इंडोनेशिया के कुछ इलाकों, खासकर वेस्ट जावा के पुंकाक क्षेत्र से एक हैरान करने वाली और बेहद संवेदनशील खबर सामने आई है। यहाँ ‘मुताह निकाह’ यानी अस्थायी विवाह (Temporary Marriage) के नाम पर गरीब महिलाओं के शोषण का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। यह प्रथा गरीबी और लालच का ऐसा मिश्रण है जिसने महिलाओं की गरिमा को दाँव पर लगा दिया है, जहाँ उन्हें ‘पार्ट-टाइम वाइफ’ या ‘खुशी के लिए पत्नी’ बनकर रहना पड़ रहा है।

‘मुताह निकाह’ शिया इस्लाम के कुछ संप्रदायों में मान्य एक अस्थायी विवाह का रूप है, जिसे सुन्नी समुदाय अवैध मानता है। लेकिन इंडोनेशिया के इस इलाके में इसे अवैध रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है:
समय सीमा: यह निकाह कुछ घंटों, दिनों या अधिकतम कुछ महीनों के लिए तय होता है। समय सीमा खत्म होते ही यह निकाह अपने आप खत्म हो जाता है।
विदेशी ‘ग्राहक’: इस प्रथा के अधिकांश ग्राहक मध्य-पूर्व के देशों से आने वाले धनी पर्यटक होते हैं, जो इंडोनेशिया की गरीबी का फायदा उठाते हैं।
सौदा: ‘निकाह’ के नाम पर दूल्हा (ग्राहक) दुल्हन और उसके परिवार को एक निश्चित राशि (दहेज या महर) देता है। गरीब परिवार पैसों की मजबूरी में अपनी बेटियों को इस तरह के अस्थायी रिश्ते में धकेल देते हैं।
रिपोर्ट्स में खुलासा किया गया है कि स्थानीय बिचौलिए (दलाल) सक्रिय हैं जो गरीब परिवारों की लड़कियों को इस अस्थायी विवाह के लिए तैयार करते हैं।
गरीबी संकट: यह साफ तौर पर गरीबी संकट का नतीजा है, जहाँ पैसे की कमी से जूझ रहे परिवार अपनी बेटियों को कुछ पैसे के लिए इस शोषण का शिकार होने देते हैं।
नतीजा: एक निश्चित समय के लिए महिला कानूनी रूप से विवाहित मानी जाती है, लेकिन समय पूरा होते ही वह अकेली रह जाती है, और अक्सर उसका भविष्य अंधकारमय हो जाता है। यह अस्थायी विवाह महिलाओं को सिर्फ उपभोग की वस्तु बनाकर रख देता है।
इंडोनेशियाई सरकार और धार्मिक संस्थाओं के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है कि वे इस अनैतिक और अवैध शोषण को कैसे रोकें, जो धर्म के नाम पर फल-फूल रहा है।