Blog

  • भोलेनाथ के मंदिर में पहुंचा हैवान! पूजा कर रही मासूम को बनाया निशाना, CCTV खुला तो मेट्रो कर्मचारी की करतूत आई सामने!

    भोलेनाथ के मंदिर में पहुंचा हैवान! पूजा कर रही मासूम को बनाया निशाना, CCTV खुला तो मेट्रो कर्मचारी की करतूत आई सामने!

    महाराष्ट्र के पिंपरी-चिंचवड़ के निगड़ी इलाके से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने धार्मिक स्थलों पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां शिव मंदिर में पूजा करने पहुंची एक नाबालिग लड़की के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म की कोशिश की गई। आरोप मेट्रो निर्माण कार्य में लगे एक कर्मचारी पर लगा है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, लड़की मंदिर में भगवान शिव के दर्शन और पूजा करने गई थी। इसी दौरान आरोपी वहां पहुंचा और उसके साथ कथित तौर पर गलत हरकत करने लगा। मंदिर जैसे स्थान पर हुई इस घटना ने स्थानीय लोगों को नाराज कर दिया। जिस जगह लोग श्रद्धा के साथ सिर झुकाने आते हैं, वहां ऐसी हरकत का आरोप लगना ही लोगों के गुस्से की वजह बन गया।

    इस पूरे घटनाक्रम की एक अहम बात यह है कि मंदिर परिसर में CCTV कैमरे लगे हुए थे। बताया जा रहा है कि कैमरों में घटना रिकॉर्ड हो गई। फुटेज में लड़की पूजा करती दिखाई देती है और इसी दौरान आरोपी उसके पास आता नजर आता है। पुलिस अब मामले से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है और CCTV फुटेज को भी अहम सबूत माना जा रहा है।

    घटना की जानकारी मिलने के बाद निगड़ी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी कर्मचारी को हिरासत में ले लिया। आरोपी मेट्रो निर्माण कार्य से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और मामले में संबंधित कानूनी कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, जांच पूरी होने और अदालत में आरोप साबित होने तक आरोपी को दोषी घोषित नहीं किया जा सकता।

    घटना सामने आने के बाद स्थानीय नागरिकों में भारी नाराजगी है। लोगों ने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। साथ ही, मेट्रो निर्माण स्थलों पर काम करने वाले कर्मचारियों के सत्यापन और सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। CCTV फुटेज, आरोपी से पूछताछ और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर याद दिलाया है कि मंदिर हो या कोई दूसरा सार्वजनिक स्थान, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

  • 12 अक्टूबर से शुक्र का खेल खत्म! इन 5 राशियों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, प्यार से लेकर पैसों तक बरतनी होगी सावधानी

    12 अक्टूबर से शुक्र का खेल खत्म! इन 5 राशियों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, प्यार से लेकर पैसों तक बरतनी होगी सावधानी

    ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, 12 अक्टूबर 2026 को शुक्र अस्त होने जा रहे हैं। ज्योतिष में शुक्र को प्रेम, वैवाहिक जीवन, सुख-सुविधाओं, सौंदर्य और धन-वैभव का कारक माना जाता है। मान्यता है कि शुक्र के अस्त होने पर इन क्षेत्रों से जुड़े मामलों में कुछ लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। इसी वजह से इस गोचर को लेकर पांच राशियों के जातकों को विशेष सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

    मेष राशि: इस राशि के जातकों को खर्चों पर नियंत्रण रखने की सलाह दी जाती है। जल्दबाजी में खरीदारी या किसी बड़े निवेश का फैसला लेने से पहले अच्छी तरह विचार करें। रिश्तों में छोटी-छोटी बातों पर विवाद बढ़ाने से बचें और बातचीत के दौरान संयम रखें।

    वृषभ राशि: शुक्र को वृषभ राशि का स्वामी माना जाता है, इसलिए इस अवधि को ज्योतिषीय नजरिए से खास बताया जा रहा है। कामकाज में धैर्य रखने और निजी रिश्तों में गलतफहमियों से बचने की सलाह दी जाती है। किसी भी महत्वपूर्ण फैसले में केवल भावनाओं के आधार पर आगे न बढ़ें।

    कर्क राशि: इस राशि के लोगों को पारिवारिक मामलों और आर्थिक फैसलों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है। अचानक खर्च सामने आ सकते हैं, इसलिए बजट बनाकर चलना बेहतर रहेगा। रिश्तों में दूसरों की बात सुने बिना कोई निष्कर्ष निकालने से बचें।

    तुला राशि: शुक्र तुला राशि का भी स्वामी है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शुक्र के अस्त होने की अवधि में प्रेम संबंधों और वैवाहिक जीवन में धैर्य बनाए रखना जरूरी माना जाता है। कामकाज में भी किसी के साथ मतभेद होने पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय सोच-समझकर कदम उठाएं।

    मकर राशि: मकर राशि के जातकों को नौकरी, कारोबार और निवेश से जुड़े मामलों में जल्दबाजी से बचने की सलाह दी जाती है। किसी भी नए काम में पैसा लगाने से पहले जरूरी जानकारी जुटाएं। निजी जीवन में भी अपेक्षाओं को लेकर तनाव पैदा करने के बजाय स्पष्ट बातचीत करना बेहतर रहेगा।

    शुक्र के अस्त होने को लेकर ज्योतिष में अलग-अलग मान्यताएं हैं और इनके प्रभाव को लेकर सभी ज्योतिषियों की राय एक जैसी नहीं होती। इसलिए इन भविष्यवाणियों को निश्चित घटना या नुकसान की गारंटी नहीं समझना चाहिए। आर्थिक फैसले वास्तविक परिस्थितियों और सही जानकारी के आधार पर ही लेने चाहिए।

  • राहुल गांधी CJI से मिलने पहुंचे, सूर्यकांत ने कहा- चिट्ठी छोड़ो, कोर्ट में याचिका डालो! ‘दरवाजे 24 घंटे खुले हैं’, अब विपक्ष के सामने अगली चाल का सवाल

    राहुल गांधी CJI से मिलने पहुंचे, सूर्यकांत ने कहा- चिट्ठी छोड़ो, कोर्ट में याचिका डालो! ‘दरवाजे 24 घंटे खुले हैं’, अब विपक्ष के सामने अगली चाल का सवाल

    राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मिलने का वक्त नहीं मिला। मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और वोट चोरी के आरोपों को लेकर विपक्षी नेताओं ने CJI से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपने की मांग की थी, लेकिन मुख्य न्यायाधीश ने साफ कर दिया कि ऐसे मामलों में ज्ञापन देने के बजाय अदालत में याचिका दायर करनी चाहिए। यानी मामला सीधे मुलाकात से नहीं, अब कानूनी रास्ते से आगे बढ़ेगा।

    CJI सूर्यकांत ने कहा कि देश का कोई भी नागरिक अपनी शिकायत लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सकता है। उन्होंने राहुल गांधी के पत्र पर अपनी असमर्थता जताते हुए कहा कि संबंधित मामला पहले से ही अदालत में विचाराधीन है। ऐसे में न्यायपालिका के प्रशासनिक स्तर पर इस मुद्दे पर अलग से बैठक करना उचित नहीं होगा। अदालत में जो भी मामला आएगा, उस पर कानून के मुताबिक सुनवाई की जाएगी।

    दरअसल, राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए CJI से मिलने का अनुरोध किया था। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में गड़बड़ियां हुई हैं और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल हैं। इन्हीं मुद्दों को लेकर विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं।

    CJI ने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान के तहत सुप्रीम कोर्ट सरकार के रोजमर्रा के प्रशासनिक कामकाज में सीधे दखल नहीं दे सकता। अगर किसी को लगता है कि उसके कानूनी या संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है, तो वह अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है। यानी शिकायत कितनी भी बड़ी हो, उसे अदालत में उठाने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा।

    इस बीच, INDIA गठबंधन ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने का ऐलान किया है। विपक्षी नेता मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर अपनी बात रखना चाहते हैं। CJI से मुलाकात की मांग स्वीकार नहीं होने के बाद अब यह देखना अहम होगा कि विपक्ष अपने मुद्दों को अदालत के सामने किस तरह रखता है और क्या इस मामले में नई याचिका दायर की जाती है।

    फिलहाल CJI का संदेश साफ है—ज्ञापन लेकर मिलने के बजाय कानूनी शिकायत है तो याचिका दाखिल कीजिए। विपक्ष चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने मामला उठाने का रास्ता न्यायिक प्रक्रिया को बताया है। अब असली परीक्षा अदालत में होगी, जहां आरोपों और दावों को कानूनी तथ्यों के आधार पर परखा जाएगा।

  • चिता पर लिटाते ही रिश्तेदार बोला- ‘अरे, इसकी तो नब्ज चल रही है!’ फिर मुर्दे को लेकर अस्पताल भागा पूरा परिवार, डॉक्टरों ने जो बताया उससे टूट गई आखिरी उम्मीद

    चिता पर लिटाते ही रिश्तेदार बोला- ‘अरे, इसकी तो नब्ज चल रही है!’ फिर मुर्दे को लेकर अस्पताल भागा पूरा परिवार, डॉक्टरों ने जो बताया उससे टूट गई आखिरी उम्मीद

    तेलंगाना के करीमनगर जिले के हुजूराबाद में एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने अंतिम संस्कार के वक्त पूरे परिवार को उम्मीद और फिर गहरे सदमे में डाल दिया। सरिता नाम की महिला को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था और परिजन अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे। लेकिन चिता पर रखने के दौरान एक रिश्तेदार ने दावा कर दिया कि महिला की नब्ज चल रही है। इसके बाद वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई।

    हुजूराबाद की एकलव्य कॉलोनी की रहने वाली सरिता काफी समय से बीमार थीं। परिवार के मुताबिक, उनकी हालत बिगड़ने के बाद मौत हो गई थी। घर में मातम पसरा था और रिश्तेदार अंतिम विदाई की तैयारियों में जुटे थे। परिवार को लग रहा था कि अब सरिता कभी वापस नहीं आएंगी, लेकिन श्मशान में अचानक किए गए एक दावे ने सबको फिर उम्मीद से भर दिया।

    दरअसल, जब सरिता के शव को चिता पर रखा जा रहा था, तभी वहां मौजूद एक रिश्तेदार को लगा कि उनकी नब्ज चल रही है और शरीर में हलचल है। बस फिर क्या था, परिवार ने अंतिम संस्कार रोक दिया। बिना देर किए एम्बुलेंस की मदद से सरिता को अस्पताल ले जाया गया। जो लोग कुछ देर पहले उन्हें आखिरी विदाई देने पहुंचे थे, वे अब उनके दोबारा जीवित होने की उम्मीद लगाए बैठे थे।

    अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने महिला की दोबारा जांच की। रिपोर्ट के मुताबिक, ईसीजी और अन्य जांच के बाद डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि सरिता की मौत पहले ही हो चुकी थी। नब्ज चलने का दावा गलतफहमी निकला और परिवार की आखिरी उम्मीद भी टूट गई। अस्पताल में मौजूद परिजन यह खबर सुनकर बिलख पड़े।

    इस घटना ने हुजूराबाद इलाके में शोक की लहर पैदा कर दी। कुछ देर के लिए परिवार को लगा था कि शायद कोई चमत्कार हो गया है, लेकिन डॉक्टरों की जांच के बाद सच्चाई सामने आ गई। सरिता के निधन से परिवार पहले ही सदमे में था और इस घटनाक्रम ने उनकी पीड़ा को और बढ़ा दिया।

    इस पूरे मामले में सबसे दुखद पहलू यही रहा कि अंतिम विदाई के ठीक पहले परिवार को एक नई उम्मीद मिली और फिर वह भी टूट गई। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में नब्ज चलने की बात रिश्तेदार का दावा बताई गई है, डॉक्टरों की पुष्टि नहीं। घटना ने यह भी याद दिलाया कि मृत्यु की पुष्टि और ऐसी असाधारण परिस्थितियों में चिकित्सा जांच कितनी अहम होती है।

  • इमरान खान के गढ़ में शहबाज शरीफ का बड़ा दांव! इमरजेंसी लगाकर छीन ली PTI की सत्ता, मुख्यमंत्री समेत नेताओं पर गिरी गिरफ्तारी की गाज

    इमरान खान के गढ़ में शहबाज शरीफ का बड़ा दांव! इमरजेंसी लगाकर छीन ली PTI की सत्ता, मुख्यमंत्री समेत नेताओं पर गिरी गिरफ्तारी की गाज

    पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पार्टी PTI के लिए बड़ा झटका लगा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने इमरान खान के मजबूत राजनीतिक गढ़ खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लागू कर दी है। इस फैसले के साथ ही प्रांत में PTI की चुनी हुई सरकार के अधिकार निलंबित कर दिए गए और शासन की कमान संघीय सरकार के नियंत्रण में चली गई।

    पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने 11 अक्टूबर को संघीय कैबिनेट की सिफारिश के बाद इमरजेंसी की घोषणा को मंजूरी दी। सरकार ने इसके पीछे बिगड़ती कानून-व्यवस्था और बढ़ती आतंकी घटनाओं को वजह बताया है। उसका आरोप है कि प्रांतीय सरकार आतंकवाद से निपटने में पर्याप्त सहयोग नहीं कर रही थी और हालात इतने बिगड़ गए थे कि केंद्र को हस्तक्षेप करना पड़ा।

    इस फैसले के बाद खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री, मंत्रियों और अन्य प्रमुख पदाधिकारियों को अपने पद छोड़ने होंगे। प्रांत का प्रशासन अब नियुक्त गवर्नर और सलाहकार परिषद के जरिए चलाया जाएगा। सरकार ने शुरुआत में इस व्यवस्था को छह महीने तक लागू रखने की बात कही है। यानी जिस प्रांत में इमरान खान की पार्टी की सरकार थी, वहां अब सत्ता का समीकरण ही बदल गया है।

    मामले ने तब और तूल पकड़ लिया, जब PTI नेताओं की गिरफ्तारी की खबरें सामने आईं। पार्टी के नेताओं ने इस कदम का विरोध करते हुए इसे लोकतांत्रिक जनादेश पर हमला बताया है। PTI का आरोप है कि आतंकवाद का हवाला देकर उसकी चुनी हुई सरकार को हटाया जा रहा है। वहीं, संघीय सरकार का कहना है कि प्रांत की सुरक्षा स्थिति को देखते हुए यह कदम जरूरी था।

    इस पूरे घटनाक्रम के पीछे इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर चल रहा राजनीतिक टकराव भी अहम है। PTI समर्थक इस्लामाबाद की ओर मार्च निकाल रहे हैं और इमरान खान की रिहाई के साथ उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा देने की मांग कर रहे हैं। सरकार और पार्टी के बीच बातचीत से कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया, जिसके बाद तनाव और बढ़ गया। अधिकारियों ने इस्लामाबाद की ओर जाने वाले कई रास्तों पर भी अवरोध लगाए हैं।

    अब पाकिस्तान की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि खैबर पख्तूनख्वा में इमरान खान की पार्टी इस फैसले का विरोध किस तरह करेगी और क्या इससे केंद्र तथा PTI के बीच टकराव और बढ़ेगा। सरकार इसे सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक कार्रवाई मान रहा है। फिलहाल, इमरान खान के सबसे मजबूत गढ़ में सत्ता बदलने के इस फैसले ने पाकिस्तान की राजनीति को नए संकट के मुहाने पर खड़ा कर दिया है।

  • मिसाइल गिरी तो एयरपोर्ट पर मच गई चीख-पुकार! कैमरे में कैद हुआ मौत का खौफनाक मंजर, 13 की गई जान… मरने वालों में हैदराबाद का भारतीय भी

    मिसाइल गिरी तो एयरपोर्ट पर मच गई चीख-पुकार! कैमरे में कैद हुआ मौत का खौफनाक मंजर, 13 की गई जान… मरने वालों में हैदराबाद का भारतीय भी

    सऊदी अरब की राजधानी रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मिसाइल हमले का नया वीडियो सामने आया है। फुटेज में एयरपोर्ट के अंदर मौजूद यात्रियों के बीच अचानक धमाका होता दिखता है, जिसके बाद वहां भगदड़ जैसी स्थिति बन जाती है। इस हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है, जबकि 300 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।

    हमले के वक्त एयरपोर्ट पर बड़ी संख्या में यात्री मौजूद थे। इनमें उमराह के लिए मक्का-मदीना जाने वाले लोग भी शामिल थे। वीडियो में धमाके के बाद लोग घबराकर इधर-उधर भागते नजर आते हैं। कुछ ही पलों में एयरपोर्ट का माहौल सामान्य से खौफनाक हो गया और लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित जगह तलाशने लगे।

    इस हमले में एक भारतीय नागरिक की भी मौत हुई है। मृतक की पहचान हैदराबाद के मेहदीपट्टनम निवासी 46 वर्षीय मोहम्मद यूसुफ के रूप में हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, वह अपने परिवार के साथ मदीना जाने के लिए चेक-इन काउंटर के पास इंतजार कर रहे थे, तभी हमले के दौरान मलबे की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया।

    भारतीय दूतावास के मुताबिक, हमले में कई भारतीय भी घायल हुए हैं। दूतावास स्थानीय अधिकारियों और अस्पतालों के संपर्क में है और प्रभावित भारतीयों की स्थिति की जानकारी जुटा रहा है। यूसुफ की मौत के बाद उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, हमले के वक्त उनके परिवार के सदस्य भी उनके साथ थे और उनकी हालत गंभीर बताई गई।

    हमले को लेकर सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों पर आरोप लगाया है। हूती समूह ने सऊदी अरब के दूसरे ठिकानों पर हमलों की जिम्मेदारी भी ली है, हालांकि रियाद एयरपोर्ट पर हुए इस खास हमले को लेकर जिम्मेदारी और घटनाक्रम के अलग-अलग पहलुओं पर आधिकारिक जानकारी अहम है। लगातार हमलों के बाद सऊदी अरब में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है।

    एक ऐसा एयरपोर्ट, जहां लोग अपने सफर और इबादत की तैयारी कर रहे थे, अचानक मौत और तबाही का गवाह बन गया। अब इस हमले ने नागरिकों की सुरक्षा और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। सबसे दर्दनाक बात यह है कि इस तबाही में एक भारतीय परिवार ने भी अपना सदस्य खो दिया।

  • 3 छात्रों को कार से कुचलकर मार डाला, ऊपर से अकड़ ऐसी कि बोला- पापा सब संभाल लेंगे! लग्जरी कार का रौब दिखाने वाले आरोपी की कहानी ने खौलाया लोगों का खून

    3 छात्रों को कार से कुचलकर मार डाला, ऊपर से अकड़ ऐसी कि बोला- पापा सब संभाल लेंगे! लग्जरी कार का रौब दिखाने वाले आरोपी की कहानी ने खौलाया लोगों का खून

    केरल में एक तेज रफ्तार मिनी कूपर कार ने तीन छात्रों की जिंदगी छीन ली। हादसा कोच्चि एयरपोर्ट के पास नेदुम्बस्सेरी इलाके में रविवार तड़के करीब 2 बजे हुआ। तीनों छात्र स्कूटर से घर लौट रहे थे, तभी पीछे से आई तेज रफ्तार कार ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में तीनों की मौत हो गई।

    मृतकों की पहचान वायनाड की देविका, पलक्कड़ की गोपिका और कर्नाटक के इजाज के रूप में हुई है। तीनों छात्र थ्रिक्काकरा में पढ़ाई के साथ काम भी कर रहे थे। बताया गया कि वे चाय पीने के बाद घर लौट रहे थे और सड़क के बाईं ओर चल रहे थे। टक्कर इतनी भीषण थी कि स्कूटर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

    हादसे के बाद स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और कार चालक सुहैल सजीव को पकड़ लिया। इसी दौरान लोगों का आरोप है कि उसने अकड़ दिखाते हुए कहा कि उसके पिता सब संभाल लेंगे। तीन युवाओं की जान जाने के बाद सामने आए इस कथित बयान ने लोगों के गुस्से को और बढ़ा दिया। हालांकि, इस बयान की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं है।

    पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर उसके खिलाफ गैर इरादतन हत्या समेत संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। शुरुआती जांच में शराब पीकर गाड़ी चलाने का शक जताया गया है। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आरोपी ने बीयर पीने की बात स्वीकार की है। उसके खून के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हादसे के वक्त वह नशे में था या नहीं।

    मामला अस्पताल तक पहुंचा तो वहां भी तनाव देखने को मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, मृतकों के कुछ दोस्तों ने आरोपी का सामना किया और पुलिस की मौजूदगी में उसके सिर पर पीछे से वार किया। पुलिस ने बीच-बचाव कर स्थिति संभाली और एक व्यक्ति को हिरासत में लिया। हादसे के बाद पुलिस ने एयरपोर्ट के आसपास रात में गश्त और तेज रफ्तार वाहनों पर निगरानी बढ़ाने की बात कही है।

    तीन परिवारों के घर मातम पसरा है और अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि हादसे के वक्त कार की रफ्तार कितनी थी और चालक ने शराब पी रखी थी या नहीं। अगर नशे में गाड़ी चलाने की पुष्टि होती है, तो मामला और गंभीर हो सकता है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या सड़क पर किसी की जान लेने के बाद सिर्फ यह कह देना काफी है कि पापा सब संभाल लेंगे?

  • न वकील की डिग्री, न LLB का तमगा… फिर भी बन गए देश के मुख्य न्यायाधीश! अंग्रेजों के जमाने के ICS अफसर का ऐसा जलवा कि आज भी मिसाल दी जाती है

    न वकील की डिग्री, न LLB का तमगा… फिर भी बन गए देश के मुख्य न्यायाधीश! अंग्रेजों के जमाने के ICS अफसर का ऐसा जलवा कि आज भी मिसाल दी जाती है

    आज के दौर में कानून की पढ़ाई और डिग्री के बिना अदालत में करियर की कल्पना करना मुश्किल लगता है, लेकिन भारत के इतिहास में एक ऐसे शख्स भी रहे, जो बिना औपचारिक कानून की डिग्री के देश के मुख्य न्यायाधीश की कुर्सी तक पहुंचे। उनका नाम था कैलाश नाथ वांचू, जिन्हें के.एन. वांचू के नाम से भी जाना जाता है। वह भारत के 10वें मुख्य न्यायाधीश बने थे।

    कैलाश नाथ वांचू ने इलाहाबाद से बीए किया और साल 1924 में भारतीय सिविल सेवा यानी ICS की परीक्षा पास की। उस दौर में ICS को ब्रिटिश शासन की सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं में गिना जाता था। वांचू ने प्रशासनिक सेवा से अपना करियर शुरू किया और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में संयुक्त मजिस्ट्रेट तथा जिला एवं सत्र न्यायाधीश के तौर पर काम किया। यहीं से उनके न्यायिक सफर की नींव पड़ी।

    साल 1947 में वांचू इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश बने। इसके बाद उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। उनके पास कानून की औपचारिक डिग्री नहीं थी, लेकिन प्रशासनिक अनुभव और न्यायिक कामकाज की समझ ने उन्हें लगातार आगे बढ़ाया। यही वजह थी कि उनका नाम देश के सबसे ऊंचे न्यायिक पद तक पहुंचने वाले लोगों में दर्ज हो गया।

    11 अगस्त 1958 को वह सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश नियुक्त हुए। इसके करीब नौ साल बाद, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश के. सुब्बाराव के इस्तीफे के बाद 12 अप्रैल 1967 को कैलाश नाथ वांचू ने भारत के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला। उनका कार्यकाल 24 फरवरी 1968 तक रहा। इस तरह वह देश के उन चुनिंदा न्यायविदों में शामिल हो गए, जिनकी कहानी आज भी लोगों को हैरान करती है।

    वांचू की कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यही है कि उन्होंने पारंपरिक कानूनी डिग्री हासिल किए बिना न्यायपालिका के सर्वोच्च पद तक का सफर तय किया। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं था कि वह कानून की समझ से दूर थे। उनकी प्रशासनिक और न्यायिक भूमिकाओं ने उन्हें कानून से जुड़े मामलों का व्यापक अनुभव दिया था। उस समय न्यायपालिका में नियुक्तियों की व्यवस्था और आज की कानूनी योग्यता संबंधी अपेक्षाओं में भी अंतर था।

    आज जब डिग्री, प्रतियोगी परीक्षाओं और योग्यता को लेकर लंबी बहस होती है, तब कैलाश नाथ वांचू का उदाहरण इतिहास का एक अनोखा अध्याय याद दिलाता है। ICS अधिकारी से हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और फिर भारत के CJI तक पहुंचने वाला उनका सफर बताता है कि उस दौर में न्यायिक नियुक्तियों का रास्ता आज से काफी अलग था। बिना LLB के देश के मुख्य न्यायाधीश बनने की उनकी कहानी इसी वजह से आज भी लोगों की उत्सुकता बढ़ाती है।

  • बंगाल में बिरयानी पर भी धर्म का पोस्टर वार! ‘हिंदू दुकान से ही खाओ’, दुर्गा पूजा से पहले सिलीगुड़ी में नया बवाल; BJP ने झाड़ा पल्ला

    बंगाल में बिरयानी पर भी धर्म का पोस्टर वार! ‘हिंदू दुकान से ही खाओ’, दुर्गा पूजा से पहले सिलीगुड़ी में नया बवाल; BJP ने झाड़ा पल्ला

    पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में दुर्गा पूजा से पहले ऐसे पोस्टर लगाए गए हैं, जिन्होंने शहर में नई बहस छेड़ दी है। हिंदू जागरण मंच ने शहर में 100 से ज्यादा पोस्टर लगाकर लोगों से हिंदू दुकानों से बिरयानी खाने और पूजा की सामग्री खरीदने की अपील की है। अब बिरयानी की प्लेट से लेकर पूजा के सामान तक, दुकानदार की धार्मिक पहचान चर्चा के केंद्र में आ गई है।

    पोस्टरों पर साफ संदेश लिखा है कि हिंदू दुकानों में बिरयानी खाएं और हिंदू दुकानों से पूजा का सामान खरीदें। कुछ पोस्टरों में फेरीवालों की पहचान पर भी ध्यान देने की अपील की गई है। संगठन का कहना है कि यह कोई फरमान नहीं, बल्कि समाज से किया गया आग्रह है। उसके मुताबिक, हिंदू कारोबारियों का समर्थन करने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा।

    हिंदू जागरण मंच के सदस्य अभिषेक दास ने इस अभियान को सामाजिक संदेश बताया। उनका कहना है कि संगठन लोगों पर अपनी राय थोप नहीं रहा, बल्कि उन्हें अपने फैसले खुद लेने की अपील कर रहा है। लेकिन सवाल यही है कि जब खाने की पसंद और खरीदारी के फैसले के बीच धर्म को लाया जाए, तो मामला सिर्फ कारोबार तक सीमित रहता है या सामाजिक बहस भी खड़ी करता है?

    इस अभियान पर माकपा नेता और सिलीगुड़ी के पूर्व मेयर अशोक भट्टाचार्य ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने पोस्टर हटाने और अभियान के पीछे शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनका तर्क है कि धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक देश में किसी की आजीविका को धार्मिक पहचान से जोड़ना गलत है। स्थानीय लोगों के एक वर्ग ने भी इस अभियान पर सवाल उठाए हैं।

    उधर, केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने साफ किया कि हिंदू जागरण मंच एक अलग संगठन है और भाजपा इस अभियान का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि लोग खुद तय करें कि वे किन दुकानों पर जाना चाहते हैं। यानी पोस्टर लगाने वालों की अपनी दलील है, विरोध करने वालों के अपने सवाल हैं और भाजपा ने भी इस विवाद से दूरी बना ली है।

    अब दुर्गा पूजा से ठीक पहले सिलीगुड़ी में यह पोस्टर अभियान राजनीतिक और सामाजिक बहस का मुद्दा बन गया है। समर्थक इसे अपने समुदाय के कारोबार को बढ़ावा देने की अपील बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसे धार्मिक आधार पर खरीदारी को बांटने की कोशिश मान रहे हैं। फिलहाल सवाल यही है—बिरयानी का स्वाद अहम रहेगा या उसे बेचने वाले की धार्मिक पहचान?

  • रिश्ते में भाई-बहन, फिर भी चढ़ा इश्क का ऐसा बुखार! परिवार ने नहीं मानी बात तो शादीशुदा बहन के साथ युवक ने उठाया खौफनाक कदम

    रिश्ते में भाई-बहन, फिर भी चढ़ा इश्क का ऐसा बुखार! परिवार ने नहीं मानी बात तो शादीशुदा बहन के साथ युवक ने उठाया खौफनाक कदम

    उत्तर प्रदेश के उन्नाव से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने रिश्तों और परिवार की बंदिशों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां 24 साल के अभय कुमार और 20 साल की प्रीति के शव आम के बाग में पेड़ से लटके मिले। पुलिस के मुताबिक, दोनों रिश्ते में भाई-बहन थे, लेकिन उनके बीच लंबे समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था।

    घटना बिहार थाना क्षेत्र के धमनीखेड़ा गांव की है। रविवार को दोनों के शव मिलने की खबर फैलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, शवों को नीचे उतरवाया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। शुरुआती जांच में पुलिस इस घटना को प्रेम प्रसंग से जोड़कर देख रही है।

    इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि प्रीति की शादी करीब 10 महीने पहले ही हो चुकी थी। पुलिस के मुताबिक, शादी के बाद भी वह अभय के संपर्क में थी और काफी समय से अपने मायके में रह रही थी। यानी परिवार ने शादी कराकर इस रिश्ते से दूरी बनाने की कोशिश की, लेकिन कहानी का अंत बेहद दुखद हुआ।

    रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार सुबह करीब 10 बजे अभय और प्रीति घर से निकले थे। बाद में धमनीखेड़ा गांव के आम के बाग में दोनों के शव मिले। पुलिस का कहना है कि परिवार इस रिश्ते को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं था। इसी वजह से प्रीति के परिजनों ने उसकी शादी भी जल्दबाजी में कर दी थी।

    फिलहाल पुलिस दोनों परिवारों से पूछताछ कर रही है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। शुरुआती पूछताछ में प्रेम प्रसंग की बात सामने आई है, लेकिन घटना से पहले क्या हुआ और दोनों ने यह कदम किन परिस्थितियों में उठाया, इसकी पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।

    जिस रिश्ते को परिवार मंजूर नहीं कर रहा था, उसे लेकर आखिर हालात यहां तक कैसे पहुंच गए? शादी के बाद भी जारी संपर्क और परिवार की नाराजगी इस मामले के अहम पहलू हैं। अब पुलिस की जांच से ही पता चलेगा कि इस दर्दनाक घटना के पीछे की पूरी कहानी क्या थी।