पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के आंतला गांव में एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ, जहां अपनों को बचाने की कोशिश ही चार लोगों की मौत की वजह बन गई। सेप्टिक टैंक में काम करते समय एक व्यक्ति अचानक अंदर गिर गया। उसे बचाने के लिए उसकी बहन दौड़ी, फिर मां को बचाने बेटा नीचे उतरा और आखिर में एक रिश्तेदार भी मदद के लिए पहुंच गया। लेकिन कुछ ही देर में चारों की जान चली गई। इस घटना ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है।

जानकारी के मुताबिक, बदिर मल्लिक मंगलवार को अपनी बहन के घर सेप्टिक टैंक का काम करने पहुंचे थे। काम के दौरान वह अचानक टैंक के भीतर गिर गए। उन्हें मुसीबत में देखकर उनकी बहन सरजिना बीबी खुद को रोक नहीं पाईं और भाई को बचाने के लिए अंदर उतर गईं। लेकिन टैंक के भीतर हालात ऐसे थे कि वह भी बाहर नहीं निकल सकीं।
जब मां को अंदर फंसा देखा तो उनका बेटा शेख रबिउल भी उन्हें बचाने के लिए टैंक में उतर गया। लेकिन मां-बेटे दोनों अंदर ही फंस गए। इसके बाद परिवार के एक रिश्तेदार शेख साहेब ने भी उन्हें बचाने की कोशिश की। वह भी टैंक के अंदर चले गए और बाहर नहीं निकल पाए। देखते ही देखते एक के बाद एक चार लोग हादसे का शिकार हो गए।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर जुट गए और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और बचाव अभियान के बाद चारों के शव बाहर निकाले गए। इस हादसे में शेख अबुकलाम नाम का एक अन्य व्यक्ति भी घायल हुआ, जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए हैं।
प्रारंभिक रिपोर्टों के मुताबिक, सेप्टिक टैंक के भीतर जहरीली गैस होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे टैंकों में ऑक्सीजन की कमी और हानिकारक गैसों के कारण कुछ ही देर में व्यक्ति बेहोश हो सकता है। सबसे खतरनाक बात यह है कि किसी को बचाने के लिए बिना सुरक्षा उपकरणों के अंदर उतरने वाला व्यक्ति भी उसी खतरे का शिकार बन सकता है। हालांकि, इस मामले में मौतों की सटीक वजह जांच के बाद स्पष्ट होगी।
इस घटना ने एक बार फिर सेप्टिक टैंकों की सफाई और मरम्मत के दौरान सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भाई को बचाने निकली बहन, मां को बचाने उतरा बेटा और फिर मदद के लिए आगे आया रिश्तेदार—तीनों की कोशिशें एक दर्दनाक त्रासदी में बदल गईं। अब पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है, लेकिन आंतला गांव के लिए यह घटना ऐसा जख्म छोड़ गई है, जिसे भुलाना आसान नहीं होगा।








