बिहार से एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने हर किसी को हैरानी में डाल दिया। यहां एक गांव में करीब 2 किलोमीटर लंबी सड़क अचानक गायब हो गई। लोगों ने जब मौके पर पहुंचकर देखा तो वहां सड़क की जगह गेहूं की फसल लहलहाती नजर आई।
यह मामला बांका जिले के रजौन प्रखंड के खरौनी गांव का बताया जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक, जिस सड़क से लोग रोजाना आवाजाही करते थे, वह कुछ ही दिनों में पूरी तरह गायब हो गई। शुरुआत में लोगों को लगा कि शायद वे गलत रास्ते पर आ गए हैं, लेकिन बाद में पूरा मामला सामने आया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ दबंगों ने ट्रैक्टर से सड़क को जोत दिया और उसकी जगह गेहूं की बुआई कर दी। जब आसपास के गांव के लोगों ने इसका विरोध किया तो उन्हें धमकाने और मारपीट की कोशिश करने का भी आरोप लगाया गया।
सड़क गायब होने के बाद ग्रामीणों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मजबूरी में लोग अब पगडंडियों का सहारा ले रहे हैं। इस मामले की शिकायत प्रशासन से की गई है, जिसके बाद अधिकारियों ने जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
आंध्र प्रदेश के तिरुमला स्थित भगवान वेंकटेश्वर मंदिर से कई रहस्य और मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। इन्हीं में से एक यह भी है कि मंदिर के गर्भगृह में अन्य मंदिरों की तरह घंटी नहीं टंगी है। इसके पीछे एक प्राचीन धार्मिक कथा प्रचलित है, जिसे श्रद्धालु आज भी आस्था के साथ मानते हैं।
मान्यता के अनुसार, संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले द्रोणांबा और अनंत सूर्य नामक दंपति ने भगवान वेंकटेश्वर की कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने गर्भगृह की घंटी उन्हें प्रसाद स्वरूप प्रदान कर दी। इसी दिव्य कृपा के बाद उनके घर महान वैष्णव संत वेदांत देशिक का जन्म हुआ।
कहा जाता है कि वेदांत देशिक बचपन से ही असाधारण प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने अपने जीवन में कई धार्मिक ग्रंथों की रचना की और वैष्णव परंपरा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके जीवन से जुड़ी अनेक चमत्कारी कथाएं भी धार्मिक ग्रंथों और लोकमान्यताओं में मिलती हैं।
हालांकि, तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) की ओर से गर्भगृह में घंटी न होने का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है। मंदिर की पूजा-पद्धति प्राचीन वैखानस आगम पर आधारित है, जिसके अनुसार यहां की परंपराएं अन्य मंदिरों से अलग हैं। इसलिए श्रद्धालु इस मान्यता को आस्था और परंपरा से जोड़कर देखते हैं।
गैस छोड़ना शरीर की एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन कई लोगों के मन में सवाल रहता है कि आखिर दिनभर में कितनी बार ऐसा होना सामान्य माना जाता है। हाल ही में किए गए एक अध्ययन में इस बात का जवाब देने की कोशिश की गई है।
शोध के अनुसार, स्वस्थ व्यक्ति दिनभर में कई बार गैस पास कर सकता है। यह संख्या हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकती है, क्योंकि इसका सीधा संबंध खानपान, पाचन तंत्र और आंतों में मौजूद बैक्टीरिया से होता है। सामान्य तौर पर दिन में 5 से 20 बार गैस छोड़ना सामान्य माना जाता है।
स्टडी में यह भी पाया गया कि उम्र बढ़ने के साथ गैस छोड़ने की आवृत्ति में बदलाव देखा जा सकता है। खासकर 26 से 45 वर्ष की उम्र के लोगों में यह औसतन सबसे ज्यादा दर्ज की गई, जबकि कम उम्र के लोगों में इसकी संख्या अपेक्षाकृत कम रही।
विशेषज्ञों का कहना है कि गैस बनने के पीछे फाइबर युक्त भोजन, बीन्स, पत्ता गोभी, ब्रोकली, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स और खाते समय ज्यादा हवा निगलना जैसी कई वजहें हो सकती हैं। हर व्यक्ति का पाचन तंत्र अलग होता है, इसलिए सभी पर इनका असर समान नहीं होता।
अगर गैस के साथ लगातार पेट दर्द, खून आना, अचानक वजन कम होना, लंबे समय तक दस्त या कब्ज जैसी समस्याएं भी हों, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है।
कुल मिलाकर, गैस छोड़ना शरीर की सामान्य प्रक्रिया है और केवल इसकी संख्या के आधार पर चिंता करने की जरूरत नहीं होती। यदि इसके साथ कोई गंभीर लक्षण नहीं हैं, तो यह आमतौर पर स्वस्थ पाचन तंत्र का ही संकेत माना जाता है।
चीन के ग्वांगझोउ शहर में आयोजित फायरफ्लाई कॉमिक कन्वेंशन में एक बेहद अजीब मामला सामने आया, जिसने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी। इवेंट में कुछ महिला कॉस्प्लेयर्स ने अपने नंगे पैर नींबू और पानी से भरे टब में डुबोए रखे, जबकि उनके साथ मौजूद लोग उसी टब से पेय निकालकर ग्राहकों को बेच रहे थे। इस ड्रिंक को मजाकिया अंदाज में ‘फुट जूस’ नाम दिया गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस ड्रिंक का एक कप करीब 50 युआन (लगभग 670 रुपये) में बेचा गया। हैरानी की बात यह रही कि भारी कीमत और विवादित तरीके के बावजूद कई लोग इसे खरीदने के लिए लाइन में लग गए। वायरल वीडियो में कुछ लोग कॉस्प्लेयर्स के पैरों से टपकती बूंदों को पकड़ने की कोशिश करते भी दिखाई दिए।
स्टॉल पर एक नोटिस लगाया गया था, जिसमें लिखा था कि यह गतिविधि केवल मनोरंजन के उद्देश्य से की जा रही है और किसी अनुचित व्यवहार को बढ़ावा देने का इरादा नहीं है। हालांकि, यह सफाई लोगों को पसंद नहीं आई।
जैसे ही इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, लोगों ने इसे अस्वच्छ और बेहद आपत्तिजनक बताते हुए तीखी आलोचना शुरू कर दी। बढ़ते विवाद के बाद इवेंट आयोजकों ने संबंधित कॉस्प्लेयर्स को स्टॉल हटाने और कार्यक्रम से बाहर जाने के लिए कह दिया।
अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की जांच के दौरान एक और अहम जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसियों को आरोपी सुभाष श्रीवास्तव के बैंक खाते में करीब 12 लाख रुपये जमा होने के संकेत मिले हैं। अब यह पता लगाया जा रहा है कि यह रकम किस स्रोत से आई और इसका मंदिर के चढ़ावे से कोई संबंध है या नहीं।
जांच में सामने आया है कि सुभाष श्रीवास्तव मंदिर में दान पेटियों से निकाली गई नकदी की गिनती की व्यवस्था से जुड़े थे। इसी वजह से उनकी भूमिका पहले से जांच के दायरे में है। पुलिस और एसआईटी बैंक खातों, संपत्ति और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की गहन पड़ताल कर रही है।
अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच के दौरान संदिग्ध लेनदेन या अवैध संपत्ति के सबूत मिलते हैं, तो उन्हें केस डायरी का हिस्सा बनाया जाएगा और उसी आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और एजेंसियां सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही हैं।
बिहार के चर्चित ईओ विमल कुमार हत्याकांड में अब एक नया मोड़ सामने आया है। पुलिस जहां इस मामले में गिरफ्तार ड्राइवर के कथित कबूलनामे के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है, वहीं मृतक की पत्नी के ताजा आरोपों ने पूरे मामले को नई दिशा दे दी है। उनके बयान के बाद इस हत्याकांड को लेकर एक बार फिर कई सवाल उठने लगे हैं।
पुलिस के अनुसार, नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी (EO) विमल कुमार की हत्या के मामले में उनके ड्राइवर को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि पूछताछ के दौरान उसने हत्या करने की बात स्वीकार की। पुलिस का कहना है कि दोनों के बीच रास्ते में विवाद हुआ था, जिसके बाद कथित तौर पर यह वारदात हुई। हालांकि मामले की जांच अभी जारी है और सभी साक्ष्यों का सत्यापन किया जा रहा है।
इसी बीच मृतक की पत्नी ने मीडिया से बातचीत में गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनके पति पर लंबे समय से दबाव बनाया जा रहा था और उनसे कथित तौर पर बड़ी रकम की मांग भी की जाती थी। पत्नी ने दावा किया कि उनके पति कई बार इन बातों का जिक्र घर पर कर चुके थे। उन्होंने मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच कराने की मांग की है। ये आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
दूसरी ओर, जिन पर आरोप लगाए गए हैं उन्होंने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि उनका इस घटना से कोई संबंध नहीं है और सच्चाई जांच के बाद सामने आ जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि वे जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करेंगे और किसी भी तरह की पूछताछ के लिए तैयार हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जांच कई पहलुओं पर एक साथ चल रही है। फॉरेंसिक टीम सबूत जुटा रही है, घटनास्थल से मिले साक्ष्यों की जांच की जा रही है और ड्राइवर के बयान का भी अन्य सबूतों से मिलान किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, अंतिम निष्कर्ष सभी साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही निकाला जाएगा।
फिलहाल यह मामला पूरे बिहार में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ पुलिस अपनी जांच को आगे बढ़ा रही है, तो दूसरी ओर मृतक के परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों ने इस हत्याकांड को नया मोड़ दे दिया है। अब सभी की नजर जांच एजेंसियों पर टिकी है कि आखिर इस हाई-प्रोफाइल केस की पूरी सच्चाई कब और कैसे सामने आएगी।
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब और तेज हो गया है। कई दिनों से राजधानी रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में अब छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो भी आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। उनके इस फैसले के बाद आंदोलन को नई ऊर्जा मिली है और बड़ी संख्या में छात्र लगातार धरना स्थल पर पहुंच रहे हैं।
छात्रों का कहना है कि उनका विरोध किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। उनका आरोप है कि JPSC, JSSC और अन्य भर्ती परीक्षाओं में लंबे समय से पारदर्शिता की कमी और अनियमितताओं के आरोप सामने आते रहे हैं। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।
देवेंद्र नाथ महतो ने अनशन शुरू करते हुए कहा कि यह लड़ाई केवल कुछ अभ्यर्थियों की नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य की है। उनका कहना है कि जब तक छात्रों की मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन और अनशन जारी रहेगा। उन्होंने सभी प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाने की भी अपील की।
धरना स्थल पर लगातार छात्रों की संख्या बढ़ती जा रही है। कई छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों ने भी आंदोलन के प्रति अपना समर्थन जताया है। प्रदर्शनकारी सरकार से सीधी बातचीत, भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक भरोसेमंद व्यवस्था नहीं बनेगी, तब तक युवाओं का विश्वास बहाल नहीं हो पाएगा।
दूसरी ओर, इस आंदोलन ने राज्य की राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है। विभिन्न राजनीतिक दल और जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इसी बीच सरकार पर छात्रों की मांगों पर जल्द फैसला लेने का दबाव भी लगातार बढ़ रहा है।
फिलहाल रांची में आंदोलन जारी है और सभी की नजर सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है। छात्र नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन तब तक खत्म नहीं होगा, जब तक भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों का संतोषजनक समाधान नहीं निकलता। आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत होती है या नहीं, इसी पर पूरे आंदोलन की आगे की दिशा तय होगी।
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। राजधानी रांची में सैकड़ों छात्र कई दिनों से धरने पर बैठे हैं और अब यह आंदोलन अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल तक पहुंच गया है। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
इस आंदोलन को हाल ही में अभिजीत दीपके और उनकी पार्टी का भी समर्थन मिला है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है। उनके समर्थन के बाद यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि 14वीं JPSC परीक्षा, JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। उनका कहना है कि पहले भी पेपर लीक और गड़बड़ियों के आरोप लगे थे, लेकिन अब तक दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई। इसी वजह से छात्रों का सरकारी जांच पर भरोसा कमजोर पड़ गया है।
छात्रों की प्रमुख मांग है कि इन मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता लाई जाए और जिन परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोप हैं, उनके बारे में स्पष्ट निर्णय लिया जाए। प्रदर्शनकारी यह भी चाहते हैं कि सरकार सीधे उनसे बातचीत करे और उनकी चिंताओं का समाधान निकाले।
भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों का कहना है कि यह लड़ाई केवल एक परीक्षा की नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य की है। उनका दावा है कि अगर भर्ती प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा खत्म हो गया, तो मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों का भविष्य भी प्रभावित होगा। इसी कारण वे शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।
फिलहाल आंदोलन जारी है और सरकार की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत होती है या नहीं, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं। झारखंड का यह आंदोलन अब राज्य से निकलकर देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर एक बड़ी बहस का विषय बन चुका है।
संसद मार्च के दौरान खुद आगे न बढ़ने को लेकर लगातार हो रही आलोचनाओं पर आखिरकार अभिजीत दीपके ने अपनी चुप्पी तोड़ दी है। सोशल मीडिया पर कई दिनों से सवाल उठ रहे थे कि जब हजारों छात्र संसद की ओर बढ़ रहे थे, तब आंदोलन का प्रमुख चेहरा आखिर कहां था। अब दीपके ने इन सवालों का विस्तार से जवाब देते हुए उस दिन की पूरी स्थिति बताई है।
अभिजीत दीपके ने कहा कि लोगों को जो वीडियो सोशल मीडिया पर दिखाई दिए, उनमें पूरी तस्वीर नजर नहीं आई। उनके मुताबिक, वह प्रदर्शनकारियों के साथ ही मौजूद थे और एक ट्रक पर चढ़कर पूरे मार्च की निगरानी कर रहे थे। उनका कहना है कि ऐसा उन्होंने अपनी सुरक्षा या बचने के लिए नहीं, बल्कि बड़ी भीड़ को नियंत्रित रखने और सभी तक निर्देश पहुंचाने के लिए किया था।
दीपके का दावा है कि अगर वह भी बाकी प्रदर्शनकारियों की तरह भीड़ के बीच होते, तो हजारों लोगों तक जरूरी संदेश पहुंचाना मुश्किल हो जाता। उन्होंने कहा कि ट्रक पर मौजूद रहकर वह लगातार लोगों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने, किसी भी तरह की हिंसा से बचने और अनुशासन बनाए रखने की अपील कर रहे थे। उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य किसी तरह का टकराव नहीं, बल्कि अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाना था।
उन्होंने उन आरोपों को भी खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि पुलिस कार्रवाई के दौरान वह पीछे हट गए थे। दीपके के अनुसार, स्थिति तेजी से बदल रही थी और भीड़ को संभालना सबसे बड़ी जिम्मेदारी थी। उनका कहना है कि नेतृत्व का मतलब सिर्फ सबसे आगे चलना नहीं, बल्कि पूरे आंदोलन को सही दिशा देना भी होता है। इसी वजह से उन्होंने वह भूमिका निभाई, जो उन्हें उस समय सबसे जरूरी लगी।
इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर फिर से बहस तेज हो गई है। कुछ लोग दीपके के स्पष्टीकरण का समर्थन कर रहे हैं और इसे व्यावहारिक फैसला बता रहे हैं, जबकि कई लोग अब भी उनके जवाब से संतुष्ट नहीं हैं। आंदोलन और संसद मार्च को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं।
फिलहाल अभिजीत दीपके का यह बयान चर्चा का विषय बना हुआ है। संसद मार्च के दौरान उनकी भूमिका को लेकर उठे सवालों पर उन्होंने अपना पक्ष सार्वजनिक कर दिया है। अब यह बहस जारी है कि उनका फैसला सही था या नहीं, लेकिन इतना तय है कि इस बयान के बाद आंदोलन और उसके नेतृत्व को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
उत्तर प्रदेश के मेरठ में सामने आए चर्चित हनी ट्रैप गिरोह की जांच के बीच एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में मुख्य आरोपी राहुल पाल एक महिला के साथ जन्मदिन मनाता और खुद को बेहद प्रभावशाली व्यक्ति की तरह पेश करता दिखाई दे रहा है। पुलिस का कहना है कि आरोपी लंबे समय से नकली पुलिस अधिकारी बनकर लोगों को डराने और उनसे पैसे वसूलने के आरोपों का सामना कर रहा है।
जांच के मुताबिक, गिरोह सोशल मीडिया पर फर्जी महिला प्रोफाइल बनाकर युवकों से दोस्ती करता था। भरोसा जीतने के बाद उन्हें मिलने के बहाने बुलाया जाता था। जब पीड़ित मौके पर पहुंचता, तो वहां महिला की जगह गिरोह के सदस्य मौजूद मिलते, जो खुद को पुलिस अधिकारी या पत्रकार बताकर डराने-धमकाने लगते थे। इसके बाद मोटी रकम की मांग की जाती थी।
पुलिस के अनुसार, आरोपी राहुल पाल और उसके साथियों ने अपने रौब को असली दिखाने के लिए एक किराए के दफ्तर को पुलिस कार्यालय जैसा रूप दे रखा था। वहां वॉकी-टॉकी, मुहरें, नेम प्लेट, फाइलें और पुलिस से जुड़े कई सामान रखे गए थे, ताकि आने वाले लोगों को शक न हो और वे आसानी से उनके जाल में फंस जाएं।
इसी बीच राहुल पाल का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह एक महिला के साथ केक काटते और जश्न मनाते दिखाई दे रहा है। सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच का केंद्र वीडियो नहीं, बल्कि हनी ट्रैप और कथित वसूली से जुड़े आरोप हैं। वीडियो की पृष्ठभूमि की भी जांच की जा रही है
पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है। जांच के दौरान मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, वॉकी-टॉकी, फर्जी दस्तावेज, मुहरें और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन सामानों का इस्तेमाल लोगों को असली पुलिस कार्रवाई का डर दिखाकर ब्लैकमेल करने के लिए किया जाता था।
फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया। फरार आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। साथ ही बरामद डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच भी कराई जा रही है, ताकि गिरोह के काम करने के तरीके और उसके अन्य संभावित कनेक्शनों का पता लगाया जा सके।