राहुल गांधी के बाद अब किसान भी खोलेंगे मोर्चा! SIR पर 23 अक्टूबर को देशभर में हल्लाबोल, CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग से बढ़ेगी सियासी तपिश

चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया को लेकर जारी विवाद अब किसान आंदोलन तक पहुंच गया है। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने 23 अक्टूबर को देशभर में विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। हरियाणा के करनाल में हुई राष्ट्रीय परिषद की बैठक में फैसला लिया गया कि किसान जिला और तहसील मुख्यालयों पर जुटकर अपनी आवाज उठाएंगे। यानी अब मतदाता सूची के विवाद में किसान संगठन भी खुलकर मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।

संयुक्त किसान मोर्चा ने SIR प्रक्रिया को तत्काल रद्द करने की मांग की है। संगठन का आरोप है कि मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर लोगों के नाम हटाए जाने से उनके मतदान के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। SKM ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है। ये संगठन की मांगें और आरोप हैं, जिन पर संबंधित पक्षों का रुख अलग हो सकता है।

किसान संगठन ने दिल्ली में हाल के विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और दमन पर भी नाराजगी जताई है। SKM ने चेतावनी दी है कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों पर कार्रवाई जारी रही, तो किसान छात्रों और युवाओं के समर्थन में भी आगे आएंगे। संगठन ने विरोध प्रदर्शन के अधिकार को लोकतांत्रिक व्यवस्था का अहम हिस्सा बताते हुए लोगों से एकजुट होने की अपील की है।

बैठक में सिर्फ SIR ही नहीं, बल्कि किसानों की पुरानी मांगों पर भी चर्चा हुई। संयुक्त किसान मोर्चा ने न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP को कानूनी गारंटी देने, किसानों की कर्जमाफी, आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को मुआवजा, पेंशन और बीमा जैसी मांगें दोहराईं। इसके अलावा बिजली के निजीकरण का विरोध, बीज विधेयक 2025 को रद्द करने और किसानों तथा आदिवासियों के भूमि अधिकारों की रक्षा की मांग भी उठाई गई।

SKM ने 26 नवंबर को किसान आंदोलन की छठी बरसी के मौके पर लंबी लड़ाई के लिए तैयार रहने की अपील की है। संगठन का कहना है कि जब तक उसकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। करनाल की बैठक में 17 राज्यों से 142 प्रतिनिधियों के शामिल होने की जानकारी भी दी गई, जिससे संगठन की राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन की तैयारी का संकेत मिलता है।

अब 23 अक्टूबर के प्रदर्शन पर सबकी नजरें रहेंगी। SIR को लेकर विपक्ष पहले से ही चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है और अब संयुक्त किसान मोर्चा ने भी इस मुद्दे को अपने आंदोलन में शामिल कर लिया है। हालांकि, प्रदर्शन का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कितने किसान इसमें शामिल होते हैं और सरकार तथा चुनाव आयोग इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

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