उत्तर प्रदेश के मेरठ में अमित कश्यप हत्याकांड ने एक बार फिर सबको झकझोर दिया है। पति की हत्या को सांप के काटने से हुई मौत दिखाने की साजिश के मामले में अदालत ने पत्नी रविता कश्यप और उसके प्रेमी अमरदीप को फांसी की सजा सुनाई है। लेकिन इस फैसले के बीच तीन मासूम बच्चों का भविष्य भी बड़ा सवाल बनकर सामने आया है। जिन बच्चों ने अपने पिता को खो दिया, अब उनकी देखभाल और पढ़ाई-लिखाई की जिम्मेदारी कौन संभालेगा?

यह मामला 13 अप्रैल 2025 का है, जब मेरठ के बहसूमा क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव में अमित कश्यप अपने घर में मृत मिले थे। उनके शव के पास एक जिंदा सांप भी मिला था। शुरुआत में परिवार को लगा कि अमित की मौत सांप के काटने से हुई होगी। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने कहानी का रुख बदल दिया। जांच में सामने आया कि अमित की मौत सर्पदंश से नहीं, बल्कि गला दबाने के कारण हुई थी। इसके बाद पुलिस ने मामले की गहराई से जांच शुरू की।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, रविता और अमरदीप के बीच संबंध थे और अमित को इसकी जानकारी होने के बाद पति-पत्नी के बीच विवाद होने लगे थे। आरोप था कि दोनों ने मिलकर अमित की हत्या की साजिश रची और वारदात को सांप के काटने से हुई मौत दिखाने के लिए शव के पास जिंदा सांप छोड़ दिया। जांच में यह भी सामने आया कि सांप को एक सपेरे से 1,000 रुपये में लिया गया था। अभियोजन पक्ष ने अदालत में गवाहों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट समेत कई अहम साक्ष्य पेश किए।
मेरठ की अदालत ने 7 अक्टूबर को दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया था और 16 अक्टूबर को सजा सुनाई। अदालत ने अपराध को ‘दुर्लभतम में दुर्लभ’ श्रेणी का मानते हुए मृत्युदंड दिया। इस फैसले के साथ ही मेरठ में कुछ ही दिनों के भीतर पति की हत्या से जुड़े दो चर्चित मामलों में मौत की सजा सुनाए जाने की चर्चा भी तेज हो गई। इससे पहले मुस्कान और साहिल को चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में मृत्युदंड दिया गया था।
हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे भावुक पहलू अमित के तीन नाबालिग बच्चों का है। रविता ने अदालत से सजा में नरमी बरतने की गुहार लगाई थी और अपने बच्चों का हवाला दिया था। लेकिन अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए अधिकतम सजा सुनाई। अदालत ने मेरठ के जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि बच्चों के भोजन, शिक्षा और रहने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि माता-पिता से जुड़े इस त्रासदीपूर्ण घटनाक्रम के बीच उनका भविष्य पूरी तरह प्रभावित न हो।
अब सवाल सिर्फ सजा का नहीं, बल्कि उन तीन बच्चों की जिंदगी का भी है, जिन्हें इस घटना की सबसे भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। अदालत के निर्देश के अनुसार उनके भोजन, शिक्षा और आवास की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी है। आगे उनके पालन-पोषण की जिम्मेदारी परिवार और संबंधित प्रशासनिक व्यवस्था किस तरह निभाएगी, यह देखना अहम होगा। अमित को न्याय मिलने के साथ-साथ इन मासूमों को सुरक्षित माहौल और स्थिर भविष्य देना भी उतना ही जरूरी है।









