नई दिल्ली/नूंह: दिल्ली लाल किला ब्लास्ट मामले की जांच में डॉक्टरों के टेरर मॉड्यूल को लेकर हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। जांच एजेंसियों के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मुख्य आरोपी डॉ. उमर ने हरियाणा के नूंह स्थित हिदायत कॉलोनी में 10 दिनों के लिए एक कमरा किराए पर लिया था।

जांच एजेंसियों ने शनिवार को हरियाणा के नूंह के अलग-अलग हिस्सों में छापेमारी की। सूत्रों के मुताबिक, डॉ. उमर ने जिस मकान में कमरा किराए पर लिया था, वह अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े एक इलेक्ट्रिशियन की साली का है। इसी इलेक्ट्रिशियन के कहने पर डॉ. उमर को यह मकान किराए पर दिया गया था। जांच में सामने आया है कि सीसीटीवी फुटेज में डॉ. उमर की सफेद कार भी दिखाई दी है। हालांकि, मकान मालकिन के परिवार सहित गायब होने के चलते घर पर ताला लटका मिला है और जांच एजेंसियां उनका डेटा खंगाल रही हैं। यूनिवर्सिटी के एक इलेक्ट्रिशियन की गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच और तेज हो गई है।
जांच एजेंसियों ने फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ा एक और बड़ा खुलासा किया है। एजेंसियों के मुताबिक, यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने अपनी छवि बचाने के लिए आरोपी डॉक्टर उमर और डॉक्टर मुजम्मिल से बैक डेट में त्याग पत्र (इस्तीफे) ले लिए थे। इस खुलासे के बाद यूनिवर्सिटी प्रबंधन पर अन्य रिकॉर्ड से भी छेड़छाड़ करने का शक गहरा गया है। एजेंसियों ने यूनिवर्सिटी के काफी रिकॉर्ड को कब्जे में लेकर उनकी बारीकी से जांच शुरू कर दी है।
धमाके के साजिशकर्ता और फरीदाबाद मॉड्यूल के संदिग्धों की जांच में जुटी एजेंसियां एक दर्जन से अधिक संदिग्ध वाहनों की जांच कर रही हैं। ये सभी गाड़ियां दिल्ली के बाहर के नंबर की हैं और धमाकास्थल के आसपास मौजूद थीं। इनमें धमाके में इस्तेमाल की गई आई-20 कार, लाल रंग की फोर्ड इकोस्पोर्ट और एक ब्रेजा कार शामिल है, जिन्हें अलग-अलग स्थानों से बरामद किया जा चुका है।
25 नाम जांच के दायरे में: अल-फलाह यूनिवर्सिटी से बरामद डायरी और अमोनियम नाइट्रेट मिलने वाली जगह से मिली नोटबुक में करीब 25 नाम मिले हैं। ये सभी नाम अब जांच के दायरे में हैं।संदिग्ध जम्मू-कश्मीर और फरीदाबाद के: एजेंसियों को शक है कि संदिग्ध वाहनों में इन नामों से जुड़े कुछ लोग सवार हो सकते हैं। इनमें से ज्यादातर संदिग्ध जम्मू-कश्मीर और फरीदाबाद के रहने वाले बताए जा रहे हैं।
रूट मैपिंग और सीसीटीवी फुटेज: संदिग्ध वाहनों की पहचान और गतिविधियों का पता लगाने के लिए धमाकास्थल से जुड़ी सड़कों के तीन किलोमीटर के दायरे तक रूट मैपिंग की जा रही है। एजेंसियां 250 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज को बार-बार खंगाल रही हैं ताकि फिदायीन उमर के अलावा साजिश में शामिल अन्य लोगों की पहचान हो सके। संदिग्ध वाहनों की सूची बनाकर उनके मालिकों और चालकों से पूछताछ की जा रही है।