राजस्थान की एक खुली जेल से सामने आई यह कहानी आम प्रेम कथाओं से बिल्कुल अलग है। यहाँ दो ऐसे कैदी मिले, जो आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे। समय के साथ दोनों के बीच नज़दीकियाँ बढ़ीं और यह रिश्ता प्यार में बदल गया।

महिला कैदी प्रिया सेठ और पुरुष कैदी हनुमान प्रसाद, दोनों ही गंभीर आपराधिक मामलों में दोषी पाए गए थे। अलग-अलग मामलों में सजा काटते हुए जब उन्हें खुली जेल में रखा गया, तभी उनकी मुलाकात हुई। खुली जेल में मिलने वाली सीमित स्वतंत्रता और नियमित संपर्क ने दोनों को एक-दूसरे के करीब ला दिया।बताया जाता है कि दोनों ने जेल प्रशासन के माध्यम से शादी की अनुमति के लिए आवेदन किया।
इसके बाद मामला अदालत तक पहुँचा। राजस्थान हाईकोर्ट ने कैदियों के वैवाहिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए पैरोल पर विचार करने का निर्देश दिया।अदालत के निर्देश के बाद संबंधित समिति ने दोनों को सीमित अवधि की पैरोल दी, ताकि वे विवाह कर सकें। पैरोल मिलने के बाद दोनों ने शादी की तैयारियाँ शुरू कीं।
सुरक्षा और कानूनी शर्तों के साथ विवाह की अनुमति दी गई।यह मामला सामने आने के बाद समाज में मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं। कुछ लोग इसे कैदियों के मानवीय अधिकारों से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे नैतिक और सामाजिक दृष्टि से गलत मानते हैं।
फिलहाल यह कहानी कानून, समाज और इंसानी भावनाओं के टकराव का एक अनोखा उदाहरण बन चुकी है, जिसने पूरे राज्य में चर्चा को जन्म दे दिया है।