यूरोप का ‘जेनेटिक नाइटमेयर’: 197 बच्चों का एक ही ‘पिता’, लेकिन विरासत में मिली मौत की बीमारी! आखिर क्या है वो भयानक सच?

यूरोप में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे मेडिकल साइंस का ‘जेनेटिक नाइटमेयर’ (अनुवांशिक दुःस्वप्न) कहा जा रहा है। डेनमार्क के एक स्पर्म बैंक की भारी लापरवाही के कारण 14 देशों के लगभग 200 बच्चों का भविष्य अब अधर में लटक गया है।

एक शख्स ने 17 सालों तक अपना स्पर्म डोनेट किया, जिससे कम से कम 197 बच्चों का जन्म हुआ। लेकिन हाल ही में हुए खुलासे ने सबको हिला कर रख दिया है। उस डोनर में TP53 नामक एक दुर्लभ जेनेटिक म्यूटेशन पाया गया है। यह म्यूटेशन बच्चों में बेहद आक्रामक और जानलेवा कैंसर (जैसे ली-फ्रौमेनी सिंड्रोम) पैदा करने के लिए जिम्मेदार माना जाता है।

हैरानी की बात यह है कि स्पर्म बैंक ने इतने सालों तक डोनर की सही ढंग से जेनेटिक स्क्रीनिंग नहीं की। अब तक जिन 77 बच्चों का टेस्ट हुआ है, उनमें से 25 बच्चे पहले ही इस खतरनाक म्यूटेशन के शिकार पाए गए हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह संख्या और भी बढ़ सकती है।

यह मामला केवल एक मेडिकल गलती नहीं है, बल्कि उन परिवारों के लिए एक कभी न खत्म होने वाला डर बन गया है। अब पूरे यूरोप में स्पर्म डोनेशन के नियमों और क्लीनिकों की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।

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