झज्जर के एक गांव में जिस घर में नई दुल्हन के आने की खुशियां मनाई जा रही थीं, वहां अचानक सन्नाटा पसर गया। घर में नई नवेली बहू ने कदम रखते ही अपनी ‘काली साजिश’ को अंजाम देना शुरू कर दिया। रात के खाने में उसने पूरे परिवार को नशीला पदार्थ खिला दिया ताकि वह आराम से घर साफ कर सके।

जैसे ही नशीली दवा का असर हुआ और ससुराल वाले गहरी नींद (बेहोशी) में चले गए, दुल्हन ने फुर्ती दिखाई। उसने घर में रखे सोने-चांदी के जेवर और नकदी अपनी पोटली में समेट ली और दबे पांव घर से निकल गई। उसे लगा कि वह अंधेरे का फायदा उठाकर निकल जाएगी।
दुल्हन की किस्मत खराब थी! गांव के कुछ लोगों को रात के सन्नाटे में एक नई दुल्हन को संदिग्ध हालत में भागते देख शक हो गया। उन्होंने पीछा करके उसे रोका और जब पूछताछ की, तो सारा सच सामने आ गया। गांव वालों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और दुल्हन को पकड़ लिया।
जब पुलिस मौके पर पहुँची, तो घर के लोग बेहोशी की हालत में मिले, जिन्हें तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। गनीमत रही कि समय रहते उन्हें चिकित्सा मिल गई। अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस खेल के पीछे कोई बड़ा गिरोह काम कर रहा है।
बड़ी सीख: लुटेरी दुल्हनों का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। बिना पूरी जांच-पड़ताल और वेरिफिकेशन के की गई शादियां अक्सर ऐसे ही अंजाम तक पहुँचाती हैं।