ढाका, बांग्लादेश: बांग्लादेश में हाल ही में एक बड़े राजनीतिक फैसले और हाई-प्रोफाइल कोर्ट के फैसलों ने पूरे देश में सज़ा-ए-मौत दिए जाने के खौफनाक तरीकों पर जोरदार बहस छेड़ दी है। शेख हसीना की सरकार के दौरान दिए गए इन फैसलों के बाद, हर कोई जानना चाहता है कि पड़ोसी देश बांग्लादेश अपने सबसे बड़े गुनाहगारों को आखिरी सज़ा कैसे देता है—क्या उन्हें फाँसी दी जाती है, गोली मारी जाती है या सिर कलम किया जाता है?

बांग्लादेश के कानून और जेल कोड के अनुसार, सज़ा-ए-मौत देने का मुख्य और आधिकारिक तरीका केवल फाँसी है। यहाँ गोली मारकर या सिर काटकर सज़ा देने का प्रावधान सामान्यतः नहीं है।
फाँसी का नियम: बांग्लादेश जेल कोड के तहत, जिन कैदियों को कोर्ट फाँसी की सज़ा सुनाती है, उन्हें जेल के अंदर विशेष कोठरी (कंडम सेल) में रखा जाता है।
आखिरी तैयारी: सज़ा देने की प्रक्रिया पूरी तरह से गोपनीय रखी जाती है। फांसी अक्सर सुबह तड़के दी जाती है, और इसे अंजाम देने के लिए जेल में विशेष रूप से नियुक्त किए गए ‘जललाद’ (हैंगमैन) मौजूद होते हैं।
अंतिम निरीक्षण: फांसी देने से पहले जेल अधीक्षक और डॉक्टरों की टीम मौजूद रहती है, जो यह सुनिश्चित करती है कि कानून का पूरी तरह पालन हो।
बांग्लादेश में पिछले कुछ सालों में युद्ध अपराधों और राजनीतिक विरोधियों को सज़ा देने के मामलों में अभूतपूर्व तेजी आई है। इन मामलों में जब-जब सज़ा-ए-मौत का ऐलान हुआ है, तब-तब फाँसी की तैयारियों ने देश और दुनिया का ध्यान खींचा है।यह कानून साफ बताता है कि चाहे मामला कितना भी हाई-प्रोफाइल क्यों न हो, बांग्लादेशी न्याय प्रणाली में मौत की अंतिम सज़ा केवल रस्सी के फंदे से ही पूरी की जाती है।