गोरखपुर: जेल के अंदर कैदी अक्सर रिहाई की दुआ मांगते हैं, लेकिन गोरखपुर जेल में एक ऐसा ‘महाठग’ बैठा था जिसने जेल को ही अपनी ठगी का हेडक्वार्टर बना लिया। मिलिए ललित किशोर से, जो खुद तो धोखाधड़ी में अंदर गया था, लेकिन वहां भी उसकी ‘IAS’ बनने की खुजली शांत नहीं हुई।

मुन्ना भाई से भी दो कदम आगे!ललित किशोर ने जेल के कैदियों के बीच यह हवा फैला दी कि वह एक बहुत बड़ा IAS अधिकारी है और उसकी सेटिंग सीधे शासन स्तर पर है। जो बेचारे कैदी सालों से जमानत के लिए तरस रहे थे, ललित उनके लिए ‘मसीहा’ बनकर उभरा—लेकिन असल में वह उनकी मजबूरी का सौदा कर रहा था।
जब जेल प्रशासन ने अचानक छापेमारी की, तो ललित के पास से एक डायरी मिली। इस डायरी को देखकर अधिकारियों के होश उड़ गए! इसमें किसी अधिकारी की तरह नोट्स नहीं, बल्कि कैदियों को फंसाने की पूरी स्क्रिप्ट लिखी थी।किसे क्या बोलना है?किस कैदी से कितने पैसे ऐंठने हैं?जमानत के नाम पर कैसे झांसा देना है?…सब कुछ वहां दर्ज था।
ललित का जरूरत से ज्यादा ‘रौब’ ही उसकी बर्बादी का कारण बना। जेल प्रशासन को शक हुआ कि एक कैदी इतना ‘VVIP’ बनकर क्यों घूम रहा है? तलाशी ली गई तो उसकी डायरी और पेन ने उसकी पोल खोल दी। अब इस फर्जी साहब पर एक और नया मुकदमा दर्ज हो गया है।