‘संसद मार्च’ के दौरान खुद कहां थे अभिजीत दीपके? लगातार उठ रहे सवालों पर आखिरकार तोड़ी चुप्पी, बताई पूरी सच्चाई

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संसद मार्च के दौरान खुद आगे न बढ़ने को लेकर लगातार हो रही आलोचनाओं पर आखिरकार अभिजीत दीपके ने अपनी चुप्पी तोड़ दी है। सोशल मीडिया पर कई दिनों से सवाल उठ रहे थे कि जब हजारों छात्र संसद की ओर बढ़ रहे थे, तब आंदोलन का प्रमुख चेहरा आखिर कहां था। अब दीपके ने इन सवालों का विस्तार से जवाब देते हुए उस दिन की पूरी स्थिति बताई है।

अभिजीत दीपके ने कहा कि लोगों को जो वीडियो सोशल मीडिया पर दिखाई दिए, उनमें पूरी तस्वीर नजर नहीं आई। उनके मुताबिक, वह प्रदर्शनकारियों के साथ ही मौजूद थे और एक ट्रक पर चढ़कर पूरे मार्च की निगरानी कर रहे थे। उनका कहना है कि ऐसा उन्होंने अपनी सुरक्षा या बचने के लिए नहीं, बल्कि बड़ी भीड़ को नियंत्रित रखने और सभी तक निर्देश पहुंचाने के लिए किया था।

दीपके का दावा है कि अगर वह भी बाकी प्रदर्शनकारियों की तरह भीड़ के बीच होते, तो हजारों लोगों तक जरूरी संदेश पहुंचाना मुश्किल हो जाता। उन्होंने कहा कि ट्रक पर मौजूद रहकर वह लगातार लोगों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने, किसी भी तरह की हिंसा से बचने और अनुशासन बनाए रखने की अपील कर रहे थे। उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य किसी तरह का टकराव नहीं, बल्कि अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाना था।

उन्होंने उन आरोपों को भी खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि पुलिस कार्रवाई के दौरान वह पीछे हट गए थे। दीपके के अनुसार, स्थिति तेजी से बदल रही थी और भीड़ को संभालना सबसे बड़ी जिम्मेदारी थी। उनका कहना है कि नेतृत्व का मतलब सिर्फ सबसे आगे चलना नहीं, बल्कि पूरे आंदोलन को सही दिशा देना भी होता है। इसी वजह से उन्होंने वह भूमिका निभाई, जो उन्हें उस समय सबसे जरूरी लगी।

इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर फिर से बहस तेज हो गई है। कुछ लोग दीपके के स्पष्टीकरण का समर्थन कर रहे हैं और इसे व्यावहारिक फैसला बता रहे हैं, जबकि कई लोग अब भी उनके जवाब से संतुष्ट नहीं हैं। आंदोलन और संसद मार्च को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं।

फिलहाल अभिजीत दीपके का यह बयान चर्चा का विषय बना हुआ है। संसद मार्च के दौरान उनकी भूमिका को लेकर उठे सवालों पर उन्होंने अपना पक्ष सार्वजनिक कर दिया है। अब यह बहस जारी है कि उनका फैसला सही था या नहीं, लेकिन इतना तय है कि इस बयान के बाद आंदोलन और उसके नेतृत्व को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

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