NEET और भर्ती परीक्षाओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच सोनम वांगचुक ने प्रदर्शन के दौरान इस्तेमाल हुई गालियों और नाराजगी पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि युवाओं की भाषा का समर्थन नहीं किया जा सकता, लेकिन उसके पीछे छिपे दर्द और निराशा को समझना बेहद जरूरी है।

सोनम वांगचुक ने कहा कि जब बड़ी संख्या में युवा लंबे समय तक बेरोजगारी, परीक्षा विवाद और अनिश्चित भविष्य का सामना करते हैं, तो उनके भीतर गुस्सा और हताशा बढ़ना स्वाभाविक है। उनके मुताबिक, ऐसी परिस्थितियों में कई बार नाराजगी गलत शब्दों के रूप में भी बाहर आ जाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर वह प्रधानमंत्री होते, तो सबसे पहले आंदोलन कर रहे युवाओं से सीधे मिलते, उनकी बातें सुनते और समस्याओं का समाधान निकालने की कोशिश करते। उनका मानना है कि संवाद किसी भी विवाद को सुलझाने का सबसे प्रभावी तरीका है।
वांगचुक ने युवाओं से भी अपील की कि वे अपना आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रखें। उन्होंने कहा कि विरोध दर्ज कराना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन भाषा और व्यवहार ऐसा होना चाहिए जिससे समाज में सकारात्मक संदेश जाए।
हाल के दिनों में पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और बेरोजगारी को लेकर देशभर में कई जगह छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में सोनम वांगचुक का यह बयान सामने आया है, जिस पर सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा हो रही है।
फिलहाल उनके बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक तरफ कुछ लोग उनके संवाद वाले सुझाव का समर्थन कर रहे हैं, तो दूसरी ओर बहस इस बात पर भी हो रही है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान भाषा की मर्यादा कैसे बनाए रखी जाए।
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