिरफ्तार; CIK की कार्रवाई से मचा हड़कंप

    आतंकियों को ‘हीरो’ मानता था सिराज नबी, इंटरनेट पर आतंकियों की करता था तारीफ, बडगाम से गिरफ्तार; CIK की कार्रवाई से मचा हड़कंप

    जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में इंटरनेट मीडिया पर कथित तौर पर आतंकियों का महिमामंडन करने के आरोप में सुरक्षा एजेंसियों ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (CIK) ने बडगाम निवासी सिराज नबी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वह इंटरनेट पर आतंकियों को ‘हीरो’ के तौर पर पेश करने और कट्टरपंथी विचारों को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों में शामिल था। कार्रवाई के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

    रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से सोशल मीडिया और इंटरनेट पर ऐसी गतिविधियों पर नजर रख रही हैं, जिनके जरिए आतंकवाद या आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों का महिमामंडन किया जाता है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस तरह की ऑनलाइन सामग्री युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रभावित कर सकती है। इसी निगरानी के दौरान सिराज नबी की कथित ऑनलाइन गतिविधियां एजेंसियों के रडार पर आईं, जिसके बाद उसके खिलाफ कार्रवाई की गई।

    सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई का मुख्य फोकस ऑनलाइन कट्टरपंथ और आतंकी विचारधारा के प्रचार पर है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपी की इंटरनेट गतिविधियां कितनी व्यापक थीं और क्या वह किसी अन्य व्यक्ति या नेटवर्क के संपर्क में था। एजेंसियां कथित सोशल मीडिया गतिविधियों से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच कर रही हैं, ताकि पूरे मामले की कड़ियों को समझा जा सके।

    मामले में गिरफ्तारी के बाद आरोपी को आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए सेंट्रल जेल भेजे जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है। अब जांच एजेंसियां उसके ऑनलाइन संपर्कों, गतिविधियों और कथित तौर पर साझा की गई सामग्री की पड़ताल कर रही हैं। जांच के दौरान अगर किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

    सुरक्षा एजेंसियों की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट के जरिए कट्टरपंथी विचारधारा और आतंकवाद के समर्थन को लेकर निगरानी लगातार सख्त की जा रही है। हालांकि, सिराज नबी पर लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया और जांच के निष्कर्षों के आधार पर होगा। फिलहाल एजेंसियां मामले से जुड़े डिजिटल सबूतों और संभावित संपर्कों की जांच में जुटी हैं।

  • ‘पति को नहीं मारोगे तो मैं खुद उसको जान से मार दूंगी…’ प्रेमी संग पत्नी ने रची खतरनाक साजिश, लेकिन चैट ने खोल दिया पूरा राज

    ‘पति को नहीं मारोगे तो मैं खुद उसको जान से मार दूंगी…’ प्रेमी संग पत्नी ने रची खतरनाक साजिश, लेकिन चैट ने खोल दिया पूरा राज

    हैदराबाद से पति-पत्नी के रिश्ते को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला पर अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा है। मामला तब सामने आया जब पति को पत्नी और उसके प्रेमी के बीच हुई सोशल मीडिया चैट का पता चल गया। चैट में कथित तौर पर पति को रास्ते से हटाने को लेकर बातचीत हुई थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि महिला ने प्रेमी से कहा कि अगर वह उसके पति की हत्या नहीं करेगा तो वह खुद उसे मार देगी।

    रिपोर्ट के मुताबिक, महिला का अपने पति के अलावा किसी अन्य युवक से संपर्क था और धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ गईं। आरोप है कि इसके बाद दोनों ने पति की हत्या करने की योजना बनाई। महिला और उसके प्रेमी के बीच सोशल मीडिया पर हुई बातचीत में कथित तौर पर हत्या की साजिश से जुड़े संदेश सामने आए। पति की नजर जब इन चैट्स पर पड़ी तो उसे पूरे मामले पर शक हुआ और उसने मामले को गंभीरता से लिया।

    सबसे बड़ा खुलासा उस वक्त हुआ जब कथित चैट में महिला की ओर से प्रेमी पर पति को खत्म करने का दबाव बनाने की बात सामने आई। रिपोर्ट में बताया गया है कि महिला ने कथित तौर पर प्रेमी से कहा कि यदि वह उसके पति को नहीं मारेगा तो वह खुद यह कदम उठा लेगी। इस बातचीत ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। पति को जब इस साजिश की भनक लगी तो उसने संबंधित जानकारी सामने रखी और मामले की जांच शुरू हुई।

    मामले में सोशल मीडिया चैट को अहम सबूत के तौर पर देखा जा रहा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि पति की हत्या की योजना कब बनाई गई, इसे अंजाम देने के लिए क्या तैयारी की गई थी और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। जांच के दौरान महिला और उसके कथित प्रेमी के बीच हुई बातचीत, उनकी गतिविधियों और अन्य उपलब्ध सबूतों की भी पड़ताल की जा रही है।

    फिलहाल इस पूरे मामले की जांच जारी है और सामने आए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। हालांकि, पति की हत्या की कथित साजिश से जुड़ी सोशल मीडिया चैट सामने आने के बाद मामला बेहद गंभीर हो गया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या साजिश को वास्तव में अंजाम देने की कोई ठोस तैयारी की गई थी या मामला योजना बनाए जाने तक ही सीमित रहा।

  • नई नवेली दुल्हन, शादी के बाद एकदम खुश था पति, फिर 20 दिन बाद दुल्हन ने कर दिया कांड, पति के परिवार में मचा हड़कंप

    नई नवेली दुल्हन, शादी के बाद एकदम खुश था पति, फिर 20 दिन बाद दुल्हन ने कर दिया कांड, पति के परिवार में मचा हड़कंप

    अलीगढ़ में शादी के महज 20 दिन बाद एक नवविवाहिता के प्रेमी के साथ फरार होने का मामला सामने आया है। आरोप है कि घर से निकलते समय वह अपने साथ सोने-चांदी के आभूषण और नकदी भी ले गई। घटना के बाद ससुराल पक्ष में हड़कंप मच गया। काफी तलाश के बावजूद जब महिला का कोई पता नहीं चला तो मामले की शिकायत पुलिस से की गई।

    बताया जा रहा है कि युवती की शादी हाल ही में हुई थी और परिवार में सब कुछ सामान्य चल रहा था। लेकिन शादी के करीब तीन सप्ताह बाद अचानक वह घर से लापता हो गई। परिजनों को जब घर में रखे आभूषण और नकदी भी नहीं मिले तो उन्हें शक हुआ कि वह किसी के साथ चली गई है। परिवार की ओर से तलाश शुरू की गई, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिलने पर पुलिस को पूरे मामले से अवगत कराया गया।

    परिवार का आरोप है कि नवविवाहिता अपने प्रेमी के साथ घर छोड़कर गई है और जाते समय वह घर से जेवर व नकदी भी लेकर गई। मामले में पुलिस ने शिकायत के आधार पर दो लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। अब पुलिस महिला की तलाश के साथ-साथ पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वह किसके साथ और किन परिस्थितियों में घर से गई।

    घटना सामने आने के बाद इलाके में भी इसकी चर्चा हो रही है। शादी के महज 20 दिन बाद दुल्हन के इस तरह घर से चले जाने और साथ में कीमती सामान ले जाने की बात ने परिवार को परेशान कर दिया है। पुलिस मामले में उपलब्ध जानकारी और शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।

    फिलहाल पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नवविवाहिता के घर छोड़ने की वास्तविक वजह क्या थी और वह किसके साथ गई है। पुलिस उसके संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाने के साथ मामले में नामजद लोगों से भी पूछताछ कर सकती है। मामले में महिला के बरामद होने के बाद उसके बयान के आधार पर आगे की तस्वीर और साफ होगी।

  • ‘रील्स 21वीं सदी का नया नशा…’, प्रयागराज में राहुल गांधी का BJP-RSS पर बड़ा हमला, बोले- युवाओं को मजदूर बनाया जा रहा

    ‘रील्स 21वीं सदी का नया नशा…’, प्रयागराज में राहुल गांधी का BJP-RSS पर बड़ा हमला, बोले- युवाओं को मजदूर बनाया जा रहा

    कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को प्रयागराज में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में युवाओं, रोजगार और तकनीक को लेकर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में भारत की सबसे बड़ी ताकत उसके युवा और उनका डेटा है। राहुल गांधी के मुताबिक, युवाओं के डेटा के बिना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का कोई अर्थ नहीं है। उन्होंने कहा कि डेटा का इस्तेमाल करके AI बनाया जा सकता है, लेकिन AI से डेटा तैयार नहीं किया जा सकता।

    राहुल गांधी ने रोजगार के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए दावा किया कि युवा कई साल तक पढ़ाई करते हैं और उनके परिवार उनकी शिक्षा पर बड़ी रकम खर्च करते हैं, लेकिन पढ़ाई पूरी होने के बाद भी पर्याप्त नौकरियां उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि 1,000 युवाओं में केवल 12 लोगों को स्थायी नौकरी मिलती है। राहुल ने आरोप लगाया कि युवाओं की क्षमता और डेटा का फायदा उठाने के बजाय सिस्टम उन्हें एक ऐसे चक्रव्यूह में फंसा रहा है, जहां डिग्री तो मिलती है लेकिन रोजगार की गारंटी नहीं मिलती।

    अपने संबोधन में राहुल गांधी ने सोशल मीडिया रील्स और गिग वर्क को भी रोजगार संकट से जोड़ते हुए कहा कि युवाओं को रील्स और कंटेंट बनाने में उलझाया जा रहा है। उन्होंने ‘रील्स को 21वीं सदी का नया नशा’ बताते हुए आरोप लगाया कि इसके बाद युवाओं को Blinkit और Uber जैसे प्लेटफॉर्म्स पर काम करने के लिए कहा जाता है। राहुल का दावा था कि युवाओं को मजदूरी और कंटेंट क्रिएशन की तरफ धकेला जा रहा है, जबकि उन्हें स्थायी रोजगार नहीं मिल पा रहा है।

    राहुल गांधी ने इसके बाद BJP और RSS पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सिस्टम BJP, RSS और बड़े पूंजीपतियों के फायदे के लिए काम कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि BJP का बैंक बैलेंस 10 हजार करोड़ रुपये है और RSS के प्रचारकों को संस्थानों में बैठाया गया है। राहुल ने आरोप लगाया कि BJP-RSS की नीतियों के कारण नौकरियां कम हुई हैं और विश्वविद्यालयों पर भी दबाव बढ़ा है। ये राहुल गांधी द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं, जिन पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया अलग हो सकती है।

    हालांकि, राहुल गांधी ने युवाओं से नफरत और हिंसा से दूर रहने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि देश की संस्कृति सच्चाई और अहिंसा पर आधारित है और छात्रों के मन में नफरत नहीं बल्कि प्रेम होना चाहिए। उन्होंने युवाओं को भारत का भविष्य बताते हुए कहा कि अपने अधिकारों के लिए लड़ाई प्यार और अहिंसा के रास्ते पर रहकर लड़नी चाहिए। प्रयागराज का यह कार्यक्रम कांग्रेस के छात्र और युवा संवाद अभियान के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • ‘सच दिखाया तो लगा दिया बैन!’ पाकिस्तान ने अलजजीरा पर लगाया यलो जर्नलिज्म का आरोप, जानिए क्या है ये शब्द

    ‘सच दिखाया तो लगा दिया बैन!’ पाकिस्तान ने अलजजीरा पर लगाया यलो जर्नलिज्म का आरोप, जानिए क्या है ये शब्द

    पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जारी विरोध-प्रदर्शनों और सुरक्षाबलों की कार्रवाई को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। इसी बीच अंतरराष्ट्रीय समाचार वेबसाइट अलजजीरा को लेकर पाकिस्तान में कथित तौर पर कार्रवाई की खबर सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, अलजजीरा समेत कुछ डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म्स पर रोक लगाए जाने की बात कही गई है। हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने अलजजीरा पर प्रतिबंध लगाए जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इस पूरे विवाद में पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अलजजीरा की रिपोर्टिंग पर सवाल उठाते हुए उस पर ‘यलो जर्नलिज्म’ करने का आरोप लगाया है।

    पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने आरोप लगाया कि अलजजीरा ने मुजफ्फराबाद के कुछ मतदान केंद्रों की चुनिंदा रिपोर्टिंग के जरिए चुनाव और मतदान प्रक्रिया की गलत तस्वीर पेश करने की कोशिश की। मंत्रालय के अनुसार, रिपोर्टिंग में चुनिंदा समय और कुछ लोगों के बयानों का इस्तेमाल किया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। इसी आधार पर मंत्रालय ने इसे ‘यलो जर्नलिज्म’ बताया। लेकिन सवाल यह है कि आखिर यलो जर्नलिज्म होता क्या है और इसका नाम कहां से आया?

    दरअसल, यलो जर्नलिज्म पत्रकारिता की ऐसी शैली है जिसमें खबर के तथ्यों और संतुलित रिपोर्टिंग से ज्यादा सनसनी और लोगों का ध्यान खींचने पर जोर दिया जाता है। इसमें किसी घटना को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना, भावनात्मक भाषा का इस्तेमाल करना या ऐसी प्रस्तुति करना शामिल हो सकता है जिससे खबर ज्यादा आकर्षक लगे। इस शब्द की शुरुआत 1890 के दशक के अमेरिका में मानी जाती है। उस समय न्यूयॉर्क के दो बड़े अखबारों—जोसेफ पुलित्जर के न्यूयॉर्क वर्ल्ड और विलियम रैंडोल्फ हर्स्ट के न्यूयॉर्क जर्नल—के बीच पाठकों और सर्कुलेशन को लेकर जबरदस्त प्रतिस्पर्धा थी।

    इसी दौर में दोनों अखबारों में ‘यलो किड’ नाम का एक लोकप्रिय कॉमिक कैरेक्टर प्रकाशित होता था। पाठकों को आकर्षित करने के लिए अखबारों में सनसनीखेज खबरों और प्रस्तुतियों का इस्तेमाल बढ़ा और इसी कॉमिक कैरेक्टर के नाम से ऐसी पत्रकारिता को ‘यलो जर्नलिज्म’ कहा जाने लगा। 1898 का स्पेनिश-अमेरिकी युद्ध इसका चर्चित उदाहरण माना जाता है, जब दोनों अखबारों की आक्रामक और भड़काऊ रिपोर्टिंग पर अमेरिकी जनमत को प्रभावित करने के आरोप लगे थे।

    वहीं पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हालात को लेकर मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय समूहों की ओर से भी गंभीर दावे सामने आए हैं। HRC-PoJK के आंकड़ों के मुताबिक, क्षेत्र में अब तक 80 मौतें दर्ज होने की बात कही गई है, जिनमें 27 जुलाई से पहले 33 आम नागरिक और उसके बाद हुई हिंसा में 43 अन्य लोगों की मौत का दावा शामिल है। मृतकों में 4 पुलिसकर्मी भी बताए गए हैं। दूसरी ओर, जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने एक वीडियो के आधार पर सुरक्षाबलों से जुड़े लोगों पर प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी और नागरिकों के साथ कथित बर्बरता के आरोप लगाए हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग स्तर पर आवश्यक है।

  • न यूपी, न बिहार… इस राज्य ने दिए हैं भारत को सबसे ज्यादा राष्ट्रपति, लिस्ट देखकर चौंक जाएंगे

    न यूपी, न बिहार… इस राज्य ने दिए हैं भारत को सबसे ज्यादा राष्ट्रपति, लिस्ट देखकर चौंक जाएंगे

    भारत में अब तक 15 राष्ट्रपति देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। मौजूदा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश की 15वीं राष्ट्रपति हैं। उन्होंने 25 जुलाई 2022 को पदभार संभाला था और वह भारत की पहली आदिवासी तथा दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं। खास बात यह है कि देश के अलग-अलग राज्यों से राष्ट्रपति चुने गए हैं, लेकिन सबसे ज्यादा राष्ट्रपति देने के मामले में वह राज्य आगे है, जिसका नाम सुनकर शायद आपको हैरानी हो।

    अगर आपको लगता है कि उत्तर प्रदेश या बिहार ने सबसे ज्यादा राष्ट्रपति दिए होंगे, तो ऐसा नहीं है। जन्मस्थान के आधार पर देखें तो तमिलनाडु इस मामले में सबसे आगे है। इस राज्य से अब तक तीन राष्ट्रपति बने हैं। इनमें डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, आर. वेंकटरमन और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम शामिल हैं। राधाकृष्णन 1962 से 1967 तक, वेंकटरमन 1987 से 1992 तक और डॉ. कलाम 2002 से 2007 तक राष्ट्रपति रहे।

    तमिलनाडु के बाद ओडिशा दूसरे स्थान पर है, जिसने देश को दो राष्ट्रपति दिए हैं। इनमें वी.वी. गिरि और वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शामिल हैं। वहीं बिहार, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, असम, पंजाब, मध्य प्रदेश, केरल, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना से एक-एक राष्ट्रपति बने हैं। यहां यह समझना जरूरी है कि यह वर्गीकरण राष्ट्रपतियों के जन्मस्थान के आधार पर किया गया है, न कि उस राज्य के आधार पर जहां उन्होंने अपना राजनीतिक जीवन बिताया।

    देश के राष्ट्रपतियों की पूरी सूची पर नजर डालें तो डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति बने और 1950 से 1962 तक इस पद पर रहे। इसके बाद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, डॉ. जाकिर हुसैन, वी.वी. गिरि, फखरुद्दीन अली अहमद, नीलम संजीव रेड्डी, ज्ञानी जैल सिंह, आर. वेंकटरमन, डॉ. शंकर दयाल शर्मा, के.आर. नारायणन, एपीजे अब्दुल कलाम, प्रतिभा पाटिल, प्रणब मुखर्जी, रामनाथ कोविंद और द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति बने।

    इन राष्ट्रपतियों के नाम कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी दर्ज हैं। डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारत के पहले और दो कार्यकाल पूरे करने वाले एकमात्र राष्ट्रपति हैं। डॉ. जाकिर हुसैन देश के पहले मुस्लिम राष्ट्रपति थे। ज्ञानी जैल सिंह पहले सिख राष्ट्रपति बने, जबकि के.आर. नारायणन देश के पहले दलित राष्ट्रपति थे। प्रतिभा पाटिल भारत की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम वैज्ञानिक पृष्ठभूमि से आने वाले राष्ट्रपति के रूप में बेहद लोकप्रिय रहे। वहीं द्रौपदी मुर्मू देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति हैं और स्वतंत्र भारत में जन्म लेने वाली पहली राष्ट्रपति भी हैं।

  • मेघा शर्मा की मौत पर बहन का बड़ा आरोप- पति दूसरे मर्दों के साथ रात बिताने को करता था मजबूर, पैसे कमाने का भी बनाता था दबाव

    मेघा शर्मा की मौत पर बहन का बड़ा आरोप- पति दूसरे मर्दों के साथ रात बिताने को करता था मजबूर, पैसे कमाने का भी बनाता था दबाव

    हरियाणा के नारनौल में मेघा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब और गंभीर होता जा रहा है। मेघा की मौत के बाद उसकी बहन ने उसके पति धीरज पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। बहन का दावा है कि धीरज मेघा पर दूसरे पुरुषों के साथ संबंध बनाने और इसके जरिए पैसे कमाने का दबाव डालता था। आरोपों के मुताबिक, मेघा इस तरह के व्यवहार से बेहद परेशान थी और इसी वजह से दोनों के बीच लगातार विवाद भी होता था। अब मेघा की मौत के बाद परिवार की ओर से लगाए गए इन आरोपों ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है।

    रिपोर्ट के अनुसार, मेघा की बहन ने आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही उसके पति का व्यवहार ठीक नहीं था और वह मेघा पर ऐसी चीजों के लिए दबाव बनाता था, जिन्हें वह स्वीकार नहीं करना चाहती थी। बहन का कहना है कि पति कथित तौर पर उसे दूसरों से संबंध बनाने के लिए मजबूर करता था और इससे पैसा कमाने की बात कहता था। मेघा ने कथित तौर पर इस दबाव का विरोध किया, जिसके बाद घर में विवाद बढ़ता गया। परिवार अब इन आरोपों की जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है।

    मेघा की मौत के बाद उसके परिवार ने पूरे घटनाक्रम को लेकर सवाल उठाए हैं। परिजनों का कहना है कि अगर वह लंबे समय से मानसिक और घरेलू दबाव में थी, तो उसकी मौत की परिस्थितियों की गहराई से जांच जरूरी है। खास तौर पर पति पर लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि मेघा के साथ वास्तव में क्या हुआ था, उसके और उसके पति के बीच किस तरह के विवाद चल रहे थे और क्या इन कथित दबावों का उसकी मौत से कोई संबंध था। फिलहाल परिवार के आरोपों को जांच के तथ्यों से अलग करके देखना जरूरी है।

    इस मामले ने इसलिए भी लोगों का ध्यान खींचा है क्योंकि एक तरफ मेघा की संदिग्ध मौत और दूसरी तरफ उसके पति पर लगाए गए बेहद गंभीर आरोप हैं। परिवार की तरफ से सामने आई जानकारी के बाद अब मामले की जांच में घरेलू विवाद, कथित मानसिक दबाव और पति के व्यवहार समेत तमाम पहलुओं को शामिल किए जाने की मांग उठ रही है। अगर जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामला सिर्फ एक महिला की संदिग्ध मौत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उसके साथ कथित तौर पर किए गए उत्पीड़न की पूरी कहानी भी सामने आ सकती है।

    फिलहाल पुलिस जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि मेघा शर्मा की मौत के पीछे असल वजह क्या थी और उसके पति पर लगाए गए आरोप कितने सही हैं। परिवार की शिकायत और बहन के आरोपों के आधार पर मामले की अलग-अलग कड़ियों को खंगाला जा रहा है। ऐसे संवेदनशील मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध सबूतों के आधार पर ही निकलेगा। लेकिन मेघा की मौत के बाद सामने आए ये आरोप एक बार फिर यह सवाल जरूर खड़ा करते हैं कि घरेलू रिश्ते के भीतर किसी महिला पर इस तरह का दबाव कितना भयावह रूप ले सकता है।