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  • संसद में राम मंदिर पर ‘ड्रामा’ करना पड़ा भारी? पप्पू यादव के खिलाफ FIR, सियासत में मचा घमासान…

    संसद में राम मंदिर पर ‘ड्रामा’ करना पड़ा भारी? पप्पू यादव के खिलाफ FIR, सियासत में मचा घमासान…

    नई दिल्ली: पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। संसद परिसर में राम मंदिर के लिए जुटाए गए चंदे में कथित गड़बड़ी को लेकर किए गए विरोध प्रदर्शन के बाद उनके खिलाफ दिल्ली में शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उनके प्रदर्शन से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और विवादित संदेश फैलाने की कोशिश की गई।

    दरअसल, संसद के मानसून सत्र के दौरान पप्पू यादव विपक्षी सांसदों के साथ एक सांकेतिक प्रदर्शन में शामिल हुए थे। इस प्रदर्शन में उन्होंने भगवा वस्त्र पहनकर और दान पेटी के साथ कथित तौर पर राम मंदिर दान को लेकर सवाल उठाए। विपक्ष का आरोप था कि मंदिर निर्माण के लिए मिले चंदे में अनियमितता हुई है, जबकि इस दावे को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया।

    प्रदर्शन के बाद दिल्ली के जहांगीरपुरी थाने में उनके खिलाफ शिकायत दी गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इस प्रदर्शन से करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं प्रभावित हुई हैं। पुलिस ने शिकायत प्राप्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है और कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने संसद के भीतर और बाहर सियासी माहौल गर्मा दिया है। एक ओर विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, वहीं भाजपा ने पप्पू यादव के प्रदर्शन की कड़ी आलोचना करते हुए इसे धार्मिक आस्था का अपमान बताया है। इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।

    फिलहाल पुलिस शिकायत की जांच कर रही है। मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • बारिश के मौसम में पीरियड्स के दौरान क्या है सबसे Safe? Pad, Tampon या Menstrual Cup… डॉक्टर भी बताते हैं ये बड़ी बात ..

    बारिश के मौसम में पीरियड्स के दौरान क्या है सबसे Safe? Pad, Tampon या Menstrual Cup… डॉक्टर भी बताते हैं ये बड़ी बात ..

    मानसून के मौसम में पीरियड्स के दौरान संक्रमण (Infection) का खतरा सामान्य दिनों की तुलना में थोड़ा बढ़ सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह अधिक नमी, पसीना और लंबे समय तक एक ही पीरियड प्रोडक्ट का इस्तेमाल करना है। ऐसे में कई महिलाओं के मन में सवाल उठता है कि इस मौसम में Sanitary Pad, Tampon या Menstrual Cup में से कौन-सा विकल्प ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक है। विशेषज्ञों का कहना है कि सही जवाब किसी एक प्रोडक्ट में नहीं, बल्कि उसके सही इस्तेमाल और व्यक्तिगत जरूरत पर निर्भर करता है।

    सैनिटरी पैड सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला विकल्प है और खासकर पहली बार पीरियड्स शुरू होने वाली लड़कियों के लिए आसान माना जाता है। लेकिन मानसून में पैड को लंबे समय तक बदलने के बिना इस्तेमाल करने से रैशेज, बदबू और बैक्टीरिया पनपने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए डॉक्टर आमतौर पर हर 4 से 6 घंटे में पैड बदलने की सलाह देते हैं, या उससे पहले यदि पैड पूरी तरह भीग जाए।

    टैम्पॉन उन महिलाओं के लिए सुविधाजनक हो सकता है जो ट्रैवल करती हैं, तैराकी करती हैं या ज्यादा शारीरिक गतिविधियां करती हैं। हालांकि इसे समय पर बदलना बेहद जरूरी है। लंबे समय तक टैम्पॉन लगाए रखने से दुर्लभ लेकिन गंभीर Toxic Shock Syndrome (TSS) का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए इसे डॉक्टर की सलाह के अनुसार सही तरीके से इस्तेमाल करना चाहिए।

    मेंस्ट्रुअल कप मेडिकल-ग्रेड सिलिकॉन से बना होता है और सही तरीके से लगाने पर 8 से 12 घंटे तक इस्तेमाल किया जा सकता है। यह दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है और पर्यावरण के लिए भी बेहतर माना जाता है। हालांकि इसे इस्तेमाल करने से पहले और बाद में अच्छी तरह साफ और स्टरलाइज़ करना जरूरी है। सही फिट और स्वच्छता के साथ इसका संक्रमण का जोखिम कम माना जाता है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक, मानसून में सबसे जरूरी बात यह नहीं कि आप कौन-सा पीरियड प्रोडक्ट चुनते हैं, बल्कि यह है कि व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखें, समय पर प्रोडक्ट बदलें, साफ हाथों का इस्तेमाल करें और किसी भी तरह की खुजली, बदबू या असामान्य डिस्चार्ज होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। सही जानकारी और अच्छी हाइजीन से मानसून में भी पीरियड्स को सुरक्षित और आरामदायक बनाया जा सकता है।

  • मरने के बाद कौन बनता है पिशाच? धर्म ग्रंथों में बताया गया है ऐसा रहस्य, जिसे जानकर खड़े हो जाएंगे रोंगटे..

    मरने के बाद कौन बनता है पिशाच? धर्म ग्रंथों में बताया गया है ऐसा रहस्य, जिसे जानकर खड़े हो जाएंगे रोंगटे..

    हिंदू धर्म के ग्रंथों में देवी-देवताओं, ऋषियों और असुरों के साथ-साथ कई रहस्यमयी शक्तियों का भी उल्लेख मिलता है। इन्हीं में से एक हैं पिशाच, जिन्हें पौराणिक कथाओं में बेहद डरावना और नकारात्मक शक्तियों वाला माना गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, पिशाच अंधकार, श्मशान और वीरान स्थानों से जुड़े होते हैं तथा इन्हें अशुभ शक्तियों का प्रतीक माना जाता है।

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पिशाचों की उत्पत्ति को लेकर अलग-अलग कथाएं मिलती हैं। कुछ ग्रंथों में इन्हें ब्रह्मा की सृष्टि का हिस्सा बताया गया है, जबकि कुछ कथाओं में इनका जन्म क्रोध और नकारात्मक ऊर्जा से माना गया है। महाभारत और कई पुराणों में भी पिशाचों का उल्लेख मिलता है।

    धार्मिक वर्णनों के अनुसार, पिशाचों का रूप बेहद भयावह बताया गया है। कहा जाता है कि उनकी आंखें लाल, दांत नुकीले और शरीर विकृत होता है। कई कथाओं में उन्हें रूप बदलने (रूपांतरण) और अदृश्य होने जैसी अलौकिक शक्तियों का स्वामी भी बताया गया है। मान्यता है कि वे अंधेरे स्थानों, जंगलों और श्मशानों में विचरण करते हैं।

    कुछ धार्मिक मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि पिशाच मनुष्य के मन और विचारों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, ये मान्यताएं पौराणिक और धार्मिक परंपराओं पर आधारित हैं, जिनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। हिंदू धर्म में ऐसे नकारात्मक प्रभावों से बचाव के लिए मंत्र, पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों का भी उल्लेख मिलता है।

    धर्म विशेषज्ञों के अनुसार, पिशाचों की कथाएं केवल डर पैदा करने के लिए नहीं हैं, बल्कि वे यह संदेश भी देती हैं कि क्रोध, लालच, हिंसा और अधर्म जैसी बुराइयां मनुष्य को विनाश की ओर ले जाती हैं। इसलिए इन कथाओं को धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भ में ही समझा जाना चाहिए, न कि स्थापित वैज्ञानिक तथ्य के रूप में।

  • मेहंदीपुर बालाजी मंदिर में दर्शन के बाद पीछे मुड़कर क्यों नहीं देखते भक्त? वजह जानकर खड़े हो जाएंगे रोंगटे …

    मेहंदीपुर बालाजी मंदिर में दर्शन के बाद पीछे मुड़कर क्यों नहीं देखते भक्त? वजह जानकर खड़े हो जाएंगे रोंगटे …

    राजस्थान के दौसा जिले में स्थित मेहंदीपुर बालाजी मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध और रहस्यमयी धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। भगवान हनुमान को समर्पित इस मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर अपनी विशेष धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं के कारण लंबे समय से लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है।

    इस मंदिर से जुड़ी सबसे चर्चित मान्यताओं में से एक यह है कि दर्शन करने के बाद श्रद्धालुओं को पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए। स्थानीय मान्यता के अनुसार, मंदिर से बाहर निकलते समय सीधे आगे बढ़ जाना शुभ माना जाता है। कई श्रद्धालु इस नियम का पालन पूरी श्रद्धा के साथ करते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मेहंदीपुर बालाजी में आने वाले लोग अपनी परेशानियों और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं। ऐसी मान्यता है कि दर्शन के बाद पीछे मुड़कर देखने से व्यक्ति की नकारात्मकता दोबारा उसके साथ जुड़ सकती है। यही कारण है कि भक्त बिना पीछे देखे मंदिर परिसर से बाहर निकल जाते हैं। यह धार्मिक आस्था का विषय है, जिसका वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

    मंदिर में आने वाले श्रद्धालु कुछ अन्य नियमों का भी पालन करते हैं। मान्यता है कि दर्शन के बाद किसी अनजान व्यक्ति से बातचीत नहीं करनी चाहिए, न ही मंदिर से प्रसाद या खाने-पीने की कोई वस्तु घर लेकर जानी चाहिए। इन परंपराओं का पालन श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार करते हैं।

    मेहंदीपुर बालाजी मंदिर वर्षों से देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां की परंपराएं और मान्यताएं लोगों के बीच आज भी गहरी श्रद्धा और जिज्ञासा का विषय बनी हुई हैं।

  • PM मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद रुचिका सिंह का यू-टर्न! माफी वाले VIDEO के बाद आया बड़ा बयान…

    PM मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद रुचिका सिंह का यू-टर्न! माफी वाले VIDEO के बाद आया बड़ा बयान…

    नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणियां करने का वीडियो वायरल होने के बाद चर्चा में आईं रुचिका सिंह ने अब सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में वह हाथ जोड़कर देश और प्रधानमंत्री से अपनी गलती के लिए क्षमा मांगती नजर आईं। उन्होंने कहा कि उनसे गंभीर भूल हुई है और उन्हें अपने शब्दों पर गहरा पछतावा है।

    https://www.instagram.com/reel/DbeButQSzlz/?igsh=MTF3dW5pNDR4a3hucw==

    वीडियो में रुचिका सिंह ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान वह वहां मौजूद अन्य लोगों के प्रभाव में आ गई थीं। उनके अनुसार, भीड़ में कई लोग प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक बातें कह रहे थे और उसी माहौल में उन्होंने भी ऐसी बातें दोहरा दीं। उन्होंने कहा कि जो कुछ उन्होंने कहा, वह गलत था और वह पूरे देश से इसके लिए माफी मांगती हैं।

    इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस ने कानूनी कार्रवाई शुरू की थी और वायरल वीडियो की जांच भी की जा रही है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि गालियां किसी समस्या का समाधान नहीं होतीं और ऐसे युवाओं को सजा देने के बजाय सही दिशा दिखाना ज्यादा जरूरी है। प्रधानमंत्री ने उन्हें “भटके हुए बच्चे” बताते हुए कहा कि समाज की जिम्मेदारी है कि उन्हें बेहतर रास्ता दिखाए।

    रुचिका सिंह के माफी वाले वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कुछ लोग उनकी माफी को स्वीकार करने की बात कर रहे हैं, जबकि कई लोग पूरे मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी रखने की मांग कर रहे हैं। फिलहाल जांच जारी है और पुलिस वायरल वीडियो से जुड़े सभी तथ्यों की पड़ताल कर रही है।

  • PM मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाकर सुर्खियों में आई युवती, अब कैमरे के सामने आई और कह दी ऐसी बात कि हर कोई रह गया हैरान …

    PM मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाकर सुर्खियों में आई युवती, अब कैमरे के सामने आई और कह दी ऐसी बात कि हर कोई रह गया हैरान …

    नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाने का वीडियो वायरल होने के बाद अब इस मामले ने नया मोड़ ले लिया है। वायरल वीडियो में दिखाई देने वाली 15 वर्षीय लड़की ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए कहा कि उससे बड़ी गलती हो गई और वह अपने शब्दों पर पछतावा जताती है।

    माफी वाले वीडियो में लड़की हाथ जोड़कर नजर आई। उसने कहा कि वह पूरे देश और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपने व्यवहार के लिए क्षमा मांगती है। उसका कहना है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान वह दूसरे लोगों के प्रभाव में आ गई थी और बिना सोचे-समझे ऐसी बातें बोल गई, जिनका उसे अब गहरा अफसोस है। उसने लोगों से अपील की कि उसकी कम उम्र और गलती को देखते हुए उसे माफ कर दिया जाए।

    यह मामला उस समय चर्चा में आया जब जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किए जाने पर काफी विवाद हुआ। इसके बाद शिकायत दर्ज होने पर पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया शुरू की और मामले की जांच भी शुरू कर दी।

    इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि “गालियां किसी समस्या का समाधान नहीं होतीं।” उन्होंने युवाओं को “भटके हुए बच्चे” बताते हुए कहा कि उन्हें सजा देने से ज्यादा जरूरी उन्हें सही रास्ता दिखाना है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि समाज की जिम्मेदारी है कि ऐसी गलतियों से युवाओं को सीखने और आगे बढ़ने का मौका दिया जाए।

    फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ लड़की के माफी मांगने के वीडियो पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर इस घटना ने विरोध प्रदर्शन की भाषा, अभिव्यक्ति की मर्यादा और सार्वजनिक मंचों पर जिम्मेदार व्यवहार को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

  • भारत का वो चमत्कारी मंदिर, जहां पिछले 60 साल से एक पल के लिए भी नहीं रुका ‘राम नाम’… Guinness World Record में दर्ज है नाम …

    भारत का वो चमत्कारी मंदिर, जहां पिछले 60 साल से एक पल के लिए भी नहीं रुका ‘राम नाम’… Guinness World Record में दर्ज है नाम …

    गुजरात के जामनगर में स्थित श्री बाला हनुमान मंदिर अपनी अनोखी परंपरा की वजह से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां 1 अगस्त 1964 से लगातार ‘श्री राम, जय राम, जय जय राम’ की अखंड राम धुन बिना एक पल रुके जारी है। इसी अद्भुत और निरंतर भक्ति के कारण मंदिर का नाम Guinness World Records में दर्ज किया गया है।

    यह मंदिर रणमल (लाखोटा) झील के किनारे स्थित है और हर दिन देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में भक्त शिफ्टों में बैठकर राम नाम का जाप करते हैं, जिससे यह अखंड संकीर्तन वर्षों से बिना किसी रुकावट के चलता आ रहा है। मंदिर प्रबंधन और स्थानीय श्रद्धालु मिलकर इस परंपरा को आज भी उसी श्रद्धा और अनुशासन के साथ निभा रहे हैं।

    बताया जाता है कि इस अखंड राम धुन की शुरुआत संत श्री प्रेमभिक्षुजी महाराज ने की थी। समय बीतता गया, लेकिन राम नाम का यह सिलसिला कभी नहीं टूटा। यही कारण है कि यह मंदिर दुनिया में सबसे लंबे समय तक लगातार चलने वाले धार्मिक मंत्रोच्चार के लिए जाना जाता है।

    सावन, राम नवमी, हनुमान जयंती और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। भक्तों का मानना है कि सच्चे मन से यहां दर्शन करने और राम नाम का स्मरण करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह आस्था का विषय है।

  • हाईवे पर पहले रुकवाई बाइक, फिर युवती को जंगल में ले गए… इसके बाद जो हुआ उसने पूरे मध्य प्रदेश को हिला दिया….

    हाईवे पर पहले रुकवाई बाइक, फिर युवती को जंगल में ले गए… इसके बाद जो हुआ उसने पूरे मध्य प्रदेश को हिला दिया….

    मध्य प्रदेश के गुना जिले से महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है। पुलिस के अनुसार, एक युवती अपने दोस्त के साथ नेशनल हाईवे-46 से गुजर रही थी। इसी दौरान कुछ लोगों ने बाइक में पंचर होने का बहाना बनाकर उन्हें रुकने के लिए मजबूर किया।

    शिकायत के मुताबिक, जैसे ही दोनों रुके, आरोपियों ने उन्हें घेर लिया। इसके बाद युवती को जबरन पास के जंगल की ओर ले जाया गया, जहां उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किए जाने का आरोप है। वारदात के दौरान उसके दोस्त के साथ भी मारपीट की गई। घटना के बाद दोनों किसी तरह वहां से निकले और पुलिस को पूरी जानकारी दी।

    सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल भेजा गया। अधिकारियों ने बताया कि पीड़िता के बयान के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए हैं।

    पुलिस का कहना है कि आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है और मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • भाभी के लिए दिल में छिपा रखा था सालों का राज, जब नहीं मिली मोहब्बत तो छोड़ गया ऐसा खत जिसने सबको चौंका दिया….

    भाभी के लिए दिल में छिपा रखा था सालों का राज, जब नहीं मिली मोहब्बत तो छोड़ गया ऐसा खत जिसने सबको चौंका दिया….

    मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक भावुक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक युवक ने कथित तौर पर एकतरफा प्रेम में परेशान होकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद मौके से मिले सुसाइड नोट ने पूरे परिवार और पुलिस को हैरान कर दिया।

    पुलिस के अनुसार, युवक अपने बड़े भाई की पत्नी से एकतरफा प्रेम करता था। बताया जा रहा है कि उसने कई बार अपने दिल की बात बताने की कोशिश की, लेकिन उसकी भावनाओं को स्वीकार नहीं किया गया। इससे वह लंबे समय से मानसिक रूप से परेशान चल रहा था।

    घटना से पहले युवक ने एक भावुक सुसाइड नोट लिखा। इसमें उसने अपने परिवार से माफी मांगी और अपनी भाभी के प्रति अपने प्रेम का जिक्र किया। उसने लिखा कि वह इस रिश्ते को भुला नहीं पा रहा था और इसी वजह से यह कदम उठा रहा है। पुलिस ने सुसाइड नोट को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।

    सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। साथ ही, सुसाइड नोट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • विदेश में बसने का है सपना? ये 3 देश खुद बुलाकर दे रहे हैं लाखों रुपये, लेकिन पहले पूरी करनी होगी ये खास शर्तें…

    विदेश में बसने का है सपना? ये 3 देश खुद बुलाकर दे रहे हैं लाखों रुपये, लेकिन पहले पूरी करनी होगी ये खास शर्तें…

    अगर आपका सपना विदेश में बसने का है, तो यह खबर आपके काम की हो सकती है। दुनिया के कुछ देश अपनी घटती आबादी और ग्रामीण इलाकों में लोगों की कमी को दूर करने के लिए नए निवासियों को आकर्षित कर रहे हैं। इसके लिए वे आर्थिक सहायता, अनुदान या अन्य सुविधाएं भी दे रहे हैं। हालांकि, इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए तय नियम और शर्तों को पूरा करना जरूरी होता है।

    1. इटली

    इटली के कुछ छोटे शहर और गांव आबादी घटने की समस्या से जूझ रहे हैं। इसी वजह से वहां की स्थानीय प्रशासनिक इकाइयां नए लोगों को बसने के लिए आर्थिक सहायता या बेहद कम कीमत पर घर खरीदने जैसी योजनाएं चलाती हैं। लेकिन इसके लिए संबंधित क्षेत्र में रहने, घर की मरम्मत कराने या निश्चित समय तक वहीं बसने जैसी शर्तें पूरी करनी पड़ती हैं।

    2. आयरलैंड

    आयरलैंड के कुछ छोटे द्वीपों पर आबादी बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार विशेष प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है। कुछ मामलों में योग्य आवेदकों को पुराने मकानों की मरम्मत और वहां स्थायी रूप से रहने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है। हालांकि, यह सुविधा हर किसी के लिए नहीं होती और इसके लिए तय पात्रता शर्तों का पालन करना जरूरी है।

    2. स्विट्जरलैंड

    स्विट्जरलैंड के कुछ छोटे पहाड़ी कस्बों ने भी वर्षों से आबादी बढ़ाने के लिए नए परिवारों को आकर्षित करने की योजनाएं शुरू की हैं। इन योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता दी जा सकती है, लेकिन बदले में कई वर्षों तक वहीं रहने और स्थानीय नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है।

    इन योजनाओं का उद्देश्य लोगों को मुफ्त पैसा देना नहीं, बल्कि कम आबादी वाले क्षेत्रों को फिर से आबाद करना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है। इसलिए आवेदन करने से पहले संबंधित देश की आधिकारिक शर्तों और पात्रता नियमों को अच्छी तरह समझ लेना जरूरी है।