OMG! 500 साल पुराने श्राप से बचने के लिए ग्रामीणों ने आधी रात को करवा दी……..

राजस्थान के बांसवाड़ा जिले से एक बेहद अनोखी और चौंकाने वाली परंपरा सामने आई है। यहां के बड़ोदिया गांव में सदियों से एक ऐसी रस्म निभाई जाती है, जिसके बारे में सुनकर बाहरी लोग हैरान रह जाते हैं। मान्यता के अनुसार गांव को एक पुराने श्राप से बचाने के लिए हर साल होली से पहले आधी रात को दो लड़कों की आपस में प्रतीकात्मक शादी कराई जाती है।


बताया जाता है कि इस साल भी होली की पूर्व संध्या पर रात करीब एक बजे गांव के लोग दो किशोरों को उनके घरों से उठाकर मंदिर ले आए और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह की रस्में पूरी करवाईं। इस दौरान दोनों लड़के दूल्हा बनने की जिद करने लगे, लेकिन पंचायत और गांव के बुजुर्गों ने फैसला किया कि एक को दूल्हा और दूसरे को दुल्हन बनाया जाएगा। इसके बाद महिलाओं ने हल्दी की रस्म निभाई और पंडित ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सिंदूर और मंगलसूत्र की रस्में पूरी कराईं।

इस अनोखे आयोजन में सामाजिक संदेश भी दिया जाता है। विवाह के दौरान हवन कुंड में लकड़ी के साथ गुटखा, बीड़ी, सिगरेट और तंबाकू जैसे नशे के पदार्थ जलाए जाते हैं और सात फेरे लेकर लोगों को नशे से दूर रहने का संदेश दिया जाता है। इसके अलावा ‘मामेरा’ की रस्म में बच्चों को नकदी के साथ पेन और किताबें भेंट की जाती हैं, ताकि नई पीढ़ी को शिक्षा के प्रति प्रेरित किया जा सके।

ग्रामीणों के अनुसार इस परंपरा का इतिहास करीब 500 साल पुराना है। कहा जाता है कि पहले इस इलाके में खेर जाति का शासन था। बाद में जब दूसरे समुदाय के लोग यहां आकर बस गए, तो जाते समय खेर जाति के मुखिया ने श्राप दिया कि यदि होली से पहले इस विवाह की परंपरा नहीं निभाई गई तो गांव पर बड़ी विपत्ति आ जाएगी।

स्थानीय लोगों का दावा है कि करीब 90 साल पहले एक बार यह रस्म नहीं हो पाई थी, जिसके बाद गांव में अकाल जैसी स्थिति बन गई और बड़ी संख्या में पशुओं की मौत हो गई। तभी से ग्रामीण इस परंपरा को हर साल निभाते आ रहे हैं और मानते हैं कि इससे गांव किसी अनहोनी से सुरक्षित रहता है।

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