शादी की सुहागरात बनी सीधे ‘जेल की रात’ — दिल्ली हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फ़ैसला! 17 साल की लड़की से शादी करने वाले पति की धज्जियां उड़ीं, अब POCSO एक्ट के तहत सलाखों के पीछे जाना तय!

दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिगों के अधिकारों को लेकर एक असाधारण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसने देश में बाल विवाह के नाम पर होने वाले अपराधों पर सीधा प्रहार किया है। यह फैसला हर उस व्यक्ति के लिए एक रेड सिग्नल है जो 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की से शादी करने की सोचता है।

मामला एक ऐसे पति से जुड़ा था जिसने सिर्फ 17 साल की नाबालिग लड़की से शादी की थी। शादी के बाद, पहली रात (सुहागरात) को दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने। पति ने कोर्ट में ज़ोरदार दलील दी कि यह शादी आपसी सहमति से हुई थी और इसलिए उस पर POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) एक्ट नहीं लगना चाहिए।

हाईकोर्ट का ‘कड़क’ और अंतिम निर्णय!दिल्ली हाईकोर्ट ने पति की इस दलील को सिरे से नकार दिया और अपना फैसला सुनाकर कानूनी गलियारों में भूचाल ला दिया:

⚡️ सहमति का कोई मतलब नहीं: कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि 18 साल से कम उम्र की लड़की की ‘सहमति’ का कोई कानूनी आधार नहीं है! यह नाबालिग के साथ किया गया यौन अपराध ही माना जाएगा।

🔥 सीधे POCSO: शादी चाहे किसी भी रीति-रिवाज या पर्सनल लॉ के तहत हुई हो, नाबालिग के साथ शारीरिक संबंध बनाना ‘यौन हमला’ (Sexual Assault) है और इसके लिए POCSO Act की सबसे सख्त धाराएं लागू होंगी!

💥 सज़ा तय: कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि पति को अब जेल की सज़ा भुगतनी ही होगी! शादी का बहाना बनाकर कानून से बचा नहीं जा सकता।

यह फैसला समाज के लिए एक जोरदार तमाचा है, जो दिखाता है कि भारत में नाबालिगों की सुरक्षा सबसे ऊपर है। अब बाल विवाह के नाम पर किसी भी तरह की दरिंदगी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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