नई दिल्ली: समय का पहिया रुकता नहीं, लेकिन कुछ जख्म ऐसे होते हैं जो वक्त के साथ और गहरे हो जाते हैं। दिल्ली के एक परिवार के लिए पिछले 4 साल किसी नरक से कम नहीं थे, जिनकी दो मासूम बेटियां अचानक गायब हो गई थीं। लेकिन दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और IPS पंकज कुमार की टीम ने जो कर दिखाया, वह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है।

यह मामला 4 साल पहले का है जब दो सगी बहनें, जो उस वक्त नाबालिग थीं, अपने घर के बाहर से अचानक लापता हो गई थीं। परिवार ने हर जगह खाक छानी, पुलिस के चक्कर लगाए, लेकिन बेटियों का कहीं पता नहीं चला। जैसे-जैसे दिन हफ्तों और महीनों में बदले, परिवार की उम्मीदें दम तोड़ने लगीं।
क्राइम ब्रांच ने जब इस केस को अपने हाथ में लिया, तो उन्होंने नए सिरे से कड़ियां जोड़ना शुरू किया। ‘ऑपरेशन मिलाप’ के तहत पुलिस ने उन सभी सुरागों को खंगाला जिन्हें नजरअंदाज कर दिया गया था।
डिजिटल फुटप्रिंट: पुलिस ने पुराने कॉल रिकॉर्ड्स और सोशल मीडिया एक्टिविटी को ट्रैक किया।ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन: टीम ने गुप्त सूचनाओं के आधार पर दिल्ली से लेकर पड़ोसी राज्यों तक छापेमारी की।
लगातार पीछा करने के बाद पुलिस आखिरकार उन लड़कियों तक पहुँच गई। जांच में सामने आया कि ये लड़कियां किसी बड़ी साजिश का शिकार होने से बाल-बाल बची थीं या फिर भटक गई थीं (पूरी कहानी में परिवार की निजता का सम्मान रखा गया है)। जब 4 साल बाद मां-बाप ने अपनी बेटियों को देखा, तो थाने का माहौल गमगीन हो गया। पिता के शब्द थे— “हमें लगा था हम उन्हें कभी नहीं देख पाएंगे।”
“4 साल का इंतज़ार, 2 गायब बहनें और दिल्ली पुलिस का जादुई ऑपरेशन; IPS पंकज कुमार ने ऐसे सुलझाई ‘अनसुलझी’ गुत्थी!””खत्म हुआ 1460 दिनों का वनवास! दिल्ली की गलियों से गायब हुई थीं दो मासूम बेटियां, क्राइम ब्रांच ने मौत के मुंह से निकाला बाहर!””मां की दुआ या पुलिस की जिद? दिल्ली की वो दो बहनें जो 4 साल पहले ‘धुआं’ हो गई थीं, एक फोन कॉल ने बदल दी पूरी कहानी!”