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  • ‘फांसी के बाद भी नहीं मरा रंगा…’ पूर्व जेलर सुनील गुप्ता ने सुनाया तिहाड़ का सबसे खौफनाक किस्सा

    ‘फांसी के बाद भी नहीं मरा रंगा…’ पूर्व जेलर सुनील गुप्ता ने सुनाया तिहाड़ का सबसे खौफनाक किस्सा

    तिहाड़ जेल के पूर्व जेलर सुनील गुप्ता ने कुख्यात अपराधी रंगा की फांसी से जुड़ा एक ऐसा किस्सा सुनाया, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। उनके मुताबिक, फांसी दिए जाने के बाद भी रंगा की मौत तुरंत नहीं हुई और स्थिति सामान्य होने में काफी समय लगा।

    सुनील गुप्ता ने बताया कि नियमों के तहत फांसी के बाद डॉक्टरों की टीम ने जांच की, लेकिन रंगा के मामले में प्रक्रिया अपेक्षा से ज्यादा लंबी चली। उन्होंने दावा किया कि करीब दो घंटे बाद जाकर उसकी मौत की पूरी तरह पुष्टि हो सकी।

    पूर्व जेलर के अनुसार, इस दौरान जेल प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। डॉक्टर लगातार निगरानी करते रहे और कानूनी प्रक्रिया के मुताबिक सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी की गईं। जब तक चिकित्सकीय पुष्टि नहीं हुई, तब तक आगे की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई।

    सुनील गुप्ता ने यह भी कहा कि मौत की सजा की पूरी प्रक्रिया बेहद संवेदनशील और सख्त नियमों के तहत होती है। इसमें किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं की जाती और हर कदम कानून के अनुसार उठाया जाता है।

    रंगा और बिल्ला का मामला देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में गिना जाता है। दोनों को 1978 के चर्चित गीता और संजय चोपड़ा अपहरण एवं हत्या मामले में दोषी ठहराया गया था और बाद में तिहाड़ जेल में फांसी दी गई थी।

    पूर्व जेलर का यह खुलासा अब फिर चर्चा में है। हालांकि यह उनका व्यक्तिगत अनुभव और वर्णन है, जिसे उन्होंने एक इंटरव्यू में साझा किया। इस बयान के बाद तिहाड़ जेल और उस ऐतिहासिक मामले को लेकर लोगों की दिलचस्पी एक बार फिर बढ़ गई है।

  • 6 घंटे तक बंद कमरे में चली मीटिंग! प्रशांत किशोर ने पवार परिवार के साथ आखिर क्या पकाई सियासी खिचड़ी?

    6 घंटे तक बंद कमरे में चली मीटिंग! प्रशांत किशोर ने पवार परिवार के साथ आखिर क्या पकाई सियासी खिचड़ी?

    बिहार उपचुनाव में बड़ी जीत के बाद चुनावी रणनीतिकार और जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की महाराष्ट्र में हुई एक बैठक ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाएं छेड़ दी हैं। मुंबई में उन्होंने एनसीपी नेता सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ पवार के साथ करीब 6 घंटे तक बंद कमरे में बैठक की। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं।

    बताया जा रहा है कि यह बैठक मुंबई स्थित देवगिरी बंगले में हुई। बैठक में महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, एनसीपी की रणनीति और आने वाले चुनावों को लेकर लंबी चर्चा हुई। हालांकि बैठक के बाद किसी भी पक्ष ने आधिकारिक तौर पर बातचीत का एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया।

    यह पहली बार नहीं है जब प्रशांत किशोर और पवार परिवार के बीच मुलाकात हुई हो। इससे पहले भी दोनों पक्षों की बैठकें चर्चा में रही हैं। ऐसे में लगातार हो रही इन मुलाकातों ने यह अटकलें और तेज कर दी हैं कि भविष्य में प्रशांत किशोर किसी रणनीतिक भूमिका में नजर आ सकते हैं।

    बैठक ऐसे समय हुई है जब बिहार में हालिया चुनावी सफलता के बाद प्रशांत किशोर की राजनीतिक सक्रियता बढ़ी हुई है। दूसरी ओर, महाराष्ट्र में भी राजनीतिक समीकरण लगातार बदल रहे हैं, इसलिए इस मुलाकात को सामान्य शिष्टाचार भेंट से कहीं अधिक माना जा रहा है।

    हालांकि अब तक न तो प्रशांत किशोर और न ही सुनेत्रा पवार या पार्थ पवार ने बैठक के नतीजों पर कोई आधिकारिक बयान दिया है। इसी वजह से राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन फिलहाल किसी भी बड़े राजनीतिक फैसले की पुष्टि नहीं हुई है।

    फिलहाल सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में इस मुलाकात का कोई राजनीतिक असर देखने को मिलता है या नहीं। अगर आगे कोई बड़ा फैसला सामने आता है, तो महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।

  • ‘घर में घुस आए YouTubers…’ सौरभ दास के आरोप से मचा बवाल, शिकायत के बाद मिली पुलिस सुरक्षा

    ‘घर में घुस आए YouTubers…’ सौरभ दास के आरोप से मचा बवाल, शिकायत के बाद मिली पुलिस सुरक्षा

    दिल्ली में CJP के प्रवक्ता सौरभ दास के घर के बाहर पुलिस सुरक्षा तैनात कर दी गई है। यह कदम तब उठाया गया जब उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ यूट्यूबर्स और अन्य लोग उनके घर के परिसर में घुस आए, अंदर की वीडियो बनाई और सोशल मीडिया पर उनका पता सार्वजनिक कर दिया, जिससे उनके परिवार की सुरक्षा खतरे में पड़ गई।

    सौरभ दास ने अपनी शिकायत में कहा कि घटना के समय वह महाराष्ट्र में थे। उनके मुताबिक, 15 से 20 लोग उनके घर के बाहर जमा हुए और कुछ लोगों ने कथित तौर पर बिना अनुमति परिसर में प्रवेश कर वीडियो रिकॉर्ड किए। उनका कहना है कि इससे उनकी निजता और सुरक्षा दोनों प्रभावित हुई हैं।

    शिकायत मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने एहतियात के तौर पर उनके घर के बाहर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती कर दी। हालांकि, खबर लिखे जाने तक इस मामले में FIR दर्ज नहीं की गई थी। पुलिस का कहना है कि शिकायत की जांच की जा रही है और तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है।

    सौरभ दास ने आरोप लगाया कि वीडियो में उनके घर का लेआउट और सुरक्षा व्यवस्था भी दिखाई गई, जिससे असामाजिक तत्वों को मदद मिल सकती है। उन्होंने इसे अपने परिवार की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

    इस मामले की गूंज संसद तक भी पहुंची। कुछ विपक्षी नेताओं ने इसे निजता और सुरक्षा का गंभीर मुद्दा बताया, जबकि सोशल मीडिया पर भी घटना को लेकर तीखी बहस छिड़ गई।

    फिलहाल दिल्ली पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि शिकायत और उपलब्ध वीडियो की जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।

  • स्वास्तिक के दोनों तरफ आखिर क्यों खींची जाती हैं 2-2 सीधी रेखाएं? 99% लोग नहीं जानते इसका असली मतलब

    स्वास्तिक के दोनों तरफ आखिर क्यों खींची जाती हैं 2-2 सीधी रेखाएं? 99% लोग नहीं जानते इसका असली मतलब

    हिंदू धर्म में स्वास्तिक को सबसे शुभ प्रतीकों में से एक माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ, गृह प्रवेश या नए काम की शुरुआत से पहले स्वास्तिक बनाया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसके दोनों ओर 2-2 सीधी रेखाएं क्यों खींची जाती हैं? इसके पीछे भी एक खास धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्वास्तिक के दोनों ओर बनाई जाने वाली दो-दो खड़ी रेखाएं धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष यानी जीवन के चार पुरुषार्थों का प्रतीक मानी जाती हैं। माना जाता है कि स्वास्तिक के साथ इन रेखाओं को बनाने से जीवन में संतुलन, समृद्धि और शुभता का आशीर्वाद मिलता है।

    मान्यता है कि स्वास्तिक भगवान गणेश और मां लक्ष्मी का प्रिय प्रतीक है। इसलिए दीपावली, गृह प्रवेश, विवाह और अन्य मांगलिक अवसरों पर इसे विशेष रूप से बनाया जाता है। दोनों ओर की रेखाएं शुभ ऊर्जा के प्रवाह और सकारात्मकता का भी प्रतीक मानी जाती हैं।

    धार्मिक परंपरा के अनुसार, स्वास्तिक हमेशा साफ-सुथरे स्थान पर रोली, हल्दी, सिंदूर या कुमकुम से बनाना शुभ माना जाता है। इसके दोनों ओर बनी रेखाएं इस बात का संकेत देती हैं कि जीवन के चारों पुरुषार्थ संतुलित रहें और व्यक्ति को सफलता के साथ आध्यात्मिक उन्नति भी मिले।

    ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि सही विधि से बनाया गया स्वास्तिक घर में सुख-समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और मंगल का वातावरण बनाए रखने में सहायक माना जाता है। हालांकि ये मान्यताएं आस्था पर आधारित हैं।

    डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है। अलग-अलग परंपराओं और संप्रदायों में इसकी व्याख्या भिन्न हो सकती है।

  • Jio यूजर्स की निकल पड़ी! ₹319 और ₹339 के रिचार्ज में मिला ऐसा फायदा, 28 दिन वाला झंझट हुआ खत्म

    Jio यूजर्स की निकल पड़ी! ₹319 और ₹339 के रिचार्ज में मिला ऐसा फायदा, 28 दिन वाला झंझट हुआ खत्म

    रिलायंस जियो ने अपने करोड़ों प्रीपेड ग्राहकों के लिए बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने ₹319 और ₹339 वाले दो नए प्रीपेड प्लान लॉन्च किए हैं, जिनकी सबसे बड़ी खासियत Calendar Month Validity है। यानी अब रिचार्ज 28 दिन नहीं, बल्कि पूरे कैलेंडर महीने तक चलेगा। इससे यूजर्स को बार-बार रिचार्ज कराने की परेशानी नहीं होगी।

    ₹319 वाले प्लान में यूजर्स को रोज 1.5GB हाई-स्पीड डेटा, अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग और प्रतिदिन 100 SMS मिलते हैं। इसके साथ JioTV, JioCinema और JioCloud जैसे ऐप्स का भी एक्सेस दिया जाता है। यह प्लान उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प है जो रोजाना सामान्य डेटा इस्तेमाल करते हैं।

    ₹339 वाले प्लान में भी प्रतिदिन 1.5GB डेटा, अनलिमिटेड कॉलिंग और 100 SMS मिलते हैं। दोनों प्लान्स की सबसे बड़ी खासियत उनकी Calendar Month Validity है। यानी अगर आपने महीने की किसी भी तारीख को रिचार्ज कराया, तो वैलिडिटी उसी कैलेंडर महीने के हिसाब से मिलेगी, न कि केवल 28 दिनों की।

    कंपनी का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य यूजर्स को ज्यादा सुविधा देना है। अब हर महीने अलग-अलग तारीख याद रखकर रिचार्ज करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे रिचार्ज मैनेज करना आसान होगा और कई यूजर्स को अतिरिक्त वैलिडिटी का भी फायदा मिल सकता है।

    अगर आप रोज करीब 1.5GB डेटा इस्तेमाल करते हैं और अनलिमिटेड कॉलिंग के साथ लंबी वैलिडिटी चाहते हैं, तो ₹319 और ₹339 दोनों प्लान अच्छे विकल्प साबित हो सकते हैं। अपनी जरूरत और मिलने वाले अतिरिक्त बेनिफिट्स के हिसाब से इनमें से किसी भी प्लान का चुनाव किया जा सकता है।

    फिलहाल Jio के ये नए प्लान चर्चा में हैं, क्योंकि Calendar Month Validity की सुविधा पहले सभी प्रीपेड प्लान्स में उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में जिन यूजर्स को 28 दिन वाले रिचार्ज से परेशानी होती थी, उनके लिए ये प्लान काफी फायदेमंद साबित हो सकते हैं।

  • 28 साल तक पुलिस को देता रहा चकमा! ‘डॉ. झटका’ बनकर जीता रहा नई जिंदगी, आखिर ऐसे चढ़ा कानून के हत्थे

    28 साल तक पुलिस को देता रहा चकमा! ‘डॉ. झटका’ बनकर जीता रहा नई जिंदगी, आखिर ऐसे चढ़ा कानून के हत्थे

    करीब 28 साल तक पुलिस की आंखों में धूल झोंकने वाला हरियाणा पुलिसकर्मी की हत्या का आरोपी आखिरकार गिरफ्तार हो गया। राजिंदर बैरागी उर्फ ‘डॉ. झटका’ नाम बदलकर मध्य प्रदेश में नई पहचान के साथ रह रहा था। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कई राज्यों में चली लंबी जांच के बाद उसे दबोच लिया।

    पुलिस के मुताबिक, राजिंदर बैरागी 1998 में हरियाणा के सोनीपत में एक शादी समारोह के दौरान हुई फायरिंग में पुलिसकर्मी जय भगवान की हत्या के मामले में आरोपी था। गिरफ्तारी के बाद वह 1999 में पुलिस हिरासत से हथकड़ी लगे होने के बावजूद फरार हो गया था। तभी से पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी।

    फरारी के दौरान उसने अपनी पहचान बदल ली। पहले महाराष्ट्र में कुछ समय तक रहा और बाद में मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के मुंगावली में बस गया। वहां उसने राजेंद्र सिंह यादव नाम से आधार, पैन, वोटर आईडी और दूसरे दस्तावेज बनवा लिए। बिना पंजीकरण के इलाज करने लगा, जिसके कारण लोग उसे ‘डॉ. झटका’ कहने लगे। उसने शादी की, परिवार बसाया और प्रॉपर्टी के कारोबार से भी जुड़ गया।

    दिल्ली पुलिस ने लंबे समय से फरार घोषित अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया। तकनीकी निगरानी, डिजिटल सुराग और मुखबिरों की मदद से पुलिस उसकी नई पहचान तक पहुंची। पहचान पक्की होने के बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने मुंगावली में छापा मारकर उसे गिरफ्तार कर लिया।

    पूछताछ में यह भी सामने आया कि उसके खिलाफ सिर्फ हत्या ही नहीं, बल्कि दिल्ली और हरियाणा में हत्या के प्रयास समेत कई अन्य आपराधिक मामले भी दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि अब उससे अन्य मामलों में भी पूछताछ की जा रही है और उसके पुराने नेटवर्क की जांच जारी है।

    करीब तीन दशक तक फरार रहने के बाद हुई यह गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस की बड़ी कामयाबी मानी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि चाहे अपराधी कितने भी साल तक छिपा रहे, कानून की पकड़ से हमेशा नहीं बच सकता।

  • NEET पेपर लीक का सबसे बड़ा राज खुला! सवाल याद किए, चिट बनाई… फिर ऐसे बेच दिया करोड़ों का पेपर

    NEET पेपर लीक का सबसे बड़ा राज खुला! सवाल याद किए, चिट बनाई… फिर ऐसे बेच दिया करोड़ों का पेपर

    NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI की चार्जशीट ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस पूरे रैकेट को बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया, ताकि किसी तरह का डिजिटल सबूत न बचे। इसके लिए कथित तौर पर NTA से जुड़े विषय विशेषज्ञों और बिचौलियों का नेटवर्क इस्तेमाल किया गया।

    CBI के अनुसार, पेपर सीधे मोबाइल या सोशल मीडिया पर भेजने के बजाय पहले उसे याद किया गया। इसके बाद सवालों को छोटी-छोटी पर्चियों पर लिखा गया और कुछ किताबों पर विशेष निशान लगाकर जानकारी आगे पहुंचाई गई। इसी तरीके से उम्मीदवारों तक सवाल और जवाब पहुंचाने की कोशिश की गई।

    जांच में यह भी सामने आया कि कथित तौर पर कुछ विषय विशेषज्ञों ने मोटी रकम लेकर गोपनीय प्रश्नपत्र लीक किए। इसके बाद बिचौलियों के जरिए चुनिंदा अभ्यर्थियों तक यह सामग्री पहुंचाई गई। एजेंसी का कहना है कि पूरा नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था।

    CBI ने चार्जशीट में कई आरोपियों की भूमिका का भी जिक्र किया है। जांच एजेंसी का दावा है कि सबूतों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी गई हैं। मामले में कई गिरफ्तारियां पहले ही हो चुकी हैं और आगे भी जांच जारी है।

    इस खुलासे के बाद देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल उठने लगे हैं। जांच एजेंसी भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली में कई बदलावों की सिफारिश भी कर सकती है।

    फिलहाल मामला अदालत में है और CBI अपनी जांच आगे बढ़ा रही है। आने वाले दिनों में चार्जशीट और सबूतों के आधार पर कई और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

  • कावेरी विवाद पर विजय को Udhayanidhi की खुली चुनौती! बोले- ‘कर्नाटक जाकर बेइज्जत होने के लिए तैयार हैं क्या?’

    कावेरी विवाद पर विजय को Udhayanidhi की खुली चुनौती! बोले- ‘कर्नाटक जाकर बेइज्जत होने के लिए तैयार हैं क्या?’

    कावेरी जल विवाद को लेकर तमिलनाडु की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। मुख्यमंत्री विजय और विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। विवाद की शुरुआत उस समय हुई, जब विजय ने कर्नाटक जाकर बातचीत के जरिए मेकेदातु (Mekedatu) परियोजना पर समाधान निकालने की बात कही।

    उदयनिधि स्टालिन ने विजय के प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए तंज कसा कि “क्या आप कर्नाटक जाकर बेइज्जत होने के लिए तैयार हैं?” उनका कहना था कि इस संवेदनशील मुद्दे पर बातचीत से ज्यादा कानूनी और राजनीतिक स्तर पर मजबूती से लड़ाई लड़ने की जरूरत है। इस बयान के बाद दोनों पक्षों के बीच सियासी टकराव और तेज हो गया।

    वहीं मुख्यमंत्री विजय ने पलटवार करते हुए कहा कि बातचीत करना कोई कमजोरी नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर संवाद के जरिए दोनों राज्यों के किसानों और लोगों के हित में समाधान निकल सकता है, तो उसमें कोई बुराई नहीं है। उन्होंने यह भी दोहराया कि तमिलनाडु के अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

    मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। कर्नाटक इसे जल भंडारण और पेयजल की जरूरतों के लिए जरूरी बता रहा है, जबकि तमिलनाडु का कहना है कि इससे राज्य के हिस्से का कावेरी जल प्रभावित हो सकता है।

    इस मुद्दे पर राजनीतिक दल भी खुलकर आमने-सामने आ गए हैं। एक ओर सरकार बातचीत का रास्ता अपनाने की बात कर रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष सरकार के रुख को कमजोर बता रहा है। कावेरी विवाद अब सिर्फ जल बंटवारे का नहीं, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति का भी बड़ा मुद्दा बन चुका है।

    फिलहाल कावेरी विवाद और मेकेदातु परियोजना को लेकर दोनों राज्यों के बीच तनाव बना हुआ है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में बातचीत, अदालत या केंद्र सरकार के स्तर पर इस विवाद को लेकर क्या नया कदम उठाया जाता है।

  • ‘अगर मैं प्रधानमंत्री होता…’ NEET आंदोलन पर सोनम वांगचुक ने कह दी ऐसी बात, छिड़ गई नई बहस

    ‘अगर मैं प्रधानमंत्री होता…’ NEET आंदोलन पर सोनम वांगचुक ने कह दी ऐसी बात, छिड़ गई नई बहस

    NEET और भर्ती परीक्षाओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच सोनम वांगचुक ने प्रदर्शन के दौरान इस्तेमाल हुई गालियों और नाराजगी पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि युवाओं की भाषा का समर्थन नहीं किया जा सकता, लेकिन उसके पीछे छिपे दर्द और निराशा को समझना बेहद जरूरी है।

    सोनम वांगचुक ने कहा कि जब बड़ी संख्या में युवा लंबे समय तक बेरोजगारी, परीक्षा विवाद और अनिश्चित भविष्य का सामना करते हैं, तो उनके भीतर गुस्सा और हताशा बढ़ना स्वाभाविक है। उनके मुताबिक, ऐसी परिस्थितियों में कई बार नाराजगी गलत शब्दों के रूप में भी बाहर आ जाती है।

    उन्होंने यह भी कहा कि अगर वह प्रधानमंत्री होते, तो सबसे पहले आंदोलन कर रहे युवाओं से सीधे मिलते, उनकी बातें सुनते और समस्याओं का समाधान निकालने की कोशिश करते। उनका मानना है कि संवाद किसी भी विवाद को सुलझाने का सबसे प्रभावी तरीका है।

    वांगचुक ने युवाओं से भी अपील की कि वे अपना आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रखें। उन्होंने कहा कि विरोध दर्ज कराना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन भाषा और व्यवहार ऐसा होना चाहिए जिससे समाज में सकारात्मक संदेश जाए।

    हाल के दिनों में पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और बेरोजगारी को लेकर देशभर में कई जगह छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में सोनम वांगचुक का यह बयान सामने आया है, जिस पर सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा हो रही है।

    फिलहाल उनके बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक तरफ कुछ लोग उनके संवाद वाले सुझाव का समर्थन कर रहे हैं, तो दूसरी ओर बहस इस बात पर भी हो रही है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान भाषा की मर्यादा कैसे बनाए रखी जाए।

  • ‘हम पीछे से वार नहीं करते, सामने से फाड़ते हैं…’ मौत के बाद अतीक के बेटे अबान का VIDEO फिर वायरल, मचा बवाल

    ‘हम पीछे से वार नहीं करते, सामने से फाड़ते हैं…’ मौत के बाद अतीक के बेटे अबान का VIDEO फिर वायरल, मचा बवाल

    माफिया अतीक अहमद के बेटे अबान अहमद का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में अबान कुछ लोगों के साथ बैठा नजर आता है और एक कथित धमकी भरा संवाद बोलता दिखाई देता है। क्लिप वायरल होने के बाद प्रयागराज समेत कई जगह इस पर चर्चा शुरू हो गई है।

    वीडियो में अबान कथित तौर पर कहता सुनाई देता है, “हम पीछे से वार नहीं करते, सामने से…”। इसी संवाद को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कई यूजर्स इसे अतीक अहमद गैंग की पुरानी दबंग छवि से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ लोग वीडियो के समय और संदर्भ को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

    रिपोर्ट के मुताबिक, यह कोई नया वीडियो नहीं है, बल्कि पुराना वीडियो है जो एक बार फिर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो कब रिकॉर्ड किया गया था, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि वायरल होने के बाद यह फिर चर्चा का विषय बन गया है।

    गौरतलब है कि अबान अहमद की हाल ही में सड़क हादसे में मौत हो गई थी। इसके बाद से उससे जुड़ी कई पुरानी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर दोबारा शेयर किए जा रहे हैं। इसी क्रम में यह वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है।

    फिलहाल पुलिस या प्रशासन की ओर से इस वायरल वीडियो को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि वीडियो में दिखाई गई बातें किस परिस्थिति में कही गई थीं। ऐसे में वीडियो की व्याख्या को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।

    अतीक अहमद और उसके परिवार से जुड़े मामलों को लेकर पहले भी कई बार सोशल मीडिया पर पुरानी सामग्री वायरल होती रही है। अबान अहमद का यह वीडियो भी उसी कड़ी में एक बार फिर चर्चा में आ गया है और इंटरनेट पर तेजी से शेयर किया जा रहा है।