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  • शादी, कत्ल और नीले ड्रम में लाश… 590 दिन बाद मुस्कान-साहिल को फांसी! सौरभ की जिंदगी से लेकर कोर्ट के फैसले तक, रोंगटे खड़े कर देगी पूरी कहानी

    शादी, कत्ल और नीले ड्रम में लाश… 590 दिन बाद मुस्कान-साहिल को फांसी! सौरभ की जिंदगी से लेकर कोर्ट के फैसले तक, रोंगटे खड़े कर देगी पूरी कहानी

    मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में आखिरकार अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुना दी है। मर्चेंट नेवी से जुड़े रहे सौरभ राजपूत की हत्या ने मार्च 2025 में पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। पत्नी और उसके प्रेमी पर सौरभ की हत्या कर शव के टुकड़े करने और उन्हें सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपाने का आरोप साबित होने के बाद अब दोनों को मृत्युदंड मिला है। करीब 13 महीने चली सुनवाई, 126 पेशियों और 22 गवाहों के बाद 14 अक्टूबर 2026 को अदालत ने अपना फैसला सुना दिया।

    इस कहानी की शुरुआत साल 2016 में हुई थी, जब सौरभ और मुस्कान ने परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी की थी। बाद में दोनों परिवारों ने इस रिश्ते को स्वीकार कर लिया। साल 2019 में उनकी बेटी का जन्म हुआ। सौरभ पहले मर्चेंट नेवी में काम करते थे और बाद में लंदन में नौकरी करने लगे। परिवार के लिए सब कुछ सामान्य दिखाई देता था, लेकिन आगे चलकर यही रिश्ता एक ऐसे हत्याकांड में बदल गया, जिसकी चर्चा देशभर में होने लगी।

    24 फरवरी 2025 को सौरभ लंदन से मेरठ लौटे थे। 25 फरवरी को मुस्कान का जन्मदिन और 28 फरवरी को बेटी का जन्मदिन मनाया गया। लेकिन अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 3 मार्च को सौरभ की हत्या कर दी गई। आरोप था कि मुस्कान ने उन्हें नशीली दवा दी और फिर साहिल को बुलाया गया। इसके बाद दोनों ने कथित तौर पर चाकू से हमला किया। हत्या के बाद शव के टुकड़े किए गए और उन्हें नीले प्लास्टिक के ड्रम में रखकर सीमेंट से ढक दिया गया, ताकि किसी को शक न हो।

    हत्या के अगले दिन, 4 मार्च को मुस्कान अपनी बेटी को मायके छोड़कर साहिल के साथ हिमाचल प्रदेश चली गई। रिपोर्टों के मुताबिक, इस दौरान सौरभ के फोन से परिवार को संदेश भेजे गए, जिससे उनकी गैरमौजूदगी पर तुरंत शक नहीं हुआ। जब परिवार को सौरभ से संपर्क नहीं हो पाया और हालात संदिग्ध लगे, तो मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंची। 17 मार्च 2025 को पुलिस ने घर में रखे नीले ड्रम से शव के टुकड़े बरामद किए। इस खुलासे ने पूरे मामले को सनसनीखेज बना दिया।

    18 मार्च को मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने जांच के बाद 12 मई 2025 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 22 गवाहों के बयान और परिस्थितिजन्य तथा फॉरेंसिक सबूत पेश किए। करीब 13 महीने की सुनवाई और 126 पेशियों के बाद 30 सितंबर 2026 को अदालत ने दोनों को हत्या और सबूत मिटाने के मामले में दोषी करार दिया। इसके बाद सजा पर अंतिम बहस हुई और अभियोजन पक्ष ने दोनों के लिए मृत्युदंड की मांग की।

    14 अक्टूबर 2026 को मेरठ की अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुना दी। फैसले के दौरान जज ने महाभारत का जिक्र करते हुए कहा कि ‘दंड भी धर्म है’। सौरभ के परिवार ने दोनों के लिए अधिकतम सजा की मांग की थी और फैसले के बाद उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद जताई। हालांकि, मृत्युदंड के फैसले के बाद भी कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रह सकती है। नीले ड्रम से शुरू हुई इस कहानी में अब अदालत का फैसला आ चुका है, लेकिन आगे की अपील और न्यायिक प्रक्रिया पर भी सबकी नजर रहेगी।

  • राहुल गांधी के सामने NSUI की ‘शेरनी’ ने खोली पोल! बोलीं— गला पकड़ा, चेहरा नोचा, थप्पड़ भी मारा… राहुल ने कहा, ‘सबका हिसाब होगा’

    राहुल गांधी के सामने NSUI की ‘शेरनी’ ने खोली पोल! बोलीं— गला पकड़ा, चेहरा नोचा, थप्पड़ भी मारा… राहुल ने कहा, ‘सबका हिसाब होगा’

    दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन अब पुलिस और कांग्रेस के बीच बड़े विवाद में बदल गया है। NSUI कार्यकर्ताओं ने दिल्ली पुलिस पर हिरासत के दौरान बेरहमी से मारपीट करने के आरोप लगाए हैं। बुधवार को राहुल गांधी ने इन कार्यकर्ताओं के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की और पुलिस की कथित कार्रवाई पर सवाल उठाए। राहुल ने कहा कि ये छात्र देश की आवाज हैं और उनकी आवाज को दबाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में समर्थ नाम के NSUI कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि वे 4 अक्टूबर से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। 5 अक्टूबर को हिरासत में लिए जाने के बाद उन्हें पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहां कथित तौर पर करीब 20 पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की। समर्थ का दावा है कि इसके बाद उन्हें दूसरे रास्ते से बाहर ले जाया गया और दिल्ली कैंट तक भी एक कांस्टेबल ने पीटा। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उनके साथी ने उल्टी आने की बात कही, तो पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर उसे बैग में उल्टी करने को कहा।

    इस दौरान महिला प्रदर्शनकारी रितु भराल ने भी अपनी आपबीती सुनाई। उनके आरोप के मुताबिक, हिरासत के दौरान महिला कांस्टेबल चंचल यादव ने उनका गला पकड़कर खींचा और धक्का दिया, जिससे वह सीट पर गिर गईं। रितु ने दावा किया कि इसके बाद उनके चेहरे और कान के पास नाखूनों से खरोंच मारी गई और विरोध करने पर थप्पड़ भी मारा गया। राहुल गांधी ने रितु को ‘शेरनी’ बताते हुए कहा कि वह कथित मारपीट के बावजूद डरी नहीं। हालांकि, इन आरोपों पर पुलिस का पक्ष और स्वतंत्र पुष्टि सामने आना बाकी है।

    एक अन्य NSUI कार्यकर्ता धर्मेंद्र कुमार ने भी पुलिस पर अभद्र भाषा इस्तेमाल करने और मारपीट करने का आरोप लगाया। उनका दावा है कि पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को चुनौती देते हुए कहा कि वे अपने नेताओं को बुला लें, कोई उन्हें बचाने नहीं आएगा। धर्मेंद्र ने कहा कि वे कथित कार्रवाई के बावजूद अन्याय के खिलाफ प्रदर्शन जारी रखेंगे। इन आरोपों ने हिरासत के दौरान पुलिस के व्यवहार और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में छात्रों से कहा कि वे अपने पास मौजूद वीडियो सबूत सुरक्षित रखें। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों की आवाज दबाई जा रही है और कहा कि उचित समय पर इन सबूतों का इस्तेमाल कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। राहुल ने गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी निशाने पर लिया। उनके बयान के मुताबिक, कांग्रेस इस मामले को आगे तक ले जाएगी और कथित बर्बरता को भूलने वाली नहीं है।

    यह पूरा विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा है। NSUI और कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि पुलिस ने अलग-अलग प्रदर्शन मामलों में कार्रवाई की है। अब बड़ा सवाल यह है कि हिरासत के दौरान कथित मारपीट के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी या नहीं। फिलहाल राहुल गांधी के समर्थन और NSUI कार्यकर्ताओं के आरोपों ने इस विवाद को और गरमा दिया है।

  • भाई को बचाने कूदी बहन, मां को बचाने दौड़ा बेटा… सेप्टिक टैंक ने एक-एक करके निगल लीं 4 जिंदगियां! बंगाल की इस घटना ने रुला दिया

    भाई को बचाने कूदी बहन, मां को बचाने दौड़ा बेटा… सेप्टिक टैंक ने एक-एक करके निगल लीं 4 जिंदगियां! बंगाल की इस घटना ने रुला दिया

    पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के आंतला गांव में एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ, जहां अपनों को बचाने की कोशिश ही चार लोगों की मौत की वजह बन गई। सेप्टिक टैंक में काम करते समय एक व्यक्ति अचानक अंदर गिर गया। उसे बचाने के लिए उसकी बहन दौड़ी, फिर मां को बचाने बेटा नीचे उतरा और आखिर में एक रिश्तेदार भी मदद के लिए पहुंच गया। लेकिन कुछ ही देर में चारों की जान चली गई। इस घटना ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है।

    जानकारी के मुताबिक, बदिर मल्लिक मंगलवार को अपनी बहन के घर सेप्टिक टैंक का काम करने पहुंचे थे। काम के दौरान वह अचानक टैंक के भीतर गिर गए। उन्हें मुसीबत में देखकर उनकी बहन सरजिना बीबी खुद को रोक नहीं पाईं और भाई को बचाने के लिए अंदर उतर गईं। लेकिन टैंक के भीतर हालात ऐसे थे कि वह भी बाहर नहीं निकल सकीं।

    जब मां को अंदर फंसा देखा तो उनका बेटा शेख रबिउल भी उन्हें बचाने के लिए टैंक में उतर गया। लेकिन मां-बेटे दोनों अंदर ही फंस गए। इसके बाद परिवार के एक रिश्तेदार शेख साहेब ने भी उन्हें बचाने की कोशिश की। वह भी टैंक के अंदर चले गए और बाहर नहीं निकल पाए। देखते ही देखते एक के बाद एक चार लोग हादसे का शिकार हो गए।

    स्थानीय लोगों के मुताबिक, घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर जुट गए और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और बचाव अभियान के बाद चारों के शव बाहर निकाले गए। इस हादसे में शेख अबुकलाम नाम का एक अन्य व्यक्ति भी घायल हुआ, जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए हैं।

    प्रारंभिक रिपोर्टों के मुताबिक, सेप्टिक टैंक के भीतर जहरीली गैस होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे टैंकों में ऑक्सीजन की कमी और हानिकारक गैसों के कारण कुछ ही देर में व्यक्ति बेहोश हो सकता है। सबसे खतरनाक बात यह है कि किसी को बचाने के लिए बिना सुरक्षा उपकरणों के अंदर उतरने वाला व्यक्ति भी उसी खतरे का शिकार बन सकता है। हालांकि, इस मामले में मौतों की सटीक वजह जांच के बाद स्पष्ट होगी।

    इस घटना ने एक बार फिर सेप्टिक टैंकों की सफाई और मरम्मत के दौरान सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भाई को बचाने निकली बहन, मां को बचाने उतरा बेटा और फिर मदद के लिए आगे आया रिश्तेदार—तीनों की कोशिशें एक दर्दनाक त्रासदी में बदल गईं। अब पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है, लेकिन आंतला गांव के लिए यह घटना ऐसा जख्म छोड़ गई है, जिसे भुलाना आसान नहीं होगा।

  • दिवाली की मिठाई पर महंगाई का तड़का! 6 दिन में चीनी 17% तक महंगी, ₹5,200 क्विंटल पहुंचा भाव… अब मिठाईवाले भी क्या करें?

    दिवाली की मिठाई पर महंगाई का तड़का! 6 दिन में चीनी 17% तक महंगी, ₹5,200 क्विंटल पहुंचा भाव… अब मिठाईवाले भी क्या करें?

    दिवाली आने से पहले ही चीनी ने आम लोगों की जेब पर हमला बोल दिया है। घरों में मिठाइयां बनाने की तैयारी चल रही है, हलवाइयों के यहां ऑर्डर बढ़ रहे हैं, लेकिन इसी बीच चीनी की कीमतों में ऐसा उछाल आया है कि त्योहार की मिठास फीकी पड़ने का डर है। TV9 भारतवर्ष की रिपोर्ट के मुताबिक, महज छह दिनों में चीनी के थोक दाम 13 से 17 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। अब सवाल है कि जब चीनी ही महंगी होगी, तो मिठाई सस्ती कैसे रहेगी?

    उत्तर प्रदेश में चीनी का एक्स-मिल भाव 6 अक्टूबर को 4,600 रुपये प्रति क्विंटल था, जो 12 अक्टूबर तक बढ़कर 5,200 रुपये पहुंच गया। यानी छह दिनों में करीब 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी। महाराष्ट्र में तो उछाल और भी ज्यादा रहा। वहां कीमत 4,350 रुपये से बढ़कर 5,100 रुपये प्रति क्विंटल हो गई, यानी करीब 17 प्रतिशत की तेजी। त्योहारों से पहले बाजार में इस बढ़ोतरी ने कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है।

    आखिर चीनी इतनी महंगी क्यों हो रही है? वजह है मांग और सप्लाई का बिगड़ा हिसाब। दिवाली के दौरान घरों, मिठाई की दुकानों और खाद्य कंपनियों में चीनी की खपत बढ़ जाती है, लेकिन बाजार में पर्याप्त माल नहीं पहुंच रहा। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे बड़े उत्पादक राज्यों में गन्ने की नई फसल की पेराई शुरू होने में देरी हो रही है। नई चीनी बाजार में आने तक पुरानी सप्लाई पर ही दबाव बना हुआ है।

    सरकार ने कीमतों पर लगाम लगाने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी है। इसके अलावा, बाजार में अतिरिक्त तीन लाख टन चीनी जारी करने और डीलरों के स्टॉक पर सख्ती जैसे कदम भी उठाए गए हैं। थोक उपभोक्ताओं की खुले बाजार से खरीद पर भी पाबंदी लगाई गई है। लेकिन इन उपायों के बावजूद फिलहाल कीमतों में राहत नजर नहीं आ रही। सरकार को आशंका है कि दिवाली से पहले दाम में एक और उछाल आ सकता है।

    इधर, गन्ना किसान भी अपनी मांग लेकर मैदान में हैं। उनका कहना है कि उत्पादन लागत बढ़ गई है, इसलिए चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) 31 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलो किया जाना चाहिए। 12 अक्टूबर को दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई। सरकार ने किसानों की चिंताओं पर चर्चा के लिए एक सप्ताह के भीतर उच्च स्तरीय संयुक्त समिति बनाने का फैसला किया है। अगर कीमतों से जुड़ी नीतियों में बदलाव होता है, तो उसका असर आगे बाजार पर भी पड़ सकता है।

    अब आम आदमी के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि दिवाली पर मिठाई का बजट कितना बढ़ेगा। चीनी की थोक कीमतों में तेजी से मिठाई बनाने वालों की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर मिठाइयों के दाम पर पड़ने की आशंका है। हालांकि, हर दुकान पर कीमत कितनी बढ़ेगी, यह स्थानीय बाजार और बाकी सामग्री की लागत पर निर्भर करेगा। फिलहाल त्योहार की तैयारी के बीच चीनी के बढ़ते भाव ने एक बात साफ कर दी है—इस बार मिठास खरीदने से पहले जेब का हिसाब लगाना पड़ सकता है।

  • जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराया, बदले में सौरव-रांका को मिली जेल! दिपके भड़के—‘क्या मोदी राज में तिरंगा लहराना पाप है?’

    जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराया, बदले में सौरव-रांका को मिली जेल! दिपके भड़के—‘क्या मोदी राज में तिरंगा लहराना पाप है?’

    दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने पहुंचे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं पर पुलिस की कार्रवाई ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया, जबकि अजिंक्य शिंदे को निजी बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया। इसके बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर उनके साथियों का गुनाह क्या था?

    दिपके ने कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए पूछा, “क्या मोदी राज में तिरंगा लहराना पाप है?” उन्होंने कहा कि अगर सरकार को आपातकाल जैसे हालात लागू करने हैं, तो उसे खुलकर घोषणा करनी चाहिए। दिपके का आरोप है कि उनके साथियों को जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने और विरोध प्रदर्शन करने के लिए जेल भेजा गया है। हालांकि, यह उनका राजनीतिक आरोप है, जबकि पुलिस ने कार्रवाई के पीछे कानूनी उल्लंघन का हवाला दिया है।

    दिल्ली पुलिस के मुताबिक, मंगलवार को सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे अपने समर्थकों के साथ बैरिकेडिंग पार करके जंतर-मंतर के प्रतिबंधित क्षेत्र में दाखिल हुए थे। वहां BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू होने की बात कही गई है। पुलिस ने तीनों को हिरासत में लिया और बाद में एहतियातन गिरफ्तार कर मंदिर मार्ग थाने में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया।

    पुलिस ने अदालत में दलील दी कि सौरव दास और आशुतोष रांका को कुछ दिन पहले भी हिरासत में लिया गया था और शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरने की शर्त पर छोड़ा गया था। पुलिस का आरोप है कि दोनों ने दोबारा नियमों का उल्लंघन किया और शांति भंग होने की आशंका बनी हुई थी। इसी आधार पर मजिस्ट्रेट ने दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। अजिंक्य शिंदे को निजी बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया।

    CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि नेताओं को देर रात तक वकीलों से मिलने नहीं दिया गया और उन्हें सुबह करीब तीन बजे निजी वैन से पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने लाया गया। उन्होंने सोशल मीडिया पर गिरफ्तारी की जानकारी देते हुए इसे अनुचित कार्रवाई बताया। दूसरी तरफ, पुलिस ने नेताओं पर प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने, बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने और सरकारी अधिकारी के काम में बाधा डालने जैसे आरोप लगाए हैं।

    यह पूरा विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच सामने आया है। जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद CJP ने इस फैसले का विरोध किया था। अब सवाल यह है कि क्या इस कार्रवाई के बाद विरोध और तेज होगा या मामला अदालत में आगे बढ़ेगा? फिलहाल दो नेताओं को जेल भेजे जाने और दिपके के तीखे बयान ने राजनीतिक बहस को और गर्म कर दिया है।

  • जज ने पूछा—पहले भी क्राइम किया है? साहिल बोला ‘नहीं’! मुस्कान-साहिल की सजा पर आज फैसला, सौरभ के परिवार ने कहा— फांसी से कम मंजूर नहीं

    जज ने पूछा—पहले भी क्राइम किया है? साहिल बोला ‘नहीं’! मुस्कान-साहिल की सजा पर आज फैसला, सौरभ के परिवार ने कहा— फांसी से कम मंजूर नहीं

    मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में आज सजा का दिन है। सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जा चुके मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला की सजा पर अदालत में सुनवाई शुरू हो गई है। 14 अक्टूबर को कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दोनों की पेशी हुई। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि अदालत दोनों को फांसी की सजा सुनाती है या उम्रकैद का फैसला आता है।

    सुनवाई के दौरान जज ने साहिल से सीधा सवाल किया कि क्या उसने पहले भी कोई अपराध किया है? इस पर साहिल ने पुराने आपराधिक रिकॉर्ड से इनकार कर दिया। जब अदालत ने उसे सजा के संबंध में अपनी बात रखने का मौका दिया, तो उसने कुछ कहने से इनकार कर दिया। अब अदालत दोनों दोषियों को दोबारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जोड़कर सजा सुनाने की प्रक्रिया पूरी करेगी।

    उधर, सौरभ राजपूत के परिवार की नजरें भी अदालत के फैसले पर टिकी हैं। सजा के ऐलान से पहले परिवार ने पूजा-पाठ किया और दोनों दोषियों के लिए फांसी की मांग दोहराई। सौरभ के भाई का कहना है कि जिस बेरहमी से उनके भाई की हत्या कर शव को नीले ड्रम में छिपाया गया, उसके लिए मृत्युदंड ही उचित सजा होगी। परिवार ने साफ कहा है कि अगर जिला अदालत से उनकी उम्मीद के मुताबिक फैसला नहीं आया, तो वे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ेंगे।

    यह मामला मार्च 2025 में सामने आया था, जब मर्चेंट नेवी अधिकारी सौरभ राजपूत की हत्या कर उनके शव के टुकड़े नीले ड्रम में छिपा दिए गए थे। पुलिस जांच के बाद उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को गिरफ्तार किया गया। अदालत ने 30 सितंबर 2026 को दोनों को हत्या और सबूत मिटाने के मामले में दोषी ठहराया था। इसके बाद सजा पर अपनी दलील रखने के लिए उन्हें समय दिया गया था।

    इस केस की सुनवाई के दौरान 126 तारीखों पर कार्यवाही हुई और अभियोजन पक्ष ने 22 से अधिक गवाह पेश किए। पुलिस ने मामले में परिस्थितिजन्य और फॉरेंसिक सबूतों के आधार पर पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने दोनों के लिए मृत्युदंड की मांग की है, जबकि अदालत को सजा तय करते समय अपराध की गंभीरता और बचाव पक्ष की दलीलों पर भी विचार करना होगा।

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नीले ड्रम कांड में मुस्कान और साहिल को फांसी होगी या उम्रकैद? सौरभ का परिवार फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहा है, जबकि अदालत सजा तय करने की प्रक्रिया में है। रिपोर्ट के मुताबिक, फैसला सुबह 11:30 बजे के बाद या लंच के बाद सुनाया जा सकता है। जैसे ही अदालत का अंतिम आदेश आएगा, इस चर्चित मामले में अगला बड़ा अपडेट सामने होगा।

  • महिला के ऊपर लेटा, मुंह दबाया… फिर भी ‘रेप की कोशिश’ का आरोप नहीं माना! पटना हाईकोर्ट के फैसले ने छेड़ी नई बहस

    महिला के ऊपर लेटा, मुंह दबाया… फिर भी ‘रेप की कोशिश’ का आरोप नहीं माना! पटना हाईकोर्ट के फैसले ने छेड़ी नई बहस

    बिहार के बेगूसराय में करीब 16 साल पुराने मामले पर पटना हाईकोर्ट के फैसले ने एक बार फिर गंभीर बहस छेड़ दी है। अदालत ने कहा कि महिला के ऊपर लेटना और उसका मुंह दबाना अपने आप में दुष्कर्म की कोशिश साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने आरोपी की हरकतों को अपराध माना और महिला की मर्यादा भंग करने के मामले में उसकी दोषसिद्धि बरकरार रखी। फैसले के बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर अदालत ने दुष्कर्म के प्रयास का आरोप क्यों हटाया?

    यह मामला 8 फरवरी 2010 की रात का है। बेगूसराय में एक विधवा महिला अपने बच्चे के साथ घर में सो रही थी। आरोप था कि उसी गांव का एक अधेड़ व्यक्ति गलत नीयत से उसके घर में घुसा, जलता हुआ दीया बुझाया और महिला के ऊपर लेट गया। महिला ने शोर मचाया तो आरोपी ने उसका मुंह दबा दिया। आवाज सुनकर आसपास के लोग पहुंचे और आरोपी को पकड़ लिया। इसके बाद उसकी पिटाई भी की गई।

    महिला ने पहले गांव की पंचायत के जरिए मामला सुलझाने की कोशिश की, लेकिन आरोपी के नहीं पहुंचने पर उसने अदालत का दरवाजा खटखटाया। शिकायत के बाद पुलिस ने केस दर्ज किया और जांच पूरी कर दुष्कर्म की कोशिश का आरोप लगाया। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए चार साल छह महीने की सश्रम कैद सुनाई थी। आरोपी ने इस फैसले को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी।

    8 अक्टूबर 2026 को जस्टिस संदीप कुमार की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि दुष्कर्म की कोशिश साबित करने के लिए आरोपी की गलत नीयत के साथ ऐसे ठोस कृत्य भी साबित होने चाहिए, जो अपराध को उस दिशा में आगे बढ़ाते हों। अदालत के मुताबिक, इस मामले में महिला के ऊपर लेटना और उसका मुंह दबाना उसकी मर्यादा भंग करने वाली हरकतें थीं, लेकिन उपलब्ध सबूतों से दुष्कर्म के प्रयास का आरोप साबित नहीं हुआ। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि कपड़े उतारने या दुष्कर्म की दिशा में आगे बढ़ने का कोई ठोस सबूत नहीं था।

    हाईकोर्ट ने दुष्कर्म की कोशिश के आरोप में दी गई सजा रद्द कर दी, लेकिन महिला की मर्यादा भंग करने और घर में अनधिकृत रूप से घुसने के अपराध में दोषसिद्धि बरकरार रखी। आरोपी की सजा पहले से जेल में बिताई गई अवधि तक सीमित कर दी गई और उस पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। अदालत ने महिला को मुआवजा देने का भी आदेश दिया। यानी आरोपी को पूरी तरह बरी नहीं किया गया, बल्कि अपराध की कानूनी श्रेणी और सजा में बदलाव किया गया।

    इस फैसले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यौन अपराधों में आरोपी की मंशा, उसके कृत्य और उपलब्ध सबूतों को अदालत किस तरह परखती है। ऐसे मामलों में कानूनी कसौटी तय करना अदालत का काम है, लेकिन फैसलों की व्याख्या पर सार्वजनिक बहस भी होती है। इस मामले में अदालत ने आरोपी की हरकतों को अपराध माना, मगर दुष्कर्म की कोशिश का आरोप साबित नहीं माना। अब यही कानूनी अंतर चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

  • दिल्ली में 5 मौतों की फर्जी खबर उड़ाई, पाकिस्तान से चल रहे अकाउंट्स पर पुलिस का शिकंजा! 500 पोस्ट गायब, 4 FIR दर्ज

    दिल्ली में 5 मौतों की फर्जी खबर उड़ाई, पाकिस्तान से चल रहे अकाउंट्स पर पुलिस का शिकंजा! 500 पोस्ट गायब, 4 FIR दर्ज

    दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पांच लोगों की मौत होने का दावा सोशल मीडिया पर फैलाया गया, लेकिन दिल्ली पुलिस ने इसे अफवाह बताया है। अब इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। TV9 भारतवर्ष की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 500 सोशल मीडिया पोस्ट हटाए गए हैं और चार FIR दर्ज की गई हैं। जांच में पाकिस्तान से संचालित होने के संदेह वाले कई अकाउंट्स भी सामने आए हैं। यानी सड़क पर प्रदर्शन के बीच सोशल मीडिया पर भी अलग ही खेल चलने का आरोप है।

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक, 10 अक्टूबर को कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स ने दावा किया था कि दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान कई लोगों की मौत हो गई। कुछ पोस्ट में पुलिस फायरिंग में पांच लोगों के मारे जाने की बात भी कही गई। पुलिस ने इन दावों को भ्रामक बताते हुए लोगों को ऐसी खबरों पर भरोसा नहीं करने की चेतावनी दी। फिलहाल इन पोस्ट के पीछे मौजूद लोगों और उनके मकसद की जांच की जा रही है।

    पुलिस का आरोप है कि कुछ अकाउंट्स पाकिस्तान से संचालित हो रहे थे और भारतीय बनकर वीडियो तथा भ्रामक जानकारी साझा कर रहे थे। अधिकारियों के मुताबिक, ऐसे पोस्ट माहौल बिगाड़ सकते थे और लोगों को भड़काने का प्रयास कर सकते थे। हालांकि, किसी अकाउंट के पीछे किसकी भूमिका थी, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकलेगा।

    इधर, दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर निगरानी बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 500 पोस्ट हटाने के अलावा लगभग 100 सोशल मीडिया हैंडल्स को भी निष्क्रिय कराया गया है। पुलिस अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर ऐसी सामग्री की पहचान कर रही है, जिसमें कथित तौर पर फर्जी वीडियो, गलत दावे या अशांति फैलाने वाली जानकारी साझा की गई हो।

    मामला सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है। INDIA गठबंधन के नेताओं के सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च के दौरान कथित नियम उल्लंघन को लेकर भी FIR दर्ज की गई हैं। पुलिस ने बैरिकेड तोड़ने और सड़कों पर ग्रैफिटी बनाने जैसी घटनाओं का जिक्र किया है। इन मामलों में आरोपों की पुष्टि कानूनी प्रक्रिया के दौरान होगी। यानी प्रदर्शन और उससे जुड़ी ऑनलाइन गतिविधियां, दोनों पुलिस की जांच के दायरे में हैं।

    दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वायरल वीडियो या सनसनीखेज पोस्ट को बिना जांचे आगे न बढ़ाएं। खासकर मौत, गोलीबारी या हिंसा जैसे गंभीर दावों की पुष्टि आधिकारिक स्रोतों से करना जरूरी है। फिलहाल 500 पोस्ट हटाए जाने और चार FIR की कार्रवाई ने मामला गरमा दिया है। अब जांच में यह पता लगाना अहम होगा कि अफवाहें किसने फैलाईं, उनका स्रोत क्या था और क्या इसके पीछे कोई संगठित अभियान काम कर रहा था।

  • साल 3311 से लौटने का दावा, दिखाईं हवा में उड़ती सिटी और अंबानी का घर! ‘टाइम ट्रैवलर’ की कहानी निकली ऐसी, इंटरनेट ने खोल दी पोल

    साल 3311 से लौटने का दावा, दिखाईं हवा में उड़ती सिटी और अंबानी का घर! ‘टाइम ट्रैवलर’ की कहानी निकली ऐसी, इंटरनेट ने खोल दी पोल

    सोचिए, कोई शख्स दावा करे कि वह आज से करीब 1300 साल आगे यानी साल 3311 की दुनिया देखकर लौटा है! ऊपर से सबूत के नाम पर ऐसी तस्वीरें दिखाए, जिनमें शहर बादलों के बीच तैरते नजर आएं। सुनने में किसी साइंस-फिक्शन फिल्म की कहानी लगती है, लेकिन सोशल मीडिया पर इन दिनों यही दावा चर्चा में है। एक गुमनाम शख्स ने खुद को टाइम ट्रैवलर बताते हुए भविष्य की दुनिया की तस्वीरें शेयर कीं और इंटरनेट पर हलचल मचा दी।

    डेली स्टार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए TV9 भारतवर्ष ने बताया कि इस शख्स ने दावा किया कि उसने क्वांटम तकनीक की मदद से समय की सीमाएं पार कीं। उसने अपने दावे के समर्थन में तीन तस्वीरें पेश कीं। इनमें एक तस्वीर में बादलों के ऊपर हवा में तैरता शहर दिखाया गया, जबकि दूसरी तस्वीर में भविष्य के एक आलीशान घर जैसी इमारत नजर आई। तीसरी तस्वीर में भी भविष्य की तकनीक और उड़ने वाली मशीनों जैसा नजारा दिखाने की कोशिश की गई।

    लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया, जब इंटरनेट यूजर्स ने तस्वीरों की पड़ताल शुरू कर दी। जिस भविष्य की दुनिया को देखकर लोग हैरान हो रहे थे, उसकी तस्वीरों पर ही सवाल उठने लगे। सोशल मीडिया पर लोगों ने दावा किया कि तस्वीरें असली नहीं, बल्कि डिजिटल एडिटिंग और मॉर्फिंग से तैयार की गई हैं। यानी टाइम मशीन से लौटने का दावा तो दूर, तस्वीरों की सच्चाई ही संदिग्ध निकलने लगी।

    रिपोर्ट के मुताबिक, हवा में तैरते शहर वाली तस्वीर असल में एक सामान्य पहाड़ी घाटी की तस्वीर पर डिजिटल बदलाव करके बनाई गई थी। उसमें शहर को इस तरह जोड़ा गया, मानो वह बादलों के बीच उड़ रहा हो। इस खुलासे के बाद कथित टाइम ट्रैवलर के दावे की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे। जिस तस्वीर को भविष्य का सबूत बताया जा रहा था, वह एडिटिंग का कमाल निकली।

    इतना ही नहीं, बाकी तस्वीरों को लेकर भी संदेह जताया गया। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों के आधार पर किसी के साल 3311 से लौटने की पुष्टि नहीं होती। अब तक ऐसा कोई विश्वसनीय वैज्ञानिक सबूत सामने नहीं आया है, जो इस शख्स के टाइम ट्रैवल करने के दावे को सही साबित करे। इसलिए इस कहानी को सच मानने के बजाय वायरल इंटरनेट दावे के तौर पर देखना ज्यादा सही होगा।

    अब सवाल यही है कि आखिर लोग ऐसी कहानियों पर यकीन क्यों कर लेते हैं? भविष्य की दुनिया कैसी होगी, यह जानने की उत्सुकता हर किसी को होती है। लेकिन जब सबूत के नाम पर एडिट की गई तस्वीरें सामने आएं, तो टाइम ट्रैवल का दावा भी हवा हो जाता है। फिलहाल साल 3311 से लौटने वाले इस कथित यात्री की कहानी ने इंटरनेट पर सनसनी जरूर फैलाई, लेकिन भविष्य की सैर कराने के बजाय उसकी तस्वीरों ने ही उसकी पोल खोल दी।

  • ननदोई के प्यार में पति ही बन गया ‘कांटा’! पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर रच डाली हत्या की साजिश, 12 घंटे में पुलिस ने खोल दी पोल

    ननदोई के प्यार में पति ही बन गया ‘कांटा’! पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर रच डाली हत्या की साजिश, 12 घंटे में पुलिस ने खोल दी पोल

    उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में रिश्तों को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। यहां पत्नी का अपने ही मौसेरे ननदोई के साथ कथित प्रेम प्रसंग चल रहा था। जब पति अंशुल को इस रिश्ते की भनक लगी तो घर में झगड़े शुरू हो गए। आरोप है कि इसके बाद पत्नी निशा ने अपने प्रेमी पप्पू उर्फ गंगा भगत के साथ मिलकर पति को रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली। मामला खोड़ा थाना क्षेत्र की वंदना विहार कॉलोनी का है।

    पुलिस के मुताबिक, अंशुल एक एक्सपोर्ट कंपनी में सिलाई कारीगर था। निशा और पप्पू के बीच करीब दो साल से प्रेम संबंध होने की बात सामने आई है। अंशुल ने जब इस रिश्ते का विरोध किया तो दोनों के बीच विवाद बढ़ने लगा। आरोप है कि पति की मौजूदगी उनके प्रेम संबंध में बाधा बन रही थी, इसलिए उसे खत्म करने की योजना बनाई गई। प्यार की कहानी में पति को ही सबसे बड़ा रोड़ा मानने का आरोप अब इस केस का सबसे चौंकाने वाला पहलू बन गया है।

    पुलिस के अनुसार, निशा ने कथित तौर पर पप्पू को हत्या के लिए तैयार किया। योजना बनाई गई कि जिस दिन अंशुल की छुट्टी होगी और वह घर में अकेला होगा, उसी दिन वारदात को अंजाम दिया जाएगा। पप्पू ने कथित तौर पर अपने गांव जाकर 315 बोर का तमंचा खरीदा। इसके बाद दोनों ने मौके और समय को लेकर योजना बनाई, ताकि किसी को शक न हो।

    रविवार को अंशुल घर में मौजूद था, जबकि उसकी पत्नी निशा कंपनी चली गई थी। इसी दौरान पुलिस के मुताबिक, पप्पू चुपके से घर में दाखिल हुआ और अंशुल को गोली मार दी। गोली लगने से अंशुल की मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। शुरुआत में मामला हत्या का था, लेकिन जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को कथित प्रेम संबंध और साजिश की कड़ियां मिलने लगीं।

    एसीपी इंदिरापुरम सूर्यबली मौर्य के मुताबिक, पुलिस ने करीब 12 घंटे के भीतर मामले का खुलासा करते हुए निशा और पप्पू को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में दोनों पर हत्या की साजिश में शामिल होने के आरोप सामने आए। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। हालांकि, मामले में अंतिम दोषसिद्धि अदालत में सबूतों और सुनवाई के आधार पर ही तय होगी।

    फिलहाल इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि रिश्तों में बढ़ते विवाद को किस हद तक ले जाया जा सकता है। पुलिस का आरोप है कि अंशुल ने जिस रिश्ते का विरोध किया, उसी वजह से उसकी हत्या की साजिश रची गई। जिस घर में साथ निभाने का वादा था, वहीं अब हत्या के आरोपों की कहानी सामने आई है। अब आगे अदालत में यह तय होगा कि पुलिस की जांच और जुटाए गए सबूत आरोपियों के खिलाफ कितने मजबूत साबित होते हैं।