बांग्लादेश ने मोंगला पोर्ट के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए चीन से 33.578 करोड़ डॉलर यानी करीब ₹2,800 करोड़ से ज्यादा का कर्ज लेने का समझौता किया है। यह बंदरगाह भारत की सीमा से करीब 80 किलोमीटर दूर है। ऐसे में चीन की इस एंट्री ने क्षेत्रीय रणनीति को लेकर चर्चा तेज कर दी है। खास बात यह है कि इसी इलाके में भारत के लिए प्रस्तावित आर्थिक क्षेत्र की योजना पहले ही रद्द की जा चुकी है।

यह समझौता 10 अक्टूबर 2026 को बांग्लादेश सरकार और चीन के एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक के बीच हुआ। चीन करीब 2.404 अरब युआन का कर्ज देगा, जिस पर 2 प्रतिशत ब्याज लगेगा। इसे 20 साल में चुकाना होगा और शुरुआती पांच साल की छूट भी मिलेगी। इस रकम से मोंगला पोर्ट पर दो कंटेनर टर्मिनल और माल ढुलाई से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
मोंगला बांग्लादेश का दूसरा सबसे बड़ा समुद्री बंदरगाह है। इसकी क्षमता बढ़ने से देश के व्यापार और माल ढुलाई को फायदा मिल सकता है। लेकिन भारत के लिए इसकी भौगोलिक स्थिति भी अहम है, क्योंकि यह भारतीय सीमा के काफी नजदीक है। चीन पहले से ही दक्षिण एशिया में बुनियादी ढांचे से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट में निवेश कर रहा है और अब इस बंदरगाह के आधुनिकीकरण में उसकी भूमिका और बढ़ने वाली है।
इस कहानी का दूसरा अहम पहलू भारत के लिए प्रस्तावित आर्थिक क्षेत्र है। साल 2015 के द्विपक्षीय समझौते के तहत मोंगला पोर्ट के पास करीब 110 एकड़ जमीन भारत के आर्थिक क्षेत्र के लिए निर्धारित की गई थी। लेकिन अक्टूबर 2025 में बांग्लादेश की तत्कालीन अंतरिम सरकार ने यह परियोजना रद्द कर दी। उसका कहना था कि भारत की ओर से नामित डेवलपर तय समय के भीतर निर्माण शुरू नहीं कर पाया था।
इसके बाद जून 2026 में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की चीन यात्रा के दौरान इसी क्षेत्र में चीनी निवेश से जुड़ी पहल आगे बढ़ी। अब मोंगला पोर्ट के आधुनिकीकरण के लिए चीन से बड़ा कर्ज समझौता भी हो गया है। हालांकि, भारत की आर्थिक क्षेत्र परियोजना रद्द होना और बंदरगाह के विस्तार के लिए चीनी कर्ज मिलना अलग-अलग फैसले हैं, लेकिन दोनों घटनाओं का समय और एक ही क्षेत्र से जुड़ाव रणनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण है।
अब सवाल यह है कि भारत की सीमा के करीब चीन की बढ़ती आर्थिक मौजूदगी का क्षेत्रीय समीकरणों पर क्या असर पड़ेगा? बांग्लादेश के लिए यह बंदरगाह व्यापार बढ़ाने का मौका है, जबकि चीन के लिए इससे ढाका के साथ आर्थिक संबंध मजबूत करने का रास्ता खुलता है। भारत की नजर भी इस पूरे घटनाक्रम पर रहेगी, क्योंकि बंगाल की खाड़ी के आसपास बंदरगाह और बुनियादी ढांचे से जुड़े फैसले सिर्फ कारोबार नहीं, बल्कि क्षेत्रीय रणनीति के लिहाज से भी अहम हैं।








