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  • ‘चौकीदार चोर है’ वाले बयान पर राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से राहत! मानहानि केस पर लगी रोक, अब निचली अदालत में नहीं चलेगी कार्यवाही

    ‘चौकीदार चोर है’ वाले बयान पर राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से राहत! मानहानि केस पर लगी रोक, अब निचली अदालत में नहीं चलेगी कार्यवाही

    राहुल गांधी को ‘चौकीदार चोर है’ वाले बयान से जुड़े मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में चल रही कार्यवाही पर रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद अब निचली अदालत में फिलहाल केस आगे नहीं बढ़ेगा। राहुल गांधी के लिए यह राहत ऐसे समय आई है, जब उनके पुराने राजनीतिक बयानों को लेकर कानूनी विवाद फिर चर्चा में है।

    यह मामला 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए राहुल गांधी के बयान से जुड़ा है। उस समय उन्होंने राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए ‘चौकीदार चोर है’ का नारा इस्तेमाल किया था। इस बयान को लेकर भाजपा नेता विजय मिश्रा ने मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि इस टिप्पणी से प्रधानमंत्री और भाजपा की छवि को नुकसान पहुंचा।

    मामले में निचली अदालत में सुनवाई चल रही थी और राहुल गांधी को कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ रहा था। राहुल गांधी की ओर से इस कार्यवाही को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। शीर्ष अदालत ने अब मामले में आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी है। इसका मतलब यह है कि फिलहाल निचली अदालत इस केस में आगे की सुनवाई नहीं करेगी।

    हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की ओर से कार्यवाही पर रोक लगाए जाने का मतलब यह नहीं है कि राहुल गांधी को मामले में अंतिम रूप से बरी कर दिया गया है। यह अंतरिम राहत है, जिसके दौरान आगे की कानूनी प्रक्रिया पर विराम रहेगा। मानहानि के आरोपों और शिकायत की वैधता पर अंतिम फैसला संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

    ‘चौकीदार चोर है’ का नारा 2019 के चुनावी माहौल में काफी चर्चा में रहा था। कांग्रेस ने राफेल सौदे को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए थे, जबकि भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया था। इसी राजनीतिक टकराव के बीच राहुल गांधी के बयान को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हुई, जो अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है।

    फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश से राहुल गांधी को इस मामले में अस्थायी राहत जरूर मिली है, लेकिन कानूनी विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अब आगे की सुनवाई और अदालत के अगले आदेश पर नजर रहेगी। राजनीतिक बयानबाजी से शुरू हुआ यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि चुनावी मंच पर दिए गए बयान बाद में लंबी कानूनी लड़ाई का रूप भी ले सकते हैं।

  • पृथ्वी शॉ पर धोखे के आरोप, फिर तोड़ी सगाई… अब एक महीने में ही लौटीं आकृति अग्रवाल! बोलीं- ‘मैं गुमराह हो गई थी’, आखिर किसने भरे थे कान?

    पृथ्वी शॉ पर धोखे के आरोप, फिर तोड़ी सगाई… अब एक महीने में ही लौटीं आकृति अग्रवाल! बोलीं- ‘मैं गुमराह हो गई थी’, आखिर किसने भरे थे कान?

    भारतीय क्रिकेटर पृथ्वी शॉ और एक्ट्रेस-इन्फ्लुएंसर आकृति अग्रवाल की लव स्टोरी में ऐसा ट्विस्ट आया है कि फैंस भी हैरान हैं। कुछ हफ्ते पहले जिस रिश्ते के टूटने की खबर सामने आई थी, अब उसी रिश्ते को एक और मौका देने का ऐलान हो गया है। आकृति ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर बताया कि दोनों ने आपस में बातचीत की और फिर से साथ रहने का फैसला किया है।

    आकृति ने अपने बयान में माना कि सगाई तोड़ते समय उन्होंने अपने करीबी लोगों की बातों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा कर लिया था। उनके मुताबिक, कुछ लोगों की राय ने पृथ्वी और उनके रिश्ते को देखने का नजरिया बदल दिया। आकृति ने कहा कि वह गुमराह हो गई थीं और दोनों के बीच ईमानदार बातचीत होने से पहले ही उन्होंने रिश्ता खत्म करने का फैसला कर लिया।

    आकृति ने अपने फैसले की जिम्मेदारी लेते हुए यह भी स्वीकार किया कि उनके कदम से पृथ्वी को तकलीफ पहुंची। उन्होंने बताया कि बाद में दोनों ने खुलकर बातचीत की, एक-दूसरे की बात समझी और फिर से साथ रहने का निर्णय लिया। आकृति ने अपने पोस्ट में कहा कि अब वह चाहती हैं कि उनके रिश्ते का भविष्य किसी दूसरे की राय से नहीं, बल्कि दोनों के आपसी भरोसे और प्यार से तय हो।

    इस रिश्ते में दरार की खबर सितंबर 2026 में आई थी, जब आकृति ने सगाई खत्म करने का ऐलान किया था। उस समय उन्होंने अलग-अलग लक्ष्य और परिस्थितियों को अलग होने की वजह बताया था। इससे पहले जुलाई में आकृति ने सोशल मीडिया पर धोखा मिलने से जुड़े पोस्ट भी शेयर किए थे, जिसके बाद पृथ्वी शॉ को लेकर अटकलें शुरू हो गई थीं। हालांकि, उस समय उन्होंने स्पष्ट किया था कि वे पोस्ट पृथ्वी के बारे में नहीं थे और उनकी सगाई बरकरार थी।

    पृथ्वी शॉ और आकृति ने मार्च 2026 में सगाई की घोषणा की थी। लेकिन कुछ ही महीनों में रिश्ता टूटने और फिर दोबारा जुड़ने की खबर ने इस निजी मामले को सुर्खियों में ला दिया। आकृति ने उन लोगों के नाम नहीं बताए, जिनकी बातों से वह प्रभावित हुई थीं। वहीं, पृथ्वी शॉ की तरफ से इस पैचअप पर अलग से कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।

    अब आकृति के नए बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उन करीबी लोगों ने उनसे क्या कहा था, जिनकी बातों पर भरोसा करके उन्होंने सगाई तोड़ दी? फिलहाल इसका जवाब सामने नहीं आया है। इतना जरूर है कि दोनों ने अपने रिश्ते को एक और मौका देने का फैसला किया है और आकृति ने लोगों से उनकी निजी जिंदगी का सम्मान करने की अपील की है।

  • राहुल गांधी के साथ दिखीं, पुलिस ने हिरासत में लिया तो और चर्चा में आ गईं! कौन हैं नेहा बोरा, जिनकी उम्र से लेकर पढ़ाई तक गूगल पर हो रही है ताबड़तोड़ सर्चिंग?

    राहुल गांधी के साथ दिखीं, पुलिस ने हिरासत में लिया तो और चर्चा में आ गईं! कौन हैं नेहा बोरा, जिनकी उम्र से लेकर पढ़ाई तक गूगल पर हो रही है ताबड़तोड़ सर्चिंग?

    दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान एक नाम अचानक सुर्खियों में छा गया है—नेहा बोरा। सोशल मीडिया पर उनके वीडियो वायरल होने और पुलिस हिरासत में लिए जाने के बाद लोग उनकी उम्र, शिक्षा और राजनीतिक सफर के बारे में जानना चाहते हैं। 29 वर्षीय नेहा बोरा ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं।

    नेहा बोरा मूल रूप से उत्तराखंड के खटीमा की रहने वाली हैं। उनके पिता भारतीय सेना में अधिकारी रहे हैं, जिसके कारण उनका बचपन अलग-अलग शहरों में बीता। उनकी स्कूली पढ़ाई पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में हुई। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से समाजशास्त्र की पढ़ाई की और डॉ. बी.आर. आंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली से आगे की शिक्षा हासिल की।

    नेहा की कहानी सिर्फ छात्र राजनीति से शुरू नहीं होती। राजनीति में सक्रिय होने से पहले वह थिएटर से जुड़ी थीं और दिल्ली के स्ट्रीट थिएटर ग्रुप संगवारी के साथ काम कर चुकी हैं। नुक्कड़ नाटकों के जरिए सामाजिक मुद्दों से उनका जुड़ाव बढ़ा। उनके मुताबिक, रंगमंच ने उन्हें अलग-अलग सामाजिक परिस्थितियों और लोगों के नजरिए को समझने का अवसर दिया। यही अनुभव आगे चलकर उनकी सार्वजनिक गतिविधियों का भी हिस्सा बना।

    साल 2019-20 में नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA के खिलाफ हुए छात्र आंदोलनों ने उनके राजनीतिक सफर को नई दिशा दी। इसके बाद वह AISA से जुड़ीं और धीरे-धीरे संगठन में अपनी पहचान बनाई। फिलहाल वह इसकी राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। शिक्षा, छात्र अधिकार, परीक्षा में कथित अनियमितताओं और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर वह लगातार आवाज उठाती रही हैं।

    हाल के महीनों में NEET और पेपर लीक से जुड़े विवादों के दौरान भी नेहा चर्चा में रहीं। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर प्रदर्शन किए और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ जंतर-मंतर पर 23 दिनों की भूख हड़ताल में भी हिस्सा लिया। अब चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन में उनकी भूमिका ने उन्हें फिर राष्ट्रीय चर्चा में ला दिया है।

    दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने नेहा बोरा समेत कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था। इसके बाद उनके वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए और लोगों की दिलचस्पी उनके निजी तथा राजनीतिक जीवन में बढ़ गई। नेहा का सफर थिएटर से छात्र आंदोलन और फिर राष्ट्रीय स्तर की छात्र राजनीति तक पहुंचा है। अब देखना होगा कि आने वाले समय में वह किन मुद्दों को लेकर अपनी आवाज बुलंद करती हैं और छात्र राजनीति में उनकी भूमिका किस दिशा में आगे बढ़ती है।

  • दुनिया की इकोनॉमी की हालत पतली, लेकिन भारत की रफ्तार देखकर IMF भी खुश! GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7% किया, आखिर भारत में ऐसा क्या चल रहा है?

    दुनिया की इकोनॉमी की हालत पतली, लेकिन भारत की रफ्तार देखकर IMF भी खुश! GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7% किया, आखिर भारत में ऐसा क्या चल रहा है?

    दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दबाव के बीच भारत के लिए एक अच्छी खबर आई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले जनवरी 2026 में IMF ने भारत की विकास दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। यानी वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार उम्मीद से बेहतर मानी जा रही है।

    IMF की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की आर्थिक वृद्धि के पीछे घरेलू मांग, खपत और निवेश की अहम भूमिका है। देश में लोगों की खरीदारी, सेवाओं की मांग और आर्थिक गतिविधियों ने विकास को सहारा दिया है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर अनुमान मजबूत हुआ है।

    हालांकि, तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। IMF ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को लेकर चुनौतियों का जिक्र किया है। व्यापारिक तनाव, भू-राजनीतिक संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव डाल रही है। ऐसे माहौल में भारत की अनुमानित वृद्धि दर का बढ़ना देश के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में घरेलू बाजार का बड़ा योगदान है। देश की बड़ी आबादी, उपभोक्ताओं की मांग, बुनियादी ढांचे पर निवेश और सेवा क्षेत्र की गतिविधियां आर्थिक विकास को गति देती हैं। इसके अलावा डिजिटल सेवाओं, विनिर्माण और सरकारी पूंजीगत खर्च जैसे क्षेत्रों पर भी नजर बनी हुई है। हालांकि, रोजगार, महंगाई और वैश्विक व्यापार से जुड़ी चुनौतियां अभी भी महत्वपूर्ण हैं।

    IMF का अनुमान भारत की आर्थिक संभावनाओं को लेकर सकारात्मक संकेत देता है, लेकिन इसे विकास की गारंटी नहीं समझना चाहिए। वास्तविक वृद्धि इस बात पर निर्भर करेगी कि घरेलू मांग कितनी मजबूत रहती है, निवेश किस गति से बढ़ता है और अंतरराष्ट्रीय हालात किस दिशा में जाते हैं। अनुमान में बढ़ोतरी अच्छी खबर जरूर है, लेकिन अर्थव्यवस्था की असली परीक्षा पूरे वित्त वर्ष के आंकड़ों से होगी।

    फिलहाल, IMF का 7 प्रतिशत का अनुमान भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में मजबूत स्थिति में दिखाता है। जब कई देश धीमी वृद्धि और अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं, तब भारत की विकास दर को लेकर अनुमान बढ़ना अहम है। अब सवाल यही है कि क्या भारत आने वाले महीनों में इस रफ्तार को बनाए रख पाएगा और क्या इसका फायदा आम लोगों तक रोजगार, आय और बेहतर आर्थिक अवसरों के रूप में पहुंचेगा?

  • CEC ज्ञानेश कुमार पर घेराबंदी तेज! राहुल गांधी ने विपक्षी सांसदों को बुलाया, अब चुनाव आयोग के खिलाफ आर-पार की तैयारी?

    CEC ज्ञानेश कुमार पर घेराबंदी तेज! राहुल गांधी ने विपक्षी सांसदों को बुलाया, अब चुनाव आयोग के खिलाफ आर-पार की तैयारी?

    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी विवाद के बीच राहुल गांधी ने विपक्षी सांसदों को एकजुट करने की कवायद तेज कर दी है। INDIA गठबंधन चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। अब इस मुद्दे पर विपक्ष की अगली रणनीति को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ गई है।

    राहुल गांधी और विपक्षी दलों का आरोप है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं। विपक्ष का कहना है कि इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इसी मुद्दे को लेकर गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है।

    इस विवाद ने 12 अक्टूबर को उस वक्त नया मोड़ लिया, जब राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA गठबंधन के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया। मार्च में मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए। हालांकि, प्रदर्शनकारियों को सुप्रीम कोर्ट से करीब 600 मीटर पहले रोक दिया गया। बाद में गठबंधन ने चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने की दिशा में कदम बढ़ाया।

    राहुल गांधी ने इससे पहले दावा किया था कि केंद्र सरकार के करीब 200 अधिकारी विपक्ष के संपर्क में हैं और उन्हें जानकारी दे रहे हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से भी अपनी भूमिका स्पष्ट करने की अपील की थी। ये राहुल गांधी के दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर लगाए गए विपक्ष के आरोपों को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है।

    INDIA गठबंधन अब इस मुद्दे को केवल संसद या प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित रखने के बजाय कानूनी और राजनीतिक, दोनों मोर्चों पर आगे बढ़ाना चाहता है। विपक्षी दलों के बीच इस बात पर जोर है कि मतदाता सूची की निष्पक्षता और चुनाव आयोग की जवाबदेही सुनिश्चित हो। हालांकि, गठबंधन की अगली बैठक में क्या फैसला होगा और आगे किस तरह का आंदोलन किया जाएगा, इसकी पूरी जानकारी सामने आना बाकी है।

    फिलहाल राहुल गांधी और विपक्षी सांसदों की सक्रियता ने चुनाव आयोग से जुड़े विवाद को फिर सुर्खियों में ला दिया है। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और निष्पक्ष चुनाव का मुद्दा बता रहा है, जबकि आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही निकलेगा। अब देखना होगा कि INDIA गठबंधन की अगली रणनीति क्या होती है और इस विवाद का अगला पड़ाव सड़क होगा या अदालत।

  • घर के काम पर डांटा तो बेटी की गर्दन ही तोड़ दी! फिर खुद ही गढ़ दी गैंगरेप की झूठी कहानी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोल दी कातिल पिता की पोल

    घर के काम पर डांटा तो बेटी की गर्दन ही तोड़ दी! फिर खुद ही गढ़ दी गैंगरेप की झूठी कहानी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोल दी कातिल पिता की पोल

    झारखंड के गुमला से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने रिश्तों को शर्मसार कर दिया है। जिस पिता पर बेटी की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, उसी पर उसकी हत्या करने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, चैतू उरांव उर्फ चैतू लकड़ा ने अपनी नाबालिग बेटी की हत्या करने के बाद पुलिस को गुमराह करने के लिए सामूहिक दुष्कर्म की झूठी कहानी गढ़ी थी। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने उसकी कहानी पर सवाल खड़े कर दिए और जांच की दिशा ही बदल गई।

    मामला पालकोट थाना क्षेत्र के तपकारा गांव का है। पुलिस के अनुसार, 25 सितंबर को आरोपी पिता ने शिकायत दर्ज कराई थी कि कुछ लोगों ने उसकी नाबालिग बेटी को अगवा कर उसके साथ गैंगरेप किया और गंभीर हालत में घर के बाहर छोड़कर फरार हो गए। शिकायत गंभीर थी, इसलिए पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। उधर, लड़की की हालत बिगड़ने पर उसे इलाज के लिए रांची के रिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 26 सितंबर को उसकी मौत हो गई।

    लड़की की मौत के बाद पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम यानी SIT बनाई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने पर कथित गैंगरेप की कहानी को समर्थन नहीं मिला। इसके बाद पुलिस का शक पिता पर गया। पूछताछ के दौरान वह बार-बार अपने बयान बदलता रहा। पुलिस के मुताबिक, सख्ती से पूछताछ करने पर उसने बेटी की हत्या करने और घटना को दूसरी दिशा देने के लिए झूठी कहानी बनाने की बात स्वीकार कर ली।

    जांच के मुताबिक, घटना 24 सितंबर की शाम की है। लड़की मवेशियों को लेकर खेत से घर लौटी थी। घर के काम को लेकर पिता ने उसे डांटा, जिस पर दोनों के बीच बहस हो गई। पुलिस का आरोप है कि इसी गुस्से में पिता ने बेटी की गर्दन जोर से दबा दी, जिससे उसकी गर्दन की हड्डी टूट गई। गंभीर हालत में उसे पहले सिमडेगा, फिर गुमला और आखिर में रांची के अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी।

    पुलिस के अनुसार, वारदात के बाद आरोपी ने खुद को बचाने के लिए अज्ञात लोगों पर गैंगरेप का आरोप लगाया और ग्रामीणों को भी यही कहानी बताई। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पूछताछ में सामने आए तथ्यों ने जांच को नया मोड़ दे दिया। पुलिस ने चैतू उरांव को गिरफ्तार कर लिया है और उसके खिलाफ हत्या तथा पुलिस को गुमराह करने से जुड़ी धाराओं में कार्रवाई की गई है।

    जिस बेटी की मौत पर आरोपी पिता दूसरों को जिम्मेदार ठहरा रहा था, पुलिस के मुताबिक उसी की हत्या के पीछे उसका हाथ निकला। घर के काम को लेकर शुरू हुआ विवाद एक नाबालिग की मौत तक पहुंच गया और उसके बाद मामले को छिपाने के लिए कथित तौर पर दूसरी कहानी बनाई गई। अब आरोपी पुलिस की गिरफ्त में है, जबकि इस घटना ने एक बार फिर घरेलू हिंसा और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • दिल्ली में प्रदर्शन करने पहुंचे, लेकिन जंतर-मंतर पर नहीं मिली एंट्री! रामलीला मैदान भी खाली, आखिर INDIA गठबंधन के मार्च का क्या हुआ?

    दिल्ली में प्रदर्शन करने पहुंचे, लेकिन जंतर-मंतर पर नहीं मिली एंट्री! रामलीला मैदान भी खाली, आखिर INDIA गठबंधन के मार्च का क्या हुआ?

    दिल्ली में चुनाव आयोग और वोटर लिस्ट के SIR मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे विपक्षी नेताओं को लेकर सोमवार को सियासी हलचल तेज रही। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की योजना थी, लेकिन वहां प्रदर्शनकारियों के लिए मंच नजर नहीं आया। दूसरी तरफ रामलीला मैदान में भी कोई प्रदर्शनकारी नहीं दिखा। ऐसे में सवाल उठने लगा कि आखिर प्रदर्शन की तैयारी कहां गई और विपक्ष का अगला कदम क्या होगा?

    दरअसल, विपक्षी दल मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। राहुल गांधी समेत INDIA गठबंधन के नेताओं ने इस प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची से नाम हटाने और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल हैं। इसी मुद्दे को लेकर दिल्ली में मार्च और प्रदर्शन की योजना बनाई गई थी।

    लेकिन जंतर-मंतर पर जिस तरह के प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही थी, वैसा नजारा नहीं दिखा। वहां मंच और प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी नहीं होने से पूरे कार्यक्रम को लेकर असमंजस की स्थिति बनी। रामलीला मैदान में भी सन्नाटा नजर आया। हालांकि, केवल मैदान खाली होने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि विरोध की योजना पूरी तरह रद्द कर दी गई थी।

    इस घटनाक्रम के बीच विपक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट में SIR से जुड़े मुद्दे उठाने की कोशिश भी की गई। राहुल गांधी और अन्य नेताओं की ओर से चुनावी प्रक्रिया को लेकर कानूनी रास्ता अपनाने की बात सामने आई है। लेकिन अदालत में याचिका दायर करने और किसी विरोध प्रदर्शन के आयोजन की प्रक्रिया अलग-अलग होती है। इसलिए दोनों घटनाओं को एक ही फैसले का नतीजा मानना सही नहीं होगा।

    जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि विपक्ष आगे किस जगह और किस तरीके से अपनी आवाज उठाएगा। क्या प्रदर्शन की रणनीति बदली गई, क्या कार्यक्रम को लेकर कोई नया फैसला हुआ या फिर प्रशासनिक अनुमति से जुड़ा कोई पेंच था—इन सवालों के जवाब संबंधित पक्षों की आधिकारिक जानकारी से ही साफ हो सकेंगे।

    फिलहाल दिल्ली के दो प्रमुख प्रदर्शन स्थलों पर अपेक्षित भीड़ नहीं दिखने से राजनीतिक चर्चा जरूर शुरू हो गई है। SIR को लेकर विपक्ष के आरोप अपनी जगह हैं, लेकिन प्रदर्शन की अगली रणनीति पर अभी स्पष्टता जरूरी है। अब देखना होगा कि INDIA गठबंधन इस मुद्दे को सड़क पर आगे बढ़ाता है या अदालत के जरिए अपनी लड़ाई तेज करता है।

  • राहुल गांधी के बाद अब किसान भी खोलेंगे मोर्चा! SIR पर 23 अक्टूबर को देशभर में हल्लाबोल, CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग से बढ़ेगी सियासी तपिश

    राहुल गांधी के बाद अब किसान भी खोलेंगे मोर्चा! SIR पर 23 अक्टूबर को देशभर में हल्लाबोल, CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग से बढ़ेगी सियासी तपिश

    चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया को लेकर जारी विवाद अब किसान आंदोलन तक पहुंच गया है। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने 23 अक्टूबर को देशभर में विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। हरियाणा के करनाल में हुई राष्ट्रीय परिषद की बैठक में फैसला लिया गया कि किसान जिला और तहसील मुख्यालयों पर जुटकर अपनी आवाज उठाएंगे। यानी अब मतदाता सूची के विवाद में किसान संगठन भी खुलकर मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।

    संयुक्त किसान मोर्चा ने SIR प्रक्रिया को तत्काल रद्द करने की मांग की है। संगठन का आरोप है कि मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर लोगों के नाम हटाए जाने से उनके मतदान के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। SKM ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है। ये संगठन की मांगें और आरोप हैं, जिन पर संबंधित पक्षों का रुख अलग हो सकता है।

    किसान संगठन ने दिल्ली में हाल के विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और दमन पर भी नाराजगी जताई है। SKM ने चेतावनी दी है कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों पर कार्रवाई जारी रही, तो किसान छात्रों और युवाओं के समर्थन में भी आगे आएंगे। संगठन ने विरोध प्रदर्शन के अधिकार को लोकतांत्रिक व्यवस्था का अहम हिस्सा बताते हुए लोगों से एकजुट होने की अपील की है।

    बैठक में सिर्फ SIR ही नहीं, बल्कि किसानों की पुरानी मांगों पर भी चर्चा हुई। संयुक्त किसान मोर्चा ने न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP को कानूनी गारंटी देने, किसानों की कर्जमाफी, आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को मुआवजा, पेंशन और बीमा जैसी मांगें दोहराईं। इसके अलावा बिजली के निजीकरण का विरोध, बीज विधेयक 2025 को रद्द करने और किसानों तथा आदिवासियों के भूमि अधिकारों की रक्षा की मांग भी उठाई गई।

    SKM ने 26 नवंबर को किसान आंदोलन की छठी बरसी के मौके पर लंबी लड़ाई के लिए तैयार रहने की अपील की है। संगठन का कहना है कि जब तक उसकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। करनाल की बैठक में 17 राज्यों से 142 प्रतिनिधियों के शामिल होने की जानकारी भी दी गई, जिससे संगठन की राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन की तैयारी का संकेत मिलता है।

    अब 23 अक्टूबर के प्रदर्शन पर सबकी नजरें रहेंगी। SIR को लेकर विपक्ष पहले से ही चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है और अब संयुक्त किसान मोर्चा ने भी इस मुद्दे को अपने आंदोलन में शामिल कर लिया है। हालांकि, प्रदर्शन का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कितने किसान इसमें शामिल होते हैं और सरकार तथा चुनाव आयोग इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

  • ‘मैं PCS अफसर हूं, कुंवारी हूं’… शादी की पहली रात से खुलने लगे राज! दुल्हन ने उम्र में 12 साल की कटौती की, 18 साल के बेटे की बात भी छिपाने का आरोप

    ‘मैं PCS अफसर हूं, कुंवारी हूं’… शादी की पहली रात से खुलने लगे राज! दुल्हन ने उम्र में 12 साल की कटौती की, 18 साल के बेटे की बात भी छिपाने का आरोप

    पंजाब के फतेहगढ़ साहिब में शादी के नाम पर कथित धोखाधड़ी का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सबको चौंका दिया है। आम आदमी पार्टी के नेता अमरिंदर सिंह मंडोफल का आरोप है कि जिस महिला से उन्होंने शादी की, उसने खुद को PCS अधिकारी और अविवाहित बताया था। लेकिन शादी के बाद उसकी पहचान, उम्र और पिछली जिंदगी को लेकर ऐसे खुलासे हुए कि मामला पुलिस तक पहुंच गया। अब महिला समेत छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

    अमरिंदर सिंह के मुताबिक, मनविंदर कौर से उनकी शादी 10 फरवरी 2026 को हुई थी। रिश्ता तय करते समय महिला को पंजाब सिविल सर्विस की अधिकारी बताया गया था। कथित तौर पर यह भी कहा गया कि वह अविवाहित है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसने इन बातों पर भरोसा करके शादी की, लेकिन बाद में पत्नी की नौकरी और वैवाहिक स्थिति को लेकर संदेह होने लगा। इसके बाद उन्होंने अपने स्तर पर जानकारी जुटानी शुरू की।

    जांच-पड़ताल के दौरान अमरिंदर सिंह को कथित तौर पर पता चला कि मनविंदर कौर पहले शादीशुदा थी और उसका 18 साल का एक बेटा भी है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि ये अहम बातें शादी से पहले छिपाई गई थीं। इतना ही नहीं, महिला के PCS अधिकारी होने के दावे पर भी सवाल उठे। जिस सरकारी पद की पहचान पर रिश्ता तय हुआ था, शिकायतकर्ता के मुताबिक उसकी पुष्टि नहीं हो सकी।

    मामले का सबसे चौंकाने वाला आरोप उम्र को लेकर है। शिकायत के मुताबिक, महिला की जन्मतिथि 1980 से बदलकर 1992 दिखाने के लिए दस्तावेजों में कथित हेरफेर किया गया। यानी कागजों पर उम्र करीब 12 साल कम दिखाने का आरोप है। आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेजों की सत्यता अब जांच का हिस्सा है। हालांकि, दस्तावेजों में धोखाधड़ी हुई या नहीं, इसका अंतिम फैसला जांच के बाद ही होगा।

    अमरिंदर सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि शादी के कुछ महीनों बाद महिला 14 तोले सोने के गहने और करीब एक लाख रुपये नकद लेकर घर से चली गई। पुलिस ने महिला के अलावा उसके भाई, मां और अन्य रिश्तेदारों समेत कुल छह लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक, केस दर्ज होने के समय किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी और जांच जारी थी।

    फिलहाल इस मामले में कई सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं—क्या महिला ने सचमुच PCS अधिकारी होने का झूठा दावा किया, क्या दस्तावेजों में उम्र बदली गई और क्या पिछली शादी व बेटे की जानकारी जानबूझकर छिपाई गई? फिलहाल ये सभी शिकायतकर्ता के आरोप हैं, जिनकी पुलिस जांच कर रही है। शादी में भरोसे के नाम पर शुरू हुई यह कहानी अब कथित धोखाधड़ी के गंभीर मामले में बदल गई है।

  • हूतियों के हमलों से कांपे सऊदी के शहजादे! कभी महल तो कभी बंकर में ठिकाना, चुने हुए सुरक्षाकर्मियों के घेरे में रह रहे MBS… आखिर इतना डर क्यों?

    हूतियों के हमलों से कांपे सऊदी के शहजादे! कभी महल तो कभी बंकर में ठिकाना, चुने हुए सुरक्षाकर्मियों के घेरे में रह रहे MBS… आखिर इतना डर क्यों?

    सऊदी अरब में यमन के हूती विद्रोहियों के हमले तेज होने के बीच क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 41 वर्षीय MBS को बेहद सुरक्षित महलों के बीच शिफ्ट किया जा रहा है, जहां बंकर जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। उनकी सुरक्षा के लिए भरोसेमंद और चुनिंदा सुरक्षाकर्मियों की टीम तैनात है। इस खबर ने इसलिए भी ध्यान खींचा है, क्योंकि सऊदी अरब की राजधानी रियाद पर हालिया हमले में भारी नुकसान हुआ है।

    द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि मोहम्मद बिन सलमान कई दिनों से सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। उन्हें आखिरी बार मंगलवार को एक राष्ट्रीय रक्तदान अभियान के दौरान देखा गया था। इसके बाद से उनकी आवाजाही को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने की खबरें सामने आई हैं। हालांकि, उनकी सुरक्षा से जुड़े इन दावों पर सऊदी सरकार की ओर से विस्तृत आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

    इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी वजह रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुआ घातक हमला बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 10 अक्टूबर को हुए मिसाइल और ड्रोन हमले में कम से कम 13 लोगों की मौत हुई और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए। हमले के बाद एयरपोर्ट का संचालन प्रभावित हुआ और सऊदी सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियों पर भी सवाल उठने लगे।

    यमन के हूती विद्रोही लंबे समय से सऊदी अरब के खिलाफ हमले करते रहे हैं। इस बार लगातार हमलों ने सऊदी अरब की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में तैनात एयर डिफेंस सिस्टम को महत्वपूर्ण ठिकानों और शाही महलों की सुरक्षा के लिए फिर से व्यवस्थित किया जा रहा है। हालांकि, पूरे देश की विशाल भौगोलिक सीमा के कारण हर ठिकाने को एक साथ सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती है।

    मोहम्मद बिन सलमान के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ उन्हें देश की सुरक्षा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की रक्षा करनी है, वहीं दूसरी ओर लगातार हमलों से निवेश, पर्यटन और सऊदी विजन 2030 जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं पर असर पड़ने की चिंता भी है। रियाद एयरपोर्ट जैसे अहम ठिकाने पर हमला देश की सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि के लिए भी चुनौती बन गया है।

    फिलहाल सऊदी अरब की सुरक्षा व्यवस्था हाई अलर्ट पर है और हूती विद्रोहियों की ओर से आगे हमले किए जाने की आशंका बनी हुई है। क्राउन प्रिंस की सुरक्षा को लेकर सामने आई रिपोर्ट्स ने क्षेत्रीय तनाव को और चर्चा में ला दिया है। अब बड़ा सवाल यही है कि सऊदी अरब इन हमलों का जवाब किस तरह देता है और क्या वह अपने अहम ठिकानों को आगे होने वाले हमलों से सुरक्षित रख पाएगा?