श्रीनगर में ‘बारूद’ का महातांडव! 9 लोगों की दर्दनाक मौत, ‘मानवीय भूल’ या आतंकियों का खूनी खेल?

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर शहर के नौगाम पुलिस स्टेशन में शुक्रवार देर रात एक बहुत बड़ा धमाका हुआ। यह विस्फोट इतना भयानक था कि इसकी आवाज 30 किलोमीटर दूर तक सुनी गई। आस-पास के घरों की खिड़कियों के शीशे तक टूट गए और ज़मीन ऐसे हिल गई जैसे ज़ोरदार भूकंप आया हो।

इस भीषण हादसे में कम से कम 9 लोगों की जान चली गई है, जबकि 29 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं। मरने वालों में अधिकतर पुलिसकर्मी और फोरेंसिक टीम के लोग शामिल हैं। धमाके के बाद पुलिस स्टेशन की इमारत का एक बड़ा हिस्सा ढह गया और वहाँ खड़ी कई पुलिस गाड़ियाँ पूरी तरह जलकर राख हो गईं। यहाँ तक कि घटनास्थल से 300 फीट दूर तक इंसानी अंग बिखरे हुए मिले।

यह पुलिस स्टेशन उस आतंकी मॉड्यूल की जांच का मुख्य केंद्र था, जिसका संबंध दिल्ली के लाल किला विस्फोट से है। पुलिस ने हरियाणा के फरीदाबाद से पकड़े गए इसी मॉड्यूल से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री (जैसे कि 350 किलो अमोनियम नाइट्रेट) जब्त करके थाने में रखी हुई थी।

लापरवाही या हादसा: सबसे बड़ी आशंका यह है कि जब फोरेंसिक साइंस टीम और पुलिस अधिकारी मजिस्ट्रेट के सामने जब्त किए गए विस्फोटक पदार्थों का सैंपल ले रहे थे या उन्हें सील कर रहे थे, तभी हैंडलिंग में किसी गलती के कारण अचानक विस्फोट हो गया। पुलिस ने शुरुआती दौर में इसे आतंकवादी हमला मानने से इनकार किया है और इसे आकस्मिक विस्फोट बताया है।

आतंकी साज़िश: दूसरा और अधिक गंभीर पहलू यह है कि यह एक आतंकी साजिश हो सकती है। कुछ अधिकारियों को शक है कि हो सकता है परिसर में खड़ी किसी जब्त गाड़ी में ‘आईईडी’ (IED) लगाकर रखा गया हो, जिसके फटने से थाने में रखे विस्फोटक का बड़ा जखीरा भी उड़ गया। जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े एक आतंकी समूह ने इस हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है, जिसकी सच्चाई की जांच अभी चल रही है।

इस घटना के बाद इलाके में तुरंत एंबुलेंस और दमकल की गाड़ियां पहुंचीं और घायलों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। प्रशासन ने अस्पतालों को अलर्ट पर रखा है।

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