श्राद्ध का भोज खाने निकले थे बच्चे, घर लौटीं 13 अर्थियां! किसी की गोद सूनी हुई, किसी का पूरा परिवार उजड़ गया… राघोपुर में चीखों से कांपा गांव

बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में गंगा नदी ने ऐसा कहर बरपाया कि पूरे गांव की खुशियां मातम में बदल गईं। मंगलवार रात रामपुर श्यामचंद गांव के लोग श्राद्ध का भोज खाने के लिए नाव से नदी पार जा रहे थे। नाव पर बच्चे और दूसरे लोग सवार थे, लेकिन बीच नदी में नाव पलट गई। इस हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई, जिनमें ज्यादातर मासूम बच्चे थे। बुधवार को जब गांव में एक के बाद एक शव पहुंचे, तो हर तरफ चीख-पुकार मच गई।

जानकारी के मुताबिक, नाव में करीब 20 से 25 लोग सवार थे। सभी गंगा पार एक गांव में आयोजित श्राद्ध भोज में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान नाव का संतुलन बिगड़ा और वह नदी में पलट गई। देखते ही देखते बच्चे और दूसरे यात्री पानी में डूबने लगे। आसपास मौजूद लोगों ने बचाव की कोशिश की और प्रशासन को सूचना दी। हादसे के बाद SDRF की टीम और स्थानीय गोताखोरों ने राहत-बचाव अभियान चलाया।

इस हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि कई परिवारों ने एक साथ अपने बच्चों को खो दिया। रिपोर्टों के मुताबिक, मृतकों में नौ लड़कियां और चार लड़के शामिल थे। एक ही परिवार के कई बच्चों की मौत ने त्रासदी को और भयावह बना दिया। जिन घरों में त्योहारों की तैयारी होनी थी, वहां अब बच्चों की तस्वीरें और उनके कपड़े देखकर परिजन बिलख रहे हैं। गांव की गलियां, जहां बच्चों की आवाजें गूंजती थीं, वहां अब मातम पसरा है।

हादसे के बाद नाव की हालत को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, नाव पुरानी थी और उसमें बड़ा छेद होने की बात सामने आई है। नाव में क्षमता से ज्यादा लोग सवार थे या नहीं, और उसे चलाने के लिए सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं—इन पहलुओं की जांच की जा रही है। हालांकि, दुर्घटना की सटीक वजह आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। अगर सुरक्षा में लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय करना बेहद जरूरी होगा।

घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दुख जताया है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की, जबकि प्रधानमंत्री की ओर से भी मृतकों के परिवारों के लिए दो-दो लाख रुपये की सहायता घोषित की गई। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य के साथ हादसे की जांच शुरू की है। स्थानीय अधिकारियों से जवाब भी मांगा गया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इतनी बड़ी दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई।

लेकिन मुआवजे और जांच के बीच उन परिवारों का दर्द कम नहीं हो सकता, जिनके बच्चे अब कभी लौटकर नहीं आएंगे। श्राद्ध भोज में शामिल होने निकले बच्चों की यात्रा घरों में मातम छोड़ गई। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होगी और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नदी में नावों की सुरक्षा पर सख्ती की जाएगी? राघोपुर की यह त्रासदी पूरे देश को याद दिलाती है कि थोड़ी-सी लापरवाही भी कितनी बड़ी कीमत वसूल सकती है।

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