दुनिया के महान ऑलराउंडरों में गिने जाने वाले शाकिब अल हसन का क्रिकेट करियर पिछले कुछ वर्षों में लगातार विवादों के घेरे में रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह उनकी राजनीतिक पारी मानी जाती है। क्रिकेट के साथ-साथ राजनीति में कदम रखने और तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग से जुड़ने के बाद उनका नाम लगातार राजनीतिक विवादों में आने लगा।

साल 2023 में शाकिब अवामी लीग में शामिल हुए और 2024 के आम चुनाव में सांसद भी चुने गए। लेकिन 2024 के छात्र आंदोलन और शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश की राजनीति पूरी तरह बदल गई। इसके बाद शाकिब भी आलोचनाओं के केंद्र में आ गए और उनके खिलाफ कई तरह के आरोप और कानूनी मामले सामने आए।
रिपोर्टों के मुताबिक, आंदोलन के दौरान चुप्पी साधने को लेकर भी शाकिब की काफी आलोचना हुई। कई लोगों ने उन्हें पूर्व सरकार का करीबी बताते हुए राष्ट्रीय टीम से बाहर करने की मांग की। बाद में शाकिब ने सार्वजनिक रूप से अपनी चुप्पी पर अफसोस भी जताया, लेकिन तब तक उनकी छवि को काफी नुकसान पहुंच चुका था।
राजनीतिक विवादों के साथ-साथ शाकिब पर चेक बाउंस और अन्य कानूनी मामलों की कार्रवाई भी हुई। इसी बीच उन्होंने शेख हसीना के समर्थन में सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया, जिसके बाद विरोध और तेज हो गया। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, शेख हसीना के एक कार्यक्रम में शामिल होने के कुछ समय बाद उनके घर पर भी हमला किए जाने की खबर सामने आई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
कभी बांग्लादेश क्रिकेट की पहचान रहे शाकिब आज अपने क्रिकेट से ज्यादा राजनीतिक विवादों की वजह से सुर्खियों में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीति में उनकी सक्रिय भूमिका ने उनके क्रिकेट करियर और सार्वजनिक छवि, दोनों पर बड़ा असर डाला। हालांकि इस पर अलग-अलग लोगों की अलग-अलग राय है।
फिलहाल शाकिब अल हसन का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है। एक समय बांग्लादेश क्रिकेट के सबसे बड़े सितारे माने जाने वाले इस खिलाड़ी की कहानी अब खेल से ज्यादा राजनीति और विवादों के इर्द-गिर्द घूमती नजर आ रही है। आने वाले समय में कानूनी मामलों और राजनीतिक घटनाक्रम का उनके करियर पर क्या असर पड़ेगा, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।
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