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  • पति की हत्या, बिस्तर पर छोड़ा जिंदा सांप और फिर मौत को बताया सर्पदंश! मेरठ कोर्ट का बड़ा फैसला, अब 3 मासूम बच्चों की परवरिश कौन करेगा?

    पति की हत्या, बिस्तर पर छोड़ा जिंदा सांप और फिर मौत को बताया सर्पदंश! मेरठ कोर्ट का बड़ा फैसला, अब 3 मासूम बच्चों की परवरिश कौन करेगा?

    उत्तर प्रदेश के मेरठ में अमित कश्यप हत्याकांड ने एक बार फिर सबको झकझोर दिया है। पति की हत्या को सांप के काटने से हुई मौत दिखाने की साजिश के मामले में अदालत ने पत्नी रविता कश्यप और उसके प्रेमी अमरदीप को फांसी की सजा सुनाई है। लेकिन इस फैसले के बीच तीन मासूम बच्चों का भविष्य भी बड़ा सवाल बनकर सामने आया है। जिन बच्चों ने अपने पिता को खो दिया, अब उनकी देखभाल और पढ़ाई-लिखाई की जिम्मेदारी कौन संभालेगा?

    यह मामला 13 अप्रैल 2025 का है, जब मेरठ के बहसूमा क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव में अमित कश्यप अपने घर में मृत मिले थे। उनके शव के पास एक जिंदा सांप भी मिला था। शुरुआत में परिवार को लगा कि अमित की मौत सांप के काटने से हुई होगी। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने कहानी का रुख बदल दिया। जांच में सामने आया कि अमित की मौत सर्पदंश से नहीं, बल्कि गला दबाने के कारण हुई थी। इसके बाद पुलिस ने मामले की गहराई से जांच शुरू की।

    अभियोजन पक्ष के मुताबिक, रविता और अमरदीप के बीच संबंध थे और अमित को इसकी जानकारी होने के बाद पति-पत्नी के बीच विवाद होने लगे थे। आरोप था कि दोनों ने मिलकर अमित की हत्या की साजिश रची और वारदात को सांप के काटने से हुई मौत दिखाने के लिए शव के पास जिंदा सांप छोड़ दिया। जांच में यह भी सामने आया कि सांप को एक सपेरे से 1,000 रुपये में लिया गया था। अभियोजन पक्ष ने अदालत में गवाहों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट समेत कई अहम साक्ष्य पेश किए।

    मेरठ की अदालत ने 7 अक्टूबर को दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया था और 16 अक्टूबर को सजा सुनाई। अदालत ने अपराध को ‘दुर्लभतम में दुर्लभ’ श्रेणी का मानते हुए मृत्युदंड दिया। इस फैसले के साथ ही मेरठ में कुछ ही दिनों के भीतर पति की हत्या से जुड़े दो चर्चित मामलों में मौत की सजा सुनाए जाने की चर्चा भी तेज हो गई। इससे पहले मुस्कान और साहिल को चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में मृत्युदंड दिया गया था।

    हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे भावुक पहलू अमित के तीन नाबालिग बच्चों का है। रविता ने अदालत से सजा में नरमी बरतने की गुहार लगाई थी और अपने बच्चों का हवाला दिया था। लेकिन अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए अधिकतम सजा सुनाई। अदालत ने मेरठ के जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि बच्चों के भोजन, शिक्षा और रहने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि माता-पिता से जुड़े इस त्रासदीपूर्ण घटनाक्रम के बीच उनका भविष्य पूरी तरह प्रभावित न हो।

    अब सवाल सिर्फ सजा का नहीं, बल्कि उन तीन बच्चों की जिंदगी का भी है, जिन्हें इस घटना की सबसे भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। अदालत के निर्देश के अनुसार उनके भोजन, शिक्षा और आवास की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी है। आगे उनके पालन-पोषण की जिम्मेदारी परिवार और संबंधित प्रशासनिक व्यवस्था किस तरह निभाएगी, यह देखना अहम होगा। अमित को न्याय मिलने के साथ-साथ इन मासूमों को सुरक्षित माहौल और स्थिर भविष्य देना भी उतना ही जरूरी है।

  • ग्रेटर नोएडा में बुराड़ी जैसा मामला! एक ही परिवार के 5 लोगों की बिगड़ी हालत, दो मासूम भाई-बहन की मौत से मचा हड़कंप

    ग्रेटर नोएडा में बुराड़ी जैसा मामला! एक ही परिवार के 5 लोगों की बिगड़ी हालत, दो मासूम भाई-बहन की मौत से मचा हड़कंप

    उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा इलाके से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी। शांतिनगर मोहल्ले में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की अचानक तबीयत बिगड़ गई। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान दो मासूम बच्चों की मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा है और मौतों की असली वजह जानने के लिए जांच की जा रही है।

    रिपोर्टों के मुताबिक, परिवार में मां रूबी और उनके चार बच्चे शामिल थे। अचानक तबीयत बिगड़ने पर सभी को ग्रेटर नोएडा के एक निजी अस्पताल में ले जाया गया। वहां इलाज के दौरान सात वर्षीय दीपांशी और पांच वर्षीय प्रशांत उर्फ प्रिंस ने दम तोड़ दिया। परिवार की दो अन्य बेटियों की हालत में सुधार होने की खबर सामने आई, जबकि मां की तबीयत को लेकर भी चिंता जताई गई थी।

    घटना को लेकर शुरुआती तौर पर फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई गई। बताया गया कि बच्चों ने पास्ता खाया था, जबकि मां ने फल खाए थे। हालांकि, परिवार के कुछ सदस्यों को अस्पताल में भर्ती कराने और इलाज के बाद तबीयत बिगड़ने की बात भी सामने आई। ऐसे में बीमारी का वास्तविक कारण क्या था, इसे लेकर अलग-अलग आशंकाएं उठीं। अभी किसी एक वजह को अंतिम रूप से जिम्मेदार ठहराना जल्दबाजी होगी।

    मामले ने इसलिए भी ध्यान खींचा क्योंकि परिवार के कई सदस्यों की तबीयत एक साथ बिगड़ी थी। सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में इसे दिल्ली के बुराड़ी मामले से जोड़कर देखा गया, लेकिन दोनों घटनाओं के बीच समानता साबित करने वाली कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है। बुराड़ी कांड में सामूहिक मौतों की परिस्थितियां अलग थीं, जबकि रबूपुरा के इस मामले में शुरुआती आशंका बीमारी या दूषित भोजन से जुड़ी बताई गई।

    स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मामले की जांच शुरू की और घर में रखे खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे जाने की जानकारी सामने आई। पुलिस की ओर से भी मौतों के कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम और अन्य उपलब्ध तथ्यों पर ध्यान दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक, मौत की असली वजह स्पष्ट होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है। परिवार की ओर से अस्पताल में संक्रमण की आशंका भी जताई गई थी, लेकिन इसकी पुष्टि होना बाकी है।

    फिलहाल, दो बच्चों की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है और इलाके के लोग भी इस घटना से स्तब्ध हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर अचानक पांच लोगों की तबीयत एक साथ कैसे बिगड़ी और दो मासूमों की जान क्यों नहीं बचाई जा सकी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा कि मामला फूड पॉइजनिंग, संक्रमण या किसी दूसरी वजह से जुड़ा था।

  • UN को भारत ने दिखाया आईना, CJP का जिक्र कर रिपोर्ट पर उठाए सवाल! बोला—‘अफवाहों को रिपोर्ट बनाकर पेश करने से ही खत्म हो रही विश्वसनीयता’

    UN को भारत ने दिखाया आईना, CJP का जिक्र कर रिपोर्ट पर उठाए सवाल! बोला—‘अफवाहों को रिपोर्ट बनाकर पेश करने से ही खत्म हो रही विश्वसनीयता’

    संयुक्त राष्ट्र में भारत ने युवाओं के विरोध-प्रदर्शनों और उनके अधिकारों को लेकर पेश की गई एक रिपोर्ट पर कड़ा ऐतराज जताया है। 17 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में भारतीय राजनयिक अनुज स्वरूप ने विशेष प्रतिवेदक जीना रोमेरो के दावों पर सवाल उठाए। भारत ने कहा कि देश के युवाओं की स्थिति को लेकर व्यापक निष्कर्ष निकालने से पहले तथ्यों की सही तरीके से जांच होनी चाहिए।

    दरअसल, संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिवेदक जीना रोमेरो ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि भारत में मानसिक स्वास्थ्य या लैंगिक न्याय जैसे मुद्दों पर बात करने वाले युवाओं को बदले की कार्रवाई और सामाजिक कलंक का सामना करना पड़ता है। भारत ने इन दावों के आधार पर सवाल उठाते हुए कहा कि रिपोर्ट में कथित तौर पर अनाम और अपुष्ट जानकारियों का सहारा लिया गया है। भारतीय पक्ष ने कहा कि इतने बड़े देश के युवाओं के बारे में ऐसे व्यापक निष्कर्ष केवल अपुष्ट दावों के आधार पर नहीं निकाले जाने चाहिए।

    अनुज स्वरूप ने अपने जवाब में भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने का अधिकार संविधान के तहत हर नागरिक को प्राप्त है। उन्होंने स्वतंत्र न्यायपालिका, स्वतंत्र प्रेस और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का भी उल्लेख किया। भारत का कहना था कि रिपोर्ट तैयार करते समय इन संस्थागत व्यवस्थाओं और देश की वास्तविक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

    इस बहस में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया, जब भारतीय राजनयिक ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP का जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर भारत में युवाओं के लिए राजनीतिक विरोध की जगह ही नहीं है, तो फिर एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक आंदोलन सरकार पर सवाल कैसे उठा रहा है, राजधानी में मार्च कैसे निकाल रहा है और वरिष्ठ नेताओं के साथ बातचीत की मेज तक कैसे पहुंच रहा है? यह टिप्पणी हाल के युवा आंदोलनों और CJP प्रतिनिधिमंडल की सरकारी नेताओं से हुई बातचीत के संदर्भ में की गई।

    भारत ने यह भी दलील दी कि युवाओं की भागीदारी और समस्याओं के समाधान के लिए सरकार की ओर से संवाद के प्रयास किए गए हैं। भारतीय पक्ष ने छात्र आंदोलनों, परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई और युवाओं को विकास से जोड़ने वाली पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की तस्वीर को एकतरफा तरीके से पेश करना उचित नहीं है। भारत ने रिपोर्ट तैयार करने वालों से अधिक निष्पक्षता, सावधानी और तथ्यों की पुष्टि सुनिश्चित करने की अपील की।

    अपने बयान के अंत में भारत ने विशेष प्रतिवेदक से रिपोर्टिंग में अधिक जवाबदेही बरतने का आग्रह किया। भारतीय पक्ष का संदेश साफ था—अनाम जानकारियों के आधार पर करोड़ों युवाओं के बारे में सामान्य निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। भारत ने रिपोर्ट के दावों को खारिज करते हुए कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय संस्था की विश्वसनीयता निष्पक्षता और तथ्यात्मक जांच पर निर्भर करती है। अब इस विवाद ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में आरोपों, प्रमाणों और जमीनी हकीकत के बीच संतुलन कैसे सुनिश्चित किया जाए।

  • Winnie-the-Pooh की 100वीं सालगिरह पर लाइब्रेरी में घुसा असली भालू! किताबें छोड़ सीधे शहद और कुकीज़ पर टूट पड़ा, VIDEO देख लोग बोले—ये तो हूबहू पूह निकला!

    Winnie-the-Pooh की 100वीं सालगिरह पर लाइब्रेरी में घुसा असली भालू! किताबें छोड़ सीधे शहद और कुकीज़ पर टूट पड़ा, VIDEO देख लोग बोले—ये तो हूबहू पूह निकला!

    अमेरिका के कैलिफोर्निया में एक काले भालू ने ऐसा कारनामा कर दिया कि सोशल मीडिया पर उसकी चर्चा होने लगी। मामला मैमथ लेक्स लाइब्रेरी का है, जहां एक भालू सुबह-सुबह अंदर घुस गया। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि उसने वहां कोई तबाही नहीं मचाई, बल्कि सीधे खाने-पीने की चीजों की तलाश शुरू कर दी। उसकी इस हरकत ने लोगों को मशहूर कार्टून किरदार Winnie-the-Pooh की याद दिला दी।

    लाइब्रेरी की निगरानी में लगे कैमरों में यह पूरा वाकया कैद हो गया। रिपोर्टों के मुताबिक, भालू 14 अक्टूबर को सुबह करीब 6 बजे लाइब्रेरी में दाखिल हुआ, जबकि आम लोगों के लिए लाइब्रेरी सुबह 10 बजे खुलनी थी। अंदर पहुंचते ही उसने कर्मचारियों के लिए रखे स्नैक्स पर धावा बोल दिया। उसकी इस अनोखी सुबह की सैर का वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर साझा किया गया।

    भालू की खाने की लिस्ट भी कम दिलचस्प नहीं थी। उसने पीनट बटर, आड़ू के कप, कुकीज़ और सबसे खास—शहद का एक जार चट कर लिया। यानी किताबों के बीच पहुंचकर भी उसकी प्राथमिकता बिल्कुल साफ थी: पहले पेट पूजा, फिर बाकी काम! इसके बाद वह लाइब्रेरी में इधर-उधर घूमता रहा और नई किताबों वाले सेक्शन से लेकर रेफरेंस डेस्क तक का मुआयना करता दिखाई दिया।

    इस घटना को और मजेदार बनाने वाला संयोग इसकी तारीख है। 14 अक्टूबर 1926 को ए. ए. मिल्ने की मशहूर किताब ‘Winnie-the-Pooh’ पहली बार प्रकाशित हुई थी। यानी जिस दिन इस प्यारे, शहद के शौकीन काल्पनिक भालू के 100 साल पूरे होने का जश्न मनाया जा रहा था, उसी दिन कैलिफोर्निया की लाइब्रेरी में एक असली भालू शहद की तलाश में पहुंच गया। इस संयोग ने वीडियो को और भी खास बना दिया।

    लाइब्रेरी प्रशासन के मुताबिक, भालू के आने से किसी किताब या शेल्फ को नुकसान नहीं पहुंचा। लाइब्रेरी के निदेशक जोसेफ बॉप ने मजाकिया अंदाज में याद दिलाया कि लाइब्रेरी में आने वाले पाठकों का स्वागत है, लेकिन स्नैक्स उधार देने के लिए नहीं रखे गए हैं। प्रशासन ने यह भी बताया कि भालू शहद का जार वापस किए बिना ही वहां से चला गया। इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने भी खूब मजे लिए।

    हालांकि, यह घटना सुनने में जितनी मजेदार है, जंगली भालुओं के मामले में सावधानी उतनी ही जरूरी है। स्थानीय स्तर पर लोगों को सलाह दी गई है कि वे भालुओं के पास न जाएं, उन्हें खाना न खिलाएं और कचरे को सुरक्षित कंटेनरों में रखें, ताकि वे खाने की तलाश में रिहायशी इलाकों में न आएं। फिलहाल, इस भालू ने लाइब्रेरी में ऐसी एंट्री मारी है कि लोग उसे असली जिंदगी का Winnie-the-Pooh कह रहे हैं—बस फर्क इतना है कि इस पूह ने किताब पढ़ने से पहले शहद का पूरा इंतजाम कर लिया!

  • पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोप से मचा बवाल, ईसाई परिवारों के घर-दुकान तक फूंके! दहशत ऐसी कि 35 से ज्यादा परिवारों ने रातोंरात छोड़ा गांव

    पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोप से मचा बवाल, ईसाई परिवारों के घर-दुकान तक फूंके! दहशत ऐसी कि 35 से ज्यादा परिवारों ने रातोंरात छोड़ा गांव

    पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना सामने आई है। शेखूपुरा जिले के घड़ियाल कलां गांव में एक ईसाई व्यक्ति पर ईशनिंदा से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने का आरोप लगा। इसके बाद मामला इतना बढ़ गया कि भीड़ ने कथित तौर पर उसके घर और दवा की दुकान में आग लगा दी। हालात बिगड़ने के डर से 35 से ज्यादा ईसाई परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगहों की ओर जाना पड़ा।

    इस मामले के केंद्र में 40 वर्षीय कामरान मसीह हैं, जो गांव में छोटी-सी दवा की दुकान चलाते थे और तीन बच्चों के पिता हैं। स्थानीय लोगों ने उन पर सोशल मीडिया पर ईशनिंदा से जुड़ा वीडियो साझा करने का आरोप लगाया। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने 8 अक्टूबर की रात उन्हें हिरासत में लिया। लेकिन गिरफ्तारी की खबर फैलने के बाद तनाव कम होने के बजाय बढ़ गया और अगले दिन उनकी संपत्ति को निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई।

    बताया गया कि स्थानीय मस्जिद से लोगों को कामरान के घर के पास इकट्ठा होने की घोषणा की गई थी। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग जमा हुए और भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने उनके घर तथा मेडिकल स्टोर को आग के हवाले कर दिया। हमले की आशंका से कामरान के परिवार और आसपास रहने वाले दूसरे ईसाई परिवारों में भी डर फैल गया। नतीजा यह हुआ कि कई परिवार अपनी सुरक्षा के लिए गांव छोड़कर निकल गए।

    पुलिस ने कामरान को सुरक्षा के लिहाज से सुरक्षित स्थान पर रखा और घटना के बाद इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए जाने की खबर है। पुलिस ने कथित आगजनी और तोड़फोड़ के मामले में भी कार्रवाई की। रिपोर्टों के अनुसार, इस घटना में शामिल होने के आरोप में पांच नामजद लोगों और कुछ अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। हालांकि, आरोपियों की गिरफ्तारी और आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर उपलब्ध रिपोर्टों में पूरी तरह स्पष्ट जानकारी नहीं है।

    इस घटना का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि किसी व्यक्ति पर आरोप लगने के बाद न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही हिंसा का माहौल बन गया। कामरान पर लगाए गए आरोपों की सच्चाई का फैसला जांच और अदालत के जरिए होना चाहिए, न कि भीड़ के दबाव से। पाकिस्तान में ईशनिंदा कानूनों के दुरुपयोग को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं, क्योंकि ऐसे आरोप धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।

    अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए 35 से ज्यादा ईसाई परिवार कब सुरक्षित लौट पाएंगे। पुलिस की तैनाती से तत्काल खतरा कम करने में मदद मिल सकती है, लेकिन प्रभावित परिवारों को स्थायी सुरक्षा और नुकसान की भरपाई दिलाना भी जरूरी है। साथ ही, आगजनी करने वालों और हिंसा भड़काने वालों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि किसी आरोप को कानून अपने हाथ में लेने का बहाना न बनाया जा सके।

  • हवा में उड़ने वाली Tesla खरीदने से पहले Elon Musk की ये 3 शर्तें जान लीजिए! ₹2.25 करोड़ जमा करने पर भी कार मिलने की गारंटी नहीं?

    हवा में उड़ने वाली Tesla खरीदने से पहले Elon Musk की ये 3 शर्तें जान लीजिए! ₹2.25 करोड़ जमा करने पर भी कार मिलने की गारंटी नहीं?

    एलन मस्क की Tesla ने अपनी नई Roadster का ऐसा प्रदर्शन दिखाया है, जिसने कार की दुनिया में हलचल मचा दी है। यह इलेक्ट्रिक स्पोर्ट्स कार हवा में उछलती, पलटी मारती और फिर सुरक्षित जमीन पर उतरती नजर आई। कंपनी ने इसमें SpaceX की तकनीक से जुड़े थ्रस्टर्स का इस्तेमाल किया है। लेकिन इस शानदार प्रदर्शन के साथ कुछ ऐसी शर्तें भी सामने आई हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना खरीदारों को भारी पड़ सकता है।

    Tesla के नए Roadster के तीन वेरिएंट सामने आए हैं—Performance, Thrust और Rocket। कंपनी के प्रदर्शन में कार को उल्टे ट्रैक पर चलते और दूसरी गाड़ियों के ऊपर से उछलते दिखाया गया। Tesla के मुताबिक, इसकी रफ्तार 0 से 60 मील प्रति घंटे तक एक सेकंड से भी कम समय में पहुंच सकती है। हालांकि, यह कंपनी के दावे और प्रदर्शन से जुड़ी जानकारी है; असल दुनिया में इसकी क्षमता की पुष्टि के लिए आगे परीक्षण जरूरी होंगे।

    अब बात करते हैं पहली बड़ी शर्त की। रिपोर्टों के मुताबिक, Performance वेरिएंट की बुकिंग के लिए 50,000 डॉलर और Thrust वेरिएंट के लिए 2,50,000 डॉलर की रिजर्वेशन रकम बताई गई है। भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग 45 लाख रुपये और 2.25 करोड़ रुपये बैठती है। ध्यान रहे, ये कार की अंतिम कीमत नहीं, बल्कि रिजर्वेशन के लिए बताई गई रकम है। Tesla ने नए मॉडल की अंतिम खरीद कीमत अभी स्पष्ट नहीं की है।

    दूसरी अहम बात यह है कि Tesla की शर्तों के मुताबिक, कार की डिलीवरी की तारीख की गारंटी नहीं दी गई है। कंपनी ने साफ किया है कि वाहन अभी विकास की प्रक्रिया में है और यह गारंटी नहीं दी जा सकती कि कार कब मिलेगी या डिलीवर भी होगी या नहीं। ऐसे में बड़ी रकम जमा करने से पहले खरीदारों को बुकिंग की शर्तें ध्यान से पढ़नी चाहिए। खासकर तब, जब पुरानी Roadster की घोषणा के बाद ग्राहकों को लंबे इंतजार का सामना करना पड़ा था।

    तीसरा सवाल है—क्या यह उड़ने वाली कार आम सड़कों पर चलाने के लिए पूरी तरह तैयार है? Rocket वेरिएंट को अधिक उन्नत थ्रस्टर सिस्टम के साथ पेश किया गया है, लेकिन उसके सड़क पर इस्तेमाल की कानूनी मंजूरी और सुरक्षा नियमों को लेकर अभी कई सवाल बाकी हैं। Tesla ने उत्पादन शुरू करने के लिए 2028 का लक्ष्य बताया है, मगर इसका मतलब यह नहीं कि ग्राहकों को उसी साल कार मिलना तय है। हवा में करतब दिखाना और रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए सुरक्षित, कानूनी वाहन बनाना दो अलग-अलग बातें हैं।

    कुल मिलाकर, Tesla Roadster का प्रदर्शन जितना रोमांचक है, इसकी खरीद से जुड़े जोखिम और अनिश्चितताएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। कार की अंतिम कीमत, डिलीवरी की समयसीमा और उड़ान जैसी क्षमताओं के इस्तेमाल पर नियमों की स्पष्ट जानकारी आने तक खरीदारों को जल्दबाजी से बचना चाहिए। एलन मस्क का यह नया प्रोजेक्ट भविष्य की झलक जरूर दिखाता है, लेकिन फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह क्रांतिकारी कार समय पर ग्राहकों तक पहुंचेगी?

  • नेहा बोरा का पता चला, लेकिन अभिजीत दिपके कहां गायब हो गए? आधी रात थाने में वकीलों से मिलीं AISA अध्यक्ष, CJP ने दिल्ली पुलिस से मांगा जवाब!

    नेहा बोरा का पता चला, लेकिन अभिजीत दिपके कहां गायब हो गए? आधी रात थाने में वकीलों से मिलीं AISA अध्यक्ष, CJP ने दिल्ली पुलिस से मांगा जवाब!

    दिल्ली में तिरंगा मार्च से पहले हिरासत में लिए गए छात्र नेताओं को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा का पता कई घंटों की भागदौड़ के बाद चल गया है, लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को लेकर पार्टी अब भी सवाल उठा रही है। CJP का आरोप है कि दिपके को किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया और उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा। दूसरी ओर, नेहा के वकील आधी रात के करीब आरके पुरम पुलिस स्टेशन में उनसे मिल सके।

    AISA के मुताबिक, नेहा बोरा को शुक्रवार को दिल्ली के मंडी हाउस इलाके से हिरासत में लिया गया था। संगठन का दावा है कि इसके बाद उन्हें करीब पांच घंटे तक अलग-अलग जगहों पर ले जाया गया और उनके ठिकाने को लेकर असमंजस बना रहा। आखिरकार वकीलों को आरके पुरम थाने में उनसे मिलने का मौका मिला। AISA ने यह भी आरोप लगाया कि नेहा की तबीयत पिछले कुछ दिनों से खराब थी, लेकिन हिरासत के दौरान उन्हें जरूरी दवाएं देने में परेशानी हुई। इन आरोपों पर पुलिस का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।

    नेहा की हिरासत को लेकर AISA ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाए कि एक महिला छात्र नेता को आधी रात तक थाने में क्यों रखा गया और उन्हें कब रिहा किया जाएगा। संगठन ने हिरासत की परिस्थितियों और उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई। इससे पहले AISA के पूर्व अध्यक्ष एन साई बालाजी ने भी सवाल किया था कि नेहा को कथित तौर पर सादे कपड़ों में आए लोगों ने बस में अकेले क्यों हिरासत में लिया। संगठन अब उनकी रिहाई और पूरे घटनाक्रम पर स्पष्ट जवाब मांग रहा है।

    उधर, CJP की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने भी अभिजीत दिपके का पता बताने की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि दिपके को हिरासत में लेने के बाद उन्हें वकीलों से बात करने की अनुमति नहीं दी जा रही और परिवार तथा संगठन का उनसे संपर्क टूट गया है। CJP ने सवाल उठाया कि तिरंगा मार्च में शामिल होने की तैयारी कर रहे अपने संस्थापक को पुलिस आखिर कहां ले गई। हालांकि, पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिपके को दिल्ली के झंडेवालान इलाके से हिरासत में लिया गया था।

    दरअसल, CJP ने 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा मार्च’ निकालने का ऐलान किया था। दिल्ली पुलिस ने इस मार्च की अनुमति नहीं दी थी और इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू होने का हवाला दिया था। इसके बावजूद प्रदर्शन में शामिल होने की कोशिश के बीच दिपके और नेहा को हिरासत में लिया गया। पुलिस की कार्रवाई के बाद पार्टी ने इसे अपने अधिकारों पर हमला बताया, जबकि पुलिस का कहना है कि प्रतिबंधों और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की गई।

    अब इस पूरे मामले में दो सवाल सबसे अहम बन गए हैं—नेहा बोरा को कब रिहा किया जाएगा और अभिजीत दिपके को कहां रखा गया है? वकीलों की नेहा से मुलाकात के बाद कम से कम उनके ठिकाने को लेकर स्थिति स्पष्ट हुई है, लेकिन CJP की शिकायतों पर जवाब का इंतजार है। तिरंगा मार्च को लेकर शुरू हुआ विवाद अब हिरासत की प्रक्रिया, वकीलों तक पहुंच और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों पर बड़ी बहस में बदल चुका है।

  • 6वीं मंजिल से 2 साल की मासूम को नीचे फेंकने का आरोप! फिर CCTV मिटाने पहुंची मां? मुंबई की इस घटना ने सबको हिला दिया

    6वीं मंजिल से 2 साल की मासूम को नीचे फेंकने का आरोप! फिर CCTV मिटाने पहुंची मां? मुंबई की इस घटना ने सबको हिला दिया

    मुंबई के गोरेगांव ईस्ट से एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। यहां 2 साल की मासूम अबीरा शाकिर शेख की छठी मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई। आरोप है कि उसी बिल्डिंग में रहने वाली एक नाबालिग लड़की ने बच्ची को खुले डक्ट में धकेल दिया। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने नाबालिग लड़की और उसकी मां को हिरासत में लिया है। अब इस घटना से जुड़े CCTV फुटेज और परिवार के आरोपों की जांच की जा रही है।

    यह घटना 14 अक्टूबर की रात करीब 10:30 बजे की बताई जा रही है। अबीरा अपने परिवार के साथ नागरिक निवारा परिसर स्थित शिवशाही प्रकल्प की बिल्डिंग नंबर-1 में रहती थी। उसका परिवार करीब 15 दिन पहले ही इस सोसायटी में रहने आया था। घटना वाली रात बच्ची छठी मंजिल पर थी, तभी वह अचानक गायब हो गई। कुछ ही देर बाद उसके परिवार को पता चला कि बच्ची नीचे गिर गई है। उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

    मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब पुलिस ने बिल्डिंग में लगे CCTV कैमरों की फुटेज देखी। पुलिस के मुताबिक, फुटेज में एक नाबालिग लड़की बच्ची को उठाकर खुले डक्ट की तरफ ले जाती और उसे नीचे धकेलती दिखाई देती है। इसके बाद लड़की वहां से भागती हुई नजर आती है। हालांकि, घटना के पीछे की असली वजह क्या थी, यह अभी साफ नहीं हुआ है। पुलिस सभी परिस्थितियों की बारीकी से जांच कर रही है।

    मासूम के परिवार ने नाबालिग लड़की की मां पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का दावा है कि घटना के बाद CCTV फुटेज मिटाने की कोशिश की गई, ताकि मामले से जुड़े सबूत सामने न आ सकें। आरोप है कि लड़की की मां सोसायटी के कार्यालय में गई थी और वहां से फुटेज डिलीट करवाई गई। हालांकि, साइबर विशेषज्ञों की मदद से हटाई गई फुटेज को रिकवर किए जाने की जानकारी सामने आई है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि फुटेज हटाने की कोशिश क्यों की गई और इसमें किसकी भूमिका थी।

    इस घटना के बाद सोसायटी के लोगों में भी चिंता और गुस्सा है। जिस बच्ची को अभी दुनिया देखनी थी, उसकी जिंदगी एक दर्दनाक हादसे में खत्म हो गई। परिवार अब यह जानना चाहता है कि आखिर उस रात हुआ क्या था और बच्ची के साथ ऐसा क्यों हुआ। पुलिस ने फिलहाल मामले में आकस्मिक मौत की रिपोर्ट दर्ज की है और घटना के हर पहलू की जांच कर रही है। नाबालिग होने के कारण आगे की कार्रवाई में बाल कल्याण समिति की भूमिका भी अहम होगी।

    फिलहाल इस मामले में कई सवालों के जवाब मिलना बाकी है—क्या बच्ची को जानबूझकर नीचे धकेला गया, घटना के पीछे कोई विवाद था और क्या सच में CCTV फुटेज मिटाने की कोशिश की गई? पुलिस अभी किसी अंतिम नतीजे पर नहीं पहुंची है। एक तरफ परिवार अपनी मासूम बेटी को खोने के गम में है, तो दूसरी तरफ जांच एजेंसियां CCTV और दूसरे सबूतों के जरिए घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही हैं।

  • नौकरी ऐसी कि बॉस बोले ‘घूमो भाई, दुनिया तुम्हारी है!’ 6 महीने की ट्रैवलिंग, सैलरी करीब ₹95 लाख… बस एक शर्त पूरी करनी होगी

    नौकरी ऐसी कि बॉस बोले ‘घूमो भाई, दुनिया तुम्हारी है!’ 6 महीने की ट्रैवलिंग, सैलरी करीब ₹95 लाख… बस एक शर्त पूरी करनी होगी

    अगर आपको घूमने का शौक है और ऑफिस में बैठकर काम करने से ज्यादा मजा नई जगहें देखने में आता है, तो यह खबर आपके चेहरे पर मुस्कान ला सकती है। अरबपति रिचर्ड ब्रैनसन के वर्जिन ग्रुप ने एक ऐसी नौकरी निकाली है, जिसमें आपको छह महीने तक दुनिया घूमने और अपने अनुभवों को वीडियो में कैद करने का मौका मिलेगा। इस नौकरी का नाम है ‘हेड ऑफ यस’ और इसके लिए करीब 95 लाख रुपये तक की सैलरी बताई गई है। यानी घूमना भी काम और काम के बदले मोटी कमाई!

    अब सोच रहे होंगे कि आखिर इस नौकरी में करना क्या होगा? दरअसल, चुने गए व्यक्ति को वर्जिन रेड के साथ दुनिया की शानदार जगहों, रोमांचक गतिविधियों और अनोखे अनुभवों को कैमरे में रिकॉर्ड करना होगा। फिर इन पलों को वीडियो और तस्वीरों के जरिए लोगों तक पहुंचाना होगा। कंपनी ऐसे व्यक्ति की तलाश में है, जो जिंदगी के नए अनुभवों को अपनाने से न घबराए और अपनी कहानी दिलचस्प तरीके से लोगों के सामने रख सके।

    इस नौकरी की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसके लिए सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स होना जरूरी नहीं है। कंपनी ने साफ किया है कि आवेदन करने वाले व्यक्ति के फॉलोअर्स की संख्या मायने नहीं रखती। यहां तक कि प्रोफेशनल शो-रील होना भी जरूरी नहीं बताया गया है। मतलब अगर आपके पास लाखों फॉलोअर्स नहीं हैं, तब भी मौका मिल सकता है—बस आपके अनुभव और उन्हें पेश करने का अंदाज दमदार होना चाहिए।

    वर्जिन ग्रुप के मुताबिक, यह छह महीने की नौकरी जनवरी 2027 से शुरू होगी। अमेरिका में चुने गए उम्मीदवार को एक लाख डॉलर और ब्रिटेन में चुने गए उम्मीदवार को 75 हजार पाउंड तक का भुगतान मिलेगा। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 95 लाख रुपये तक बैठती है। हालांकि, यह वेतन संबंधित देश के उम्मीदवार के लिए है; भारत में रहने वाले हर व्यक्ति को सीधे यह रकम मिलने की गारंटी नहीं है।

    अब आवेदन का तरीका भी जान लीजिए। इच्छुक उम्मीदवार को एक छोटा वीडियो बनाना होगा, जिसमें वह बताए कि उसने कब किसी रोमांचक या नए अनुभव के लिए ‘हां’ कहा था और उस फैसले ने उसकी जिंदगी पर क्या असर डाला। इस वीडियो को Instagram, YouTube या TikTok पर #HeadOfYes हैशटैग के साथ पोस्ट करना होगा और @Virgin को टैग करना होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, आवेदन की आखिरी तारीख 20 अक्टूबर 2026 रात 11:59 बजे है। लेकिन एक अहम बात—यह अवसर अमेरिका और ब्रिटेन में रहने वाले उम्मीदवारों के लिए बताया गया है।

    तो अगर आपके दिमाग में भी कभी आया है कि काश कोई आपको दुनिया घूमने के पैसे दे, तो वर्जिन ग्रुप की यह नौकरी किसी सपने से कम नहीं लगती। लेकिन आवेदन करने से पहले पात्रता और आधिकारिक नियम जरूर जांच लें। क्योंकि यहां सिर्फ सूटकेस पैक करके निकलना काफी नहीं होगा—आपको अपने अनुभवों को इस तरह पेश करना होगा कि दुनिया भी कहे, ‘वाह, ये तो सच में हेड ऑफ यस है!’

  • बच्ची की पीठ पर निकली 2 इंच लंबी पूंछ, डॉक्टर भी रह गए दंग! 2 महीने बाद हुई सर्जरी, फिर सामने आई मेडिकल साइंस की हैरान करने वाली कहानी

    बच्ची की पीठ पर निकली 2 इंच लंबी पूंछ, डॉक्टर भी रह गए दंग! 2 महीने बाद हुई सर्जरी, फिर सामने आई मेडिकल साइंस की हैरान करने वाली कहानी

    मैक्सिको से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। यहां एक बच्ची का जन्म पीठ के निचले हिस्से में पूंछ जैसी संरचना के साथ हुआ। पहली नजर में डॉक्टर भी चौंक गए, क्योंकि यह कोई सामान्य जन्मजात निशानी नहीं थी। बच्ची के शरीर पर करीब 2 इंच लंबी संरचना थी, जिस पर बाल भी मौजूद थे। हालांकि, जांच में राहत की बात यह रही कि बच्ची बाकी मामलों में स्वस्थ थी और उसकी हालत स्थिर थी।

    यह मामला उत्तर-पूर्वी मैक्सिको के एक ग्रामीण अस्पताल का बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बच्ची का जन्म सिजेरियन डिलीवरी से हुआ था। जन्म के बाद जब डॉक्टरों ने नियमित जांच की, तो उन्हें रीढ़ की हड्डी के पास पूंछ जैसी संरचना दिखाई दी। यह देखकर मेडिकल टीम ने आगे की जांच की, ताकि पता चल सके कि यह संरचना किस तरह के ऊतकों से बनी है और कहीं इसका संबंध रीढ़ की हड्डी या नसों से तो नहीं है।

    जर्नल ऑफ पीडियाट्रिक सर्जरी केस रिपोर्ट्स में प्रकाशित विवरण के मुताबिक, यह संरचना हड्डी से बनी हुई नहीं थी। इसमें मुख्य रूप से चर्बी और दूसरे मुलायम ऊतक मौजूद थे। जांच के दौरान सुई चुभने पर बच्ची की प्रतिक्रिया से यह संकेत मिला कि इसमें नसों की मौजूदगी भी थी। मेडिकल साहित्य में इंसानों में इस तरह की पूंछ जैसी संरचनाएं बेहद दुर्लभ मानी जाती हैं। हालांकि, ऐसी हर संरचना को असली पूंछ कहना सही नहीं होता, क्योंकि कुछ मामलों में यह जन्मजात ऊतकों की असामान्य वृद्धि भी हो सकती है।

    डॉक्टरों ने बच्ची की सेहत और विकास पर लगातार नजर रखी। जब बच्ची करीब दो महीने की हुई, तब तक यह संरचना बढ़कर लगभग 5.7 सेंटीमीटर लंबी हो गई थी। इसके बाद विशेषज्ञों ने सर्जरी करने का फैसला लिया। ऑपरेशन के दौरान पूंछ जैसी संरचना को शरीर से सफलतापूर्वक हटाया गया और प्रभावित हिस्से की मरम्मत की गई। राहत की बात यह रही कि सर्जरी सफल रही और बच्ची को स्वस्थ हालत में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

    अब सवाल यह है कि इंसान के शरीर में ऐसी संरचना बनती कैसे है? गर्भ में भ्रूण के शुरुआती विकास के दौरान कुछ समय के लिए पूंछ जैसी संरचना मौजूद होती है, जो सामान्य विकास के साथ बाद में समाप्त हो जाती है। दुर्लभ मामलों में इस प्रक्रिया में बदलाव होने पर पूंछ जैसी संरचना जन्म के समय दिखाई दे सकती है। हालांकि, हर मामले का कारण एक जैसा नहीं होता और इसकी सही प्रकृति जानने के लिए डॉक्टरों को जांच करनी पड़ती है।

    इस घटना ने एक बार फिर दिखाया है कि मानव शरीर का विकास कितना जटिल है और मेडिकल साइंस के सामने अब भी कई दुर्लभ स्थितियां आती रहती हैं। सबसे अहम बात यह है कि बच्ची की सर्जरी सफल रही और वह स्वस्थ घर लौट गई। विशेषज्ञों के लिए ऐसे मामले महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इनसे जन्मजात असामान्यताओं को समझने में मदद मिलती है।