उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध नागचंद्रेश्वर मंदिर सालभर बंद रहता है और इसके कपाट केवल नाग पंचमी के दिन 24 घंटे के लिए खोले जाते हैं। यही वजह है कि इस एक दिन लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यह मंदिर महाकालेश्वर मंदिर परिसर की तीसरी मंजिल पर स्थित है और इसे देश के सबसे अनोखे शिव मंदिरों में गिना जाता है।

इस साल 17 अगस्त 2026 को नाग पंचमी के अवसर पर मंदिर के कपाट आधी रात के बाद श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। पूरे 24 घंटे तक भक्त भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन कर सकेंगे और उसके बाद मंदिर फिर पूरे एक साल के लिए बंद हो जाएगा।
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी दुर्लभ प्रतिमा है। यहां भगवान शिव, माता पार्वती और नागराज तक्षक की अद्भुत प्रतिमा विराजमान है। मान्यता है कि ऐसी प्रतिमा दुनिया में कहीं और नहीं है। इसी कारण नाग पंचमी के दिन यहां दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नाग पंचमी पर नागचंद्रेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना करने और भगवान शिव का जलाभिषेक करने से कालसर्प दोष, सर्प भय और जीवन की कई बाधाओं से राहत मिल सकती है। हालांकि यह धार्मिक आस्था पर आधारित मान्यता है।
हर साल मंदिर खुलने से पहले प्रशासन और महाकाल मंदिर समिति की ओर से विशेष तैयारियां की जाती हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा, दर्शन व्यवस्था और कतार प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए जाते हैं, क्योंकि कुछ ही घंटों में लाखों लोग यहां पहुंच जाते हैं।
नाग पंचमी के दिन नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन को लेकर देशभर के श्रद्धालुओं में खास उत्साह रहता है। साल में सिर्फ एक बार मिलने वाला यह अवसर धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और यही कारण है कि भक्त पूरे साल इस दिन का इंतजार करते हैं।

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