ईरान युद्ध और देश में एलपीजी सप्लाई को लेकर कांग्रेस के अंदर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। राहुल गांधी जहां लगातार मोदी सरकार की विदेश नीति और हालात संभालने के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं पार्टी के कई बड़े नेता उनसे अलग राय रखते नजर आ रहे हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा, कमलनाथ, शशि थरूर और मनीष तिवारी ने खुलकर सरकार के रुख का समर्थन किया है। इन नेताओं का मानना है कि ईरान संकट के दौरान भारत ने काफी संतुलित और समझदारी भरी विदेश नीति अपनाई है।
आनंद शर्मा ने सोशल मीडिया पर सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि भारत ने पश्चिम एशिया संकट को बहुत परिपक्व और कुशल तरीके से संभाला है। वहीं कमलनाथ ने साफ कहा कि देश में एलपीजी संकट जैसी कोई स्थिति नहीं है।
दूसरी तरफ राहुल गांधी लगातार मोदी सरकार पर हमला बोल रहे हैं। उन्होंने सरकार की विदेश नीति को “समझौता वाली नीति” बताया और कहा कि भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि कमजोर हुई है।शशि थरूर ने राहुल गांधी की बात से अलग राय रखते हुए सरकार की नीति को “जिम्मेदार स्टेटक्राफ्ट” बताया। वहीं मनीष तिवारी ने भी कई मौकों पर सरकार के पक्ष में बयान दिए हैं।इन बयानों के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। बीजेपी का कहना है कि राहुल गांधी अपनी ही पार्टी के नेताओं को साथ लेकर नहीं चल पा रहे हैं और कांग्रेस के अंदर अब खुलकर दो गुट दिखाई देने लगे हैं।
ईरान युद्ध और एलपीजी सप्लाई को लेकर कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने राहुल गांधी से अलग राय रखी है। आनंद शर्मा, कमलनाथ, शशि थरूर और मनीष तिवारी ने सरकार के रुख का समर्थन किया, जबकि राहुल गांधी लगातार मोदी सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठा रहे हैं।