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  • भतीजे से प्यार, परिवार का विरोध और फिर शुरू हुआ ऐसा कांड… युवती की कहानी में आया ऐसा मोड़ कि हर कोई रह गया हैरान..

    भतीजे से प्यार, परिवार का विरोध और फिर शुरू हुआ ऐसा कांड… युवती की कहानी में आया ऐसा मोड़ कि हर कोई रह गया हैरान..

    मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले से एक युवती की संदिग्ध मौत का मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में हलचल मचा दी है। मृतका के परिजनों का आरोप है कि वह लंबे समय से मानसिक तनाव में थी और इसके पीछे परिवार के भीतर चल रहा विवाद था। मामले ने नया मोड़ तब लिया जब आरोपों का केंद्र मृतका की बुआ और उसके बेटे (मृतका के भतीजे) से जुड़े कथित रिश्ते पर आ गया।

    परिजनों का दावा है कि युवती और उसके भतीजे के बीच प्रेम संबंध थे, जिनका परिवार में लगातार विरोध हो रहा था। आरोप है कि इसी बात को लेकर युवती को बार-बार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। परिवार का कहना है कि लगातार दबाव और तनाव के कारण उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ती चली गई। फिलहाल ये आरोप परिजनों के हैं और पुलिस जांच का हिस्सा हैं।

    घटना के बाद परिजनों ने पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि युवती की मौत को सामान्य घटना मानने के बजाय उन सभी परिस्थितियों की जांच की जाए, जिनकी वजह से वह लगातार मानसिक दबाव में थी। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और सभी संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है।

    अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले साक्ष्य और परिजनों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की जांच कर रही है। मामले की सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • विदेश में पढ़ाई के लिए आए करोड़ों रुपये कहां से? अभिजीत दीपके के पिता पर उठे बड़े सवाल, जांच की उठी मांग…

    विदेश में पढ़ाई के लिए आए करोड़ों रुपये कहां से? अभिजीत दीपके के पिता पर उठे बड़े सवाल, जांच की उठी मांग…

    नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह उनका कोई बयान नहीं, बल्कि उनकी विदेशी शिक्षा और परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर उठे सवाल हैं। एक आरटीआई कार्यकर्ता ने संबंधित एजेंसियों से शिकायत कर जांच की मांग की है कि आखिर अभिजीत दीपके की अमेरिका में पढ़ाई का खर्च कैसे उठाया गया और इसके लिए धन का स्रोत क्या था।

    शिकायत में दावा किया गया है कि अभिजीत दीपके के पिता महाराष्ट्र सरकार में कर्मचारी रह चुके हैं। आरटीआई कार्यकर्ता ने सवाल उठाया है कि सरकारी नौकरी से मिलने वाले वेतन के आधार पर अमेरिका जैसी महंगी शिक्षा का खर्च कैसे वहन किया गया। इसी आधार पर परिवार की आय, संपत्ति और धन के स्रोत की जांच की मांग की गई है। फिलहाल ये आरोप हैं और इनकी आधिकारिक जांच की मांग की गई है; अभी किसी एजेंसी ने किसी गड़बड़ी की पुष्टि नहीं की है।

    इसके साथ ही शिकायत में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की फंडिंग पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरटीआई कार्यकर्ता ने चुनाव आयोग और संबंधित विभागों से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि यदि पार्टी के नाम पर कानूनी सहायता के लिए बड़ी रकम जुटाई जा रही है, तो उसकी कानूनी स्थिति और धन के स्रोत की भी जांच होनी चाहिए। हाल के दिनों में पार्टी के लिए घोषित 1 करोड़ रुपये के लीगल डिफेंस फंड को लेकर भी पारदर्शिता की मांग की गई है।

    फिलहाल मामला शिकायत और जांच की मांग के स्तर पर है। संबंधित एजेंसियों की ओर से इस मामले में अंतिम निष्कर्ष या किसी तरह की कार्रवाई की घोषणा नहीं की गई है। आने वाले दिनों में जांच आगे बढ़ने पर ही यह साफ हो पाएगा कि शिकायत में उठाए गए सवालों में कितना दम है।

  • अश्लील वीडियो देखने में डूबी रही मां, उधर तड़पता रहा 6 महीने का बेटा… सामने आई दिल दहला देने वाली कहानी

    अश्लील वीडियो देखने में डूबी रही मां, उधर तड़पता रहा 6 महीने का बेटा… सामने आई दिल दहला देने वाली कहानी

    अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने लोगों को झकझोर कर रख दिया। यहां एक 23 वर्षीय महिला पर आरोप है कि उसने अपने 6 महीने के बेटे को गंभीर रूप से घायल करने के बाद समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया। जांच में पुलिस ने दावा किया कि बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन मां घंटों तक अपने मोबाइल फोन पर TikTok और अश्लील वेबसाइटें देखती रही। बाद में बच्चे की मौत हो गई।

    पुलिस के अनुसार, महिला ने शुरुआत में बच्चे की चोटों को लेकर अलग-अलग कहानियां बताईं। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पूछताछ के बाद उसने स्वीकार किया कि दिनभर में बच्चे के साथ कई घटनाएं हुईं, जिनमें एक बार उसने गुस्से में उसे प्लेपेन की ओर फेंक दिया था। अधिकारियों का मानना है कि इसी दौरान बच्चे को गंभीर चोटें आईं।

    जांच में यह भी सामने आया कि बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर महिला ने डॉक्टर या इमरजेंसी सेवा को बुलाने के बजाय इंटरनेट पर “Baby has concussion” और “Baby feels cold” जैसे सर्च किए। इसके बाद भी उसने काफी समय सोशल मीडिया और अन्य वेबसाइटों पर बिताया। पुलिस का कहना है कि यदि समय रहते बच्चे को चिकित्सीय सहायता मिल जाती, तो उसकी जान बचने की संभावना हो सकती थी।

    फिलहाल आरोपी महिला को गंभीर बाल उत्पीड़न (Aggravated Child Abuse) के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और पोस्टमार्टम व अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपों में बदलाव भी किया जा सकता है। दोष सिद्ध होने पर उसे 30 साल तक की सजा का सामना करना पड़ सकता है।

  • PM मोदी को गालियां देकर फंसी रुचिका सिंह! अब हर कोई पूछ रहा एक ही सवाल… अगर यही हरकत चीन या रूस में करती तो क्या होता?

    PM मोदी को गालियां देकर फंसी रुचिका सिंह! अब हर कोई पूछ रहा एक ही सवाल… अगर यही हरकत चीन या रूस में करती तो क्या होता?

    नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने के मामले ने पूरे देश में बहस छेड़ दी है। इस घटना के बाद एक बड़ा सवाल सामने आया कि अगर किसी देश के सर्वोच्च निर्वाचित नेता के खिलाफ इसी तरह की भाषा दूसरे देशों में इस्तेमाल की जाए, तो वहां कानून क्या कहता है और कार्रवाई कितनी सख्त हो सकती है।

    भारत में किसी भी व्यक्ति को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार पूर्ण नहीं है। यदि किसी बयान से मानहानि, सार्वजनिक शांति भंग होने, नफरत फैलाने या अन्य दंडनीय अपराधों का मामला बनता है, तो भारतीय कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। किसी मामले में कौन-सी धाराएं लगेंगी, यह बयान की प्रकृति, उसके प्रभाव और परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

    अगर अन्य देशों की बात करें तो नियम अलग-अलग हैं। अमेरिका में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दायरा काफी व्यापक है और राजनीतिक नेताओं की कड़ी आलोचना भी आमतौर पर संवैधानिक सुरक्षा के दायरे में आती है। हालांकि, यदि किसी बयान में हिंसा के लिए उकसाना, प्रत्यक्ष धमकी देना या अन्य आपराधिक तत्व शामिल हों, तो कानूनी कार्रवाई हो सकती है। दूसरी ओर चीन जैसे देशों में शीर्ष नेतृत्व या सरकार के खिलाफ सार्वजनिक टिप्पणी पर कहीं अधिक कड़े प्रतिबंध हैं और कई मामलों में सख्त कार्रवाई देखने को मिलती है। वहीं रूस में भी सेना, राज्य या शीर्ष नेतृत्व से जुड़े कुछ मामलों में कठोर कानून लागू हो सकते हैं।

    कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि हर देश का संविधान, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और आपराधिक कानून अलग हैं। इसलिए किसी एक देश के नियमों की तुलना सीधे दूसरे देश से नहीं की जा सकती। हालिया विवाद ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की आजादी और उसकी कानूनी सीमाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

  • लगातार 7 मंगलवार इस हनुमान मंदिर में कर लें दर्शन! कहते हैं खाली हाथ नहीं लौटता कोई भक्त, पूरी हो जाती है हर मनोकामना..

    लगातार 7 मंगलवार इस हनुमान मंदिर में कर लें दर्शन! कहते हैं खाली हाथ नहीं लौटता कोई भक्त, पूरी हो जाती है हर मनोकामना..

    उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में स्थित एक प्राचीन हनुमान मंदिर अपनी विशेष धार्मिक मान्यता के कारण श्रद्धालुओं के बीच बेहद प्रसिद्ध है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि जो भक्त लगातार सात मंगलवार तक यहां आकर सच्चे मन से पूजा-अर्चना करते हैं, उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यही वजह है कि हर मंगलवार मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

    मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, यहां आने वाले भक्त भगवान हनुमान को सिंदूर, चमेली का तेल और प्रसाद अर्पित करते हैं। कई श्रद्धालु लगातार सात मंगलवार तक दर्शन करने का संकल्प लेते हैं और हनुमान चालीसा का पाठ भी करते हैं। लोगों का विश्वास है कि इससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और रुके हुए कार्य पूरे होने लगते हैं। यह धार्मिक आस्था पर आधारित मान्यता है।

    स्थानीय पुजारियों के अनुसार, मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु नौकरी, विवाह, संतान सुख और पारिवारिक खुशहाली जैसी मनोकामनाएं लेकर आते हैं। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने वालों पर बजरंगबली की विशेष कृपा बनी रहती है। मंगलवार और हनुमान जयंती जैसे अवसरों पर यहां भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं।

    धार्मिक दृष्टि से मंगलवार का दिन भगवान हनुमान की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसलिए कई श्रद्धालु इस दिन व्रत रखते हैं, सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं तथा मंदिर में दर्शन कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और संकटों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं। हालांकि, मनोकामना पूरी होने संबंधी मान्यताएं आस्था पर आधारित हैं और इनके समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

  • देवर से थे अवैध संबंधों के शक, फिर घर के अंदर हुआ ऐसा खूनी खेल… पुलिस ने खोला चौंकाने वाला राज..

    देवर से थे अवैध संबंधों के शक, फिर घर के अंदर हुआ ऐसा खूनी खेल… पुलिस ने खोला चौंकाने वाला राज..

    उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक ऐसा सनसनीखेज हत्याकांड सामने आया, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। शुरुआत में मामला एक रहस्यमयी हत्या का लग रहा था, लेकिन पुलिस जांच आगे बढ़ी तो शक घर के ही एक सदस्य पर जा पहुंचा। जांच में सामने आया कि हत्या के पीछे पारिवारिक विवाद और कथित अवैध संबंधों का शक मुख्य वजह हो सकता है।

    पुलिस के मुताबिक, मृतका नीदा और उसके देवर उवैस के बीच कथित तौर पर बढ़ती नजदीकियों को लेकर लंबे समय से घर में तनाव चल रहा था। उवैस की पत्नी रिमशा को इस रिश्ते पर शक था, जिस कारण दोनों महिलाओं के बीच अक्सर कहासुनी होती रहती थी। परिवार के लोगों ने भी कई बार विवाद शांत कराने की कोशिश की, लेकिन तनाव लगातार बढ़ता गया।

    जांच के अनुसार, घटना वाले दिन रिमशा अपने मायके से घर पहुंची। इसी दौरान दोनों के बीच फिर से तीखी बहस शुरू हो गई। पुलिस का आरोप है कि गुस्से में रिमशा ने रसोई में रखा चाकू उठाया और नीदा पर हमला कर दिया। सीने में गंभीर चोट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी वहां से निकल गई, जबकि परिवार में चीख-पुकार मच गई।

    हत्या की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। शुरुआती दौर में मामला उलझा हुआ लग रहा था, लेकिन तकनीकी साक्ष्यों, घटनास्थल से जुटाए गए सबूतों और पूछताछ के आधार पर पुलिस रिमशा तक पहुंची। पूछताछ के दौरान पूरे घटनाक्रम का खुलासा हुआ और पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

    फिलहाल पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत में चार्जशीट पेश की जाएगी।

  • ‘PM मोदी सबसे बड़े फेलियर हैं…’ शहजाद पूनावाला का बयान सुनकर चौंक जाएंगे, आगे जो कहा वही बना चर्चा का विषय…

    ‘PM मोदी सबसे बड़े फेलियर हैं…’ शहजाद पूनावाला का बयान सुनकर चौंक जाएंगे, आगे जो कहा वही बना चर्चा का विषय…

    नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो की शुरुआत में पूनावाला कहते हैं कि वह प्रधानमंत्री मोदी से बेहद निराश हैं और उन्हें लगता है कि 12 साल बाद भी पीएम “फेल” हो गए हैं। उनके इस बयान ने शुरुआत में लोगों को चौंका दिया, लेकिन कुछ ही सेकेंड बाद वीडियो का पूरा संदर्भ सामने आने पर मामला बिल्कुल अलग निकला।

    दरअसल, पूनावाला का यह बयान व्यंग्यात्मक था। उन्होंने विपक्ष के उन आरोपों पर कटाक्ष किया, जिनमें प्रधानमंत्री मोदी को लंबे समय से “तानाशाह” कहा जाता रहा है। वीडियो में उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर 12 साल बाद भी प्रधानमंत्री अपने विरोधियों को माफ करने की बात कर रहे हैं, तो विपक्ष का “तानाशाह” वाला आरोप खुद ही कमजोर पड़ जाता है।

    पूनावाला की यह प्रतिक्रिया उस वीडियो के बाद आई, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने जंतर-मंतर पर NEET प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाने वाले छात्रों को “भटके हुए बच्चे” बताते हुए उन्हें माफ करने की बात कही थी। प्रधानमंत्री ने कहा था कि गालियों से किसी समस्या का समाधान नहीं निकलता और युवाओं को सही दिशा दिखाना ज्यादा जरूरी है।

    वीडियो में पूनावाला ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के शासनकाल का भी जिक्र किया और दावा किया कि अतीत में विरोध प्रदर्शनों से निपटने का तरीका अलग था। उनका कहना था कि मौजूदा घटनाक्रम और प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया को देखते हुए विपक्ष का “तानाशाही” वाला आरोप टिकता नहीं है।

    वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस पर तीखी बहस शुरू हो गई। कुछ लोगों ने इसे विपक्ष पर व्यंग्य बताया, जबकि कुछ ने इसे राजनीतिक संदेश देने की कोशिश माना। फिलहाल यह वीडियो राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया दोनों जगह चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • संसद में राम मंदिर पर ‘ड्रामा’ करना पड़ा भारी? पप्पू यादव के खिलाफ FIR, सियासत में मचा घमासान…

    संसद में राम मंदिर पर ‘ड्रामा’ करना पड़ा भारी? पप्पू यादव के खिलाफ FIR, सियासत में मचा घमासान…

    नई दिल्ली: पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। संसद परिसर में राम मंदिर के लिए जुटाए गए चंदे में कथित गड़बड़ी को लेकर किए गए विरोध प्रदर्शन के बाद उनके खिलाफ दिल्ली में शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उनके प्रदर्शन से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और विवादित संदेश फैलाने की कोशिश की गई।

    दरअसल, संसद के मानसून सत्र के दौरान पप्पू यादव विपक्षी सांसदों के साथ एक सांकेतिक प्रदर्शन में शामिल हुए थे। इस प्रदर्शन में उन्होंने भगवा वस्त्र पहनकर और दान पेटी के साथ कथित तौर पर राम मंदिर दान को लेकर सवाल उठाए। विपक्ष का आरोप था कि मंदिर निर्माण के लिए मिले चंदे में अनियमितता हुई है, जबकि इस दावे को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया।

    प्रदर्शन के बाद दिल्ली के जहांगीरपुरी थाने में उनके खिलाफ शिकायत दी गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इस प्रदर्शन से करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं प्रभावित हुई हैं। पुलिस ने शिकायत प्राप्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है और कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने संसद के भीतर और बाहर सियासी माहौल गर्मा दिया है। एक ओर विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, वहीं भाजपा ने पप्पू यादव के प्रदर्शन की कड़ी आलोचना करते हुए इसे धार्मिक आस्था का अपमान बताया है। इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।

    फिलहाल पुलिस शिकायत की जांच कर रही है। मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • बारिश के मौसम में पीरियड्स के दौरान क्या है सबसे Safe? Pad, Tampon या Menstrual Cup… डॉक्टर भी बताते हैं ये बड़ी बात ..

    बारिश के मौसम में पीरियड्स के दौरान क्या है सबसे Safe? Pad, Tampon या Menstrual Cup… डॉक्टर भी बताते हैं ये बड़ी बात ..

    मानसून के मौसम में पीरियड्स के दौरान संक्रमण (Infection) का खतरा सामान्य दिनों की तुलना में थोड़ा बढ़ सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह अधिक नमी, पसीना और लंबे समय तक एक ही पीरियड प्रोडक्ट का इस्तेमाल करना है। ऐसे में कई महिलाओं के मन में सवाल उठता है कि इस मौसम में Sanitary Pad, Tampon या Menstrual Cup में से कौन-सा विकल्प ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक है। विशेषज्ञों का कहना है कि सही जवाब किसी एक प्रोडक्ट में नहीं, बल्कि उसके सही इस्तेमाल और व्यक्तिगत जरूरत पर निर्भर करता है।

    सैनिटरी पैड सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला विकल्प है और खासकर पहली बार पीरियड्स शुरू होने वाली लड़कियों के लिए आसान माना जाता है। लेकिन मानसून में पैड को लंबे समय तक बदलने के बिना इस्तेमाल करने से रैशेज, बदबू और बैक्टीरिया पनपने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए डॉक्टर आमतौर पर हर 4 से 6 घंटे में पैड बदलने की सलाह देते हैं, या उससे पहले यदि पैड पूरी तरह भीग जाए।

    टैम्पॉन उन महिलाओं के लिए सुविधाजनक हो सकता है जो ट्रैवल करती हैं, तैराकी करती हैं या ज्यादा शारीरिक गतिविधियां करती हैं। हालांकि इसे समय पर बदलना बेहद जरूरी है। लंबे समय तक टैम्पॉन लगाए रखने से दुर्लभ लेकिन गंभीर Toxic Shock Syndrome (TSS) का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए इसे डॉक्टर की सलाह के अनुसार सही तरीके से इस्तेमाल करना चाहिए।

    मेंस्ट्रुअल कप मेडिकल-ग्रेड सिलिकॉन से बना होता है और सही तरीके से लगाने पर 8 से 12 घंटे तक इस्तेमाल किया जा सकता है। यह दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है और पर्यावरण के लिए भी बेहतर माना जाता है। हालांकि इसे इस्तेमाल करने से पहले और बाद में अच्छी तरह साफ और स्टरलाइज़ करना जरूरी है। सही फिट और स्वच्छता के साथ इसका संक्रमण का जोखिम कम माना जाता है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक, मानसून में सबसे जरूरी बात यह नहीं कि आप कौन-सा पीरियड प्रोडक्ट चुनते हैं, बल्कि यह है कि व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखें, समय पर प्रोडक्ट बदलें, साफ हाथों का इस्तेमाल करें और किसी भी तरह की खुजली, बदबू या असामान्य डिस्चार्ज होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। सही जानकारी और अच्छी हाइजीन से मानसून में भी पीरियड्स को सुरक्षित और आरामदायक बनाया जा सकता है।

  • मरने के बाद कौन बनता है पिशाच? धर्म ग्रंथों में बताया गया है ऐसा रहस्य, जिसे जानकर खड़े हो जाएंगे रोंगटे..

    मरने के बाद कौन बनता है पिशाच? धर्म ग्रंथों में बताया गया है ऐसा रहस्य, जिसे जानकर खड़े हो जाएंगे रोंगटे..

    हिंदू धर्म के ग्रंथों में देवी-देवताओं, ऋषियों और असुरों के साथ-साथ कई रहस्यमयी शक्तियों का भी उल्लेख मिलता है। इन्हीं में से एक हैं पिशाच, जिन्हें पौराणिक कथाओं में बेहद डरावना और नकारात्मक शक्तियों वाला माना गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, पिशाच अंधकार, श्मशान और वीरान स्थानों से जुड़े होते हैं तथा इन्हें अशुभ शक्तियों का प्रतीक माना जाता है।

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पिशाचों की उत्पत्ति को लेकर अलग-अलग कथाएं मिलती हैं। कुछ ग्रंथों में इन्हें ब्रह्मा की सृष्टि का हिस्सा बताया गया है, जबकि कुछ कथाओं में इनका जन्म क्रोध और नकारात्मक ऊर्जा से माना गया है। महाभारत और कई पुराणों में भी पिशाचों का उल्लेख मिलता है।

    धार्मिक वर्णनों के अनुसार, पिशाचों का रूप बेहद भयावह बताया गया है। कहा जाता है कि उनकी आंखें लाल, दांत नुकीले और शरीर विकृत होता है। कई कथाओं में उन्हें रूप बदलने (रूपांतरण) और अदृश्य होने जैसी अलौकिक शक्तियों का स्वामी भी बताया गया है। मान्यता है कि वे अंधेरे स्थानों, जंगलों और श्मशानों में विचरण करते हैं।

    कुछ धार्मिक मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि पिशाच मनुष्य के मन और विचारों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, ये मान्यताएं पौराणिक और धार्मिक परंपराओं पर आधारित हैं, जिनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। हिंदू धर्म में ऐसे नकारात्मक प्रभावों से बचाव के लिए मंत्र, पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों का भी उल्लेख मिलता है।

    धर्म विशेषज्ञों के अनुसार, पिशाचों की कथाएं केवल डर पैदा करने के लिए नहीं हैं, बल्कि वे यह संदेश भी देती हैं कि क्रोध, लालच, हिंसा और अधर्म जैसी बुराइयां मनुष्य को विनाश की ओर ले जाती हैं। इसलिए इन कथाओं को धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भ में ही समझा जाना चाहिए, न कि स्थापित वैज्ञानिक तथ्य के रूप में।